भगवान विष्णु Mantras
The preserver of the universe, protector of dharma.
Lord Vishnu — Narayana, the all-pervading preserver of the universe — protects dharma and descends in age after age through his ten avatars (Dashavatar) to restore righteousness. Chanting Vishnu mantras like "Om Namo Bhagavate Vasudevaya" and the Vishnu Sahasranama bestows peace, protection, prosperity and liberation. Find his complete 1000 names, chalisa and stotras below with Sanskrit, transliteration and meaning.
Best day to worship: Thursday · 136 mantras available
The Legend of Lord Vishnu
The demon-king Hiranyakashipu, by long and terrible penance, won a boon that he could be slain by neither man nor beast, neither by day nor by night, neither indoors nor out, neither on the earth nor in the sky, and by no weapon. Believing himself immortal, he forbade all worship of Vishnu and demanded to be worshipped as god himself. Yet his own young son, Prahlad, was a pure and fearless devotee of Lord Vishnu, and no threat or torment could shake his faith.
In fury, Hiranyakashipu pointed to a stone pillar of his hall and roared, "Is your Vishnu in this pillar too?" Prahlad answered quietly, "He is everywhere." The king struck the pillar — and from it burst forth Lord Vishnu in his fourth avatar, Narasimha: half-man and half-lion, neither wholly man nor beast.
At dusk, which is neither day nor night, Narasimha seized the demon; he carried him to the threshold of the palace, which is neither indoors nor out; he laid him across his lap, which is neither earth nor sky; and with his claws, which are no weapon, he ended the tyrant — fulfilling the boon to the letter. Then, his terrible wrath calmed by the touch of the child Prahlad, the Lord blessed his devotee. So Narasimha shows that the Lord will bend every law of nature to protect those who love him, and that no power on earth can stand against sincere devotion.
भगवान विष्णु Mantras, Chalisa & Stotras
अच्युतानन्तगोविन्द
अच्युतानन्तगोविन्द नामोच्चारणभेषजात्।
पढ़ें और जपें →अच्युताष्टकम्
अच्युताच्युत हरे परमात्मन् राम कृष्ण पुरुषोत्तम विष्णो ।
पढ़ें और जपें →अगस्त्यं कुम्भकर्णं च — भोजनोत्तर (पाचन) मन्त्र
अगस्त्यं कुम्भकर्णं च शनिं च बडबानलम् ।
पढ़ें और जपें →अघमर्षण सूक्तम्
ऋतं च सत्यं चाभीद्धात्तपसोऽध्यजायत ।
पढ़ें और जपें →நாச்சியார் திருமொழி — வாரணம் ஆயிரம்
வாரணம் ஆயிரம் சூழ வலம்செய்து
पढ़ें और जपें →నానాటి బతుకు నాటకము
నానాటి బతుకు నాటకము
पढ़ें और जपें →अपराधसहस्राणि
अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।
पढ़ें और जपें →अपवित्रः पवित्रो वा
अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
पढ़ें और जपें →असतो मा सद्गमय
ॐ असतो मा सद्गमय ।
पढ़ें और जपें →अष्टभुजाष्टकम्
गजेन्द्ररक्षात्वरितं भवन्तं ग्राहैरिवाहं विषयैर्विकृष्टः ।
पढ़ें और जपें →श्री भगवद्ध्यानसोपानम्
अन्तर्ज्योतिः किमपि यमिनामञ्जनं योगदृष्टे-
पढ़ें और जपें →भगवद्गीता किञ्चिदधीता
भगवद्गीता किञ्चिदधीता गङ्गाजल लवकणिका पीता ।
पढ़ें और जपें →भज गोविन्दम्
भज गोविन्दं भज गोविन्दं गोविन्दं भज मूढमते ।
पढ़ें और जपें →ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी — करदर्शनम्
ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी
पढ़ें और जपें →బ్రహ్మం ఒక్కటే
బ్రహ్మ మొక్కటే పరబ్రహ్మ మొక్కటే
पढ़ें और जपें →श्री बृहस्पति देव आरती
ॐ जय बृहस्पति देवा ।
पढ़ें और जपें →दशावतार स्तोत्रम्
नमोऽस्तु नारायणमन्दिराय नमोऽस्तु हारायणकन्धराय ।
पढ़ें और जपें →दीपज्योतिः परब्रह्म — दीप प्रज्वलन मन्त्र
दीपज्योतिः परब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः ।
पढ़ें और जपें →धनतेरस धन्वन्तरि मंत्र एवं गायत्री
ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वन्तरये
पढ़ें और जपें →धन्वन्तरि अष्टोत्तर शतनामावली
ॐ धन्वन्तरये नमः
पढ़ें और जपें →धन्वंतरि उपचार मंत्र (महामंत्र)
ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वन्तरये।
पढ़ें और जपें →धन्वंतरि मंत्र
ॐ नमो भगवते धन्वन्तरये ।
पढ़ें और जपें →ध्रुव स्तुति
योऽन्तः प्रविश्य मम वाचमिमां प्रसुप्तां
पढ़ें और जपें →दिनयामिन्यौ सायं प्रातः
दिनयामिन्यौ सायं प्रातः शिशिरवसन्तौ पुनरायातः ।
पढ़ें और जपें →द्वादश स्तोत्र
वन्दे वन्द्यं सदानन्दं वासुदेवं निरञ्जनम्।
पढ़ें और जपें →गजेन्द्रमोक्ष स्तोत्रम्
श्रीशुक उवाच -
पढ़ें और जपें →गरुड गमन तव (विष्णु स्तोत्रम्)
गरुडगमन तव चरणकमलमिह
पढ़ें और जपें →गरुड़ गायत्री मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे सुवर्णपक्षाय धीमहि ।
पढ़ें और जपें →घालीन लोटांगण
घालीन लोटांगण वंदीन चरण ।
पढ़ें और जपें →गोविंद नामालु
श्री श्रीनिवासा गोविंदा
पढ़ें और जपें →गोविन्दं भज मूढमते
भज गोविन्दं भज गोविन्दं गोविन्दं भज मूढमते ।
पढ़ें और जपें →हरि स्तोत्रम्
जगज्जालपालं चलत्कण्ठमालं
पढ़ें और जपें →हरि वायु स्तुति
पान्त्वस्मान् पुरुहूत-वैरि-बलवन्-मातङ्ग-माद्यद्-घटा-
पढ़ें और जपें →हरिर्दाता हरिर्भोक्ता
हरिर्दाता हरिर्भोक्ता हरिरन्नं प्रजापतिः ।
पढ़ें और जपें →हयग्रीव अष्टोत्तर शतनामावली
ॐ हयग्रीवाय नमः
पढ़ें और जपें →हयग्रीव स्तोत्रम् (हयग्रीव सम्पदा स्तोत्रम्)
ज्ञानानन्दमयं देवं निर्मलस्फटिकाकृतिम् ।
पढ़ें और जपें →हेचि दान देगा देवा
हेचि दान देगा देवा । तुझा विसर न व्हावा ॥
पढ़ें और जपें →हिरण्यगर्भ सूक्तम्
हिरण्यगर्भः समवर्तताग्रे भूतस्य जातः पतिरेक आसीत् ।
पढ़ें और जपें →जगन्नाथ स्तोत्रम् (नीलाचलनिवासाय)
नीलाचलनिवासाय नित्याय परमात्मने ।
पढ़ें और जपें →जगन्नाथाष्टकम्
कदाचित्कालिन्दीतटविपिनसङ्गीतकरवो कवरो
पढ़ें और जपें →जन्माद्यस्य यतः
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
पढ़ें और जपें →का ते कान्ता कस्ते पुत्रः
का ते कान्ता कस्ते पुत्रः संसारोऽयमतीव विचित्रः ।
पढ़ें और जपें →कामासिकाष्टकम्
श्रुतीनामुत्तरं भागं वेगवत्याश्च दक्षिणम् ।
पढ़ें और जपें →कायेन वाचा मनसेन्द्रियैर्वा
कायेन वाचा मनसेन्द्रियैर्वा
पढ़ें और जपें →किमेकं दैवतं लोके
युधिष्ठिर उवाच —
पढ़ें और जपें →कस्त्वं कोऽहं कुत आयातः
कस्त्वं कोऽहं कुत आयातः का मे जननी को मे तातः ।
पढ़ें और जपें →क्षीरोदन्वत्प्रदेशे (विष्णु ध्यानम्)
क्षीरोदन्वत्प्रदेशे शुचिमणिविलसत्सैकतेर्मौक्तिकानां
पढ़ें और जपें →कूर्म स्तोत्रम्
नमाम ते देव पदारविन्दं प्रपन्नतापोपशमातपत्रम् ।
पढ़ें और जपें →लक्ष्मीनृसिंह अष्टोत्तर शतनामावली
ॐ श्रीनृसिंहाय नमः
पढ़ें और जपें →लक्ष्मीनृसिंह करावलम्ब स्तोत्र
श्रीमत्पयोनिधिनिकेतन चक्रपाणे
पढ़ें और जपें →लक्ष्मीनृसिंह पञ्चरत्नम्
त्वत्प्रभुजीवप्रियमिच्छसि चेन्
पढ़ें और जपें →मा कुरु धन यौवन गर्वम्
मा कुरु धन यौवन गर्वं हरति निमेषात्कालः सर्वम् ।
पढ़ें और जपें →मङ्गलं भगवान् विष्णुः
मङ्गलं भगवान् विष्णुः मङ्गलं गरुडध्वजः ।
पढ़ें और जपें →मुकुन्दमाला स्तोत्रम्
वन्दे मुकुन्दमरविन्ददलायताक्षं
पढ़ें और जपें →नमस्ते नरसिंहाय (नृसिंह प्रणाम)
नमस्ते नरसिंहाय प्रह्लादाह्लाददायिने ।
पढ़ें और जपें →नमो ब्रह्मण्यदेवाय
नमो ब्रह्मण्यदेवाय गोब्राह्मणहिताय च ।
पढ़ें और जपें →नृसिंह गायत्री मंत्र
ॐ वज्रनखाय विद्महे तीक्ष्णदंष्ट्राय धीमहि ।
पढ़ें और जपें →नृसिंह कवचम्
नृसिंहकवचं वक्ष्ये प्रह्लादेनोदितं पुरा ।
पढ़ें और जपें →नृसिंह नख स्तुतिः
पान्त्वस्मान् पुरुहूतवैरिबलवन्मातङ्गमाद्यद्घटा-
पढ़ें और जपें →नारायण सूक्तम्
ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै।
पढ़ें और जपें →नारायणं नमस्कृत्य
नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम् ।
पढ़ें और जपें →नासदीय सूक्तम्
नासदासीन्नो सदासीत्तदानीं नासीद्रजो नो व्योमा परो यत्।
पढ़ें और जपें →नास्था धर्मे न वसुनिचये
नास्था धर्मे न वसुनिचये नैव कामोपभोगे
पढ़ें और जपें →न्यासदशकम्
अहं मद्रक्षणभरो मद्रक्षणफलं तथा ।
पढ़ें और जपें →ॐ जय जगदीश हरे आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
पढ़ें और जपें →ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
पढ़ें और जपें →ॐ नमो नारायणाय (अष्टाक्षर मंत्र)
ॐ नमो नारायणाय॥
पढ़ें और जपें →ॐ सह नाववतु
ॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु ।
पढ़ें और जपें →सुदर्शन मंत्र (ॐ सहस्रार हुं फट्)
ॐ सहस्रार हुं फट्॥
पढ़ें और जपें →विश्वं विष्णुर्वषट्कारः
हरिः ॐ ।
पढ़ें और जपें →श्री अनन्तपद्मनाभ मङ्गल स्तोत्रम्
श्रियःकान्ताय कल्याणनिधये निधयेऽर्थिनाम् ।
पढ़ें और जपें →विष्णु पञ्चायुध स्तोत्रम्
स्फुरत्सहस्रारशिखातितीव्रं
पढ़ें और जपें →पाण्डुरङ्ग (विठ्ठल) अष्टोत्तर शतनामावली
ॐ क्लीम् नमः
पढ़ें और जपें →पाण्डुरङ्गाष्टकम्
ॐ श्री ।
पढ़ें और जपें →परमार्थस्तुतिः
श्रीमद्गृध्रसरस्तीरपारिजातमुपास्महे ।
पढ़ें और जपें →परशुराम अष्टकम्
शुभ्रदेहं सदा क्रोधरक्तेक्षणम्
पढ़ें और जपें →पसायदान (संत ज्ञानेश्वर)
आता विश्वात्मके देवे। येणे वाग्यज्ञे तोषावे॥
पढ़ें और जपें →दशावतार स्तोत्रम् — प्रलयपयोधिजले (जयदेव)
प्रलयपयोधिजले धृतवानसि वेदं विहितवहित्रचरित्रमखेदम् ।
पढ़ें और जपें →संकल्प मन्त्र
ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः।
पढ़ें और जपें →पुनरपि जननं पुनरपि मरणम्
पुनरपि जननं पुनरपि मरणं पुनरपि जननीजठरे शयनम् ।
पढ़ें और जपें →पुरुष सूक्तम्
हरिः ॐ सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात् ।
पढ़ें और जपें →रक्षाबन्धन मंत्र (येन बद्धो बली राजा)
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
पढ़ें और जपें →राम अष्टोत्तर शतनामावली
ॐ श्रीमत्सूर्यकुलाम्भोधिवर्धनीयकलानिधये नमः
पढ़ें और जपें →रङ्गनाथाष्टकम्
आनन्दरूपे निजबोधरूपे ब्रह्मस्वरूपे श्रुतिमूर्तिरूपे ।
पढ़ें और जपें →रङ्गनाथ अष्टोत्तर शतनामावली
ॐ श्रीरङ्गशायिने नमः
पढ़ें और जपें →स वै पुंसां परो धर्मो
स वै पुंसां परो धर्मो यतो भक्तिरधोक्षजे।
पढ़ें और जपें →सान्द्रानन्दावबोधात्मकम् (नारायणीयम् आरम्भ)
सान्द्रानन्दावबोधात्मकमनुपमितं कालदेशावधिभ्यां
पढ़ें और जपें →सप्तपदी मन्त्र
ॐ एकमिषे विष्णुस्त्वान्वेतु।
पढ़ें और जपें →सर्वे भवन्तु सुखिनः
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ।
पढ़ें और जपें →सशङ्खचक्रं सकिरीटकुण्डलम् (विष्णु ध्यानम्)
सशङ्खचक्रं सकिरीटकुण्डलं
पढ़ें और जपें →सत्सङ्गत्वे निस्सङ्गत्वम्
सत्सङ्गत्वे निस्सङ्गत्वं निस्सङ्गत्वे निर्मोहत्वम् ।
पढ़ें और जपें →श्री सत्यनारायण जी की आरती
जय लक्ष्मीरमणा, स्वामी जय लक्ष्मीरमणा ।
पढ़ें और जपें →सत्यनारायण ध्यान मंत्र (सत्यनारायणं देवं वन्दे)
सत्यनारायणं देवं वन्देऽहं कामदं प्रभुम्।
पढ़ें और जपें →शं नो मित्रः शं वरुणः
ॐ शं नो मित्रः शं वरुणः। शं नो भवत्वर्यमा।
पढ़ें और जपें →शान्ताकारं भुजगशयनं
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
पढ़ें और जपें →श्री राघवेन्द्र स्तोत्र (पूज्याय राघवेन्द्राय)
ॐ श्री राघवेन्द्राय नमः ॥
पढ़ें और जपें →सुदर्शनाष्टकम्
प्रतिभटश्रेणि भीषण वरगुणस्तोम भूषण
पढ़ें और जपें →सुंदर ते ध्यान
सुंदर ते ध्यान उभे विटेवरी ।
पढ़ें और जपें →स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः
स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।
पढ़ें और जपें →तच्छं योरावृणीमहे
ॐ तच्छं योरावृणीमहे। गातुं यज्ञाय। गातुं यज्ञपतये।
पढ़ें और जपें →திருப்பல்லாண்டு
பல்லாண்டு பல்லாண்டு பல்லாயிரத்தாண்டு
पढ़ें और जपें →திருக்குறள் — கடவுள் வாழ்த்து
அகர முதல எழுத்தெல்லாம் ஆதி
पढ़ें और जपें →तुलसी नमस्तुभ्यम्
तुलसि श्रीसखि शुभे पापहारिणि पुण्यदे।
पढ़ें और जपें →श्री तुलसी आरती
मैया जय तुलसी माता ।
पढ़ें और जपें →त्वदीयं वस्तु गोविन्द — समर्पण मन्त्र
त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये ।
पढ़ें और जपें →त्वमेव माता च पिता त्वमेव
त्वमेव माता च पिता त्वमेव ।
पढ़ें और जपें →त्वमेव माता च पिता त्वमेव
त्वमेव माता च पिता त्वमेव
पढ़ें और जपें →नृसिंह मंत्र (उग्रं वीरं महाविष्णुं)
उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्।
पढ़ें और जपें →वैराग्यपञ्चकम्
क्षोणीकोणशतांशपालनकलद्दुर्वारगर्वानल-
पढ़ें और जपें →वैष्णव जन तो
वैष्णव जन तो तेने कहिए, जे पीड़ पराई जाणे रे।
पढ़ें और जपें →वराह स्तोत्रम्
चिदानन्दघनं शुद्धं विश्वमङ्गलकारकम् ।
पढ़ें और जपें →वास्तु शान्ति मन्त्र (वास्तोष्पते)
वास्तोष्पते प्रति जानीह्यस्मान्त्स्वावेशो अनमीवो भवा नः।
पढ़ें और जपें →वासुदेवाश्रयो मर्त्यः (विष्णु सहस्रनाम फलश्रुति)
दुर्गाण्यतितरत्याशु पुरुषः पुरुषोत्तमम् ।
पढ़ें और जपें →श्री वातपुरनाथाष्टकम्
कुन्दसुमवृन्दसममन्दहसितास्यं
पढ़ें और जपें →वेङ्कटेश अष्टकम्
श्रीवेङ्कटेशपदपङ्कज धूलिपङ्क्तिः
पढ़ें और जपें →श्री वेङ्कटेश करावलम्ब स्तोत्रम्
श्रीशेषशैलसुनिकेतन दिव्यमूर्ते
पढ़ें और जपें →वेङ्कटेश्वर अष्टोत्तर शतनामावली
ॐ ओंकारपरमर्थाय नमः
पढ़ें और जपें →श्री वेङ्कटेश मङ्गलाशासनम्
श्रियः कान्ताय कल्याणनिधये निधयेऽर्थिनाम् ।
पढ़ें और जपें →श्री वेङ्कटेश प्रपत्तिः
ईशानां जगतोऽस्य वेङ्कटपतेर्विष्णोः परां प्रेयसीं
पढ़ें और जपें →श्री वेङ्कटेश्वर स्तोत्रम् (कमलाकुचचूचुक)
कमलाकुचचूचुक कुङ्कुमतो
पढ़ें और जपें →वेंकटेश्वर सुप्रभातम्
कौसल्या सुप्रजा राम पूर्वासंध्या प्रवर्तते ।
पढ़ें और जपें →विष्णु अष्टोत्तर शतनामावली
ॐ हृषीकेशाय नमः
पढ़ें और जपें →विष्णु भुजङ्गप्रयात स्तोत्रम्
चिदंशं विभुं निर्मलं निर्विकल्पं
पढ़ें और जपें →विष्णु चालीसा
विष्णु सुनिए विनय, सेवक की चितलाय।
पढ़ें और जपें →विष्णु गायत्री मंत्र
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि ।
पढ़ें और जपें →विष्णु मंत्र
ॐ नमो नारायणाय ॥
पढ़ें और जपें →विष्णु सहस्रनाम
शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम् ।
पढ़ें और जपें →विष्णु षट्पदी
अविनयमपनय विष्णो दमय मनः शमय विषयमृगतृष्णाम् ।
पढ़ें और जपें →विष्णु षोडश नाम स्तोत्रम्
औषधे चिन्तयेद्विष्णुं
पढ़ें और जपें →विष्णु सूक्तम्
ॐ विष्णोर्नु कं वीर्याणि प्र वोचं यः पार्थिवानि विममे रजांसि।
पढ़ें और जपें →व्यास वन्दना (व्यासाय विष्णुरूपाय)
व्यासाय विष्णुरूपाय व्यासरूपाय विष्णवे।
पढ़ें और जपें →य इदं शृणुयान्नित्यम् (विष्णु सहस्रनाम फलश्रुति)
य इदं शृणुयान्नित्यं यश्चापि परिकीर्तयेत् ।
पढ़ें और जपें →यं ब्रह्मा वरुणेन्द्ररुद्रमरुतः — विष्णु ध्यान श्लोक
यं ब्रह्मा वरुणेन्द्ररुद्रमरुतः स्तुन्वन्ति दिव्यैः स्तवै-
पढ़ें और जपें →यस्य स्मृत्या च नामोक्त्या
यस्य स्मृत्या च नामोक्त्या तपोयज्ञक्रियादिषु ।
पढ़ें और जपें →येई हो विठ्ठले
येई हो विठ्ठले माझे माउली ये ।
पढ़ें और जपें →युगे अठ्ठावीस (पांडुरंग आरती)
युगे अठ्ठावीस विटेवरी उभा ।
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