भगवान शिव Mantras
The destroyer and transformer, supreme ascetic and lord of meditation.
Lord Shiva — Mahadeva, the Auspicious One — is the destroyer and transformer of the cosmic trinity, the supreme ascetic and lord of meditation, time and yoga. Chanting Shiva mantras such as "Om Namah Shivaya" and the Mahamrityunjaya brings fearlessness, healing, inner peace and liberation (moksha). Explore his complete mantras, the Shiv Sahasranama, chalisa, ashtakams and stotras below, each with Sanskrit text, transliteration and meaning.
Best day to worship: Monday · 101 mantras available
The Legend of Lord Shiva
In the churning of the ocean of milk (Samudra Manthan), the gods and demons together turned Mount Mandara with the great serpent Vasuki as their rope, seeking the nectar of immortality. But before any treasure arose, the churning brought forth Halahala — a poison so virulent that its very fumes began to scorch and destroy the three worlds.
In terror, gods and demons alike fled to Lord Shiva, the only one who could save creation. Out of boundless compassion, Mahadeva gathered the deadly poison in his palm and drank it. As the venom passed his throat, Goddess Parvati pressed it gently to hold it there, that it might harm neither the Lord nor the worlds held within him. The poison lodged in his throat and turned it a deep blue.
From that day Lord Shiva is honoured as Neelkanth — the blue-throated one — who swallowed the world's poison to save all beings. It is the supreme image of his selfless grace: that the Lord takes the suffering of the world upon himself, and asks for nothing in return.
भगवान शिव Mantras, Chalisa & Stotras
अद्वैत पञ्चरत्नम् (आत्मपञ्चकम्)
नाहं देहो नेन्द्रियाण्यन्तरङ्गो
पढ़ें और जपें →अघोर मंत्र (पंचब्रह्म — शिव का दक्षिण मुख)
अघोरेभ्योऽथ घोरेभ्यो
पढ़ें और जपें →अनायासेन मरणम्
अनायासेन मरणं विना दैन्येन जीवनम्।
पढ़ें और जपें →अङ्गिकं भुवनं यस्य (नटराज ध्यान)
आङ्गिकं भुवनं यस्य वाचिकं सर्ववाङ्मयम्।
पढ़ें और जपें →अर्धनारीनटेश्वर स्तोत्रम्
चाम्पेयगौरार्धशरीरकायै
पढ़ें और जपें →अर्धनारीश्वर स्तोत्रम्
श्रीगणेशाय नमः ॥
पढ़ें और जपें →असितगिरिसमं स्यात्
असितगिरिसमं स्यात् कज्जलं सिन्धुपात्रे
पढ़ें और जपें →बटुक भैरव अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम्
ॐ भैरवो भूतनाथश्च भूतात्मा भूतभावनः।
पढ़ें और जपें →बटुक भैरव स्तोत्रम्
वन्दे बालं स्फटिकसदृशं कुण्डलोद्भासिवक्त्रं
पढ़ें और जपें →श्री भैरव चालीसा
श्री गणपति गुरु गौरी पद, प्रेम सहित धरि माथ ।
पढ़ें और जपें →भो शम्भो शिव शम्भो स्वयम्भो
भो शम्भो शिव शम्भो स्वयम्भो॥
पढ़ें और जपें →बिल्वाष्टकम्
त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम् ।
पढ़ें और जपें →ब्रह्मज्ञानावलीमाला
असङ्गोऽहमसङ्गोऽहमसङ्गोऽहं पुनः पुनः।
पढ़ें और जपें →ब्रह्मानन्दं परमसुखदं (गुरु / दक्षिणामूर्ति ध्यान)
ब्रह्मानन्दं परमसुखदं केवलं ज्ञानमूर्तिं
पढ़ें और जपें →चन्द्रमौलीश स्तोत्रम्
श्रीगणेशाय नमः ।
पढ़ें और जपें →चन्द्रशेखर अष्टकम्
चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर पाहि माम्।
पढ़ें और जपें →चिन्मय लिङ्गाष्टकम्
(श्रीरुद्रकृतम्)
पढ़ें और जपें →दक्षिणामूर्ति स्तोत्रम्
मौनव्याख्याप्रकटितपरब्रह्मतत्त्वं युवानं
पढ़ें और जपें →दक्षिणामूर्ति अष्टकम्
अगणितगुणगणमप्रमेमाद्यं
पढ़ें और जपें →दक्षिणामूर्ति अष्टोत्तर शतनामावली
ॐ ओङ्कारोद्यानकोकिलाय नमः
पढ़ें और जपें →दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्रम्
विश्वेश्वराय नरकार्णवतारणाय
पढ़ें और जपें →दशश्लोकी (निर्वाण दशकम्)
ॐ तत् सत्।
पढ़ें और जपें →धराधरेन्द्रनन्दिनीविलासबन्धु
धराधरेन्द्र नन्दिनी विलासबन्धु बन्धुर
पढ़ें और जपें →द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र
सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
पढ़ें और जपें →एकश्लोकी
किं ज्योतिस्तवभानुमानहनि मे रात्रौ प्रदीपादिकं
पढ़ें और जपें →हर हर महादेव
हर हर महादेव॥
पढ़ें और जपें →हस्तामलकीयम् (हस्तामलकस्तोत्रम्)
कस्त्वं शिशो कस्य कुतोऽसि गन्ता
पढ़ें और जपें →ह्रौं बीज मंत्र
ॐ ह्रौं
पढ़ें और जपें →श्री काल भैरव आरती
जय भैरव देवा प्रभु जय भैरव देवा ।
पढ़ें और जपें →काल भैरव अष्टकम्
देवराजसेव्यमानपावनाङ्घ्रिपङ्कजं
पढ़ें और जपें →कालभैरव अष्टोत्तर शतनामावली
ॐ श्रीगणेशाय नमः
पढ़ें और जपें →करचरणकृतं — क्षमा प्रार्थना
करचरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वा
पढ़ें और जपें →कर्पूरगौरं करुणावतारम्
कर्पूरगौरं करुणावतारं
पढ़ें और जपें →काशी पञ्चकम्
मनोनिवृत्तिः परमोपशान्तिः
पढ़ें और जपें →काशी विश्वनाथाष्टकम्
गङ्गातरङ्गरमणीयजटाकलापं
पढ़ें और जपें →कौपीनपञ्चकम्
वेदान्तवाक्येषु सदा रमन्तो
पढ़ें और जपें →लवथवती विक्राळा (शंकराची आरती)
लवथवती विक्राळा ब्रह्मांडीं माळा ।
पढ़ें और जपें →लिंगाष्टकम्
ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं
पढ़ें और जपें →महामृत्युंजय स्तोत्रम्
रुद्रं पशुपतिं स्थाणुं नीलकण्ठमुमापतिम्।
पढ़ें और जपें →महालिङ्गाष्टकम्
महालिङ्गं महादेवं महेश्वरमुमापतिम् ।
पढ़ें और जपें →महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
पढ़ें और जपें →श्री मल्लिकार्जुन मंगलाशासनम्
उमाकान्ताय कान्ताय कामितार्थप्रदायिने।
पढ़ें और जपें →मनीषा पञ्चकम्
जाग्रत्स्वप्नसुषुप्तिषु स्फुटतरा या संविदुज्जृम्भते
पढ़ें और जपें →मार्गबन्धु स्तोत्रम्
शम्भो महादेव देव शिव शम्भो महादेव देवेश शम्भो।
पढ़ें और जपें →मार्कण्डेय शिवाष्टकम्
सदा गोदावर्यास्तटनिकटवासं पशुपतिं
पढ़ें और जपें →मृत्युञ्जय मानसिक पूजा स्तोत्रम्
कैलासे कमनीयरत्नखचिते कल्पद्रुमूले स्थितं
पढ़ें और जपें →नमः शिवाष्टकम्
संसारदावानलशामकाय
पढ़ें और जपें →नन्दिकेश्वर गायत्री मंत्र (नन्दी गायत्री)
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे
पढ़ें और जपें →नटराज स्तोत्रम् (पतञ्जलि कृतम्)
सदञ्चितमुदञ्चितनिकुञ्चितपदं झलझलं चलितमञ्जुकटकं
पढ़ें और जपें →निर्वाण मञ्जरी
अहं नामरो नैव मर्त्यो न दैत्यो
पढ़ें और जपें →निर्वाण षट्कम् (आत्म षट्कम्)
मनोबुद्ध्यहंकारचित्तानि नाहं
पढ़ें और जपें →ॐ जय शिव ओमकारा आरती
ॐ जय शिव ओमकारा, स्वामी जय शिव ओमकारा।
पढ़ें और जपें →ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय
पढ़ें और जपें →ॐ नमो भगवते रुद्राय
ॐ नमो भगवते रुद्राय॥
पढ़ें और जपें →पार्वतीवल्लभनीलकण्ठाष्टकम्
नमो भूतनाथं नमो देवदेवं नमः कालकालं नमो दिव्यतेजः।
पढ़ें और जपें →पशुपत्यष्टकम्
पशुपतीन्दुपतिं धरणीपतिं भुजगलोकपतिं च सतीपतिम्।
पढ़ें और जपें →प्रदोष स्तोत्रम्
सत्यं ब्रवीमि परलोकहितं ब्रवीमि
पढ़ें और जपें →प्रश्नोत्तररत्नमालिका
कः खलु नालङ्क्रियते दृष्टादृष्टार्थसाधनपटीयान्।
पढ़ें और जपें →रामलिङ्गाष्टकम्
वेदवृन्दवन्दितं वरेण्यरूपसुन्दरं
पढ़ें और जपें →शिव रुद्राष्टकम्
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं
पढ़ें और जपें →रुद्र सूक्तम्
ॐ आ ते पितर्मरुतां सुम्नमेतु मा नः सूर्यस्य संदृशो युयोथाः।
पढ़ें और जपें →सदाशिव अष्टकम्
नन्दिस्कन्धविराजितं गिरिजापतिं सुरसुन्दरं
पढ़ें और जपें →साधन पञ्चकम्
वेदो नित्यमधीयतां तदुदितं कर्म स्वनुष्ठीयतां
पढ़ें और जपें →सद्योजात मंत्र (पंचब्रह्म — शिव का पश्चिम मुख)
सद्योजातं प्रपद्यामि
पढ़ें और जपें →शम्भु स्तुति
नमामि शम्भुं पुरुषं पुराणं
पढ़ें और जपें →शान्तं पद्मासनस्थं (शिव ध्यान श्लोक)
शान्तं पद्मासनस्थं शशधरमकुटं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रं
पढ़ें और जपें →शरभेशाष्टकम्
देवादिदेवाय जगन्मयाय शिवाय नालीकनिभाननाय।
पढ़ें और जपें →शिव चालीसा
॥ दोहा ॥
पढ़ें और जपें →शिव महिम्न स्तोत्र
महिम्नः पारं ते परमविदुषो यद्यसदृशी
पढ़ें और जपें →शिव पञ्चाक्षर स्तोत्र
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय
पढ़ें और जपें →शिव सहस्रनाम
ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचन्द्रावतंसं
पढ़ें और जपें →शिव अपराध क्षमापन स्तोत्रम्
जय शङ्कर पार्वतीपते कृपया पाहि परेश सत्पते ।
पढ़ें और जपें →शिव अष्टोत्तर शतनामावली
ॐ शिवाय नमः।
पढ़ें और जपें →श्री शिव भुजङ्गप्रयात स्तोत्रम्
कृपासागरायाशुकाव्यप्रदाय
पढ़ें और जपें →शिव गायत्री मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि ।
पढ़ें और जपें →श्री शिव कवचम्
ध्यानम्
पढ़ें और जपें →शिव मानस पूजा
रत्नैः कल्पितमासनं हिमजलैः स्नानं च दिव्याम्बरं नानारत्नविभूषितं मृगमदामोदाङ्कितं चन्दनम्।
पढ़ें और जपें →शिव मङ्गलाष्टकम्
भवाय चन्द्रचूडाय निर्गुणाय गुणात्मने।
पढ़ें और जपें →शिवनामावल्यष्टकम्
हे चन्द्रचूड मदनान्तक शूलपाणे
पढ़ें और जपें →शिव प्रातः स्मरण स्तोत्रम्
प्रातः स्मरामि भवभीतिहरं सुरेशं
पढ़ें और जपें →शिव सङ्कल्प सूक्तम्
यज्जाग्रतो दूरमुदैति दैवं तदु सुप्तस्य तथैवैति।
पढ़ें और जपें →श्री शिव षडक्षर स्तोत्रम्
ॐकारं बिन्दुसंयुक्तं नित्यं ध्यायन्ति योगिनः ।
पढ़ें और जपें →शिव तांडव स्तोत्रम्
जटाटवी गलज्जल प्रवाह पावितस्थले
पढ़ें और जपें →शिवानन्दलहरी
कलाभ्यां चूडालंकृतशशिकलाभ्यां निजतपः-
पढ़ें और जपें →शिवाष्टकम् (व्यास)
व्यास उवाच ।
पढ़ें और जपें →श्री रुद्रं चमकम्
॥ प्रथम अनुवाक ॥
पढ़ें और जपें →श्री रुद्रं नमकम्
ओं नमो भगवते॑ रुद्रा॒य ॥
पढ़ें और जपें →तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्
ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं
पढ़ें और जपें →தேவாரம் — தோடுடைய செவியன்
தோடுடைய செவியன் விடைஏறி ஓர் தூவெண்மதி சூடி
पढ़ें और जपें →திருவாசகம் — சிவபுராணம்
நமச்சிவாய வாஅழ்க நாதன்தாள் வாழ்க
पढ़ें और जपें →திருவெம்பாவை
ஆதியும் அந்தமும் இல்லா அரும்பெருஞ்
पढ़ें और जपें →तोटकाष्टकम्
विदिताखिलशास्त्रसुधाजलधे महितोपनिषत् कथितार्थनिधे ।
पढ़ें और जपें →त्रिदलं त्रिगुणाकारम्
त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम् ।
पढ़ें और जपें →उमामहेश्वर स्तोत्रम्
नमः शिवाभ्यां नवयौवनाभ्यां
पढ़ें और जपें →वैद्यनाथाष्टकम्
श्रीरामसौमित्रिजटायुवेद-
पढ़ें और जपें →वन्दे शम्भुमुमापतिं (शिव ध्यान श्लोक)
वन्दे शम्भुमुमापतिं सुरगुरुं वन्दे जगत्कारणं
पढ़ें और जपें →वेदसार शिव स्तोत्रम्
॥ श्रीः॥
पढ़ें और जपें →विश्वं दर्पणदृश्यमान (दक्षिणामूर्ति स्तोत्रम् १)
विश्वं दर्पणदृश्यमाननगरीतुल्यं निजान्तर्गतं
पढ़ें और जपें →विश्वनाथ अष्टकम्
आदिशम्भु-स्वरूप-मुनिवर-चन्द्रशीश-जटाधरं
पढ़ें और जपें →श्री काशी विश्वनाथ सुप्रभातम्
उत्तिष्ठ भैरवस्वामिन् काशिकापुरपालक।
पढ़ें और जपें →यति पञ्चकम् (कौपीन पञ्चकम्)
वेदान्तवाक्येषु सदा रमन्तो
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