रङ्गनाथाष्टकम्
अन्य नाम / खोज: anandarupe nijabodharupe brahmasvarupe shrutimurtirupe · ranganatha ashtakam lyrics
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✦ अर्थ
रङ्गनाथाष्टकम् आदि शंकराचार्य द्वारा रचित आठ श्लोकों की स्तुति है, जो श्रीरंगम में शेषनाग पर शयन करते भगवान विष्णु (रङ्गनाथ) को समर्पित है। यह कावेरी के महान द्वीप-मंदिर के स्वामी को वंदन करती है। श्रद्धा से इसका पाठ भगवान की कृपा, आशीर्वाद और रक्षा प्रदान करता है।
उत्पत्ति और कथा
Ascribed to Adi Shankaracharya · Adi Shankaracharya · Classical
रङ्गनाथाष्टकम् पारम्परिक रूप से आदि शंकराचार्य को श्रेय दिया जाता है। रङ्गनाथ — श्रीरंगम में शेषनाग पर शयन करते भगवान विष्णु — की यह आठ श्लोकों की स्तुति, आदि शंकराचार्य रचित, जो कावेरी के महान द्वीप-मंदिर के स्वामी को वंदन करती है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
कहा जाता है कि सच्चे और भक्तिपूर्ण हृदय से रङ्गनाथाष्टकम् का पाठ करना भगवान की कृपा के निकट पहुँचना है, जो प्रेमपूर्वक उन्हें पुकारने वालों को कभी नहीं त्यागते।
मंत्र
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आनन्दरूपे निजबोधरूपे ब्रह्मस्वरूपे श्रुतिमूर्तिरूपे । शशाङ्करूपे रमणीयरूपे श्रीरङ्गरूपे रमतां मनो मे ॥ १॥ कावेरितीरे करुणाविलोले मन्दारमूले धृतचारुचेले । दैत्यान्तकालेऽखिललोकलीले श्रीरङ्गलीले रमतां मनो मे ॥ २॥ लक्ष्मीनिवासे जगतां निवासे हृत्पद्मवासे रविबिम्बवासे । कृपानिवासे गुणवृन्दवासे श्रीरङ्गवासे रमतां मनो मे ॥ ३॥ ब्रह्मादिवन्द्ये जगदेकवन्द्ये मुकुन्दवन्द्ये सुरनाथवन्द्ये । व्यासादिवन्द्ये सनकादिवन्द्ये श्रीरङ्गवन्द्ये रमतां मनो मे ॥ ४॥ ब्रह्माधिराजे गरुडाधिराजे वैकुण्ठराजे सुरराजराजे । त्रैलोक्यराजेऽखिललोकराजे श्रीरङ्गराजे रमतां मनो मे ॥ ५॥ अमोघमुद्रे परिपूर्णनिद्रे श्रीयोगनिद्रे ससमुद्रनिद्रे । श्रितैकभद्रे जगदेकनिद्रे श्रीरङ्गभद्रे रमतां मनो मे ॥ ६॥ स चित्रशायी भुजगेन्द्रशायी नन्दाङ्कशायी कमलाङ्कशायी । क्षीराब्धिशायी वटपत्रशायी श्रीरङ्गशायी रमतां मनो मे ॥ ७॥ इदं हि रङ्गं त्यजतामिहाङ्गम् पुनर्नचाङ्कं यदि चाङ्गमेति । पाणौ रथाङ्गं चरणेम्बु गाङ्गम् याने विहङ्गं शयने भुजङ्गम् ॥ ८॥ रङ्गनाथाष्टकं पुण्यम् प्रातरुत्थाय यः पठेत् । सर्वान् कामानवाप्नोति रङ्गिसायुज्यमाप्नुयात् ॥ ॥ इति श्रीमच्छङ्कराचार्यविरचितं श्रीरङ्गनाथाष्टकं सम्पूर्णम्॥
ānandarūpe nijabodharūpe brahmasvarūpe śrutimūrtirūpe | śaśāṅkarūpe ramaṇīyarūpe śrīraṅgarūpe ramatāṃ mano me || 1|| kāveritīre karuṇāvilole mandāramūle dhṛtacārucele | daityāntakāle'khilalokalīle śrīraṅgalīle ramatāṃ mano me || 2|| lakṣmīnivāse jagatāṃ nivāse hṛtpadmavāse ravibimbavāse | kṛpānivāse guṇavṛndavāse śrīraṅgavāse ramatāṃ mano me || 3|| brahmādivandye jagadekavandye mukundavandye suranāthavandye | vyāsādivandye sanakādivandye śrīraṅgavandye ramatāṃ mano me || 4|| brahmādhirāje garuḍādhirāje vaikuṇṭharāje surarājarāje | trailokyarāje'khilalokarāje śrīraṅgarāje ramatāṃ mano me || 5|| amoghamudre paripūrṇanidre śrīyoganidre sasamudranidre | śritaikabhadre jagadekanidre śrīraṅgabhadre ramatāṃ mano me || 6|| sa citraśāyī bhujagendraśāyī nandāṅkaśāyī kamalāṅkaśāyī | kṣīrābdhiśāyī vaṭapatraśāyī śrīraṅgaśāyī ramatāṃ mano me || 7|| idaṃ hi raṅgaṃ tyajatāmihāṅgam punarnacāṅkaṃ yadi cāṅgameti | pāṇau rathāṅgaṃ caraṇembu gāṅgam yāne vihaṅgaṃ śayane bhujaṅgam || 8|| raṅganāthāṣṭakaṃ puṇyam prātarutthāya yaḥ paṭhet | sarvān kāmānavāpnoti raṅgisāyujyamāpnuyāt || || iti śrīmacchaṅkarācāryaviracitaṃ śrīraṅganāthāṣṭakaṃ sampūrṇam||
अर्थ:रङ्गनाथ — श्रीरंगम में शेषनाग पर शयन करते भगवान विष्णु — की आठ श्लोकों की स्तुति, आदि शंकराचार्य रचित, जो कावेरी के महान द्वीप-मंदिर के स्वामी को वंदन करती है।
रङ्गनाथाष्टकम् पाठ के लाभ
रङ्गनाथाष्टकम् का पाठ भगवान की कृपा, आशीर्वाद और रक्षा प्रदान करने वाला माना जाता है।
यह भक्ति को बढ़ाता है, मन को शांत करता है और हृदय को भगवान के स्मरण में स्थिर करता है।
गुरुवार और एकादशी को तथा एकादशी एवं विष्णु पर्वों में इसका पाठ सर्वाधिक शुभ होता है।
यह एक छोटा, मधुर स्तोत्र है जिसे कोई भी सीखकर प्रतिदिन श्रद्धा से पाठ कर सकता है।
रङ्गनाथाष्टकम् जप विधि
स्नान करके देवता की मूर्ति के सम्मुख पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें। दीपक जलाएँ और रङ्गनाथाष्टकम् का धीरे-धीरे भक्तिपूर्वक पाठ करें। इसे प्रतिदिन, अथवा विशेष रूप से एकादशी और विष्णु पर्वों में पढ़ा जा सकता है। अंत में कृपा और रक्षा हेतु प्रार्थना करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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