मङ्गलं भगवान् विष्णुः — Word-by-Word Meaning
मङ्गलं भगवान् विष्णुः
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
मङ्गलं भगवान् विष्णुः
Mangalam bhagavan vishnuh
भगवान विष्णु मंगलमय हैं
मङ्गलं गरुडध्वजः
Mangalam garudadhvajah
गरुड़ध्वज (जिनकी ध्वजा पर गरुड़ है) मंगलमय हैं
मङ्गलं पुण्डरीकाक्षः
Mangalam pundarikakshah
कमलनयन मंगलमय हैं
मङ्गलायतनो हरिः
Mangalayatano harih
हरि, मंगल के परम आश्रय (धाम)
Complete Translation
भगवान विष्णु मंगलमय हैं, गरुड़ध्वज मंगलमय हैं, कमलनयन मंगलमय हैं — हरि मंगल के आश्रय (धाम) हैं।
Origin & History
Source: Traditional mangala (auspiciousness) shloka of Vishnu
Author: Traditional
Period: Classical
यह वह प्रिय 'मंगलम्' श्लोक है, जो विष्णु पूजा और अनेक पवित्र पाठों को सम्पन्न करने हेतु गाया जाता है, सबसे परिचित रूप से सत्यनारायण कथा के समापन पर। 'मंगलम्' (शुभ) शब्द को दोहराकर और भगवान को विष्णु, गरुड़ध्वज, कमलनयन पुण्डरीकाक्ष और हरि नामों से पुकारकर, यह उन्हें शुभता का स्वरूप घोषित करता है और उस आशीर्वाद का आवाहन उन सब पर करता है जो इसे सुनते हैं। यह विवाह, गृहप्रवेश और हर शुभ आरंभ एवं समापन पर पढ़ा जाता है।
Frequently Asked Questions
मङ्गलं भगवान् विष्णुः कब पढ़ा जाता है?▼
यह मंगल (शुभता) श्लोक है, जो विष्णु पूजा, सत्यनारायण कथा और अनेक स्तोत्रों के अंत में, तथा विवाह और गृहप्रवेश जैसे शुभ अवसरों पर, उस आयोजन को आशीर्वाद से सम्पन्न करने हेतु पढ़ा जाता है।
मङ्गलं भगवान् विष्णुः का क्या अर्थ है?▼
यह भगवान विष्णु को — गरुड़ध्वज को धारण करने वाले, कमलनयन हरि को — सर्व-मंगलमय और मंगल का साक्षात आश्रय घोषित करता है, और भक्त पर उस आशीर्वाद का आवाहन करता है।
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