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रङ्गनाथाष्टकम् — Word-by-Word Meaning

रङ्गनाथाष्टकम्

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

Complete Translation

रङ्गनाथ — श्रीरंगम में शेषनाग पर शयन करते भगवान विष्णु — की आठ श्लोकों की स्तुति, आदि शंकराचार्य रचित, जो कावेरी के महान द्वीप-मंदिर के स्वामी को वंदन करती है।

Origin & History

Source: Ascribed to Adi Shankaracharya

Author: Adi Shankaracharya

Period: Classical

रङ्गनाथाष्टकम् पारम्परिक रूप से आदि शंकराचार्य को श्रेय दिया जाता है। रङ्गनाथ — श्रीरंगम में शेषनाग पर शयन करते भगवान विष्णु — की यह आठ श्लोकों की स्तुति, आदि शंकराचार्य रचित, जो कावेरी के महान द्वीप-मंदिर के स्वामी को वंदन करती है।

Frequently Asked Questions

रङ्गनाथाष्टकम् क्या है?
रङ्गनाथ — श्रीरंगम में शेषनाग पर शयन करते भगवान विष्णु — की आठ श्लोकों की स्तुति, आदि शंकराचार्य रचित, जो कावेरी के महान द्वीप-मंदिर के स्वामी को वंदन करती है।
रङ्गनाथाष्टकम् की रचना किसने की और इसका पाठ कब किया जाता है?
यह आदि शंकराचार्य को श्रेय दिया जाता है। इसका पाठ प्रातः या सायंकाल श्रद्धा से किया जाता है, और विशेष रूप से गुरुवार और एकादशी को तथा एकादशी एवं विष्णु पर्वों में।

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