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महालक्ष्मी अष्टकम्

🕉️ hindu·📿 8× जप·🕐 शुक्रवार प्रातः, दीपावली, धनतेरस·🎵 ऑडियो सहित·📜 Padma Purana

अन्य नाम / खोज: namastestu mahamaye · namostute mahamaye · indra krita lakshmi stotram · mahalakshmi stotram

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अर्थ

महालक्ष्मी अष्टकम् पद्म पुराण में वर्णित आठ श्लोकों का स्तोत्र है, जिसे देवराज इन्द्र ने महालक्ष्मी की स्तुति में रचा। प्रत्येक श्लोक 'महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते' पर समाप्त होता है और लक्ष्मी को केवल धन की देवी नहीं, अपितु सर्वोच्च आद्याशक्ति रूप में पूजकर धन-वैभव तथा मोक्ष दोनों प्रदान करता है।

उत्पत्ति और कथा

Padma Purana · Indra (king of gods) · Puranic era

पद्म पुराण के अनुसार, जब देवी महालक्ष्मी ने देवताओं को भयंकर दानव कोलासुर पर विजय दिलाई, तब इन्द्र ने कृतज्ञतावश इस अष्टकम् की रचना की। उन्होंने उनकी स्तुति केवल धन की देवी रूप में नहीं, अपितु सर्वोच्च ब्रह्मांडीय शक्ति रूप में की — वह सर्वज्ञ, सर्ववरदायिनी, आद्याशक्ति जो स्वयं परब्रह्म का स्वरूप है।

शास्त्रों में वर्णित

पद्म पुराण वर्णन करता है कि दानव कोलासुर ने स्वर्ग पर अधिकार कर देवताओं को सताया था। जब देवताओं के सभी अस्त्र विफल हो गए, तब उन्होंने महालक्ष्मी की प्रार्थना की। वे अपने उग्र योद्धा रूप में गरुड़ पर आरूढ़ होकर प्रकट हुईं और कोलासुर तथा उसकी समस्त सेना का संहार किया। कृतज्ञता से अभिभूत देवताओं ने इस अष्टकम् की रचना की। यह प्रकट करता है कि लक्ष्मी केवल धन की निष्क्रिय देवी नहीं, अपितु महानतम बुराई का नाश करने में समर्थ उग्र ब्रह्मांडीय शक्ति हैं।

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सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

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श्लोक 1

नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते। शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

Namastestu Mahamaye Shripeethe Surapoojite Shankha Chakra Gada Haste Mahalakshmi Namostu Te

अर्थ:हे महामाया! श्रीपीठ पर विराजमान, देवों से पूजित, शंख-चक्र-गदा धारण करने वाली — हे महालक्ष्मी! तुम्हें नमस्कार।

श्लोक 2

नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयंकरि। सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

Namaste Garudarudhe Kolasurabhayankari Sarvapapaahare Devi Mahalakshmi Namostu Te

अर्थ:हे गरुड़ पर आरूढ़, कोलासुर को भयभीत करने वाली, समस्त पापों को हरने वाली देवी — हे महालक्ष्मी! तुम्हें नमस्कार।

श्लोक 3

सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयंकरि। सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

Sarvagye Sarvavarade Sarvadushtabhayankari Sarvaduhkhahare Devi Mahalakshmi Namostu Te

अर्थ:हे सर्वज्ञ, सब वरदान देने वाली, समस्त दुष्टों को भयभीत करने वाली, सब दुःख हरने वाली देवी — हे महालक्ष्मी! तुम्हें नमस्कार।

श्लोक 4

सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि। मन्त्रमूर्ते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

Siddhibuddhiprade Devi Bhuktimukti Pradayini Mantramooorte Sada Devi Mahalakshmi Namostu Te

अर्थ:हे सिद्धि-बुद्धि प्रदान करने वाली, भुक्ति और मुक्ति देने वाली, मन्त्रमूर्ति देवी — हे महालक्ष्मी! तुम्हें नमस्कार।

श्लोक 5

आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्तिमहेश्वरि। योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

Adyantarahite Devi Adyashakti Maheshwari Yogaje Yogasambhoote Mahalakshmi Namostu Te

अर्थ:हे आदि-अन्त रहित देवी, आद्याशक्ति, महेश्वरी; योग से उत्पन्न, योगमयी — हे महालक्ष्मी! तुम्हें नमस्कार।

श्लोक 6

स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे महाशक्तिमहोदरे। महापापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

Sthoolasookshma Maharaudre Mahashakti Mahodare Mahapapahare Devi Mahalakshmi Namostu Te

अर्थ:हे स्थूल-सूक्ष्म और महारौद्र रूप वाली, महाशक्ति, महोदरा; महापापों को हरने वाली देवी — हे महालक्ष्मी! तुम्हें नमस्कार।

श्लोक 7

पद्मासनस्थिते देवि परब्रह्मस्वरूपिणि। परमेशि जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

Padmasanasthite Devi Parabrahmaswaroopini Parameshi Jaganmatar Mahalakshmi Namostu Te

अर्थ:हे कमल पर विराजमान, परब्रह्मस्वरूपा देवी; परमेश्वरी, जगन्माता — हे महालक्ष्मी! तुम्हें नमस्कार।

श्लोक 8

श्वेताम्बरधरे देवि नानालंकारभूषिते। जगत्स्थिते जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

Shwetambaradhare Devi Nanalankara Bhooshite Jagatsthite Jaganmatar Mahalakshmi Namostu Te

अर्थ:हे श्वेत वस्त्र धारण करने वाली, अनेक अलंकारों से भूषित देवी; जगत् में स्थित, जगन्माता — हे महालक्ष्मी! तुम्हें नमस्कार।

श्लोक 9

महालक्ष्म्यष्टकं स्तोत्रं यः पठेद्भक्तिमान्नरः। सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा॥ एककाले पठेन्नित्यं महापापविनाशनम्। द्विकालं यः पठेन्नित्यं धनधान्यसमन्वितः॥ त्रिकालं यः पठेन्नित्यं महाशत्रुविनाशनम्। महालक्ष्मीर्भवेन्नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा॥

Mahalakshmyashtakam Stotram Yah Pathed Bhaktiman Narah Sarvasiddhimavapnoti Rajyam Prapnoti Sarvada Ekakale Pathennityam Mahapapavinashanam Dvikalam Yah Pathennityam Dhanadhanyasamanvitah Trikalam Yah Pathennityam Mahashatruvinashanam Mahalakshmirbhavennityam Prasanna Varada Shubha

अर्थ:जो भक्तिमान् मनुष्य इस महालक्ष्म्यष्टक स्तोत्र का पाठ करता है, वह समस्त सिद्धियाँ पाता है और सदा राज्य (वैभव) प्राप्त करता है। प्रतिदिन एक बार पाठ करने से महापापों का नाश होता है; दो बार पाठ करने से वह धन-धान्य से सम्पन्न होता है; और तीन बार पाठ करने से महाशत्रुओं का नाश होता है — तथा महालक्ष्मी सदा प्रसन्न होकर वरदायिनी और शुभदायिनी होती हैं।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

महालक्ष्मि🔊Mahalakshmiमहालक्ष्मि — महान लक्ष्मी
नमोऽस्तु ते🔊Namostu Teनमोऽस्तु ते — आपको नमस्कार हो
महामाये🔊Mahamayeमहामाये — हे महामाया (ब्रह्मांडीय माया)
श्रीपीठे🔊Shripeetheश्रीपीठे — श्री के सिंहासन पर विराजमान
शंखचक्रगदाहस्ते🔊Shankha Chakra Gada Hasteशंखचक्रगदाहस्ते — हाथों में शंख, चक्र और गदा धारण करने वाली
गरुडारूढे🔊Garudarudheगरुडारूढे — गरुड़ पर आरूढ़
सर्वपापहरे🔊Sarvapapaahareसर्वपापहरे — समस्त पापों को हरने वाली
सर्वज्ञे🔊Sarvagyeसर्वज्ञे — सर्वज्ञ
सर्ववरदे🔊Sarvavaradeसर्ववरदे — समस्त वर देने वाली
सिद्धिबुद्धिप्रदे🔊Siddhibuddhipradeसिद्धिबुद्धिप्रदे — सिद्धि और बुद्धि देने वाली
भुक्तिमुक्ति🔊Bhuktimuktiभुक्तिमुक्ति — भोग और मोक्ष
मन्त्रमूर्ते🔊Mantramooorteमन्त्रमूर्ते — मन्त्रों की मूर्ति (मन्त्रस्वरूपा)
पद्मासनस्थिते🔊Padmasanasthiteपद्मासनस्थिते — कमल आसन पर विराजमान
परब्रह्मस्वरूपिणि🔊Parabrahmaswaroopiniपरब्रह्मस्वरूपिणि — जिनका स्वरूप परब्रह्म है
जगन्मातर्🔊Jaganmatarजगन्मातर् — जगत् की माता

महालक्ष्मी अष्टकम् पाठ के लाभ

धन और समृद्धि हेतु लक्ष्मी की सबसे शक्तिशाली प्रार्थनाओं में से एक।

प्रत्येक श्लोक 'महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते' पर समाप्त — आठ बार की वन्दना।

भौतिक धन (भुक्ति) तथा आध्यात्मिक मुक्ति दोनों प्रदान करता है।

लक्ष्मी को केवल धन की देवी नहीं, अपितु सर्वोच्च ब्रह्मांडीय शक्ति रूप में प्रकट करता है।

दीपावली, धनतेरस तथा शुक्रवार की पूजा के लिए अनिवार्य प्रार्थना।

श्लोकों के अनुसार सभी पाप और सभी दुःख दूर करता है।

महालक्ष्मी अष्टकम् जप विधि

जप संख्या8बार
उत्तम समयशुक्रवार प्रातः, दीपावली, धनतेरस

लक्ष्मी की प्रतिमा के सामने बैठें। घी का दीपक जलाएँ। लाल कमल या गेंदे के फूल अर्पित करें। आठों श्लोकों का पाठ करें। प्रत्येक श्लोक के बाद 'महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते' एक शक्तिशाली भक्तिमय लय रचता है। शुक्रवार को आठ बार पाठ करें। दीपावली पर 108 बार पाठ करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह पद्म पुराण में वर्णित महालक्ष्मी की आठ श्लोकों की स्तुति है, जिसे देवराज इन्द्र ने कहा। प्रत्येक श्लोक लक्ष्मी के एक भिन्न दिव्य गुण का वर्णन करता है और 'महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते' (महालक्ष्मी को नमस्कार) पर समाप्त होता है।
यह पद्म पुराण से है और इन्द्र द्वारा रचित मानी जाती है, जिन्होंने लक्ष्मी द्वारा देवताओं को कोलासुर पर विजय दिलाने के बाद इसकी रचना की। यह लक्ष्मी के प्रति देवताओं की कृतज्ञता का प्रतीक है।
हाँ। श्री सूक्तम् एक वैदिक सूक्त है जो अग्नि के माध्यम से लक्ष्मी का आह्वान करता है। महालक्ष्मी अष्टकम् एक पौराणिक स्तोत्र है जो सीधे लक्ष्मी के गुणों की स्तुति करता है। दोनों धन के लिए शक्तिशाली हैं — श्री सूक्तम् अधिक प्राचीन है, अष्टकम् अधिक सुलभ।

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