Mantra.Tips
vishnunarayanamantraashtakshara

विष्णु मंत्र

🕉️ hindu·📿 108× जप·🕐 गुरुवार और एकादशी को प्रातःकाल; तथा संकट के समय निरंतर जप के रूप में·📜 The Ashtakshara mantra of Lord Vishnu (Narayana)

अन्य नाम / खोज: om namo narayanaya

Share:

अर्थ

"ॐ नमो नारायणाय" भगवान विष्णु (नारायण) का अष्टाक्षर मंत्र है — वैष्णव परंपरा के सर्वोच्च मंत्रों में से एक। यह मन की शांति, रक्षा, पाप और दुःख के नाश तथा भगवान के प्रति अटल भक्ति के लिए जपा जाता है। माना जाता है कि यह मोक्ष और प्रभु की कृपा प्रदान करता है।

उत्पत्ति और कथा

The Ashtakshara mantra of Lord Vishnu (Narayana) · Traditional (Vedic / Puranic)

"ॐ नमो नारायणाय" भगवान विष्णु का अष्टाक्षर — आठ अक्षर वाला मंत्र है, जिनकी आराधना नारायण के रूप में होती है, जो ब्रह्मांडीय जलों पर तथा प्रत्येक प्राणी के हृदय में निवास करते हैं। वैष्णव परंपरा के सर्वोच्च मंत्रों में गिना जाने वाला यह मंत्र युगों से ऋषियों और भक्तों द्वारा शांति के आश्रय, पाप के नाशक और प्रभु की मुक्तिदायिनी कृपा के सुनिश्चित मार्ग के रूप में जपा जाता रहा है।

मंत्र

किसी भी पंक्ति या ▶ बटन पर टैप कर सुनें

नमो नारायणाय

Om Namo Narayanaya.

अर्थ:ॐ। समस्त जीवों के आश्रय व पालक भगवान नारायण (विष्णु) को नमस्कार है।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

🔊Omआदि-नाद (प्रणव)
नमो🔊Namoनमस्कार / मैं नमन करता हूँ
नारायणाय🔊Narayanayaनारायण को — भगवान विष्णु, समस्त प्राणियों के आश्रय-स्थल

विष्णु मंत्र पाठ के लाभ

भगवान विष्णु/नारायण का अष्टाक्षर (आठ अक्षर वाला) मंत्र — वैष्णव परंपरा के सर्वोच्च मंत्रों में से एक

मन की शांति, रक्षा, पाप और दुःख के नाश तथा प्रभु के प्रति अटल भक्ति के लिए जपा जाता है

मोक्ष और प्रभु की कृपा प्रदान करने वाला कहा गया है, विशेषकर संकट, रोग और जीवन के अंत-काल में इसका जप किया जाता है

गुरुवार (विष्णु के दिन), एकादशी और वैकुंठ एकादशी पर विशेष रूप से प्रभावशाली

तुलसी और दीप के साथ विष्णु की मूर्ति के सम्मुख 108 बार, अथवा दिनभर निरंतर जप के रूप में किया जाता है

"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" और विष्णु सहस्रनाम के साथ नारायण का एक सरल, पूर्ण नित्य मंत्र

विष्णु मंत्र जप विधि

जप संख्या108बार
उत्तम समयगुरुवार और एकादशी को प्रातःकाल; तथा संकट के समय निरंतर जप के रूप में

स्नान के पश्चात तुलसी पत्र और घी के दीप के साथ भगवान विष्णु/नारायण की मूर्ति के सम्मुख बैठें। तुलसी की माला पर "ॐ नमो नारायणाय" का 108 बार जप करें, मन को प्रभु के प्रति समर्पित करते हुए। शांति और रक्षा हेतु इस अष्टाक्षर मंत्र को दिनभर अजपा जप के रूप में भी निरंतर दोहराया जा सकता है। संकट में और मृत्यु के समय इसका स्मरण विशेष रूप से पावन माना गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रमुख विष्णु मंत्र "ॐ नमो नारायणाय" है — अष्टाक्षर (आठ अक्षर वाला) मंत्र, जो समस्त जीवों के पालक एवं आश्रय भगवान विष्णु अर्थात् नारायण को नमस्कार है। ("ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" इससे संबंधित द्वादशाक्षर मंत्र है।)
यह शांति, रक्षा, पाप और दुःख के नाश, अटल भक्ति और अंततः मोक्ष के लिए जपा जाता है। संकट के समय और जीवन के अंत में यह एक पावन आश्रय के रूप में पूजनीय है।
इसे प्रतिदिन तुलसी की माला पर 108 बार जपें। छोटा और पूर्ण होने के कारण यह अष्टाक्षर मंत्र दिनभर निरंतर जप के लिए भी उत्तम है।
गुरुवार (विष्णु का दिन), एकादशी और वैकुंठ एकादशी सबसे शुभ हैं, और प्रातःकाल सर्वोत्तम समय है। इसका स्मरण किसी भी समय किया जा सकता है।
इस मंत्र के साथ "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय", विष्णु सहस्रनाम, विष्णु चालीसा और "ॐ जय जगदीश हरे" आरती का पाठ करें।

ये भी पढ़ें

उपयोगी लगा? अपनों के साथ साझा करें 🙏

Share:

Explore more sacred mantras with complete meaning and chanting guides