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दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्रम्

🕉️ hindu·📿 11× जप·🕐 सोमवार प्रातः, महाशिवरात्रि, अथवा आर्थिक कठिनाई के समय·🎵 ऑडियो सहित·📜 Hindu devotional tradition

अन्य नाम / खोज: vishveshvaraya narakarnava taranaya · daridraya dahana shiva stotram lyrics · daridraya dahana shiva stotra

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अर्थ

दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्रम् भगवान शिव की वह शक्तिशाली स्तुति है जिसका प्रत्येक श्लोक 'दारिद्र्य-दुःख को भस्म करने वाले शिव को नमस्कार' इस घोषणा से समाप्त होता है। महर्षि वसिष्ठ द्वारा रचित यह स्तोत्र दरिद्रता और दुःख को दूर करने वाला माना जाता है। सोमवार को श्रद्धा से इसका पाठ आर्थिक तथा आध्यात्मिक समृद्धि के लिए किया जाता है।

उत्पत्ति और कथा

Hindu devotional tradition · Unknown (attributed to ancient tradition) · Medieval period

यह स्तोत्र एक सार्वभौमिक मानवीय चिन्ता — दरिद्रता — को भगवान शिव की शक्ति के द्वारा सम्बोधित करता है। प्रत्येक श्लोक शिव की एक भिन्न दिव्य छवि गढ़ता है और साथ ही इस ध्रुवपद को दृढ़ता से दोहराता है: 'दारिद्र्य-दुःख-दहनाय नमः शिवाय' — दरिद्रता और दुःख को भस्म करने वाले शिव को नमस्कार। इस ध्रुवपद की बारम्बार आवृत्ति एक प्रबल भावना उत्पन्न करती है जो चेतन और अचेतन दोनों स्तरों पर कार्य करती है।

शास्त्रों में वर्णित

काशी (वाराणसी) में काशी विश्वनाथ मन्दिर के भक्त इस स्तोत्र का पाठ सोमवार के अभिषेक अनुष्ठान के अंग रूप में करते हैं। मन्दिर के अभिलेखों और मौखिक परम्परा में अनेक ऐसे भक्तों के वृत्तान्त हैं जो निर्धन थे, किन्तु इस स्तोत्र का नियमित पाठ आरम्भ करने पर उन्होंने नाटकीय आर्थिक परिवर्तन अनुभव किए — अप्रत्याशित नौकरी के प्रस्ताव, ऋणों का निवारण, विस्मृत सम्बन्धियों से उत्तराधिकार, और व्यवसाय में सफलता। इस स्तोत्र की शक्ति शिव के उस स्वरूप को आरोपित की जाती है जो परम संन्यासी होते हुए भी विरोधाभासपूर्वक समस्त सम्पदा के स्वामी हैं।

सुनें और साथ में जपें

सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

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श्लोक 1

विश्वेश्वराय नरकार्णवतारणाय कर्णामृताय शशिशेखरभूषणाय। कर्पूरकान्तिधवलाय जटाधराय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥

Vishveshvaraya Narakarnava Taranaya Karnamritaya Shashishekharabhushanaya Karpurakanti Dhavalaya Jatadharaya Daridrya Duhkha Dahanaya Namah Shivaya

अर्थ:विश्वेश्वर, नरक रूपी सागर से तारने वाले, कर्णों को अमृत-से प्रिय, चन्द्रशेखर भूषण वाले — दारिद्र्य-दुःख को भस्म करने वाले शिव को नमस्कार।

श्लोक 2

गौरीप्रियाय रजनीशकलाधराय कालान्तकाय भुजगाधिपकंकणाय। गंगाधराय गजराजविमर्दनाय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥

Gauripriyaya Rajanishakala Dharaya Kalantakaya Bhujagadhipa Kankanaya Gangadharaya Gajaraja Vimardanaya Daridrya Duhkha Dahanaya Namah Shivaya

अर्थ:गौरीप्रिय, चन्द्रकला धारण करने वाले, काल के अन्तक, सर्पराज का कंकण पहनने वाले — दारिद्र्य-दुःख को भस्म करने वाले शिव को नमस्कार।

श्लोक 3

भक्तिप्रियाय भवरोगभयापहाय उग्राय दुर्गभवसागरतारणाय। ज्योतिर्मयाय गुणनामसुनृत्यकाय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥

Bhaktipriyaya Bhavarogabhayapahaya Ugraya Durgabhava Sagara Taranaya Jyotirmayaya Gunanama Sunrityakaya Daridrya Duhkha Dahanaya Namah Shivaya

अर्थ:भक्तिप्रिय, संसार के रोग और भय को हरने वाले, उग्र, दुर्गम भवसागर से तारने वाले — दारिद्र्य-दुःख को भस्म करने वाले शिव को नमस्कार।

श्लोक 4

चर्माम्बराय शवभस्मविलेपनाय भालेक्षणाय मणिकुण्डलमण्डिताय। मंजीरपादयुगलाय जटाधराय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥

Charmambaraya Shavabhasma Vilepanaya Bhalekshanaya Manikundalamandtaya Manjeerapadayugalaya Jatadharaya Daridrya Duhkha Dahanaya Namah Shivaya

अर्थ:चर्म-वस्त्रधारी, शव-भस्म से विलेपित, भाल पर तीसरे नेत्र वाले, मणिकुण्डलों से सुशोभित — दारिद्र्य-दुःख को भस्म करने वाले शिव को नमस्कार।

श्लोक 5

पञ्चाननाय फणिराजविभूषणाय हेमांशुकाय भुवनत्रयमण्डिताय। आनन्दभूमिवरदाय तमोमयाय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥

Panchananaya Phaniraja Vibhushanaya Hemamshukaya Bhuvanatraya Manditaya Anandabhumivaradaya Tamomayaya Daridrya Duhkha Dahanaya Namah Shivaya

अर्थ:पञ्चानन (पाँच मुख वाले), फणिराज से विभूषित, स्वर्ण-वस्त्रधारी, तीनों भुवनों के आभूषण — दारिद्र्य-दुःख को भस्म करने वाले शिव को नमस्कार।

श्लोक 6

भानुप्रियाय भवसागरतारणाय कालान्तकाय कमलासनपूजिताय। नेत्रत्रयाय शुभलक्षणलक्षिताय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥

Bhanupriyaya Bhavasagara Taranaya Kalantakaya Kamalasana Poojitaya Netratrayaya Shubhalakshana Lakshitaya Daridrya Duhkha Dahanaya Namah Shivaya

अर्थ:भानुप्रिय, भवसागर से तारने वाले, काल के अन्तक, कमलासन (ब्रह्मा) से पूजित — दारिद्र्य-दुःख को भस्म करने वाले शिव को नमस्कार।

श्लोक 7

रामप्रियाय रघुनाथवरप्रदाय नागप्रियाय नरकार्णवतारणाय। पुण्याय पुण्यभरिताय सुरार्चिताय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥

Ramapriyaya raghunathavarapradaya Nagapriyaya narakarnavataranaya Punyaya punyabharitaya surarchitaya Daridryaduhkhadahanaya namah shivaya

अर्थ:उन शिव को नमस्कार — जो राम के प्रिय और रघुनाथ को वरदान देने वाले हैं; नागों के प्रिय, नरक-रूपी सागर से तारने वाले; पुण्यस्वरूप, पुण्य से परिपूर्ण, देवताओं द्वारा पूजित — जो दारिद्र्य के दुःख को भस्म कर देते हैं।

श्लोक 8

मुक्तेश्वराय फलदाय गणेश्वराय गीताप्रियाय वृषभेश्वरवाहनाय। मातङ्गचर्मवसनाय महेश्वराय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥

Mukteshvaraya phaladaya ganeshvaraya Gitapriyaya vrishabheshvaravahanaya Matangacharmavasanaya maheshvaraya Daridryaduhkhadahanaya namah shivaya

अर्थ:उन शिव को नमस्कार — जो मुक्ति के ईश्वर, फलदाता और गणों के स्वामी हैं; गीत के प्रेमी, वृषभराज (नन्दी) पर सवार; गजचर्म धारण करने वाले महेश्वर — जो दारिद्र्य के दुःख को भस्म कर देते हैं।

श्लोक 9

वसिष्ठेन कृतं स्तोत्रं सर्वरोगनिवारणम्। सर्वसम्पत्करं शीघ्रं पुत्रपौत्रादिवर्धनम्। त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नित्यं हि स्वर्गमवाप्नुयात्॥

Vasishthena kritam stotram sarvaroganivaranam Sarvasampatkaram shighram putrapautradivardhanam Trisandhyam yah pathennityam sa hi svargamavapnuyat

अर्थ:महर्षि वसिष्ठ द्वारा रचित यह स्तोत्र समस्त रोगों का निवारण करने वाला, शीघ्र ही सब प्रकार की सम्पत्ति देने वाला और पुत्र-पौत्रादि की वृद्धि करने वाला है। जो प्रतिदिन त्रिकाल (प्रातः, मध्याह्न, सायं) इसका पाठ करता है, वह निश्चय ही स्वर्ग को प्राप्त होता है।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

दारिद्र्य🔊Daridryaदरिद्रता, निर्धनता
दुःख🔊Duhkhaदुःख, पीड़ा
दहन🔊Dahanaजलाना, भस्म करना
विश्वेश्वर🔊Vishveshvaraविश्व के स्वामी
नरकार्णवतारण🔊Narakarnava Taranaनरक रूपी सागर से तारने वाले
शशिशेखर🔊Shashishekharaचन्द्रशेखर (शिव)
कर्पूरकान्ति🔊Karpurakantiकर्पूर की कांति (शुद्ध श्वेत)
गौरीप्रिय🔊Gauripriyaगौरी (पार्वती) के प्रिय
कालान्तक🔊Kalantakaमृत्यु के संहारक
गंगाधर🔊Gangadharaगंगा को धारण करने वाले
भवरोग🔊Bhavarogaसांसारिक अस्तित्व का रोग
ज्योतिर्मय🔊Jyotirmayaदिव्य प्रकाश से परिपूर्ण
भालेक्षण🔊Bhalekshanaमस्तक पर नेत्र (तीसरा नेत्र)
पञ्चानन🔊Panchananपञ्चमुख (शिव)
नेत्रत्रय🔊Netratrayaत्रिनेत्र

दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्रम् पाठ के लाभ

विशेष रूप से दरिद्रता को दूर करने के लिए — प्रत्येक श्लोक इसी घोषणा से समाप्त होता है।

आर्थिक परिवर्तन के लिए शिव की सर्वाधिक प्रभावशाली प्रार्थनाओं में से एक।

सोमवार को श्रद्धा से पाठ करना आर्थिक बाधाओं को दूर करने वाला कहा जाता है।

प्रत्येक श्लोक शिव के एक भिन्न दिव्य गुण का वर्णन करते हुए दरिद्रता को भस्म करता है।

केवल भौतिक दरिद्रता ही नहीं, अपितु आत्मा, ज्ञान और भक्ति की दरिद्रता को भी दूर करता है।

आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे भक्तों में अत्यन्त लोकप्रिय।

दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्रम् जप विधि

जप संख्या11बार
उत्तम समयसोमवार प्रातः, महाशिवरात्रि, अथवा आर्थिक कठिनाई के समय

शिवलिंग अथवा प्रतिमा के सम्मुख बैठें। घी का दीप जलाएँ। बिल्वपत्र और जल अर्पित करें। सोमवार को ११ बार पाठ करें। प्रत्येक श्लोक का मुख्य वाक्य है 'दारिद्र्य-दुःख-दहनाय नमः शिवाय' — प्रत्येक आवृत्ति को दरिद्रता भस्म करते हुए अनुभव करें। अत्यधिक आर्थिक कठिनाई के समय ४० दिनों तक प्रतिदिन १०८ बार पाठ करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दारिद्र्य = दरिद्रता। दहन = भस्म करना/नष्ट करना। इस स्तोत्र के नाम का शाब्दिक अर्थ है 'शिव की वह स्तुति जो दरिद्रता को भस्म कर देती है'। इसके प्रत्येक श्लोक का अन्त इसी घोषणा से होता है।
भारत भर के भक्त नियमित पाठ के पश्चात उल्लेखनीय आर्थिक परिवर्तनों की साक्षी देते हैं। यह स्तोत्र कर्म के स्तर पर कार्य करता है — दरिद्रता के मूल कारणों को भस्म करता है, केवल लक्षणों को नहीं। सोमवार को निरन्तर दैनिक अभ्यास की संस्तुति की जाती है।
जो भी आर्थिक कठिनाइयों, करियर की रुकावट, ऋण अथवा समृद्धि के अभाव का सामना कर रहा हो। यह उनके लिए भी लाभकारी है जो आध्यात्मिक सम्पदा — अज्ञान और मोह की 'दरिद्रता' से मुक्ति — चाहते हैं।

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