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काल भैरव अष्टकम्

🕉️ hindu·📿 8× जप·🕐 भैरव अष्टमी, शनिवार की संध्या, अथवा काशी यात्रा के समय·🎵 ऑडियो सहित·📜 Composed by Adi Shankaracharya

अन्य नाम / खोज: kalabhairava ashtakam · deva raja sevyamana · kashika pura adhinatha kalabhairavam · kaal bhairav ashtak

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अर्थ

काल भैरव अष्टकम् आदि शंकराचार्य रचित आठ श्लोकों का स्तोत्र है, जो काशी के रक्षक भगवान शिव के उग्र रूप काल भैरव को समर्पित है। प्रत्येक श्लोक 'काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे' पर समाप्त होता है और भय, पाप तथा मृत्यु के अहंकार का नाश कर भुक्ति और मुक्ति दोनों प्रदान करता है।

उत्पत्ति और कथा

Composed by Adi Shankaracharya · Adi Shankaracharya · 8th century CE

शंकराचार्य ने काशी (वाराणसी) के काल भैरव मंदिर में इस अष्टकम् की रचना की, जो पवित्र नगरी के सबसे प्राचीन और शक्तिशाली मंदिरों में से एक है। काल भैरव काशी के उग्र रक्षक देवता माने जाते हैं — परंपरा कहती है कि उनकी अनुमति के बिना कोई काशी में निवास नहीं कर सकता। जो काशी में देहत्याग करते हैं, उनके कर्मों का न्याय वही करते हैं और परलोक में उनकी गति निर्धारित करते हैं।

शास्त्रों में वर्णित

शिव पुराण के अनुसार, जब शिव ने भैरव रूप में ब्रह्मा का अहंकारी पाँचवाँ सिर काटा, तब ब्रह्महत्या के पाप-स्वरूप वह कपाल उनके हाथ से चिपक गया। भैरव भयंकर भिक्षुक रूप में सम्पूर्ण ब्रह्मांड में भटकते रहे, कपाल उनकी हथेली से चिपका रहा। केवल जब वे काशी पहुँचे, तभी वह कपाल गिरा — ठीक उसी स्थान पर जहाँ आज काल भैरव मंदिर है। इसी से काशी ब्रह्मांड का एकमात्र स्थान बनी जहाँ ब्रह्महत्या जैसे पाप का भी निवारण होता है। यह अष्टकम् उसी महान पावन शक्ति का आह्वान करता है।

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सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

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श्लोक 1

देवराजसेव्यमानपावनाङ्घ्रिपङ्कजं व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम्। नारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगम्बरं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥

Devarajasevyamana Pavananghrpankajam Vyalayagyasutram Indushekharam Kripakaram Naradadi Yogivrinda Vanditam Digambaram Kashikapuradhianatha Kalabhairavam Bhaje

अर्थ:जिनके पावन चरणकमल देवराज इन्द्र द्वारा सेवित हैं, जो सर्प का यज्ञोपवीत और चन्द्र का शेखर धारण किए हैं — काशी के उस कालभैरव की मैं वन्दना करता हूँ।

श्लोक 2

भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परं नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम्। कालकालमम्बुजाक्षमक्षशूलमक्षरं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥

Bhanukotibhasvaram Bhavabdhitarakam Param Neelakantham Eepsitarthadayakam Trilochanam Kalakalam Ambujakshm Akshashulamaksharam Kashikapuradhianatha Kalabhairavam Bhaje

अर्थ:करोड़ों सूर्यों-से देदीप्यमान, संसार-सागर से पार उतारने वाले परम, नीलकण्ठ, इच्छित अर्थ देने वाले — काशी के उस कालभैरव की मैं वन्दना करता हूँ।

श्लोक 3

शूलटङ्कपाशदण्डपाणिमादिकारणं श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम्। भीमविक्रमं प्रभुं विचित्रताण्डवप्रियं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥

Shoolatanka Pashadanda Panimadikaranam Shyamakayam Adidevam Aksharam Niramayam Bheemavikramam Prabhum Vichitratandavapriyam Kashikapuradhianatha Kalabhairavam Bhaje

अर्थ:हाथों में शूल, टंक (कुल्हाड़ी), पाश और दण्ड धारण किए, आदिकारण, श्यामवर्ण, आदिदेव, अक्षर, निरामय — काशी के उस कालभैरव की मैं वन्दना करता हूँ।

श्लोक 4

भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं भक्तवत्सलं स्थितं समस्तलोकविग्रहम्। विनिक्वणन्मनोज्ञहेमकिङ्किणीलसत्कटिं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥

Bhuktimuktidayakam Prashastachaaruvigrahm Bhaktavatsalam Sthitam Samastalokavigrahm Vinikvanmanojnya Hemakinkini Lasatkantim Kashikapuradhianatha Kalabhairavam Bhaje

अर्थ:भुक्ति और मुक्ति देने वाले, प्रशस्त एवं सुन्दर विग्रह वाले, भक्तवत्सल, समस्त लोकों में स्थित — काशी के उस कालभैरव की मैं वन्दना करता हूँ।

श्लोक 5

धर्मसेतुपालकं त्वधर्ममार्गनाशकं कर्मपाशमोचकं सुशर्मदायकं विभुम्। स्वर्णवर्णशेषपाशशोभिताङ्गमण्डलं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥

Dharmasetupaalakam Tvadharmamarganashakam Karmapasamochakam Susharmadayakam Vibhum Swarnavarneshesha Pasha Shobhitanga Mandalam Kashikapuradhianatha Kalabhairavam Bhaje

अर्थ:धर्म के सेतु की रक्षा करने वाले, अधर्म के मार्ग का नाश करने वाले, कर्म के पाश से मुक्त करने वाले, सुख देने वाले — काशी के उस कालभैरव की मैं वन्दना करता हूँ।

श्लोक 6

रत्नपादुकाप्रभाभिरामपादयुग्मकं नित्यमद्वितीयमिष्टदैवतं निरञ्जनम्। मृत्युदर्पनाशनं करालदंष्ट्रमोक्षणं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥

Ratnapaduka Prabha Abhirama Padayugmakam Nityam Adviteeyam Ishtadaivatam Niranjanam Mrityudarpanashanam Karaladamshtra Mokshanam Kashikapuradhianatha Kalabhairavam Bhaje

अर्थ:रत्नजड़ित पादुकाओं की प्रभा से सुशोभित चरणयुगल वाले, नित्य, अद्वितीय, इष्टदेव, निर्गुण — काशी के उस कालभैरव की मैं वन्दना करता हूँ।

श्लोक 7

अट्टहासभिन्नपद्मजाण्डकोशसन्ततिं दृष्टिपातनष्टपापजालमुग्रशासनम्। अष्टसिद्धिदायकं कपालमालिकाधरं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥

Attahasabhinna Padmajanda Kosha Santatim Drishtipata Nashtapapajaalam Ugrashashnam Ashtasiddhidayakam Kapalamalikaadharam Kashikapuradhianatha Kalabhairavam Bhaje

अर्थ:जिनके अट्टहास से ब्रह्मा के अण्डकोशों की पंक्ति विदीर्ण हुई, जिनकी दृष्टिमात्र से पापसमूह नष्ट हो जाता है, उग्रशासन वाले — काशी के उस कालभैरव की मैं वन्दना करता हूँ।

श्लोक 8

भूतसङ्घनायकं विशालकीर्तिदायकं काशिवासलोकपुण्यपापशोधकं विभुम्। नीतिमार्गकोविदं पुरातनं जगत्पतिं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥

Bhootasanghanayakam Vishalakeertidayakam Kashivasaloka Punyapapa Shodhakam Vibhum Neetimargakovidam Puratnam Jagatpatim Kashikapuradhianatha Kalabhairavam Bhaje

अर्थ:भूतगणों के नायक, विशाल कीर्ति प्रदान करने वाले, काशीवासियों के पुण्य-पाप का शोधन करने वाले विभु — काशी के उस कालभैरव की मैं वन्दना करता हूँ।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

कालभैरव🔊Kalabhairavaसमय के भयंकर स्वामी — शिव का उग्र रूप
काशिकापुराधिनाथ🔊Kashikapuradhianathaकाशी (वाराणसी) नगरी के अधिनाथ
भजे🔊Bhajeमैं वन्दना/भजन करता हूँ
पावनाङ्घ्रिपङ्कजं🔊Pavananghrpankajamजिनके चरणकमल पवित्र करने वाले हैं
दिगम्बरं🔊Digambaramदिगम्बर (नग्न तपस्वी)
भानुकोटि🔊Bhanukotiकरोड़ों सूर्यों की कान्ति वाले
त्रिलोचनम्🔊Trilochanamत्रिनेत्रधारी
शूलटङ्क🔊Shulatankaशूल और टंक (कुल्हाड़ी)
भुक्तिमुक्ति🔊Bhuktimuktiसांसारिक भोग और मुक्ति
धर्मसेतु🔊Dharmasetuधर्म का सेतु
कर्मपाशमोचकं🔊Karmapasamochakamकर्म के पाश से मुक्त करने वाले
मृत्युदर्पनाशनं🔊Mrityudarpanashanamमृत्यु के अहंकार का नाश करने वाले
अष्टसिद्धि🔊Ashtasiddhiआठ अलौकिक सिद्धियाँ
कपालमालिका🔊Kapalamalikaकपालों की माला
भूतसङ्घनायकं🔊Bhootasanghanayakamभूतगणों के नायक

काल भैरव अष्टकम् पाठ के लाभ

काल भैरव काशी के कोतवाल हैं — वे इस पवित्र नगरी की रक्षा करते हैं।

भय का नाश करते हैं, कर्मबंधन से मुक्त करते हैं और मृत्यु पर भी विजय दिलाते हैं।

भुक्ति (सांसारिक भोग) और मुक्ति (मोक्ष) दोनों प्रदान करते हैं।

वाराणसी में इसका पाठ विशेष रूप से प्रभावशाली माना जाता है।

अत्यंत कठोर पापों और बाधाओं को दूर करते हैं।

अष्ट सिद्धियाँ (आठ अलौकिक शक्तियाँ) प्रदान करते हैं।

काल भैरव अष्टकम् जप विधि

जप संख्या8बार
उत्तम समयभैरव अष्टमी, शनिवार की संध्या, अथवा काशी यात्रा के समय

दक्षिण दिशा (भैरव की दिशा) की ओर मुख करें। सरसों के तेल का दीपक जलाएँ। काले तिल अर्पित करें। आठों श्लोकों का पाठ करें — प्रत्येक 'काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे' पर समाप्त होकर एक शक्तिशाली लयबद्ध भाव रचता है। भैरव अष्टमी या कालाष्टमी पर आठ बार पाठ करना विशेष रूप से प्रभावशाली है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

काल भैरव भगवान शिव के उग्र एवं भयंकर रूप हैं। वे काशी (वाराणसी) के कोतवाल माने जाते हैं। 'काल' का अर्थ है समय/मृत्यु और 'भैरव' का अर्थ है भयंकर — वे समय के भयंकर स्वामी हैं जो मृत्यु पर भी विजय पाते हैं।
आदि शंकराचार्य ने काशी यात्रा के समय काल भैरव अष्टकम् की रचना की। आठों श्लोक 'काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे' — काशी के स्वामी काल भैरव की मैं वन्दना करता हूँ — से समाप्त होते हैं।
कथा के अनुसार, जब भगवान शिव ने ब्रह्मा के पाँच में से एक सिर को काटा, तब वह कपाल उनके हाथ से चिपक गया। वे भिक्षुक रूप में भटकते हुए काशी पहुँचे, जहाँ वह कपाल गिर गया — इस प्रकार काशी सबसे बड़े पाप से भी मुक्ति का स्थान बन गई। तभी से काल भैरव काशी के रक्षक हैं।
यह पृष्ठ काल भैरव अष्टकम् के सम्पूर्ण बोल मूल संस्कृत (देवनागरी) के साथ अंग्रेज़ी लिप्यंतरण में श्लोक दर श्लोक देता है, साथ ही प्रत्येक श्लोक का अर्थ अंग्रेज़ी और हिन्दी में — सभी आठ श्लोक तथा समापन फलश्रुति सहित।
काल भैरव अष्टकम् का पाठ भय — मृत्यु के भय सहित — का नाश करता है, पापों को दूर करता है, नकारात्मक ऊर्जा और काले जादू से रक्षा करता है, तथा काशी के रक्षक एवं काल के स्वामी काल भैरव की कृपा प्रदान करता है। इसका पाठ विशेषकर भैरव अष्टमी, रविवार और कालाष्टमी के दिनों में किया जाता है।

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