Mantra.Tips
krishnachalisakanhaiyagovardhan

कृष्ण चालीसा

🕉️ hindu·📿 1× जप·🕐 प्रातः या सायंकाल; विशेषकर जन्माष्टमी और बुधवार·🎵 ऑडियो सहित·📜 Traditional Hindi devotional hymn

अन्य नाम / खोज: krishna chalisa lyrics · banshi wale teri

Share:

अर्थ

कृष्ण चालीसा भगवान श्रीकृष्ण की चालीस छंदों वाली हिंदी स्तुति है, जो उनके मनोहर रूप, बाल-लीलाओं और भक्तों की रक्षा का गुणगान करती है। इसमें गोवर्धन धारण, कालिय-दमन, द्रौपदी-चीर तथा सुदामा-अनुग्रह जैसी लीलाएँ हैं। इसके पाठ से हृदय में प्रेम-भक्ति, शांति और रक्षा प्राप्त होती है।

उत्पत्ति और कथा

Traditional Hindi devotional hymn · Traditional (signed 'Sundardas') · Devotional era

कृष्ण चालीसा लोकप्रिय चालीसा परम्परा की चालीस छंदों वाली हिंदी स्तुति है। यह वृंदावन के श्याम, मुरलीधर भगवान की वंदना करती है। इसमें एक-एक लीला का स्मरण है—उँगली पर गोवर्धन उठाना, कालिय नाग पर नृत्य, द्रौपदी की साड़ी बढ़ाना और सुदामा के तंदुल स्वीकार करना—जो दर्शाती हैं कि कृष्ण सदा दीनों के मित्र और रक्षक हैं।

शास्त्रों में वर्णित

एक-एक छंद कृष्ण की रक्षक कृपा का स्मरण कराता है—मीरा की रक्षा हेतु राणा के भेजे सर्प को शालिग्राम बना देना, अंत समय में निंदक शिशुपाल को मुक्त करना, और द्रौपदी की एक साड़ी को अनंत बना देना ताकि उसकी लज्जा कभी न जाए। चालीसा वचन देती है कि इसका पाठ करने वाले भक्त को अष्ट सिद्धि, नवनिधि तथा चारों पुरुषार्थ प्राप्त होते हैं।

सुनें और साथ में जपें

सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

किसी भी पंक्ति या ▶ बटन पर टैप कर सुनें

दोहा 1

बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम। अरुण अधर जनु बिम्बा फल, पिताम्बर शुभ साज॥

Bamshi shobhita kara madhura, nila jalada tana shyama Aruna adhara janu bimba phala, pitambara shubha saja

अर्थ:उनके मधुर हाथों में बाँसुरी शोभायमान है; उनका शरीर नील जलधर सा श्याम है; उनके लाल अधर बिम्ब फल से हैं, और शुभ पीताम्बर उन्हें सुशोभित करता है।

दोहा 2

जय मनमोहन मदन छवि, कृष्णचन्द्र महाराज। करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥

Jaya manamohana madana chhavi, krishnachandra maharaja Karahu kripa he ravi tanaya, rakhahu jana ki laja

अर्थ:मनमोहन को जय, कामदेव सी छवि वाले, कृष्णचन्द्र महाराज! कृपा करो, हे सूर्यपुत्र (के लोक के स्वामी), और अपने भक्तों की लाज रखो।

चौपाई 1

जय यदुनन्दन जय जगवन्दन। जय वसुदेव देवकी नन्दन॥

Jaya yadunandana jaya jagavandana Jaya vasudeva devaki nandana

अर्थ:जय, हे यदुओं के आनन्द, जगत के वन्दनीय; जय, हे वसुदेव और देवकी के नन्दन!

चौपाई 2

जय यशुदा सुत नन्द दुलारे। जय प्रभु भक्तन के दृग तारे॥

Jaya yashuda suta nanda dulare Jaya prabhu bhaktana ke driga tare

अर्थ:जय, हे यशोदा और नन्द के दुलारे; जय, हे प्रभु, भक्तों के नेत्रों के तारे!

चौपाई 3

जय नट-नागर नाग नथैया। कृष्ण कन्हैया धेनु चरैया॥

Jaya nata-nagara naga nathaiya Krishna kanhaiya dhenu charaiya

अर्थ:जय, हे नट-नागर जिसने नाग (कालिय) को नथा; कृष्ण कन्हैया, गायें चराने वाले!

चौपाई 4

पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो। आओ दीनन कष्ट निवारो॥

Puni nakha para prabhu girivara dharo Ao dinana kashta nivaro

अर्थ:फिर, हे प्रभु, आपने नख पर महान गिरिवर धारण किया; आओ और दीनों के कष्ट निवारण करो।

चौपाई 5

वंशी मधुर अधर धरी तेरी। होवे पूर्ण मनोरथ मेरो॥

Vamshi madhura adhara dhari teri Hove purna manoratha mero

अर्थ:आपके अधरों पर मधुर बाँसुरी सजी है; मेरे मन का मनोरथ पूर्ण हो।

चौपाई 6

आओ हरि पुनि माखन चाखो। आज लाज भारत की राखो॥

Ao hari puni makhana chakho Aja laja bharata ki rakho

अर्थ:आओ, हे हरि, और फिर माखन चखो; आज भारत की लाज रखो।

चौपाई 7

गोल कपोल, चिबुक अरुणारे। मृदु मुस्कान मोहिनी डारे॥

Gola kapola, chibuka arunare Mridu muskana mohini dare

अर्थ:गोल कपोल, अरुणारी चिबुक, और मृदु मोहिनी मुस्कान;

चौपाई 8

रंजित राजिव नयन विशाला। मोर मुकुट वैजयंती माला॥

Ramjita rajiva nayana vishala Mora mukuta vaijayamti mala

अर्थ:— विशाल सुन्दर कमल से नयन, मोर मुकुट और वैजयन्ती माला।

चौपाई 9

कुण्डल श्रवण पीतपट आछे। कटि किंकणी काछन काछे॥

Kundala shravana pitapata achhe Kati kimkani kachhana kachhe

अर्थ:कानों में कुण्डल, उत्तम पीतपट, कटि पर नन्ही किंकिणी का करधन;

चौपाई 10

नील जलज सुन्दर तनु सोहे। छवि लखि, सुर नर मुनिमन मोहे॥

Nila jalaja sundara tanu sohe Chhavi lakhi, sura nara munimana mohe

अर्थ:— आपका सुन्दर नील शरीर ऐसा शोभता है कि देव, मनुष्य और मुनि सब छवि देख मोहित हो जाते हैं।

चौपाई 11

मस्तक तिलक, अलक घुंघराले। आओ कृष्ण बांसुरी वाले॥

Mastaka tilaka, alaka ghumgharale Ao krishna bamsuri vale

अर्थ:मस्तक पर तिलक और घुंघराली अलकें — आओ, हे बाँसुरी वाले कृष्ण!

चौपाई 12

करि पय पान, पुतनहि तारयो। अका बका कागासुर मारयो॥

Kari paya pana, putanahi tarayo Aka baka kagasura marayo

अर्थ:उसका विषभरा दूध पीकर आपने पूतना को तार दिया; आपने अघासुर, बकासुर और कागासुर का वध किया।

चौपाई 13

मधुवन जलत अग्नि जब ज्वाला। भै शीतल, लखितहिं नन्दलाला॥

Madhuvana jalata agni jaba jvala Bhai shitala, lakhitahim nandalala

अर्थ:जब मधुवन अग्नि की ज्वाला से जला, तो नन्दलाल के देखते ही वह शीतल हो गया।

चौपाई 14

सुरपति जब ब्रज चढ़यो रिसाई। मसूर धार वारि वर्षाई॥

Surapati jaba braja chadha़yo risai Masura dhara vari varshai

अर्थ:जब देवराज इन्द्र ब्रज पर क्रोधित होकर चढ़ आए और मूसलधार वर्षा बरसाई,

चौपाई 15

लगत-लगत ब्रज चहन बहायो। गोवर्धन नखधारि बचायो॥

Lagata-lagata braja chahana bahayo Govardhana nakhadhari bachayo

अर्थ:— जब ब्रज बहने को था, तब आपने गोवर्धन को नख पर धारण कर उसे बचा लिया।

चौपाई 16

लखि यसुदा मन भ्रम अधिकाई। मुख महं चौदह भुवन दिखाई॥

Lakhi yasuda mana bhrama adhikai Mukha maham chaudaha bhuvana dikhai

अर्थ:यह देख यशोदा का मन भ्रम से भर गया — और आपने अपने मुख में चौदह भुवन दिखा दिए।

चौपाई 17

दुष्ट कंस अति उधम मचायो। कोटि कमल जब फूल मंगायो॥

Dushta kamsa ati udhama machayo Koti kamala jaba phula mamgayo

अर्थ:जब दुष्ट कंस ने अति उधम मचाया और करोड़ कमल के फूल मँगवाए,

चौपाई 18

नाथि कालियहिं तब तुम लीन्हें। चरणचिन्ह दै निर्भय किन्हें॥

Nathi kaliyahim taba tuma linhem Charanachinha dai nirbhaya kinhem

अर्थ:— तब आपने कालिय नाग को नथा, और उस पर चरण-चिह्न देकर सबको निर्भय किया।

चौपाई 19

करि गोपिन संग रास विलासा। सबकी पूरण करी अभिलाषा॥

Kari gopina samga rasa vilasa Sabaki purana kari abhilasha

अर्थ:गोपियों संग रास विलास करके, आपने उन सबकी अभिलाषा पूर्ण की।

चौपाई 20

केतिक महा असुर संहारयो। कंसहि केस पकड़ि दै मारयो॥

Ketika maha asura samharayo Kamsahi kesa pakaड़i dai marayo

अर्थ:आपने कितने ही महान असुरों का संहार किया, और कंस को केश पकड़कर मार डाला।

चौपाई 21

मात-पिता की बन्दि छुड़ाई। उग्रसेन कहं राज दिलाई॥

Mata-pita ki bandi chhuड़ai Ugrasena kaham raja dilai

अर्थ:आपने अपने माता-पिता को बन्दीगृह से छुड़ाया और उग्रसेन को राज दिलाया।

चौपाई 22

महि से मृतक छहों सुत लायो। मातु देवकी शोक मिटायो॥

Mahi se mritaka chhahom suta layo Matu devaki shoka mitayo

अर्थ:आपने मृत्युलोक से छहों मृत पुत्रों को ले आकर माता देवकी का शोक मिटाया।

चौपाई 23

भौमासुर मुर दैत्य संहारी। लाये षट दश सहसकुमारी॥

Bhaumasura mura daitya samhari Laye shata dasha sahasakumari

अर्थ:भौमासुर और मुर दैत्यों का संहार कर, आपने सोलह सहस्र कन्याओं को ले आए।

चौपाई 24

दै भिन्हीं तृण चीर सहारा। जरासिंधु राक्षस कहं मारा॥

Dai bhinhim trina chira sahara Jarasimdhu rakshasa kaham mara

अर्थ:तिनके और चीर का भी सहारा देकर, आपने राक्षसराज जरासन्ध का वध किया।

चौपाई 25

असुर बकासुर आदिक मारयो। भक्तन के तब कष्ट निवारियो॥

Asura bakasura adika marayo Bhaktana ke taba kashta nivariyo

अर्थ:आपने बकासुर और अन्य असुरों का वध किया, और इस प्रकार अपने भक्तों के कष्ट निवारण किए।

चौपाई 26

दीन सुदामा के दुःख टारयो। तंदुल तीन मूंठ मुख डारयो॥

Dina sudama ke duhkha tarayo Tamdula tina mumtha mukha darayo

अर्थ:आपने दीन सुदामा का दुःख दूर किया, उनके विनम्र तीन मुट्ठी तन्दुल को स्वीकार करके।

चौपाई 27

प्रेम के साग विदुर घर मांगे। दुर्योधन के मेवा त्यागे॥

Prema ke saga vidura ghara mamge Duryodhana ke meva tyage

अर्थ:आपने विदुर के घर साधारण साग माँगा और दुर्योधन के मेवे त्याग दिए;

चौपाई 28

लखि प्रेम की महिमा भारी। ऐसे श्याम दीन हितकारी॥

Lakhi prema ki mahima bhari Aise shyama dina hitakari

अर्थ:— प्रेम की महिमा देखकर, ऐसे हैं श्याम, दीनों के हितकारी।

चौपाई 29

भारत के पारथ रथ हांके। लिए चक्र कर नहिं बल ताके॥

Bharata ke paratha ratha hamke Lie chakra kara nahim bala take

अर्थ:भारत के युद्ध में आपने पार्थ (अर्जुन) का रथ हाँका, चक्र हाथ में लेकर, यद्यपि आपको बल की आवश्यकता न थी।

चौपाई 30

निज गीता के ज्ञान सुनाये। भक्तन हृदय सुधा वर्षाये॥

Nija gita ke jnana sunaye Bhaktana hridaya sudha varshaye

अर्थ:आपने अपनी गीता का ज्ञान सुनाया, भक्तों के हृदय पर सुधा बरसाते हुए।

चौपाई 31

मीरा थी ऐसी मतवाली। विष पी गई बजाकर ताली॥

Mira thi aisi matavali Visha pi gai bajakara tali

अर्थ:मीरा आपके प्रेम में ऐसी मतवाली थी कि वह ताली बजाकर विष पी गई;

चौपाई 32

राना भेजा सांप पिटारी। शालिग्राम बने बनवारी॥

Rana bheja sampa pitari Shaligrama bane banavari

अर्थ:— राणा ने पिटारी में साँप भेजा, पर वह आपकी कृपा से शालिग्राम बन गया।

चौपाई 33

निज माया तुम विधिहिं दिखायो। उर ते संशय सकल मिटायो॥

Nija maya tuma vidhihim dikhayo Ura te samshaya sakala mitayo

अर्थ:आपने अपनी माया सबको दिखाई, और हृदय से सारा संशय मिटा दिया।

चौपाई 34

तब शत निन्दा करी तत्काला। जीवन मुक्त भयो शिशुपाला॥

Taba shata ninda kari tatkala Jivana mukta bhayo shishupala

अर्थ:जब शिशुपाल ने सौ निन्दाएँ कीं, तब वह तत्काल जीवनमुक्त हो गया।

चौपाई 35

जबहिं द्रौपदी टेर लगाई। दीनानाथ लाज अब जाई॥

Jabahim draupadi tera lagai Dinanatha laja aba jai

अर्थ:जिस क्षण द्रौपदी ने पुकारा, 'हे दीनानाथ, अब मेरी लाज जाती है!' —

चौपाई 36

तुरतहिं वसन बने ननन्दलाला। बढ़े चीर भै अरि मुँह काला॥

Turatahim vasana bane nanandalala Baढ़e chira bhai ari munha kala

अर्थ:— उसी क्षण आप, नन्दलाल, उसके अनन्त वस्त्र बन गए; चीर बढ़ता ही गया, शत्रुओं के मुँह काले करते हुए।

चौपाई 37

अस नाथ के नाथ कन्हैया। डूबत भंवर बचावत नैया॥

Asa natha ke natha kanhaiya Dubata bhamvara bachavata naiya

अर्थ:ऐसे हैं कन्हैया, नाथों के नाथ, जो भँवर में डूबती नैया को पार लगाते हैं।

चौपाई 38

सुन्दरदास आस उर धारी। दयादृष्टि कीजै बनवारी॥

Sundaradasa asa ura dhari Dayadrishti kijai banavari

अर्थ:सुन्दरदास हृदय में आस धारण कर प्रार्थना करते हैं: दयादृष्टि कीजिए, हे बनवारी।

चौपाई 39

नाथ सकल मम कुमति निवारो। क्षमहु बेगि अपराध हमारो॥

Natha sakala mama kumati nivaro Kshamahu begi aparadha hamaro

अर्थ:हे नाथ, मेरी सारी कुमति दूर करो और शीघ्र मेरे अपराध क्षमा करो।

चौपाई 40

खोलो पट अब दर्शन दीजै। बोलो कृष्ण कन्हैया की जै॥

Kholo pata aba darshana dijai Bolo krishna kanhaiya ki jai

अर्थ:अब पट खोलो और मुझे दर्शन दो; बोलो, कृष्ण कन्हैया की जय!

अंतिम दोहा

अष्ट सिद्धि नवनिधि फल, लहै पदारथ चारि॥

Ashta siddhi navanidhi phala, lahai padaratha chari

अर्थ:जो कोई इसका पाठ करता है, वह अष्ट सिद्धि, नवनिधि और चारों पदार्थ (पुरुषार्थ) प्राप्त करता है।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

कन्हैया🔊Kanhaiyaबाल कृष्ण का स्नेहपूर्ण नाम
यदुनन्दन🔊Yadunandanयदुवंश के आनन्द
मोर मुकुट🔊Mor Mukutमोरपंख का मुकुट
गोवर्धन🔊Govardhanवह पर्वत जिसे कृष्ण ने अँगुली पर उठाया
रास🔊Rasaगोपियों के साथ दिव्य नृत्य
वैजयंती माला🔊Vaijayanti Malaकृष्ण की वनफूलों की माला
कालिय🔊Kaliyaयमुना में कृष्ण द्वारा दमित नाग
बनवारी🔊Banwariवनमालाएँ धारण करने वाले; कृष्ण

कृष्ण चालीसा पाठ के लाभ

कृष्ण चालीसा का पाठ हृदय को भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम-भक्ति से भर देता है और उनकी मनोहर बाल-लीलाओं का स्मरण कराता है।

इसमें कृष्ण की लीलाओं—गोवर्धन धारण, कालिय-दमन, द्रौपदी की रक्षा—का वर्णन है, जिससे श्रद्धा और समर्पण दृढ़ होते हैं।

इसे प्रेम, शांति, समृद्धि और रक्षा देने वाला तथा भय और शोक मिटाने वाला माना जाता है।

जन्माष्टमी, बुधवार और कृष्ण पक्ष की एकादशी पर इसका विशेष प्रभाव होता है।

अशांत मन को शांत करता है और उसे श्रीकृष्ण के मधुर स्मरण में लीन कर देता है।

यह सरल चालीस छंदों का भजन है जो नित्य पारिवारिक पाठ और बच्चों के लिए आदर्श है।

कृष्ण चालीसा जप विधि

जप संख्या1बार
उत्तम समयप्रातः या सायंकाल; विशेषकर जन्माष्टमी और बुधवार
दिशाEast

श्रीकृष्ण के चित्र के सम्मुख बैठें, तुलसी, माखन और पुष्प अर्पित करें, और दीप जलाएँ। उनकी लीलाओं में प्रेमपूर्वक ध्यान लगाकर आरम्भिक दोहे और चालीस चौपाइयों का पाठ करें। अंत में 'हरे कृष्ण' या 'जय श्री कृष्ण' तथा आरती करें। जन्माष्टमी की मध्यरात्रि विशेष शुभ है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कृष्ण चालीसा भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति में रची चालीस छंदों की हिंदी स्तुति है, जो 'बंशी शोभित कर मधुर' से आरम्भ होती है। यह उनके सौंदर्य, बाल-लीलाओं तथा द्रौपदी, सुदामा और मीरा जैसे भक्तों की रक्षा का गुणगान करती है।
यह जन्माष्टमी (कृष्ण-जन्मोत्सव), बुधवार और एकादशी पर सबसे शुभ है। अनेक भक्त इसे प्रतिदिन प्रातः या सायंकाल पढ़ते हैं।
इसमें गोवर्धन धारण, कालिय-दमन, पूतना, कंस और अन्य असुरों का वध, रास-लीला, द्रौपदी की रक्षा तथा सुदामा और मीरा पर कृपा का वर्णन है।
माना जाता है कि यह प्रेम, शांति, समृद्धि और रक्षा देती है, भय और संशय दूर करती है तथा भगवान श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति को गहरा करती है।

ये भी पढ़ें

उपयोगी लगा? अपनों के साथ साझा करें 🙏

Share:

Explore more sacred mantras with complete meaning and chanting guides