गणेश मंत्र
अन्य नाम / खोज: om gam ganapataye namaha · om gam ganpataye namah · ganesha beej mantra · ganpati beej mantra
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✦ अर्थ
गणेश मंत्र 'ॐ गं गणपतये नमः' विघ्नहर्ता भगवान गणेश को समर्पित शक्तिशाली बीज मंत्र है। यह सभी बाधाओं को दूर करता है, बुद्धि को तीक्ष्ण करता है और हर नए कार्य में सफलता तथा शुभ आरम्भ प्रदान करता है।
उत्पत्ति और कथा
Various Puranas and Tantric texts · Vedic Rishis · Ancient
गणेश मंत्र विभिन्न शास्त्रों से उद्भूत हैं। 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र गणेश को समस्त गणों के स्वामी के रूप में आमंत्रित करता है। गणेश की सदा सर्वप्रथम पूजा होती है — यह परम्परा तब आरम्भ हुई जब शिव ने घोषणा की कि गणेश की पूजा सभी देवताओं से पहले होनी चाहिए।
✦ शास्त्रों में वर्णित
शिव पुराण में, जब शिव ने गणेश को न पहचानकर उनका शीश काट दिया, तब पार्वती के शोक से समस्त ब्रह्मांड काँप उठा। शिव ने उनके शीश के स्थान पर हाथी का सिर लगाया और घोषणा की कि गणेश की पूजा सभी देवताओं में सर्वप्रथम होगी। मुद्गल पुराण में वर्णित है कि गणेश मंत्र के जप ने इतिहास भर राजाओं और ऋषियों के विघ्न दूर किए हैं।
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मंत्र
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ॐ गं गणपतये नमः
Om Gam Ganapataye Namaha
अर्थ:ॐ गं गणपतये नमः — समस्त गणों के स्वामी, विघ्नहर्ता भगवान गणेश को मैं नमस्कार करता हूँ।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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गणेश मंत्र पाठ के लाभ
बाधाओं को दूर करता है — यही इसका मुख्य उद्देश्य है। गणेश आपके मार्ग की दृश्य और अदृश्य सभी रुकावटें, आपके सामने आने से पहले ही हटा देते हैं।
नए आरम्भ को बल देता है — कोई भी नया कार्य — नौकरी, व्यवसाय, सम्बन्ध या साधना — दिव्य आशीर्वाद और शुभ गति प्राप्त करता है।
बुद्धि को तीक्ष्ण करता है — ज्ञान के देवता गणेश नियमित जप से मानसिक स्पष्टता, बुद्धि और समस्या सुलझाने की क्षमता बढ़ाते हैं।
सफलता को आकर्षित करता है — यह मंत्र आपकी ऊर्जा को सफलता की तरंग से जोड़ता है, जिससे जीवन में अवसर और शुभ परिणाम खिंचे चले आते हैं।
आध्यात्मिक नींव बनाता है — गणेश मूलाधार चक्र के रक्षक और समस्त आध्यात्मिक प्रगति के द्वार हैं — उनका मंत्र आध्यात्मिक नींव को स्थिर करता है।
कर्म की बाधाओं को मिटाता है — गहरे स्तर पर यह मंत्र उन कर्म-संस्कारों को घोलता है जो जीवन में बार-बार रुकावट लाते हैं, और भक्त को आगे बढ़ने के लिए मुक्त करता है।
गणेश मंत्र जप विधि
बुधवार गणेश का दिन है। बुधवार का सूर्योदय विशेष रूप से शक्तिशाली होता है। उपलब्ध हो तो मोदक या लड्डू अर्पित करें। गणेश की ऊर्जा को सीधे आमंत्रित करने हेतु पहले बीज मंत्र 'गं' का तीन बार जप करें। फिर माला पर 'ॐ गं गणपतये नमः' का 108 बार धीरे और स्पष्ट जप करें, 'गं' की गूँज को अपने हृदय में अनुभव करते हुए। कल्पना करें कि गणेश अपनी सूँड से आगे के मार्ग की सभी बाधाएँ हटा रहे हैं। जप से पहले या बाद में अपना संकल्प स्पष्ट रूप से कहें। किसी विशेष लक्ष्य के लिए 21 दिन लगातार 108 बार जप करें (अनुष्ठान)। किसी भी नए कार्य से पहले केवल 11 बार जप करना भी सुप्रतिष्ठित है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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