Lord Krishna Mantras
The divine lover, supreme teacher of the Bhagavad Gita.
Lord Krishna — the eighth avatar of Vishnu, the enchanting cowherd of Vrindavan and supreme teacher of the Bhagavad Gita — embodies divine love, joy and wisdom. Chanting Krishna mantras such as the Hare Krishna Mahamantra, Madhurashtakam and the Krishna Chalisa fills the heart with devotion (bhakti), peace and bliss. His complete mantras and stotras follow with Sanskrit text, transliteration and meaning.
Best day to worship: Wednesday · 198 mantras available
The Legend of Lord Krishna
In the cowherd village of Vrindavan, the people each year held a great offering to Indra, the king of the gods and lord of rain. But the young Krishna asked them instead to honour Govardhan Hill and the cows and land that truly sustained them. The villagers agreed and worshipped the hill — and Indra, his pride wounded, sent down a storm of furious, unending rain to drown all Vrindavan.
As the floodwaters rose and the people trembled, Krishna — then only a boy — lifted the entire Govardhan Hill upon the little finger of his left hand, and held it aloft like a vast umbrella. Beneath it all the people, the cows and the cowherds took shelter, safe and dry, while the rains raged in vain for seven days and nights.
At last Indra, his fury spent and his pride humbled, understood that this child was the Supreme Lord himself, and bowed before him. So Krishna taught that devotion to God and gratitude to the earth that feeds us outweigh the worship of pride and power. The lifting of Govardhan is remembered each year at Govardhan Puja, the day after Diwali.
Lord Krishna Mantras, Chalisa & Stotras
অচ্যুতম্ কেশবম্
अच्युतम् केशवम् रामनारायणम्
Read & Chant →অদ্বেষ্টা সর্বভূতানাম্ (ভগবদ্গীতা 12.13)
अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च।
Read & Chant →অহং সর্বস্য প্রভবো
अहं सर्वस्य प्रभवो
Read & Chant →অহং বৈশ্বানরো ভূত্বা — ভোজন মন্ত্র (গীতা 15.14)
अहं वैश्वानरो भूत्वा प्राणिनां देहमाश्रितः ।
Read & Chant →অক্রূর স্তুতি (অক্রূরের প্রার্থনা)
नतोऽस्म्यहं त्वाखिलहेतुहेतुं
Read & Chant →অনন্যাশ্চিন্তয়ন্তো মাম্ (ভগবদ্গীতা ৯.২২)
अनन्याश्चिन्तयन्तो मां
Read & Chant →শ্রী বাঁকে বিহারী আরতি
हे गिरिधर तेरी आरती गाऊँ, प्यारे आपको रिझाऊँ ।
Read & Chant →বর্হাপীডাভিরামায় গোবিন্দায় নমো নমঃ
बर्हापीडाभिरामाय रामायाकुण्ठमेधसे।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১.১ — ধর্মক্ষেত্রে কুরুক্ষেত্রে
धृतराष्ट्र उवाच
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১.২১ — সেনয়োরুভয়োর্মধ্যে
अर्जुन उवाच
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১.২৬ — তত্রাপশ্যৎস্থিতান্পার্থঃ
तत्रापश्यत्स्थितान्पार्थः पितृ़नथ पितामहान्।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১.২৮ — কৃপয়া পরয়াআবিষ্টো
अर्जुन उवाच
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১.২৯ — সীদন্তি মম গাত্রাণি
सीदन्ति मम गात्राणि मुखं च परिशुष्यति।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১.৩১ — নিমিত্তানি চ পশ্যামি
निमित्तानि च पश्यामि विपरीतानि केशव।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১.৩২ — ন কাঙ্ক্ষে বিজয়ং কৃষ্ণ
न काङ्क्षे विजयं कृष्ण न च राज्यं सुखानि च।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১.৩৭ — তস্মান্নার্হা বয়ং হন্তুম্
तस्मान्नार्हा वयं हन्तुं धार्तराष्ट्रान्स्वबान्धवान्।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১.৪০ — কুলক্ষয়ে প্রণশ্যন্তি
कुलक्षये प्रणश्यन्ति कुलधर्माः सनातनाः।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১.৪৫ — অহো বত মহত্পাপম্
अहो बत महत्पापं कर्तुं व्यवसिता वयम्।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১.৪৬ — যদি মামপ্রতীকারম্
यदि मामप्रतीकारमशस्त्रं शस्त्रपाणयः।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১.৪৭ — এবমুক্ত্বার্জুনঃ সংখ্যে
सञ्जय उवाच
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১০.১০ — তেষাং সতত-যুক্তানাং
तेषां सततयुक्तानां भजतां प्रीतिपूर्वकम्।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১০.২১ — আদিত্যানামহং বিষ্ণুঃ
आदित्यानामहं विष्णुर्ज्योतिषां रविरंशुमान्।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১০.২২ — বেদানাং সাম-বেদোঽস্মি
वेदानां सामवेदोऽस्मि देवानामस्मि वासवः।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১০.২৫ — মহর্ষীণাং ভৃগুরহম্
महर्षीणां भृगुरहं गिरामस्म्येकमक्षरम्।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১০.৩৬ — দ্যূতং ছলযতামস্মি
द्यूतं छलयतामस्मि तेजस्तेजस्विनामहम्।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১১.১২ — দিবি সূর্য-সহস্রস্য
दिवि सूर्यसहस्रस्य भवेद्युगपदुत्थिता।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১১.১৫ — পশ্যামি দেবাংস্তব দেব দেহে
अर्जुन उवाच
Read & Chant →ভগবদ্গীতা 11.16 — অনেকবাহূদরবক্ত্রনেত্রম্
अनेकबाहूदरवक्त्रनेत्रं
Read & Chant →ভগবদ্গীতা 11.17 — কিরীটিনং গদিনং চক্রিণম্
किरीटिनं गदिनं चक्रिणं च
Read & Chant →ভগবদ্গীতা 11.18 — ত্বমক্ষরং পরমম্
त्वमक्षरं परमं वेदितव्यं
Read & Chant →ভগবদ্গীতা 11.24 — নভঃস্পৃশং দীপ্তম্
नभःस्पृशं दीप्तमनेकवर्णं
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১১.৩২ — কালোঽস্মি লোকক্ষয়কৃৎ
श्री भगवानुवाच
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১১.৩৩ — তস্মাত্ত্বমুত্তিষ্ঠ
तस्मात्त्वमुत्तिष्ठ यशो लभस्व
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১১.৩৬ — স্থানে হৃষীকেশ
अर्जुन उवाच
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১১.৩৮ — ত্বমাদিদেবঃ পুরুষঃ পুরাণঃ
त्वमादिदेवः पुरुषः पुराण
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১১.৪০ — নমঃ পুরস্তাদথ পৃষ্ঠতস্তে
नमः पुरस्तादथ पृष्ठतस्ते
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১১.৪৩ — পিতাসি লোকস্য চরাচরস্য
पितासि लोकस्य चराचरस्य
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১১.৪৪ — তস্মাত্প্রণম্য প্রণিধায় কায়ম্
तस्मात्प्रणम्य प्रणिधाय कायं
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১১.৪৯ — মা তে ব্যথা মা চ বিমূঢ়ভাবো
मा ते व्यथा मा च विमूढभावो
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১১.৫৩ — নাহং বেদৈর্ন তপসা
नाहं वेदैर्न तपसा न दानेन न चेज्यया।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১১.৫৪ — ভক্ত্যা ত্বনন্যয়া
भक्त्या त्वनन्यया शक्यमहमेवंविधोऽर्जुन।
Read & Chant →ভগবদ্গীতা 11.55 — মত্কর্মকৃন্মত্পরমো
मत्कर्मकृन्मत्परमो मद्भक्तः सङ्गवर्जितः।
Read & Chant →ভগবদ্গীতা 11.8 — ন তু মাং শক্যসে দ্রষ্টুম্
न तु मां शक्यसे द्रष्टुमनेनैव स्वचक्षुषा।
Read & Chant →ভগবদ্গীতা 11.9 — এবমুক্ত্বা ততো রাজন্
सञ्जय उवाच
Read & Chant →ভগবদ্গীতা 12.15 — যস্মান্নোদ্বিজতে লোকো
यस्मान्नोद्विजते लोको लोकान्नोद्विजते च यः।हर्षामर्षभयोद्वेगैर्मुक्तो यः स च मे प्रियः॥
Read & Chant →ভগবদ্গীতা 12.6-7 — যে তু সর্বাণি কর্মাণি
ये तु सर्वाणि कर्माणि मयि संन्यस्य मत्पराः।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা 12.8 — ময্যেব মন আধৎস্ব
मय्येव मन आधत्स्व मयि बुद्धिं निवेशय।निवसिष्यसि मय्येव अत ऊर्ध्वं न संशयः॥
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা 13.2 — ইদং শরীরং কৌন্তেয় (ক্ষেত্র-ক্ষেত্রজ্ঞ)
श्रीभगवानुवाच
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা 13.28 — সমং সর্বেষু ভূতেষু
समं सर्वेषु भूतेषु तिष्ठन्तं परमेश्वरम्।विनश्यत्स्वविनश्यन्तं यः पश्यति स पश्यति॥
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা 13.8 — অমানিত্বমদম্ভিত্বমহিংসা
अमानित्वमदम्भित्वमहिंसा क्षान्तिरार्जवम्।आचार्योपासनं शौचं स्थैर्यमात्मविनिग्रहः॥
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা 14.26 — মাং চ যোঽব্যভিচারেণ
मां च योऽव्यभिचारेण भक्तियोगेन सेवते।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১৪.২৭ — ব্রহ্মণো হি প্রতিষ্ঠাহম্
ब्रह्मणो हि प्रतिष्ठाऽहममृतस्याव्ययस्य च।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১৪.৪ — সর্বযোনিষু কৌন্তেয়
सर्वयोनिषु कौन्तेय मूर्तयः सम्भवन्ति याः।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১৫.১৫ — সর্বস্য চাহং হৃদি সন্নিবিষ্টো
सर्वस्य चाहं हृदि सन्निविष्टो मत्तः स्मृतिर्ज्ञानमपोहनं च।वेदैश्च सर्वैरहमेव वेद्यो वेदान्तकृद्वेदविदेव चाहम्॥
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১৬.২১ — ত্রিবিধং নরকস্যেদং দ্বারম্
त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मनः।कामः क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत्त्रयं त्यजेत्॥
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১৬.২৪ — তস্মাচ্ছাস্ত্রং প্রমাণং তে
तस्माच्छास्त्रं प्रमाणं ते कार्याकार्यव्यवस्थितौ।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা 16.3 — তেজঃ ক্ষমা ধৃতিঃ শৌচম্
तेजः क्षमा धृतिः शौचमद्रोहो नातिमानिता।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা 17.15 — অনুদ্বেগকরং বাক্যম্
अनुद्वेगकरं वाक्यं सत्यं प्रियहितं च यत्।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা 17.16 — মনঃপ্রসাদঃ সৌম্যত্বম্
मनःप्रसादः सौम्यत्वं मौनमात्मविनिग्रहः।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা 18.13 — পঞ্চৈতানি মহাবাহো
पञ्चैतानि महाबाहो कारणानि निबोध मे।सांख्ये कृतान्ते प्रोक्तानि सिद्धये सर्वकर्मणाम्॥
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা 18.20 — সর্বভূতেষু যেনৈকম্
सर्वभूतेषु येनैकं भावमव्ययमीक्षते।अविभक्तं विभक्तेषु तज्ज्ञानं विद्धि सात्त्विकम्॥
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা 18.42 — শমো দমস্তপঃ শৌচম্
शमो दमस्तपः शौचं क्षान्तिरार्जवमेव च।ज्ञानं विज्ञानमास्तिक्यं ब्रह्मकर्म स्वभावजम्॥
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা 18.46 — যতঃ প্রবৃত্তির্ভূতানাম্
यतः प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम्।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা 18.54 — ব্রহ্মভূতঃ প্রসন্নাত্মা
ब्रह्मभूतः प्रसन्नात्मा न शोचति न काङ्क्षति।समः सर्वेषु भूतेषु मद्भक्तिं लभते पराम्॥
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা 18.55 — ভক্ত্যা মামভিজানাতি
भक्त्या मामभिजानाति यावान्यश्चास्मि तत्त्वतः।ततो मां तत्त्वतो ज्ञात्वा विशते तदनन्तरम्॥
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা 18.56 — সর্বকর্মাণ্যপি সদা কুর্বাণো
सर्वकर्माण्यपि सदा कुर्वाणो मद्व्यपाश्रयः।मत्प्रसादादवाप्नोति शाश्वतं पदमव्ययम्॥
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা 18.58 — মচ্চিত্তঃ সর্বদুর্গাণি
मच्चित्तः सर्वदुर्गाणि मत्प्रसादात्तरिष्यसि।अथ चेत्त्वमहङ्कारान्न श्रोष्यसि विनङ्क्ष्यसि॥
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা 18.61 — ঈশ্বরঃ সর্বভূতানাম্
ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति।
Read & Chant →ভগবদ্গীতা 18.62 — তমেব শরণং গচ্ছ
तमेव शरणं गच्छ सर्वभावेन भारत।तत्प्रसादात्परां शान्तिं स्थानं प्राप्स्यसि शाश्वतम्॥
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১৮.৬৩ — ইতি তে জ্ঞানমাখ্যাতম্
इति ते ज्ञानमाख्यातं गुह्याद्गुह्यतरं मया।विमृश्यैतदशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु॥
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১৮.৬৪ — সর্বগুহ্যতমং ভূয়ঃ
सर्वगुह्यतमं भूयः श्रृणु मे परमं वचः।इष्टोऽसि मे दृढमिति ततो वक्ष्यामि ते हितम्॥
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা 18.65 — মন্মনা ভব মদ্ভক্তো
मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु।मामेवैष्यसि सत्यं ते प्रतिजाने प्रियोऽसि मे॥
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১৮.৬৭ — ইদং তে নাতপস্কায
इदं ते नातपस्काय नाभक्ताय कदाचन।न चाशुश्रूषवे वाच्यं न च मां योऽभ्यसूयति॥
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১৮.৬৮ — য ইমং পরমং গুহ্যম্
य इमं परमं गुह्यं मद्भक्तेष्वभिधास्यति।भक्ितं मयि परां कृत्वा मामेवैष्यत्यसंशयः॥
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১৮.৭ — নিয়তস্য তু সংন্যাসঃ
नियतस्य तु संन्यासः कर्मणो नोपपद्यते।मोहात्तस्य परित्यागस्तामसः परिकीर्तितः॥
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১৮.৭০ — অধ্যেষ্যতে চ য ইমম্
अध्येष्यते च य इमं धर्म्यं संवादमावयोः।ज्ञानयज्ञेन तेनाहमिष्टः स्यामिति मे मतिः॥
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১৮.৭২ — কচ্চিদেতচ্ছ্রুতং পার্থ
कच्चिदेतच्छ्रुतं पार्थ त्वयैकाग्रेण चेतसा।कच्चिदज्ञानसंमोहः प्रनष्टस्ते धनञ्जय॥
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১৮.৭৩ — নষ্টো মোহঃ স্মৃতির্লব্ধা
अर्जुन उवाचनष्टो मोहः स्मृतिर्लब्धा त्वत्प्रसादान्मयाच्युत।स्थितोऽस्मि गतसन्देहः करिष्ये वचनं तव॥
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ১৮.৭৭ — তচ্চ সংস্মৃত্য সংস্মৃত্য
तच्च संस्मृत्य संस्मृत्य रूपमत्यद्भुतं हरेः।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা 2.14 — মাত্রাস্পর্শাস্তু কৌন্তেয়
मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ২.১৬ — নাসতো বিদ্যতে ভাবো
नासतो विद्यते भावो नाभावो विद्यते सतः।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা 2.17 — অবিনাশি তু তদ্বিদ্ধি
अविनाशि तु तद्विद्धि येन सर्वमिदं ततम्।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ২.২৭ — জাতস্য হি ধ্রুবো মৃত্যুঃ
जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ২.৪০ — নেহাভিক্রমনাশোऽস্তি
नेहाभिक्रमनाशोऽस्ति प्रत्यवायो न विद्यते।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ২.৫৫ — প্রজহাতি যদা কামান্
श्रीभगवानुवाच
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ২.৫৬ — দুঃখেষ্বনুদ্বিগ্নমনাঃ
दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ২.৬৯ — যা নিশা সর্বভূতানাং
या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ২.৭ — কার্পণ্যদোষোপহতস্বভাবঃ
कार्पण्यदोषोपहतस्वभावः
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা 2.71 — বিহায় কামান্যঃ সর্বান্
विहाय कामान्यः सर्वान्पुमांश्चरति निःस्पृहः।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা 3.19 — তস্মাদসক্তঃ সততম্
तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা 3.27 — প্রকৃতেঃ ক্রিয়মাণানি গুণৈঃ
प्रकृतेः क्रियमाणानि गुणैः कर्माणि सर्वशः।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা 3.30 — ময়ি সর্বাণি কর্মাণি
मयि सर्वाणि कर्माणि संन्यस्याध्यात्मचेतसा।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা 3.42 — ইন্দ্রিয়াণি পরাণ্যাহুঃ
इन्द्रियाणि पराण्याहुरिन्द्रियेभ्यः परं मनः।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ৪.১০ — বীতরাগভয়ক্রোধা
वीतरागभयक्रोधा मन्मया मामुपाश्रिताः।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ৪.১১ — যে যথা মাং প্রপদ্যন্তে
ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम्।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ৪.১৮ — কর্মণ্যকর্ম যঃ পশ্যেত্
कर्मण्यकर्म यः पश्येदकर्मणि च कर्म यः।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ৪.৯ — জন্ম কর্ম চ মে দিব্যম্
जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वतः।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ৫.২২ — যে হি সংস্পর্শজা ভোগা
ये हि संस्पर्शजा भोगा दुःखयोनय एव ते।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ৫.৮ — নৈব কিঞ্চিৎ করোমীতি
नैव किंचित्करोमीति युक्तो मन्येत तत्त्ववित्।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ৬.১৬ — নাত্যশ্নতস্তু যোগোঽস্তি
नात्यश्नतस्तु योगोऽस्ति न चैकान्तमनश्नतः।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ৬.১৭ — যুক্তাহারবিহারস্য
युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु।
Read & Chant →ভগবদ্গীতা ৬.১৯ — যথা দীপো নিবাতস্থো
यथा दीपो निवातस्थो नेङ्गते सोपमा स्मृता।
Read & Chant →ভগবদ্গীতা ৬.৩৪ — চঞ্চলং হি মনঃ কৃষ্ণ
चञ्चलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवद्दृढम्।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ৬.৪৬ — তপস্বিভ্যোঽধিকো যোগী
तपस्विभ्योऽधिको योगी ज्ञानिभ्योऽपि मतोऽधिकः।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ৬.৬ — বন্ধুরাত্মাত্মনস্তস্য
बन्धुरात्माऽऽत्मनस्तस्य येनात्मैवात्मना जितः।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ৭.১৪ — দৈবী হ্যেষা গুণময়ী
दैवी ह्येषा गुणमयी मम माया दुरत्यया।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ৭.৩ — মনুষ্যাণাং সহস্রেষু
मनुष्याणां सहस्रेषु कश्िचद्यतति सिद्धये।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা 7.8 — রসোঽহমপ্সু কৌন্তেয়
रसोऽहमप्सु कौन्तेय प्रभास्मि शशिसूर्ययोः।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ৮.৬ — যং যং বাপি স্মরন্ ভাবং
यं यं वापि स्मरन्भावं त्यजत्यन्ते कलेवरम्।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ৮.৭ — তস্মাত্ সর্বেষু কালেষু
तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা ৯.১১ — অবজানন্তি মাং মূঢা
अवजानन्ति मां मूढा मानुषीं तनुमाश्रितम्।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা 9.13 — মহাত্মানস্তু মাং পার্থ
महात्मानस्तु मां पार्थ दैवीं प्रकृतिमाश्रिताः।
Read & Chant →শ্রীমদ্ভগবদ্গীতা 9.30 — অপি চেত্সুদুরাচারো
अपि चेत्सुदुराचारो भजते मामनन्यभाक्।
Read & Chant →শ্রী কৃষ্ণাষ্টকম্ (ভজে ব্রজৈক মণ্ডনম্)
भजे व्रजैकमण्डनं समस्तपापखण्डनं
Read & Chant →ভীষ্ম স্তুতি
इति मतिरुपकल्पिता वितृष्णा
Read & Chant →ব্রহ্ম স্তুতি
श्रीब्रह्मोवाच
Read & Chant →ব্রহ্মার্পণং ব্রহ্ম হবিঃ
ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम् ।
Read & Chant →দামোদরাষ্টকম্
दामोदराय कृष्णाय करे वंशीधराय च ।
Read & Chant →দেহিনোऽস্মিন্যথা দেহে (ভগবদ্গীতা 2.13)
देहिनोऽस्मिन्यथा देहे कौमारं यौवनं जरा।
Read & Chant →দেবকী স্তুতি
श्रीदेवक्युवाच
Read & Chant →ধ্যায়তো বিষয়ান্পুংসঃ (ভগবদ্গীতা ২.৬২)
ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।
Read & Chant →গর্ভ স্তুতি (গর্ভস্থ শ্রীকৃষ্ণের দেবতাদের দ্বারা স্তুতি)
सत्यव्रतं सत्यपरं त्रिसत्यं
Read & Chant →গীতা ধ্যানম্
ॐ पार्थाय प्रतिबोधितां भगवता नारायणेन स्वयं
Read & Chant →গোপাল গোপাল দেবকীনন্দন গোপাল
गोपाल गोपाल देवकीनन्दन गोपाल ।
Read & Chant →গোপিকা গীত
गोप्य ऊचुः -
Read & Chant →গোবর্ধনধরং বন্দে (গোবর্ধন পূজা মন্ত্র)
गोवर्धनधरं वन्दे गोपालं गोकुलोत्सवम्।
Read & Chant →গোবিন্দাষ্টকম্ (সত্যং জ্ঞানমনন্তং নিত্যম্)
सत्यं ज्ञानमनन्तं नित्यमनाकाशं परमाकाशं
Read & Chant →গোবিন্দ দামোদর স্তোত্রম্
अग्रे कुरूणामथ पाण्डवानां
Read & Chant →গোবিন্দাষ্টকম্
श्री गणेशाय नमः ॥
Read & Chant →হরে কৃষ্ণ মহামন্ত্র
हरे कृष्ण हरे कृष्ण
Read & Chant →He Krishna Karuna Sindho
हे कृष्ण करुणासिन्धो दीनबन्धो जगत्पते ।
Read & Chant →জয় রাধা মাধব
(जय) राधा-माधव (जय) कुञ्ज-बिहारी ।
Read & Chant →Kararavindena (Bala Mukunda Dhyana)
कराविन्देन पादारविन्दं
Read & Chant →কর্মণ্যেবাধিকারস্তে (ভগবদ্গীতা 2.47)
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन ।
Read & Chant →Kasturi Tilakam (Gopala Dhyana Shloka)
कस्तूरीतिलकं ललाटपटले वक्षःस्थले कौस्तुभं
Read & Chant →খাটু শ্যাম আরতি
ॐ जय श्री श्याम हरे बाबा जय श्री श्याम हरे ।
Read & Chant →খাটু শ্যাম চালীসা
श्री गुरु चरण ध्यान धर,सुमिरि सच्चिदानन्द।
Read & Chant →ক্লীং বীজ মন্ত্র
ॐ क्लीं
Read & Chant →কৃষ্ণ আরতি — আরতি কুঞ্জবিহারী কী
आरती कुंजबिहारी की।
Read & Chant →Krishna Ashtottara Shatanamavali
श्रीकृष्णाय नमः
Read & Chant →কৃষ্ণ চালীসা
बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम।
Read & Chant →কৃষ্ণ গায়ত্রী মন্ত্র
ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि ।
Read & Chant →Krishna Karnamritam (Selections)
चिन्तामणिर्जयति सोमगिरिर्गुरुर्मे
Read & Chant →Krishna Krishna Mahayogin
कृष्ण कृष्ण महायोगिन् भक्तानामभयङ्कर ।
Read & Chant →কৃষ্ণ মন্ত্র
ॐ क्लीं कृष्णाय नमः ॥
Read & Chant →কৃষ্ণাষ্টকম্
वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् ।
Read & Chant →কৃষ্ণায় বাসুদেবায়
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने ।
Read & Chant →Krishnaya Yadavendraya
कृष्णाय यादवेन्द्राय ज्ञानमुद्राय योगिने।
Read & Chant →Aarti Kunj Bihari Ki
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
Read & Chant →Kunti Stuti
नमस्ये पुरुषं त्वाद्यमीश्वरं प्रकृतेः परम् ।
Read & Chant →মধুরাষ্টকম্
अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम् ।
Read & Chant →মৈয়া মোরি মৈं নহিं মাখন খায়ো
मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो।
Read & Chant →Mamaivamsho Jiva Loke (Bhagavad Gita 15.7)
ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः।
Read & Chant →Man-mana Bhava Mad-bhakto (Bhagavad Gita 9.34)
मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु।
Read & Chant →Mattah Parataram Nanyat
मत्तः परतरं नान्यत्
Read & Chant →মেরে তো গিরধর গোপাল
मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई।
Read & Chant →Mucukunda Stuti
लब्ध्वा जनो दुर्लभमत्र मानुषं
Read & Chant →Na Jayate Mriyate Va (Bhagavad Gita 2.20)
न जायते म्रियते वा कदाचि
Read & Chant →নৈনং ছিন্দন্তি শস্ত্রাণি
नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः ।
Read & Chant →Nanda Kumara Ashtakam
सुन्दरगोपालमुरवनमालं नयनविशालं दुःखहरम् ।
Read & Chant →Nanda Nandanashtakam
सुचारुवक्त्रमण्डलं सुकर्णरत्नकुण्डलम् ।
Read & Chant →Nigama Kalpataror Galitam Phalam (The Ripened Fruit of the Vedas)
निगमकल्पतरोर्गलितं फलं
Read & Chant →Alaipayuthe Kanna (Oothukkadu Venkata Kavi)
அலைபாயுதே கண்ணா என் மனம் மிகவே
Read & Chant →Paritranaya Sadhunam
परित्राणाय साधूनां
Read & Chant →Patram Pushpam Phalam Toyam (Bhagavad Gita 9.26)
पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति।
Read & Chant →পায়ো জী মৈঁনে রাম রতন ধন পায়ো
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।
Read & Chant →Phullendivara Kantim (Krishna Dhyana)
फुल्लेन्दीवरकान्तिमिन्दुवदनं बर्हावतंसप्रियं
Read & Chant →Jagadoddharana (Purandaradasa)
ಜಗದೋದ್ಧಾರನ ಆಡಿಸಿದಳೆಶೋದೆ
Read & Chant →শ্রী রাধা চালীসা
श्री राधे वृषभानुजा, भक्तनि प्राणाधार।
Read & Chant →Shri Radha Kripa Kataksha Stotram
मुनीन्द्रवृन्दवन्दिते त्रिलोकशोकहारिणि
Read & Chant →রাধে রাধে — রাধা কৃষ্ণ ধুন
राधे राधे राधे राधे, राधे गोविन्द राधे।
Read & Chant →Sri Radha Shoddasha Nama Stotram
श्रीनारायण उवाच ।
Read & Chant →Sri Radhika Stava
राधे जय जय माधवदयिते
Read & Chant →সাঁসোঁ কী মালা পে (আমার শ্বাসের মালায়)
साँसों की माला पे सिमरूँ मैं पी का नाम।
Read & Chant →সন্তান গোপাল মন্ত্র
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुताय नमः ॥
Read & Chant →Santana Gopala Stotram
श्रीशं कमलपत्राक्षं देवकीनन्दनं हरिम् ।
Read & Chant →সর্বধর্মান্ পরিত্যজ্য (ভগবদ্গীতা 18.66)
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज ।
Read & Chant →Sri Shikshashtakam
चेतोदर्पणमार्जनं भवमहादावाग्निनिर्वापणं
Read & Chant →Shraddhavan Labhate Jnanam (Bhagavad Gita 4.39)
श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः।
Read & Chant →Shreyan Svadharmo Vigunah (Bhagavad Gita 3.35)
श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्।
Read & Chant →শ্রী কৃষ্ণ গোবিন্দ হরে মুরারে
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे।
Read & Chant →Tad Viddhi Pranipatena (Bhagavad Gita 4.34)
तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया।
Read & Chant →Tiruppavai (Opening Pasurams)
மார்கழித் திங்கள் மதிநிறைந்த நன்னாளால்
Read & Chant →Trailokya Mangala Krishna Kavacham
श्रीनारद उवाच —
Read & Chant →Uddhared Atmana Atmanam (Bhagavad Gita 6.5)
उद्धरेदात्मनाऽऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।
Read & Chant →Vamshi Vibhushita Karat (Krishnat Param Kimapi)
वंशीविभूषितकरान्नवनीरदाभात्
Read & Chant →বাসাংসি জীর্ণানি (ভগবদ্গীতা ২.২২)
वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि ।
Read & Chant →বসুদেবসুতং দেবং
वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् ।
Read & Chant →Sri Vrinda Devi Ashtakam
गाङ्गेयचाम्पेयतडिद्विनिन्दिरोचिःप्रवाहस्नपितात्मवृन्दे ।
Read & Chant →Yad Yad Acharati Shreshthah (Bhagavad Gita 3.21)
यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः।
Read & Chant →যদা যদা হি ধর্মস্য (ভগবদ্গীতা 4.7-8)
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।
Read & Chant →Yajna Shishtashinah Santo — Prasada Verse (Gita 3.13)
यज्ञशिष्टाशिनः सन्तो मुच्यन्ते सर्वकिल्बिषैः ।
Read & Chant →Yat Karoshi Yad Ashnasi (Bhagavad Gita 9.27)
यत्करोषि यदश्नासि यज्जुहोषि ददासि यत्।
Read & Chant →Yatra Yogeshvarah Krishno (Bhagavad Gita 18.78)
यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः।
Read & Chant →Yo Mam Pashyati Sarvatra (Bhagavad Gita 6.30)
यो मां पश्यति सर्वत्र सर्वं च मयि पश्यति।
Read & Chant →Yogasthah Kuru Karmani (Bhagavad Gita 2.48)
योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय।
Read & Chant →Yogah Karmasu Kaushalam (Bhagavad Gita 2.50)
बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते।
Read & Chant →Yugalashtakam
कृष्णप्रेममयी राधा राधाप्रेममयो हरिः ।
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