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गायत्री मंत्र

🕉️ Vedic·📿 108× जप·🕐 सूर्योदय (प्रातः संध्या) / ब्रह्म मुहूर्त; मध्याह्न और सायं भी।·🎵 ऑडियो सहित·📜 Rigveda (Mandala 3, Hymn 62, Verse 10)

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अर्थ

गायत्री मंत्र सबसे पूजनीय वैदिक मंत्र है — सूर्य (सविता) के दिव्य प्रकाश से प्रार्थना कि वह हमारी बुद्धि को जागृत और प्रकाशित करे। इसे 'वेद-माता' कहा जाता है और बुद्धि, स्पष्टता तथा शांति के लिए इसका जप किया जाता है।

उत्पत्ति और कथा

Rigveda (Mandala 3, Hymn 62, Verse 10) · Rishi Vishwamitra · 1800-1500 BCE

गायत्री मंत्र ऋषि विश्वामित्र को गहन तपस्या के समय प्राप्त हुआ। वे पहले राजा (क्षत्रिय) थे, जिन्होंने राज्य त्यागकर वर्षों तप किया और ब्रह्मर्षि बने। उनकी गहनतम समाधि में सविता का दिव्य प्रकाश प्रकट हुआ और गायत्री के 24 अक्षर प्रकट हुए। उन्होंने इसे ऋग्वेद में संकलित किया। इसे 'वेद-माता' कहा जाता है क्योंकि इसमें समस्त वैदिक ज्ञान का सार है।

शास्त्रों में वर्णित

कहा जाता है कि तीनों लोकों में गायत्री के समान कुछ भी पवित्र करने वाला नहीं। छांदोग्य उपनिषद इसे सबका सार कहता है — श्रद्धा से जप करने पर यह अनेक जन्मों के पापों को धो देता है।

सुनें और साथ में जपें

मंत्र

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भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥

Om Bhur Bhuvah Swah Tat Savitur Varenyam Bhargo Devasya Dhimahi Dhiyo Yo Nah Prachodayat

अर्थ:हम उस सर्वोत्तम सत्ता के दिव्य तेज का ध्यान करते हैं जो समस्त सृष्टि का स्रोत है। वह दिव्य प्रकाश हमारी बुद्धि को प्रेरित और प्रकाशित करे।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

🔊OmThe primordial sound — the universal divine vibration
भूः🔊BhuhThe physical world — the earth plane
भुवः🔊BhuvahThe astral world — the vital life force (prana)
स्वः🔊SwahThe celestial world — the realm of the gods
महः🔊MahahThe world beyond the three — the realm of truth
जनः🔊JanahThe world of birth — the realm of creative will
तपः🔊TapahThe world of austerity — realm of divine love
सत्यम्🔊SatyamThe world of truth — the realm of supreme Brahman
तत्🔊TatThat — pointing to the Supreme Reality (Brahman)
सवितुः🔊SavituhOf Savitr — the divine sun, creator and source of life
वरेण्यम्🔊VarenyamMost worthy of adoration; the best, most adorable
भर्गो🔊BhargoThe divine radiance — the light that destroys sin and ignorance
देवस्य🔊DevasyaOf the divine one — belonging to the supreme deity
धीमहि🔊DhimahiWe meditate — we contemplate deeply and reverentially
धियो🔊DhiyoThe intellect — our powers of reasoning and understanding
यो🔊YoWho — that divine being
नः🔊NahOur — belonging to us, ours
प्रचोदयात्🔊PrachodayatMay illuminate — may inspire and guide our intellect

गायत्री मंत्र पाठ के लाभ

बुद्धि को तीक्ष्ण करता है — मंत्र की मूल प्रार्थना 'धी' अर्थात बुद्धि के प्रकाश के लिए है; नियमित जप से स्पष्टता और एकाग्रता बढ़ती है।

मन को शांत करता है — इसकी लयबद्ध ध्वनि तनाव, भय और चिंता को कम करके गहरी शांति देती है।

मन को शुद्ध करता है — इसके कंपन नकारात्मकता और अज्ञान को हटाकर मन को दिव्य प्रकाश से भर देते हैं।

आध्यात्मिक साधना को गहरा करता है — इसे 'वेद-माता' (वेदों की माता) कहा जाता है, जो सर्वोच्च ज्ञान का द्वार खोलती है।

नियमित जप से एकाग्रता, आत्मबल और भीतरी शक्ति आती है।

गायत्री मंत्र जप विधि

जप संख्या108बार
उत्तम समयसूर्योदय (प्रातः संध्या) / ब्रह्म मुहूर्त; मध्याह्न और सायं भी।
दिशाEast

स्नान या हाथ-मुँह धोकर शुद्ध हों। पूर्व की ओर मुख करके सीधी रीढ़ से बैठें। 108 दानों की माला लेकर प्रत्येक जप से पहले गहरी श्वास लें और सभी 24 अक्षर स्पष्ट रूप से उच्चारें, कंपन को अनुभव करते हुए। 108 के बाद कुछ मिनट मौन बैठें। आरंभकर्ता प्रतिदिन 11 या 21 से प्रारंभ करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह सबसे पूजनीय वैदिक मंत्र है, जो ऋग्वेद (3.62.10) में आता है। यह सविता (दिव्य सूर्य) को संबोधित है और हमारी बुद्धि के प्रकाश के लिए प्रार्थना करता है। इसे 'वेद-माता' कहा जाता है।
परंपरा में प्रतिदिन 108 बार; आरंभ करने वाले 11 या 21 से शुरू कर सकते हैं। प्रातः, मध्याह्न और सायं — तीनों संध्याओं में जप श्रेष्ठ है। संख्या से अधिक नियमितता महत्वपूर्ण है।
हाँ। आज यह माना जाता है कि स्त्री, पुरुष और बालक — सभी श्रद्धा से गायत्री का जप कर सकते हैं।

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