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लक्ष्मी मंत्र

🕉️ hindu·📿 108× जप·🕐 शुक्रवार की संध्या या सूर्योदय·🎵 ऑडियो सहित·📜 Lakshmi Tantra and various Puranas

अन्य नाम / खोज: om shreem hreem shreem

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अर्थ

लक्ष्मी मंत्र (ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद) धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी महालक्ष्मी का आह्वान करने वाला बीज मंत्र है। श्रीं बीज समृद्धि की ध्वनि-शक्ति है। नियमित जप से जीवन में ऐश्वर्य, कृपा और मंगल का प्रवाह बढ़ता है।

उत्पत्ति और कथा

Lakshmi Tantra and various Puranas · Vedic and Tantric tradition · Ancient

लक्ष्मी मंत्रों में श्रीं बीज का प्रयोग होता है, जो समृद्धि का ध्वनि-सार है। समुद्र मंथन के समय लक्ष्मी कमल पर खड़ी प्रकट हुईं और विष्णु को अपना शाश्वत पति चुना। उनके मंत्र समृद्धि की इसी आदि ऊर्जा का आह्वान करते हैं।

शास्त्रों में वर्णित

विष्णु पुराण कहता है कि जहाँ भक्ति से लक्ष्मी मंत्र का जप होता है, वहाँ दरिद्रता टिक नहीं सकती — ठीक वैसे ही जैसे प्रकाश के समक्ष अंधकार नहीं ठहर सकता। दीपावली पर करोड़ों लोग मध्यरात्रि में लक्ष्मी मंत्र जपते हैं, और परंपरा मानती है कि लक्ष्मी स्वयं उन घरों में पधारती हैं जो उनके पावन जप से गूँजते हैं।

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मंत्र

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श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥

Om Shreem Hreem Shreem Kamale Kamalalaye Praseed Praseed Om Shreem Hreem Shreem Mahalakshmyai Namaha

अर्थ:ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं — हे कमल में विराजमान देवी लक्ष्मी! प्रसन्न हों और मुझे समृद्धि एवं ऐश्वर्य प्रदान करें।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

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🔊Omॐ — सार्वभौमिक ध्वनि; सृष्टि का आदि स्पंदन
श्रीं🔊Shreemश्रीं — लक्ष्मी का मुख्य बीज (बीज मंत्र); प्रचुरता और कृपा का प्रतीक
ह्रीं🔊Hreemह्रीं — दिव्य ऊर्जा और प्राकट्य का बीज; सृजनशक्ति को जाग्रत करता है
कमले🔊Kamaleकमले — हे कमलस्वरूपा; वह जो स्वयं कमल हैं (कमल = पद्म)
कमलालये🔊Kamalalayeकमलालये — जो कमल में निवास करती हैं; हृदय एवं पवित्रता का कमल
प्रसीद🔊Praseedप्रसीद — प्रसन्न हों, कृपा करें — दिव्य आशीर्वाद की हार्दिक प्रार्थना
महालक्ष्म्यै🔊Mahalakshmyaiमहालक्ष्म्यै — महान लक्ष्मी को; समस्त प्रचुरता की परम देवी
नमः🔊Namahaनमः — मैं नमन करता हूँ; दिव्य माता के समक्ष अहंकार का समर्पण
लक्ष्मी🔊Lakshmiलक्ष्मी — धन, सौंदर्य, कृपा, समृद्धि और सौभाग्य की देवी
श्री🔊Shriश्री — वह ब्रह्मांडीय कृपा जो सब कुछ सुंदर, समृद्ध और मंगलमय बनाती है
धन🔊Dhanaधन — संपत्ति; भौतिक ऐश्वर्य और आर्थिक प्रचुरता
सम्पत्ति🔊Sampattiसम्पत्ति — समृद्धि; सभी आयामों में धन की परिपूर्णता
ऐश्वर्य🔊Aishwaryaऐश्वर्य — दिव्य प्रभुता और परम समृद्धि
विष्णुप्रिया🔊Vishnu-Priyaविष्णुप्रिया — विष्णु की प्रिया; लक्ष्मी उनकी दिव्य पत्नी हैं
पद्मा🔊Padmaपद्मा — कमल; सृष्टि के जल से उठती पवित्रता का प्रतीक
कल्याणी🔊Kalyaniकल्याणी — मंगलमयी; जो सबका कल्याण करती हैं
सौभाग्य🔊Saubhagyaसौभाग्य — सौभाग्य; वह भाग्य और कृपा जो लक्ष्मी प्रदान करती हैं
सुन्दरी🔊Sundariसुन्दरी — सुंदरी; लक्ष्मी सौंदर्य की साक्षात मूर्ति हैं
अभय🔊Abhayaअभय — निर्भयता; दिव्य प्रचुरता से आने वाली भय से मुक्ति
वरद🔊Varadaवरद — वरदायिनी; आशीर्वाद प्रदान करने की लक्ष्मी की मुद्रा
मंगल🔊Mangalaमंगल — मंगलमयता; जो कुछ लक्ष्मी की उपस्थिति से आता है
स्वर्ण🔊Swarnaस्वर्ण — स्वर्ण; लक्ष्मी से जुड़ा रंग और तत्व
गज🔊Gajaगज — हाथी; जो अपने प्रतिष्ठित रूप में लक्ष्मी पर जल की वर्षा करते हैं
दीपावली🔊Deepavaliदीपावली — दिवाली; प्रकाश का पर्व, लक्ष्मी पूजन का सर्वोत्तम समय
अन्नपूर्णा🔊Annapurnaअन्नपूर्णा — जो प्रचुर अन्न प्रदान करती हैं; लक्ष्मी की कृपा का एक स्वरूप
कमल🔊Kamalaकमल — कमल; लक्ष्मी का आसन और सांसारिक समृद्धि के मध्य आध्यात्मिक पवित्रता का प्रतीक
बीज मंत्र🔊Beej Mantraबीज मंत्र — बीज मंत्र; एक शक्तिशाली अक्षर जिसमें देवता की पूर्ण ऊर्जा समाहित है
कृपा🔊Kripaकृपा — कृपा; लक्ष्मी से प्रवाहित होने वाला अनर्जित दिव्य आशीर्वाद
समृद्धि🔊Samriddhiसमृद्धि — समृद्धि की परिपूर्णता; जीवन के सभी क्षेत्रों में प्रचुरता
शुक्र🔊Shukraशुक्र — शुक्र ग्रह; लक्ष्मी से संबद्ध ग्रह, जो शुक्रवार का स्वामी है

लक्ष्मी मंत्र पाठ के लाभ

आर्थिक समृद्धि को आकर्षित करता है — श्रीं बीज समृद्धि की सबसे प्रत्यक्ष ध्वनि है। नियमित जप साधक की ऊर्जा को प्रचुरता की तरंग से जोड़ देता है।

नए अवसर खोलता है — लक्ष्मी की कृपा से अप्रत्याशित द्वार खुलते हैं; नए व्यापार, आय के स्रोत और समृद्धि स्वाभाविक रूप से बहने लगती है।

दरिद्रता की भावना मिटाता है — यह मंत्र अभाव और अयोग्यता की गहरी मान्यताओं को घोलता है, जो अनजाने में समृद्धि को रोके रखती हैं।

सौंदर्य और लावण्य बढ़ाता है — लक्ष्मी हर रूप में सौंदर्य की देवी हैं। उनके मंत्र का जप साधक के सहज लावण्य और आकर्षण को निखारता है।

करियर और व्यापार में सहायक — पदोन्नति, व्यापारिक सफलता या किसी नए उद्यम में आर्थिक स्थिरता चाहने वालों के लिए विशेष लाभकारी।

आध्यात्मिक समृद्धि देता है — सच्ची लक्ष्मी में आध्यात्मिक धन भी सम्मिलित है — ज्ञान, शांति, प्रेमपूर्ण संबंध और सृजनात्मक तृप्ति। यह मंत्र हर प्रकार की प्रचुरता लाता है।

लक्ष्मी मंत्र जप विधि

जप संख्या108बार
उत्तम समयशुक्रवार की संध्या या सूर्योदय
दिशाEast

शुक्रवार लक्ष्मी का पावन दिन है — साधना का आरंभ या गहराव शुक्रवार से करें। दीपावली का लक्ष्मी पूजन वर्ष का सबसे शक्तिशाली समय है। स्वच्छ और सुंदर स्थान बनाएं, क्योंकि लक्ष्मी स्वच्छता, सौंदर्य और व्यवस्था की ओर आकर्षित होती हैं। कुछ पुष्प और एक दीपक पर्याप्त हैं। पीला पुष्प या पीला वस्त्र अर्पित करें — पीला और स्वर्ण लक्ष्मी के रंग हैं; गेंदा पारंपरिक है। पूर्व की ओर मुख करके कमलगट्टे या स्फटिक माला से 108 बार जप करें। श्रीं का उच्चारण करते हुए अपने घर, कार्य और संबंधों को लक्ष्मी की कृपा के स्वर्णिम प्रकाश में नहाया हुआ देखें। जो आपके पास पहले से है उसके प्रति सच्ची कृतज्ञता का भाव रखते हुए और अधिक समृद्धि का आह्वान करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ॐ आदि ध्वनि है; श्रीं लक्ष्मी का बीज मंत्र है, जो धन और समृद्धि की तरंग है; ह्रीं दिव्य ऊर्जा और हृदय का बीज है; 'कमले कमलालये' का अर्थ है 'हे कमल से उत्पन्न, हे कमल में निवास करने वाली'; 'प्रसीद प्रसीद' का अर्थ है 'प्रसन्न हों, कृपा करें'। पूरा मंत्र एक प्रार्थना है — 'हे देवी लक्ष्मी, कमल में जन्मी और कमल पर विराजमान, मुझ पर कृपा करें और मेरे जीवन में समृद्धि के साथ निवास करें।'
यह मंत्र देवी लक्ष्मी को उनके बीज स्वरों (श्रीं और ह्रीं) के द्वारा पुकारता है और उनसे प्रसन्न होकर समृद्धि प्रदान करने की प्रार्थना करता है। 'कमले कमलालये' उन्हें 'कमल में निवास करने वाली' कहकर संबोधित करता है — जो सृष्टि के जल से उठती पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक है। पूरा मंत्र जीवन के हर क्षेत्र में समृद्धि की दिव्य कृपा के प्रवाह की हार्दिक प्रार्थना है।
शुक्रवार की संध्या लक्ष्मी पूजन का सबसे शुभ समय है। किसी भी दिन सूर्योदय का समय भी अत्यंत लाभकारी है। दीपावली के समय, विशेषकर लक्ष्मी पूजन की रात (कार्तिक अमावस्या) को, माना जाता है कि लक्ष्मी घरों में पधारकर अपना आशीर्वाद देती हैं। फिर भी, कभी-कभार की तीव्र साधना की अपेक्षा नियमित दैनिक जप अधिक प्रभावी होता है।
हाँ, अवश्य। लक्ष्मी लिंग का भेद किए बिना हर उस प्राणी को आशीर्वाद देती हैं जो सच्ची भक्ति से उनकी शरण आता है। अनेक घरों में परिवार का मुखिया — प्रायः गृहस्वामी — ही लक्ष्मी पूजन करता है।

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