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गणेश मंत्र — Word-by-Word Meaning

गणेश मंत्र

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

Om
सार्वभौमिक नाद — सृष्टि का आदि स्पंदन
गं
Gam
गणेश का बीज (बीजाक्षर) मंत्र — इसमें उनकी पूर्ण संकेन्द्रित ऊर्जा समाहित है
गणपतये
Ganapataye
समस्त प्राणियों और गणों के स्वामी (गण = समूह/प्राणी, पति = स्वामी)
नमः
Namaha
मैं नमन करता हूँ — दिव्य के समक्ष अहंकार का विसर्जन
विघ्नहर्ता
Vighnaharta
विघ्नों के हर्ता — गणेश की मुख्य भूमिका
सिद्धिविनायक
Siddhi-Vinayaka
सिद्धि और पूर्णता के दाता
गणेश
Ganesha
गणों के स्वामी — गजमुख देवता
बीज
Beej
बीज — एक अक्षर जिसमें देवता की पूर्ण ऊर्जा समाहित है
मोदक
Modaka
मोदक — गणेश का प्रिय भोग, जीवन की मधुरता का प्रतीक
मूषिक
Mushika
मूषक — गणेश का वाहन, वश में किए गए चंचल मन का प्रतीक
लम्बोदर
Lambodara
लम्बोदर — बड़े उदर वाले, जिनके भीतर समस्त ब्रह्मांड समाया है
एकदन्त
Ekadanta
एकदन्त — एक दाँत वाले, त्याग और अहंकार के निवारण का प्रतीक
प्रणव
Pranava
प्रणव — पवित्र ओंकार; कहा जाता है गणेश का स्वरूप ही ॐ है
हेरम्ब
Heramba
हेरम्ब — दुर्बलों के रक्षक, गणेश का एक अन्य नाम
विनायक
Vinayaka
विनायक — परम नायक, जो समस्त विघ्नों को दूर करते हैं
गजानन
Gajanana
गजानन — गजमुख वाले (गज = हाथी, आनन = मुख)
शुभ
Shubha
शुभ — मांगलिक; गणेश के साथ आरंभ किया हर कार्य शुभ होता है
सिद्धि
Siddhi
सिद्धि — उपलब्धि और अलौकिक प्राप्ति
बुद्धि
Buddhi
बुद्धि — बुद्धिमत्ता और प्रज्ञा; गणेश मानसिक स्पष्टता बढ़ाते हैं
मूलाधार
Muladhara
मूलाधार — मूल चक्र; गणेश आध्यात्मिक नींव के रक्षक हैं
मंगल
Mangala
मंगल — मांगल्य; समस्त अनुष्ठानों के आरंभ में गणेश का आह्वान होता है
प्रथम पूज्य
Prathama Pujya
प्रथम पूज्य — सर्वप्रथम पूजे जाने वाले; गणेश सदा अन्य सभी देवताओं से पूर्व पूजित होते हैं
विघ्न
Vighna
विघ्न — बाधा, जिसे गणेश भक्त के मार्ग से दूर करते हैं
अनुष्ठान
Anushthana
अनुष्ठान — समर्पित आध्यात्मिक साधना — परंपरागत रूप से 21 दिन तक 108 जप
माला
Mala
माला — 108 मनकों की जपमाला, आवृत्तियाँ गिनने के लिए
चतुर्थी
Chaturthi
चतुर्थी — प्रत्येक चान्द्र पक्ष का चौथा दिन — गणेश को समर्पित
कर्म
Karma
कर्म — संचित कर्म; गणेश कर्म-बाधाओं को दूर करते हैं
पार्वतीनन्दन
Parvati-Nandana
पार्वतीनन्दन — पार्वती के पुत्र, गणेश की दिव्य माता
शिवसुत
Shiva-Suta
शिवसुत — शिव के पुत्र, गणेश के दिव्य पिता
दुर्मुख
Durmukha
दुर्मुख — गणेश के स्वरूपों में से एक, उग्र रक्षण का प्रतीक

Complete Translation

ॐ गं गणपतये नमः — समस्त गणों के स्वामी, विघ्नहर्ता भगवान गणेश को मैं नमस्कार करता हूँ।

Origin & History

Source: Various Puranas and Tantric texts

Author: Vedic Rishis

Period: Ancient

गणेश मंत्र विभिन्न शास्त्रों से उद्भूत हैं। 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र गणेश को समस्त गणों के स्वामी के रूप में आमंत्रित करता है। गणेश की सदा सर्वप्रथम पूजा होती है — यह परम्परा तब आरम्भ हुई जब शिव ने घोषणा की कि गणेश की पूजा सभी देवताओं से पहले होनी चाहिए।

Frequently Asked Questions

ॐ गं गणपतये नमः का अर्थ क्या है?
'ॐ' सार्वभौमिक नाद है; 'गं' गणेश का बीज मंत्र है जिसमें उनकी पूर्ण ऊर्जा समाई है; 'गणपतये' का अर्थ है समस्त गणों के स्वामी; 'नमः' का अर्थ है मैं नमन करता हूँ — अहंकार को दिव्यता के समक्ष विलीन करते हुए। एक साथ: 'समस्त के स्वामी परम गणेश को मैं नमन करता हूँ।' इसका जप करने से आप गणेश की ऊर्जा को अपना मार्ग प्रशस्त करने और सफलता लाने के लिए आमंत्रित करते हैं।
गणेश मंत्र का जप कब करना चाहिए?
बुधवार गणेश पूजा के लिए सबसे शुभ दिन है, विशेषकर चतुर्थी (प्रत्येक पक्ष का चौथा दिन)। गणेश चतुर्थी उन्हें समर्पित सबसे बड़ा पर्व है। फिर भी किसी भी दिन कोई नया कार्य, यात्रा या परियोजना इस मंत्र से आरम्भ करना अत्यंत लाभकारी है।
गणेश मंत्र का जप कितनी बार करना चाहिए?
माला पर प्रतिदिन 108 बार जप करना पारम्परिक विधि है। किसी विशेष लक्ष्य या नए आरम्भ के लिए 21 दिनों तक लगातार 108 बार जप (अनुष्ठान) अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। किसी भी नए कार्य से पहले केवल 11 बार जप करना भी एक प्रतिष्ठित परम्परा है।

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