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मङ्गलं भगवान् विष्णुः

🕉️ hindu·📿 3× जप·🕐 विष्णु पूजा, सत्यनारायण कथा या किसी शुभ आयोजन के समापन पर; एकादशी और गुरुवार को·📜 Traditional mangala (auspiciousness) shloka of Vishnu

अन्य नाम / खोज: mangalam bhagavan vishnu mangalam garuda dhwajah · mangalam pundarikaksha mangalayatano harih · vishnu mangala shloka

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अर्थ

'मङ्गलं भगवान् विष्णुः' विष्णु का प्रसिद्ध मंगल (शुभता) श्लोक है, जो विष्णु पूजा, सत्यनारायण कथा और अनेक स्तोत्रों के समापन पर पढ़ा जाता है। यह विष्णु को गरुड़ध्वज, पुण्डरीकाक्ष (कमलनयन) और हरि के नामों से सर्व-मंगलमय और मंगल का आश्रय घोषित करता है। यह विवाह, गृहप्रवेश और हर शुभ अवसर पर गाया जाता है।

उत्पत्ति और कथा

Traditional mangala (auspiciousness) shloka of Vishnu · Traditional · Classical

यह वह प्रिय 'मंगलम्' श्लोक है, जो विष्णु पूजा और अनेक पवित्र पाठों को सम्पन्न करने हेतु गाया जाता है, सबसे परिचित रूप से सत्यनारायण कथा के समापन पर। 'मंगलम्' (शुभ) शब्द को दोहराकर और भगवान को विष्णु, गरुड़ध्वज, कमलनयन पुण्डरीकाक्ष और हरि नामों से पुकारकर, यह उन्हें शुभता का स्वरूप घोषित करता है और उस आशीर्वाद का आवाहन उन सब पर करता है जो इसे सुनते हैं। यह विवाह, गृहप्रवेश और हर शुभ आरंभ एवं समापन पर पढ़ा जाता है।

शास्त्रों में वर्णित

कहा जाता है कि जहाँ यह श्लोक गाया जाता है, वहाँ शुभता एकत्र होती है — क्योंकि यह हरि का आवाहन करता है, जो समस्त शुभ और मंगल का साक्षात धाम हैं।

मंत्र

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मङ्गलं भगवान् विष्णुः मङ्गलं गरुडध्वजः मङ्गलं पुण्डरीकाक्षः मङ्गलायतनो हरिः

Mangalam bhagavan vishnuh mangalam garudadhvajah Mangalam pundarikakshah mangalayatano harih

अर्थ:भगवान विष्णु मंगलमय हैं, गरुड़ध्वज मंगलमय हैं, कमलनयन मंगलमय हैं — हरि मंगल के आश्रय (धाम) हैं।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

मङ्गलं भगवान् विष्णुः🔊Mangalam bhagavan vishnuhभगवान विष्णु मंगलमय हैं
मङ्गलं गरुडध्वजः🔊Mangalam garudadhvajahगरुड़ध्वज (जिनकी ध्वजा पर गरुड़ है) मंगलमय हैं
मङ्गलं पुण्डरीकाक्षः🔊Mangalam pundarikakshahकमलनयन मंगलमय हैं
मङ्गलायतनो हरिः🔊Mangalayatano harihहरि, मंगल के परम आश्रय (धाम)

मङ्गलं भगवान् विष्णुः पाठ के लाभ

विष्णु पूजा, सत्यनारायण कथा और अनेक स्तोत्रों के समापन पर पढ़ा जाने वाला शास्त्रीय 'मंगल' (शुभता) श्लोक।

विष्णु के नामों — गरुड़ध्वज, पुण्डरीकाक्ष (कमलनयन) और हरि — द्वारा सर्व-मंगल का आवाहन करता है।

पूजा या पाठ को आशीर्वाद से समाप्त करने और शुभ, निर्विघ्न फल के आवाहन हेतु पढ़ा जाता है।

विवाह, गृहप्रवेश और शुभ कार्यों के आरंभ या समापन पर पढ़ा जाता है।

संक्षिप्त, मधुर और सहज ही स्मरणीय।

मङ्गलं भगवान् विष्णुः जप विधि

जप संख्या3बार
उत्तम समयविष्णु पूजा, सत्यनारायण कथा या किसी शुभ आयोजन के समापन पर; एकादशी और गुरुवार को
दिशाEast or North

पूजा या किसी भी शुभ कार्य के समापन पर इसे पढ़ें, ताकि उपस्थित सभी जनों पर भगवान के मंगल आशीर्वाद का आवाहन हो। तीन बार दोहराएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह मंगल (शुभता) श्लोक है, जो विष्णु पूजा, सत्यनारायण कथा और अनेक स्तोत्रों के अंत में, तथा विवाह और गृहप्रवेश जैसे शुभ अवसरों पर, उस आयोजन को आशीर्वाद से सम्पन्न करने हेतु पढ़ा जाता है।
यह भगवान विष्णु को — गरुड़ध्वज को धारण करने वाले, कमलनयन हरि को — सर्व-मंगलमय और मंगल का साक्षात आश्रय घोषित करता है, और भक्त पर उस आशीर्वाद का आवाहन करता है।

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