हरे कृष्ण महामंत्र
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✦ अर्थ
हरे कृष्ण महामंत्र भगवान कृष्ण और राम के पवित्र नामों से बना सोलह शब्दों का महामंत्र है। यह दिव्य शक्ति (हरे), परम चेतना (कृष्ण) और परम आनंद (राम) को पुकारते हुए उनकी प्रेममयी सेवा की प्रार्थना है। इसका जप व कीर्तन हृदय को शुद्ध करता है और कलियुग में मुक्ति का सर्वोत्तम मार्ग माना जाता है।
उत्पत्ति और कथा
Kali-Santarana Upanishad · Revealed to Brahma by Narayana · Ancient (specific date debated)
हरे कृष्ण महामंत्र कलि-संतरण उपनिषद में आता है, जहाँ ब्रह्मा इसे ऋषि नारद को कलियुग में मुक्ति की सर्वोत्तम विधि के रूप में प्रकट करते हैं। नारद पूछते हैं: "कलियुग के दोषों का उपाय क्या है?" ब्रह्मा उत्तर देते हैं कि ये सोलह नाम कलियुग के समस्त दुष्प्रभावों का नाश करते हैं और समस्त वेदों में इससे श्रेष्ठ कोई साधन नहीं। बाद में श्री चैतन्य महाप्रभु (1486 ई.) ने इस मंत्र के सार्वजनिक कीर्तन को समस्त भारत में लोकप्रिय बनाया।
✦ शास्त्रों में वर्णित
श्री चैतन्य महाप्रभु ने 16वीं शताब्दी के बंगाल में इस मंत्र की परिवर्तनकारी शक्ति प्रकट की। वे हजारों लोगों को सार्वजनिक कीर्तन में ले जाते थे, और साक्षियों ने लिखा कि महामंत्र सुनते ही कठोर अपराधी, हिंसक डाकू और घृणा से भरे लोग भी भक्ति के आँसुओं में बह जाते थे। चैतन्य चरितामृत में वर्णित है कि पूरे-पूरे नगर एक ही रात में बदल गए।
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मंत्र
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
Hare Krishna Hare Krishna Krishna Krishna Hare Hare Hare Rama Hare Rama Rama Rama Hare Hare
अर्थ:हे हरे (दिव्य शक्ति), हे कृष्ण (परम चेतना), हे राम (परम आनंद) — कृपया मुझे अपनी सेवा में लगाइए।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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हरे कृष्ण महामंत्र पाठ के लाभ
हृदय की शुद्धि — शास्त्रों में वर्णित है कि यह मंत्र दुःख का कारण बनने वाले संचित संस्कारों से हृदय को सीधे शुद्ध करता है।
दिव्य प्रेम का विकास — महामंत्र का नियमित कीर्तन धीरे-धीरे भगवान के प्रति शुद्ध प्रेम जगाता है — जो भक्ति योग की सर्वोच्च उपलब्धि है।
तत्काल शांति — एक बार का सच्चा जप भी चेतना में तुरंत परिवर्तन ला देता है — एक हल्कापन, आनंद और शांति जो स्पष्ट अनुभव होती है।
आध्यात्मिक चेतना का विकास — यह मंत्र चेतना को क्षणभंगुर देह-मन की पहचान से हटाकर शाश्वत आत्मा की पहचान की ओर ले जाता है।
सार्वभौमिक — कोई बाधा नहीं — अनेक मंत्रों के विपरीत इसके लिए न किसी दीक्षा की, न जाति की, न लिंग की कोई शर्त है। यह समस्त मानवता के लिए है।
माया का नाश — निरंतर जप धीरे-धीरे उस माया को विलीन कर देता है जो जीवात्मा को उसके दिव्य स्रोत से अलग करती है।
हरे कृष्ण महामंत्र जप विधि
जप से आरंभ करें — शांत व्यक्तिगत जप। परंपरागत साधना प्रतिदिन 16 मालाओं का जप है (108 बार = 1 माला, कुल 1,728 बार, जिसमें 1.5–2 घंटे लगते हैं)। आरंभ करने वाले 1–4 मालाओं से शुरू कर सकते हैं। स्पष्ट जपें, प्रत्येक शब्द को सुनते हुए — सुनना उतना ही महत्त्वपूर्ण है जितना जपना। फिर कीर्तन की ओर बढ़ें — सामूहिक गायन, जो ऊर्जा को कई गुना बढ़ा देता है। कोई विशेष शर्त नहीं: खड़े होकर, बैठकर, चलते हुए; प्रातः, दोपहर, रात्रि; अकेले या समूह में; माला के साथ या बिना। उत्तरदायित्व के लिए माला से मालाएँ गिनें। समय के साथ प्रतिदिन एक भी सच्ची माला परिवर्तनकारी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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