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विक्रम-बेताल की कहानियाँ

राजा विक्रमादित्य और बेताल की पच्चीस पहेली-कथाएँ

बेताल पच्चीसी में राजा विक्रमादित्य को रात के श्मशान से बेताल-युक्त शव ले जाना है। हर बार बेताल एक पहेली-कथा सुनाता है — और हर उत्तर राजा के धर्म व विवेक की परीक्षा लेता है।

🏹सोमप्रभा और तीन वरबेताल पच्चीसी — पहेली 5राह तैयार करने वाले धन्यवाद के पात्र हैं, पर फल उसी का है जो प्राणों को दाँव पर लगाकर काम पूरा करता है।🦴चार भाई और सिंहबेताल पच्चीसी — पहेली 22विनाश का दोष उसी के सिर है जिसके कर्म ने संकट को खोल छोड़ा, क्योंकि दूरदर्शिता के बिना कौशल सबसे ख़तरनाक अज्ञान है।🪷फिर से जी उठी कन्याबेताल पच्चीसी — पहेली 2कर्म ही सच्चे रिश्ते बताते हैं — बड़े उपकार आदर दिलाते हैं, पर दुख में अडिग निष्ठा ही सच्चे प्रेम की पहचान है।👑तीन सुकुमार रानियाँबेताल पच्चीसी — पहेली 11सच्चा न्याय हर बात को उसकी ठीक-ठीक मात्रा से तौलता है, क्योंकि सबसे छोटे कारण से सबसे बड़ा प्रभाव ही सबसे बड़ा प्रमाण है।🛕बदले हुए सिरबेताल पच्चीसी — पहेली 6मनुष्य की पहचान उसके सिर में बसती है — उस मन में जो सोचता है और उस चेहरे में जिससे संसार उसे जानता है।🛡️स्वामिभक्त वीरवरबेताल पच्चीसी — पहेली 4अपना कर्तव्य निभाना श्रेष्ठ है, पर दुर्लभतम महानता उस बलिदान में है जिसकी कर्तव्य ने कभी माँग ही नहीं की।

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