బ్రహ్మం ఒక్కటే
अन्य नाम / खोज: brahmam okkate · brahmam okate · parabrahmam okkate · annamayya brahmam okkate · brahma mokkate
अपनी भाषा/लिपि में पढ़ें
✦ अर्थ
'ब्रह्मं ऒक्कटे' तिरुमला के भगवान वेंकटेश के महान 15वीं सदी के संत-संगीतकार अन्नमाचार्य (अन्नमय्या) की सर्वाधिक प्रिय तेलुगु कीर्तनों में से एक है। इसका संदेश गहन और क्रांतिकारी है: परब्रह्म एक ही है, जो समस्त प्राणियों का अंतरात्मा है, अतः ईश्वर के समक्ष कोई ऊँच-नीच नहीं — राजा और सेवक की निद्रा, ब्राह्मण और चांडाल के नीचे की भूमि, देवों और चींटियों का सुख — सब एक समान हैं। यह आध्यात्मिक समता और भक्ति का कालजयी गीत है।
उत्पत्ति और कथा
Telugu keertana of Annamacharya (Annamayya), in praise of Lord Venkateswara (15th century CE) · Annamacharya (Tallapaka Annamayya) · 1408-1503 CE
अन्नमाचार्य का जन्म तल्लपाक में हुआ और बचपन से ही वे तिरुमला के भगवान वेंकटेश के पूर्णतः भक्त थे, जिन पर उन्होंने हजारों कीर्तनों की रचना की। 'ब्रह्मं ऒक्कटे' में वे समस्त सांसारिक ऊँच-नीच को परे रखते हुए घोषणा करते हैं कि एक परब्रह्म प्रत्येक प्राणी में समान रूप से निवास करता है। उनके अनेक गीत, इस सहित, ताम्रपत्रों पर उत्कीर्ण किए गए और तिरुमला मंदिर में सुरक्षित रखे गए, जिन्हें सदियों बाद पुनः खोजा गया।
✦ शास्त्रों में वर्णित
परंपरा मानती है कि अन्नमाचार्य के 32,000 गीत भगवान वेंकटेश की प्रत्यक्ष कृपा से प्रवाहित हुए, और कि उन्हें धारण करने वाले ताम्रपत्र, जो सदियों तक तिरुमला के एक तहखाने में छिपे रहे, अक्षत रूप में पुनः प्राप्त हुए — मानो भगवान ने स्वयं अपने भक्त के भक्ति और समता के वचनों को समस्त युगों के लिए सुरक्षित रखा हो।
सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित
किसी भी पंक्ति या ▶ बटन पर टैप कर सुनें
బ్రహ్మ మొక్కటే పరబ్రహ్మ మొక్కటే పరబ్రహ్మ మొక్కటే పరబ్రహ్మ మొక్కటే
brahma mokkaṭē parabrahma mokkaṭē parabrahma mokkaṭē parabrahma mokkaṭē
अर्थ:ब्रह्म एक ही है, परब्रह्म एक ही है।
కందువగు హీనాధికము లిందు లేవు అందరికి శ్రీహరే అంతరాత్మ ఇందులో జంతుకుల మింతా నొక్కటే అందరికి శ్రీహరే అంతరాత్మ
kanduvagu hīnādhikamu lindu lēvu andariki śrīharē antarātma indulō jantukula mintā nokkaṭē andariki śrīharē antarātma
अर्थ:यहाँ ऊँच-नीच का कोई भेद नहीं; सबका अंतरात्मा एकमात्र श्रीहरि (विष्णु) ही है। इस संसार में समस्त प्राणियों का कुल एक ही है; सबके भीतर श्रीहरि ही अंतरात्मा हैं।
నిండార రాజు నిద్రించు నిద్రయు నొకటే అండనే బంటు నిద్ర అదియు నొకటే మెండైన బ్రాహ్మణుడు మెట్టు భూమి యొకటే చండాలుడుండేటి సరిభూమి యొకటే
niṇḍāra rāju nidriñcu nidrayu nokaṭē aṇḍanē baṇṭu nidra adiyu nokaṭē meṇḍaina brāhmaṇuḍu meṭṭu bhūmi yokaṭē caṇḍāluḍuṇḍēṭi saribhūmi yokaṭē
अर्थ:जिस निद्रा में महान राजा सोता है, वही निद्रा उसके पास सोते सेवक की भी है — दोनों एक हैं। जिस भूमि पर श्रेष्ठ ब्राह्मण चलता है, वही भूमि वह है जहाँ चांडाल खड़ा है — दोनों समान हैं।
అనుగుదేవతలకును అలకామ సుఖ మొకటే ఘన కీటకాదులకు కామ సుఖ మొకటే దిన మహేశ్వరునికిని తెలిసి సుఖ మొకటే వను చీమల కైనను వట్టి సుఖ మొకటే
anugudēvatalakunu alakāma sukha mokaṭē ghana kīṭakādulaku kāma sukha mokaṭē dina maheśvarunikini telisi sukha mokaṭē vanu cīmala kainanu vaṭṭi sukha mokaṭē
अर्थ:प्रिय देवताओं के लिए कामसुख एक है; तुच्छ कीट आदि के लिए भी वही कामसुख है; जानने वाले महेश्वर के लिए वह आनंद एक है; रेंगती चींटियों के लिए भी वही सामान्य सुख एक है।
కొరలి శిష్టాన్నములు గుడుచుట యొకటే తిరుగు దుష్టాన్నములు తినుట యొకటే పరగ దుర్గంధములపై వాయు వొకటే తిరుమని వేంకటేశు తెలిసిన వా రొకటే
korali śiṣṭānnamulu guḍucuṭa yokaṭē tirugu duṣṭānnamulu tinuṭa yokaṭē paraga durgandhamulapai vāyu vokaṭē tirumani vēṅkaṭēśu telisina vā rokaṭē
अर्थ:शिष्ट (उत्तम) अन्न खाना और घूमते हुए मिला दुष्ट (हीन) अन्न खाना — खाने की क्रिया एक ही है; सुगंधित और दुर्गंधित दोनों पर वही वायु बहती है; और जिन्होंने पवित्र भगवान वेंकटेश को सचमुच जान लिया है, वे सब एक समान हैं। सबके लिए परब्रह्म एक ही है।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें
బ్రహ్మం ఒక్కటే पाठ के लाभ
ईश्वर की एकता तथा समस्त प्राणियों की आध्यात्मिक समता की एक गहन शिक्षा, भक्तिपूर्वक गाई गई।
अहंकार के ऊँच-नीच के भाव को विलीन करती है, विनम्रता को विकसित करते हुए और सबमें श्रीहरि को आत्मा के रूप में देखते हुए।
तिरुमला के भगवान वेंकटेश की स्तुति में अन्नमय्या की 32,000 कीर्तनों में से सर्वाधिक प्रिय में से एक।
वेंकटेश (बालाजी) के प्रति भक्ति को गहरा करने तथा अद्वैत (अद्वैत) की दृष्टि को आत्मसात् करने के लिए पठित एवं गाई जाती है।
यह सिखाते हुए मन को शांति देती है कि वही भगवान और वही सार राजा-सेवक, देव-चींटी सबमें व्याप्त है।
బ్రహ్మం ఒక్కటే जप विधि
भगवान वेंकटेश (बालाजी) के चित्र के समक्ष बैठकर कीर्तन को भाव सहित गाएँ या पढ़ें, इसके अर्थ पर मनन करते हुए — कि एक परम आत्मा सबमें निवास करती है। अन्नमय्या के गीत गाने के लिए हैं; यदि पढ़ें, तो प्रत्येक चरणम् के पश्चात पल्लवी 'ब्रह्मं ऒक्कटे' को टेक के रूप में दोहराएँ, जिस समता और एकता की वह घोषणा करता है उसका चिन्तन करते हुए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ये भी पढ़ें
ॐ
Explore more sacred mantras with complete meaning and chanting guides