कुंडली मिलान — गुण मिलान
वर व वधू की जन्म तिथि से अष्टकूट के 36 गुणों का निःशुल्क मिलान — नक्षत्र अपने-आप गणना, नाड़ी व भकूट दोष-परिहार सहित, तुरंत परिणाम।
🤵 वर (पुरुष)
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👰 वधू (स्त्री)
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गुण मिलान क्या है?
वैदिक ज्योतिष में विवाह से पूर्व वर-वधू की अनुकूलता जानने के लिए उनकी चंद्र-राशि व जन्म नक्षत्र की तुलना की जाती है — इसे गुण मिलान या अष्टकूट कहते हैं। आठ कूटों के कुल 36 गुणों में जितने अधिक गुण मिलें, दांपत्य उतना ही सुखद माना जाता है।
आठ कूट (36 गुण)
गुण कैसे पढ़ें
सामान्य प्रश्न
कुंडली मिलान / गुण मिलान क्या है?
गुण मिलान (अष्टकूट) वर-वधू की चंद्र-नक्षत्र आधारित वैदिक मिलान पद्धति है, जिसमें आठ कूटों (वर्ण, वश्य, तारा, योनि, ग्रह मैत्री, गण, भकूट, नाड़ी) के कुल 36 गुणों की तुलना की जाती है। गुण जितने अधिक, मिलान उतना ही शुभ माना जाता है।
विवाह के लिए कितने गुण आवश्यक हैं?
परंपरा अनुसार 36 में से 18 या अधिक गुण विवाह योग्य माने जाते हैं; 25–32 अति उत्तम। 18 से कम होने पर उपाय या विस्तृत विचार आवश्यक है। किंतु गुण-संख्या केवल एक कारक है — मांगलिक दोष, सप्तम भाव का बल व दशा-काल भी महत्वपूर्ण हैं।
नाड़ी दोष व भकूट दोष क्या है?
नाड़ी (8) व भकूट (7) का भार सर्वाधिक है। समान नाड़ी होने पर सभी 8 अंक नष्ट (नाड़ी दोष), जो स्वास्थ्य व संतान से जुड़ा है। भकूट दोष (0 अंक) 6–8, 2–12 या 5–9 राशि-अक्ष पर बनता है। दोनों के शास्त्रीय परिहार हैं (जैसे समान/मित्र राशि-स्वामी), जिन्हें यह कैलकुलेटर स्वतः लागू करता है।
क्या यह कुंडली मिलान सटीक है?
हाँ — 36-गुण गणना मानक शास्त्रीय अष्टकूट तालिकाओं पर आधारित है और प्रत्येक नक्षत्र व पाद हेतु जगन्नाथ होरा संदर्भ से सेल-सटीक सत्यापित है। पूर्ण निर्णय हेतु मांगलिक दोष व सम्पूर्ण कुंडली भी ज्योतिषी से जँचवाएँ, जिनके लिए जन्म समय व स्थान आवश्यक है।