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ॐ जय शिव ओमकारा आरती

🕉️ hindu·📿 1× जप·🕐 संध्या पूजा (संध्या काल), सोमवार, महाशिवरात्रि, श्रावण मास·🎵 ऑडियो सहित·📜 Traditional Hindu devotional composition

अन्य नाम / खोज: om jai shiv omkara · jai shiv omkara har har · shiv ji ki aarti

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अर्थ

ॐ जय शिव ओमकारा भगवान शिव को समर्पित सबसे प्रिय और व्यापक रूप से गाई जाने वाली आरती है। यह शिव को उस परम सत्ता के रूप में वर्णित करती है जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों को समाहित करती है, और परंपरागत रूप से स्वामी शिवानंद को इसका श्रेय दिया जाता है।

उत्पत्ति और कथा

Traditional Hindu devotional composition · Unknown (folk tradition) · Medieval period

ॐ जय शिव ओमकारा सबसे प्रिय शिव आरती है, जो पूरे भारत में मंदिरों और घरों में संध्या उपासना के समय गाई जाती है। यह आरती शिव के दिव्य गुणों — अर्धचंद्र, गंगा, त्रिशूल, वृषभ नंदी, और नाग — का वर्णन करती है।

शास्त्रों में वर्णित

पूरे भारत के शिव मंदिरों में, विशेषकर वाराणसी के काशी विश्वनाथ में, ॐ जय शिव ओमकारा के साथ संध्या आरती प्रतिदिन हजारों लोगों को आकर्षित करती है। भक्त बताते हैं कि वातावरण दिव्य ऊर्जा से विद्युतमय हो जाता है, और कई लोग भक्ति के स्वतःस्फूर्त अश्रु और उपचार का अनुभव करते हैं।

सुनें और साथ में जपें

सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

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श्लोक 1

जय शिव ओमकारा, स्वामी जय शिव ओमकारा। ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥ जय शिव ओमकारा॥

Om Jai Shiv Omkara, Swami Jai Shiv Omkara Brahma Vishnu Sadashiv Ardhangi Dhara Om Jai Shiv Omkara

अर्थ:ॐ भगवान शिव ओमकारा की जय, शिव ओमकारा की जय! ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव — आप अपनी अर्धांगिनी को अपने आधे शरीर में धारण करते हैं। ॐ जय शिव ओमकारा!

श्लोक 2

एकानन चतुरानन पंचानन राजे। हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ जय शिव ओमकारा॥

Ekanan Chaturanan Panchanan Raje Hansasan Garudhasan Vrishvahan Saje Om Jai Shiv Omkara

अर्थ:एकमुख, चतुर्मुख, पंचमुख — आप सर्वोच्च विराजते हैं। हंस, गरुड़ और वृषभ पर आसीन — आप सुंदर रूप से सुशोभित हैं। ॐ जय शिव ओमकारा!

श्लोक 3

दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे। त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥ जय शिव ओमकारा॥

Do Bhuj Char Chaturbhuj Das Bhuj Ati Sohe Trigun Roop Nirakhte Tribhuvan Jan Mohe Om Jai Shiv Omkara

अर्थ:दो भुजाओं, चार भुजाओं, दस भुजाओं से — आप अति भव्य दिखते हैं। आपके त्रिगुण रूप को देखकर तीनों लोकों के लोग मोहित हो जाते हैं। ॐ जय शिव ओमकारा!

श्लोक 4

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी। चन्दन मृगमद सोहे भाले शशिधारी॥ जय शिव ओमकारा॥

Akshamala Vanmala Mundmala Dhari Chandan Mrigmad Sohe Bhale Shashidhari Om Jai Shiv Omkara

अर्थ:आप अक्षमाला, वनमाला और मुण्डमाला धारण करते हैं। चंदन और कस्तूरी आपको सुशोभित करते हैं, और अर्धचंद्र आपके भाल को सुशोभित करता है। ॐ जय शिव ओमकारा!

श्लोक 5

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे। सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥ जय शिव ओमकारा॥

Shwetambar Pitambar Baaghambar Ange Sanakadik Garunadik Bhootadik Sange Om Jai Shiv Omkara

अर्थ:श्वेत वस्त्र, पीत वस्त्र और बाघम्बर आपके शरीर को सुशोभित करते हैं। सनक आदि ऋषि, गरुड़ आदि, भूत और प्राणी — सभी आपके साथ रहते हैं। ॐ जय शिव ओमकारा!

श्लोक 6

कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी। सुखकारी दुखहारी जगपालनकारी॥ जय शिव ओमकारा॥

Kar Ke Madhya Kamandalu Chakra Trishuldhari Sukhkari Dukh-hari Jagpalankari Om Jai Shiv Omkara

अर्थ:आपके हाथों में कमण्डलु, चक्र और त्रिशूल है। आप सुख के दाता, दुःख के हर्ता और जगत के पालनकर्ता हैं। ॐ जय शिव ओमकारा!

श्लोक 7

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका॥ जय शिव ओमकारा॥

Brahma Vishnu Sadashiv Janat Aviveka Pranavakshar Mein Shobhit Ye Teenon Eka Om Jai Shiv Omkara

अर्थ:ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव — अज्ञानी उन्हें अलग मानते हैं। परंतु ॐ अक्षर में तीनों एक होकर प्रकाशित होते हैं। ॐ जय शिव ओमकारा!

श्लोक 8

त्रिगुण स्वामी जी की आरती जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥ जय शिव ओमकारा॥

Trigun Swami Ji Ki Aarti Jo Koi Nar Gaave Kahat Shivanand Swami Manvanchhit Phal Pave Om Jai Shiv Omkara

अर्थ:जो कोई त्रिमूर्ति प्रभु की यह आरती गाता है, स्वामी शिवानंद कहते हैं — वह अपने मन की सब इच्छाएँ पा लेता है। ॐ जय शिव ओमकारा!

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

🔊Omआदिम ब्रह्मांडीय नाद
जय🔊Jaiविजय, जय, नमन
शिव🔊Shivभगवान शिव, मंगलमय
ओमकारा🔊Omkaraॐ का स्वरूप, साकार ब्रह्मांडीय नाद
स्वामी🔊Swamiप्रभु, स्वामी
ब्रह्मा🔊Brahmaसृष्टिकर्ता ब्रह्मा
विष्णु🔊Vishnuपालनकर्ता विष्णु
सदाशिव🔊Sadashivशाश्वत शिव, संहारक
अर्द्धांगी🔊Ardhangiजिनके आधे शरीर में अर्धांगिनी विराजती हैं
एकानन🔊Ekananएकमुख (ब्रह्मा का मूल रूप)
चतुरानन🔊Chaturananचतुर्मुख (ब्रह्मा)
पंचानन🔊Panchananपंचमुख (शिव)
हंसासन🔊Hansasanहंस पर आसीन (ब्रह्मा का वाहन)
गरुड़ासन🔊Garudhasanगरुड़ पर आसीन (विष्णु का वाहन)
वृषवाहन🔊Vrishvahanवृषभ नंदी पर सवार (शिव का वाहन)
त्रिगुण🔊Trigunतीन गुण — सत्त्व, रज, तम
त्रिभुवन🔊Tribhuvanतीन लोक — स्वर्ग, पृथ्वी, पाताल
अक्षमाला🔊Akshamalaरुद्राक्ष की माला
वनमाला🔊Vanmalaवन के पुष्पों की माला
मुण्डमाला🔊Mundmalaमुण्डों की माला
चन्दन🔊Chandanचंदन का लेप
मृगमद🔊Mrigmadकस्तूरी (मृग की सुगंध)
शशिधारी🔊Shashidhariभाल पर अर्धचंद्र धारण करने वाले
श्वेताम्बर🔊Shwetambarश्वेत वस्त्रधारी (ब्रह्मा का रूप)
पीताम्बर🔊Pitambarपीत वस्त्रधारी (विष्णु का रूप)
बाघम्बर🔊Baaghambarबाघम्बरधारी (शिव का रूप)
कमण्डलु🔊Kamandaluतपस्वियों का कमण्डलु
चक्र🔊Chakraदिव्य चक्र (विष्णु का अस्त्र)
त्रिशूल🔊Trishulत्रिशूल (शिव का अस्त्र)
सुखकारी🔊Sukhkariसुख के दाता
दुखहारी🔊Dukh-hariदुःख के हर्ता
जगपालनकारी🔊Jagpalankariजगत के पालक और रक्षक
प्रणवाक्षर🔊Pranavaksharप्रणव (ॐ) का अक्षर
मनवांछित🔊Manvanchhitमन की इच्छा, वांछित
फल🔊Phalफल, परिणाम, प्रतिफल

ॐ जय शिव ओमकारा आरती पाठ के लाभ

त्रिदेव का आवाहन — यह आरती शिव की उस परम सत्ता के रूप में अनूठी उपासना है जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश को समाहित करती है — तीनों के आशीर्वाद का आवाहन करती है।

दुःख हरती है — आरती स्पष्ट रूप से शिव को 'दुखहारी' कहती है, और नियमित पाठ शोक और कष्ट को विलीन करने वाला माना जाता है।

पवित्र वातावरण रचती है — जलते दीपक के साथ यह आरती करने से घर शुद्ध होता है, नकारात्मक ऊर्जा हटती है और गहन आध्यात्मिक वातावरण बनता है।

मनोकामना पूर्ण करती है — अंतिम पद वचन देता है कि जो भी इस आरती को भक्ति से गाएगा उसे 'मनवांछित फल' प्राप्त होगा।

शिव भक्ति गहरी करती है — नियमित पाठ भगवान शिव से प्रबल संबंध बनाता है, विशेषकर श्रावण मास में और सोमवार को।

पारिवारिक सामंजस्य लाती है — संध्या पूजा में परिवार के साथ मिलकर इस आरती को गाना बंधनों को सुदृढ़ करता है और घर में दिव्य शांति का निमंत्रण देता है।

ॐ जय शिव ओमकारा आरती जप विधि

जप संख्या1बार
उत्तम समयसंध्या पूजा (संध्या काल), सोमवार, महाशिवरात्रि, श्रावण मास

शिवलिंग या प्रतिमा के सामने घी का दीपक और धूप जलाएँ। बेल पत्र, जल, दूध और पुष्प अर्पित करें। जलते दीपक के साथ आरती की थाली पकड़ें और देवता के सामने उसे दक्षिणावर्त (घड़ी की दिशा में) घुमाएँ। बाएँ हाथ से घंटी बजाएँ। आरती को धीरे-धीरे और मधुरता से पूर्ण भक्ति के साथ गाना चाहिए। समाप्ति के बाद उपस्थित सभी भक्तों को ज्योति अर्पित करें। यह आरती सोमवार को, श्रावण मास में, और महाशिवरात्रि पर विशेष रूप से प्रभावशाली होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ॐ जय शिव ओमकारा भगवान शिव को समर्पित सबसे प्रिय और व्यापक रूप से गाई जाने वाली आरती है। यह शिव के दिव्य स्वरूप, उनके गुणों, उनके आयुधों और ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश के हिंदू त्रिदेव को समाहित करने वाले परम देवता के रूप में उनकी भूमिका का वर्णन करती है। परंपरागत रूप से इसका श्रेय स्वामी शिवानंद को दिया जाता है।
यह आरती आदर्श रूप से संध्या पूजा (संध्या काल) में गाई जाती है। यह विशेषकर सोमवार (शिव का दिन) को, श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) के दौरान, महाशिवरात्रि पर, और प्रदोष व्रत के दिनों में अत्यंत शुभ है। हालाँकि, इसे किसी भी समय गाया जा सकता है जब आप भगवान शिव की उपासना करना चाहें।
ओमकारा का अर्थ है 'ॐ का स्वरूप' या 'जो ॐ है'। आरती शिव को पवित्र अक्षर ॐ के मूर्त रूप के रूप में संबोधित करती है — वह आदि ब्रह्मांडीय ध्वनि जिससे समस्त सृष्टि उत्पन्न हुई। यह शिव को परम, निराकार ब्रह्म के रूप में स्थापित करता है।
आरती शिव को उस परम सत्ता के रूप में प्रस्तुत करती है जो हिंदू त्रिदेव के तीनों रूपों — सृष्टिकर्ता ब्रह्मा, पालनकर्ता विष्णु, और संहारकर्ता शिव — के रूप में प्रकट होती है। मुख्य पद कहता है कि ॐ अक्षर में तीनों एक हैं। यह शैव दार्शनिक दृष्टि को दर्शाता है।
आरती का श्रेय परंपरागत रूप से स्वामी शिवानंद को दिया जाता है, जैसा कि अंतिम पद में उल्लिखित है। यह एक प्रिय भक्ति रचना है जो पीढ़ियों से हिंदू उपासना परंपरा का हिस्सा रही है और पूरे भारत में मंदिरों एवं घरों में प्रत्येक संध्या गाई जाती है।

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