विष्णु चालीसा
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✦ अर्थ
विष्णु चालीसा भगवान विष्णु, जगत के पालनहार, की चालीस छंदों वाली हिंदी स्तुति है। इसमें मत्स्य, कूर्म, वराह, राम सहित उनके दशावतारों का स्मरण है। नित्य पाठ से विघ्न, शोक और भय दूर होकर शांति, समृद्धि और रक्षा प्राप्त होती है।
उत्पत्ति और कथा
Traditional Hindi devotional hymn · Traditional · Medieval / modern devotional era
विष्णु चालीसा हनुमान चालीसा जैसी प्रिय 'चालीसा' परम्परा की चालीस छंदों वाली हिंदी स्तुति है। यह जगत के पालनहार भगवान विष्णु की वंदना करती है। इसमें स्मरण है कि वे युग-युग में अनेक रूप धारण कर पृथ्वी का भार हरने, दुष्टों का संहार करने और ध्रुव, प्रह्लाद, अजामिल तथा गणिका जैसे भक्तों के उद्धार के लिए अवतरित होते हैं।
✦ शास्त्रों में वर्णित
चालीसा स्वयं विष्णु के अनगिनत उद्धारों का स्मरण कराती है—वराह रूप में पृथ्वी को जलमग्नता से उद्धारना, बालक प्रह्लाद को असुर पिता से बचाना, और अंत समय केवल 'नारायण' नाम पुकारने वाले पापी अजामिल का भी उद्धार। इसका अंतिम वचन सरल और मधुर है—जो भी इस प्रार्थना को श्रद्धा से पढ़े या सुने, वह सुख पाता है।
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विष्णु सुनिए विनय, सेवक की चितलाय। कीरत कुछ वर्णन करूँ, दीजै ज्ञान बताय॥
Vishnu sunie vinaya, sevaka ki chitalaya Kirata kuchha varnana karun, dijai jnana bataya
अर्थ:हे विष्णु, मेरी विनती सुनिए और अपने सेवक की ओर मन लगाइए; मैं आपकी महिमा का कुछ अंश गाऊँगा — मुझे, मैं प्रार्थना करता हूँ, ऐसा करने की बुद्धि दीजिए।
नमो विष्णु भगवान खरारी। कष्ट नशावन अखिल बिहारी॥
Namo vishnu bhagavana kharari Kashta nashavana akhila bihari
अर्थ:भगवान विष्णु को नमस्कार, खर (असुरों के शत्रु) के संहारक, कष्टों के नाशक, जो समस्त लोकों में व्याप्त होकर विहार करते हैं।
प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी। त्रिभुवन फैल रही उजियारी॥
Prabala jagata mem shakti tumhari Tribhuvana phaila rahi ujiyari
अर्थ:समस्त संसार में आपकी शक्ति प्रबल है; आपका तेज तीनों लोकों में फैल रहा है।
सुन्दर रूप मनोहर सूरत। सरल स्वभाव मोहनी मूरत॥
Sundara rupa manohara surata Sarala svabhava mohani murata
अर्थ:सुन्दर है आपका रूप और मनोहर आपका मुख; सरल आपका स्वभाव और मोहनी आपकी मूरत।
तन पर पीताम्बर अति सोहत। बैजन्ती माला मन मोहत॥
Tana para pitambara ati sohata Baijanti mala mana mohata
अर्थ:आपके शरीर पर पीताम्बर अति शोभित होता है, और बैजन्ती माला मन को मोह लेती है।
शंख चक्र कर गदा बिराजे। देखत दैत्य असुर दल भाजे॥
Shamkha chakra kara gada biraje Dekhata daitya asura dala bhaje
अर्थ:शंख, चक्र और गदा आपके हाथों में सुशोभित हैं; देखते ही असुरों के दल भाग जाते हैं।
सत्य धर्म मद लोभ न गाजे। काम क्रोध मद लोभ न छाजे॥
Satya dharma mada lobha na gaje Kama krodha mada lobha na chhaje
अर्थ:जहाँ सत्य और धर्म हैं, वहाँ मद और लोभ गरज नहीं सकते; काम, क्रोध, मद और लोभ को स्थान नहीं मिलता।
सन्तभक्त सज्जन मनरंजन। दनुज असुर दुष्टन दल गंजन॥
Santabhakta sajjana manaramjana Danuja asura dushtana dala gamjana
अर्थ:आप सन्त, भक्त और सज्जनों के मन को आनन्दित करते हैं, और दानव, असुर तथा दुष्टों के दल का संहार करते हैं।
सुख उपजाय कष्ट सब भंजन। दोष मिटाय करत जन सज्जन॥
Sukha upajaya kashta saba bhamjana Dosha mitaya karata jana sajjana
अर्थ:आप सुख उपजाते और हर कष्ट का नाश करते हैं; दोष मिटाकर जनों को सज्जन बनाते हैं।
पाप काट भव सिन्धु उतारण। कष्ट नाशकर भक्त उबारण॥
Papa kata bhava sindhu utarana Kashta nashakara bhakta ubarana
अर्थ:आप पाप काटकर जीवों को भवसागर से पार उतारते हैं; कष्ट नाशकर अपने भक्तों को उबारते हैं।
करत अनेक रूप प्रभु धारण। केवल आप भक्ति के कारण॥
Karata aneka rupa prabhu dharana Kevala apa bhakti ke karana
अर्थ:प्रभु अनेक और विविध रूप धारण करते हैं — केवल अपने भक्तों के प्रेम के कारण।
धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा। तब तुम रूप राम का धारा॥
Dharani dhenu bana tumahim pukara Taba tuma rupa rama ka dhara
अर्थ:जब पृथ्वी ने गाय बनकर आपको पुकारा, तब आपने राम का रूप धारण किया;
भार उतार असुर दल मारा। रावण आदिक को संहारा॥
Bhara utara asura dala mara Ravana adika ko samhara
अर्थ:— और उसका भार उतारकर आपने असुर दलों का संहार किया और रावण आदि को मारा।
आप वाराह रूप बनाया। हिरण्याक्ष को मार गिराया॥
Apa varaha rupa banaya Hiranyaksha ko mara giraya
अर्थ:आपने वराह का रूप बनाया और असुर हिरण्याक्ष को मार गिराया।
धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया। चौदह रतनन को निकलाया॥
Dhara matsya tana sindhu banaya Chaudaha ratanana ko nikalaya
अर्थ:मत्स्य रूप धारण कर आप सिन्धु में विचरे, और चौदह रत्नों को निकाला।
अमिलख असुरन द्वन्द मचाया। रूप मोहनी आप दिखाया॥
Amilakha asurana dvanda machaya Rupa mohani apa dikhaya
अर्थ:जब असुरों ने अनन्त द्वन्द्व मचाया, तब आपने मोहिनी रूप दिखाया;
देवन को अमृत पान कराया। असुरन को छबि से बहलाया॥
Devana ko amrita pana karaya Asurana ko chhabi se bahalaya
अर्थ:— आपने देवताओं को अमृत पान कराया, जबकि असुरों को अपनी छबि से बहलाया।
कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया। मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया॥
Kurma rupa dhara sindhu majhaya Mandrachala giri turata uthaya
अर्थ:कूर्म रूप धारण कर आपने सिन्धु को थामा, तुरन्त मन्दराचल पर्वत को उठा लिया।
शंकर का तुम फन्द छुड़ाया। भस्मासुर को रूप दिखाया॥
Shamkara ka tuma phanda chhuda़aya Bhasmasura ko rupa dikhaya
अर्थ:आपने शंकर को फन्दे से छुड़ाया और भस्मासुर का (असली) रूप दिखाया;
वेदन को जब असुर डुबाया। कर प्रबन्ध उन्हें ढुँढवाया॥
Vedana ko jaba asura dubaya Kara prabandha unhem dhundhavaya
अर्थ:— जब उस असुर ने वेदों को गहराई में डुबाया, तब आपने प्रबन्ध कर उन्हें ढुँढवाया।
मोहित बनकर खलहि नचाया। उसही कर से भस्म कराया॥
Mohita banakara khalahi nachaya Usahi kara se bhasma karaya
अर्थ:मोहिनी बनकर आपने उस दुष्ट को नचाया, और उसी के हाथ से उसे भस्म करा दिया।
असुर जलंधर अति बलदाई। शंकर से उन कीन्ह लड़ाई॥
Asura jalamdhara ati baladai Shamkara se una kinha lada़ai
अर्थ:असुर जलन्धर, बल में अति प्रबल, शंकर से युद्ध करने लगा;
हार पार शिव सकल बनाई। कीन सती से छल खल जाई॥
Hara para shiva sakala banai Kina sati se chhala khala jai
अर्थ:— शिव चारों ओर से हार गए, क्योंकि उस खल ने छल से सती को ठगा था।
सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी। बतलाई सब विपत कहानी॥
Sumirana kina tumhem shivarani Batalai saba vipata kahani
अर्थ:शिव की रानी (पार्वती) ने आपका स्मरण किया और सारी विपत्ति की कहानी कह सुनाई।
तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी। वृन्दा की सब सुरति भुलानी॥
Taba tuma bane munishvara jnani Vrinda ki saba surati bhulani
अर्थ:तब आप ज्ञानी मुनीश्वर बने और वृन्दा (जलन्धर की पत्नी) की सब सावधानी भुला दी;
देखत तीन दनुज शैतानी। वृन्दा आय तुम्हें लपटानी॥
Dekhata tina danuja shaitani Vrinda aya tumhem lapatani
अर्थ:— असुर की तीन प्रकार की कपटता देखकर वृन्दा आई और आपसे लिपट गई।
हो स्पर्श धर्म क्षति मानी। हना असुर उर शिव शैतानी॥
Ho sparsha dharma kshati mani Hana asura ura shiva shaitani
अर्थ:जब उसने अपने धर्म (पतिव्रत) की क्षति मानी, तब असुर की शक्ति टूट गई और शिव ने उस खल का वध किया।
तुमने धुरू प्रहलाद उबारे। हिरणाकुश आदिक खल मारे॥
Tumane dhuru prahalada ubare Hiranakusha adika khala mare
अर्थ:आपने ध्रुव और प्रह्लाद का उद्धार किया, और दुष्ट हिरण्यकशिपु आदि को मारा।
गणिका और अजामिल तारे। बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे॥
Ganika aura ajamila tare Bahuta bhakta bhava sindhu utare
अर्थ:आपने गणिका और अजामिल का उद्धार किया, और असंख्य भक्तों को भवसागर से पार उतारा।
हरहु सकल संताप हमारे। कृपा करहु हरि सिरजन हारे॥
Harahu sakala samtapa hamare Kripa karahu hari sirajana hare
अर्थ:हमारे समस्त संताप हर लीजिए; कृपा कीजिए, हे हरि, हे सबके सृजनहार।
देखहुँ मैं निज दरश तुम्हारे। दीन बन्धु भक्तन हितकारे॥
Dekhahun maim nija darasha tumhare Dina bandhu bhaktana hitakare
अर्थ:मुझे अपना दर्शन दीजिए, हे दीनबन्धु, हे भक्तों के हितकारी।
चहत आपका सेवक दर्शन। करहु दया अपनी मधुसूदन॥
Chahata apaka sevaka darshana Karahu daya apani madhusudana
अर्थ:आपका सेवक आपके दर्शन के लिए तरसता है; अपनी दया दिखाइए, हे मधुसूदन।
जानूं नहीं योग्य जप पूजन। होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन॥
Janum nahim yogya japa pujana Hoya yajna stuti anumodana
अर्थ:मैं जप और पूजन की योग्य विधि नहीं जानता; मेरी स्तुति को यज्ञ के समान स्वीकार कीजिए।
शीलदया सन्तोष सुलक्षण। विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण॥
Shiladaya santosha sulakshana Vidita nahim vratabodha vilakshana
अर्थ:शील, दया, सन्तोष और सुलक्षण — व्रत और ज्ञान का रहस्य — मैं सचमुच नहीं जानता।
करहुँ आपका किस विधि पूजन। कुमति विलोक होत दुख भीषण॥
Karahun apaka kisa vidhi pujana Kumati viloka hota dukha bhishana
अर्थ:मैं किस विधि से आपका पूजन करूँ? अपनी कुमति देखकर मुझे भीषण दुःख होता है।
करहुँ प्रणाम कौन विधिसुमिरण। कौन भांति मैं करहुँ समर्पण॥
Karahun pranama kauna vidhisumirana Kauna bhamti maim karahun samarpana
अर्थ:मैं किस प्रकार प्रणाम करूँ, किस भाँति आपका स्मरण करूँ, किस रीति से स्वयं को समर्पित करूँ?
सुर मुनि करत सदा सिवकाई। हर्षित रहत परम गति पाई॥
Sura muni karata sada sivakai Harshita rahata parama gati pai
अर्थ:देवता और मुनि सदा शिव (और आपकी) सेवा करते हैं, और परम गति पाकर हर्षित रहते हैं।
दीन दुखिन पर सदा सहाई। निज जन जान लेव अपनाई॥
Dina dukhina para sada sahai Nija jana jana leva apanai
अर्थ:आप सदा दीन और दुखियों के सहायक हैं; हमें अपना जान कर अपना लीजिए।
पाप दोष संताप नशाओ। भव बन्धन से मुक्त कराओ॥
Papa dosha samtapa nashao Bhava bandhana se mukta karao
अर्थ:हमारे पाप, दोष और संताप का नाश कीजिए, और हमें संसार के बन्धन से मुक्त कीजिए।
सुत सम्पति दे सुख उपजाओ। निज चरनन का दास बनाओ॥
Suta sampati de sukha upajao Nija charanana ka dasa banao
अर्थ:सन्तान और सम्पत्ति देकर सुख उपजाइए; हमें अपने चरणों का दास बनाइए।
निगम सदा ये विनय सुनावै। पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै॥
Nigama sada ye vinaya sunavai Padha़ai sunai so jana sukha pavai
अर्थ:इस प्रकार निगम (भक्त/शास्त्र) सदा यह विनती सुनाता है: जो भी इसे पढ़े या सुने, वह सुख पाता है।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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विष्णु चालीसा पाठ के लाभ
विष्णु चालीसा के नित्य पाठ से पालनहार भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और विघ्न, शोक तथा संकट दूर होते हैं।
इसमें विष्णु के दशावतार—मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, राम, कृष्ण आदि—का वर्णन है, जिससे श्रद्धा और भक्ति दृढ़ होती है।
इसे धन, बल, यश और शांति देने वाला तथा शनि, राहु, केतु आदि ग्रहदोष शांत करने वाला माना जाता है।
गुरुवार और एकादशी—विष्णु को समर्पित दिनों—पर इसका विशेष प्रभाव होता है।
मन को शांत करता है, भय मिटाता है और भक्त को सांसारिक बंधनों से मुक्त करता है।
यह सरल चालीस छंदों का भजन है जिसे पूरा परिवार साथ मिलकर पाठ कर सकता है।
विष्णु चालीसा जप विधि
स्नान के पश्चात स्वच्छ (यथासंभव पीले) वस्त्र पहनकर विष्णु/नारायण के चित्र के सम्मुख बैठें। दीप जलाएँ, तुलसी-पत्र और चंदन अर्पित करें, फिर श्रद्धापूर्वक आरम्भिक दोहा एवं चालीस चौपाइयों का पाठ करें। अंत में 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जप और आरती करें। गुरुवार सबसे शुभ दिन है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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