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నానాటి బతుకు నాటకము

🕉️ hindu·📿 1× जप·🕐 प्रातः या सायं प्रार्थना; वेंकटेश पूजा के समय और शनिवार को (बालाजी को समर्पित)·📜 Telugu keertana of Annamacharya (Annamayya), in praise of Lord Venkateswara (15th century CE)

अन्य नाम / खोज: nanati batuku natakamu · nanati bratuku natakamu · annamayya nanati batuku · nanaati batuku natakamu · naanaati bratuku

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अर्थ

'नानाटि बतुकु नाटकमु' तिरुमला के भगवान वेंकटेश के महान 15वीं सदी के संत-संगीतकार अन्नमाचार्य (अन्नमय्या) की सर्वाधिक प्रिय दार्शनिक कीर्तनों में से एक है। इसका विषय वैराग्य है: दैनिक जीवन एक क्षणभंगुर खेल है; जन्म और मृत्यु सत्य हैं, किंतु इनके बीच का सब कुछ मात्र नाटक है; केवल मोक्ष (कैवल्य), जो दृश्य जगत् से परे और उस आकाश से भी परे है जहाँ वेंकटेश विराजते हैं, ही सच्चा सत्य है। यह जीवन की अनित्यता और आत्मा के लक्ष्य का गहन, कोमल स्मरण है।

उत्पत्ति और कथा

Telugu keertana of Annamacharya (Annamayya), in praise of Lord Venkateswara (15th century CE) · Annamacharya (Tallapaka Annamayya) · 1408-1503 CE

अन्नमाचार्य का जन्म तल्लपाक में हुआ और बाल्यकाल से ही वे तिरुमला के भगवान वेंकटेश के प्रति पूर्णतः समर्पित थे, जिन पर उन्होंने भक्ति एवं दर्शन की हजारों कीर्तनाओं की रचना की। 'नानाटि बतुकु नाटकमु' में वे सांसारिक जीवन की अनित्यता पर चिंतन करते हैं, उसे एक क्षणभंगुर नाटक कहते हैं, और उसके परे प्रभु के शाश्वत शासन के अधीन मोक्ष की ओर संकेत करते हैं। इस सहित उनके अनेक गीत तिरुमला मंदिर में सुरक्षित ताम्रपत्रों पर अंकित किए गए थे।

शास्त्रों में वर्णित

परम्परा मानती है कि अन्नमाचार्य के 32,000 गीत भगवान वेंकटेश की प्रत्यक्ष कृपा से प्रवाहित हुए, और जो ताम्रपत्र उन्हें धारण किए हुए थे, सदियों तक तिरुमला के एक कोष्ठ में छिपे रहकर अक्षत रूप में पुनः प्राप्त हुए — मानो स्वयं प्रभु ने अपने भक्त के वैराग्य एवं भक्ति के गीतों को समस्त युगों के लिए सुरक्षित रखा हो।

सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

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श्लोक 1

నానాటి బతుకు నాటకము కానక కన్నది కైవల్యము

nānāṭi batuku nāṭakamu kānaka kannadi kaivalyamu

अर्थ:यह दिन-प्रतिदिन का जीवन मात्र एक नाटक है, एक खेल; और जो समस्त सामान्य दृष्टि से परे झलकता है, वही मोक्ष (कैवल्य) है। (यह भगवान वेंकटेश पर अन्नमाचार्य की सर्वाधिक प्रिय तेलुगु कीर्तनों में से एक है, जो वैराग्य सिखाती है।)

श्लोक 2

పుట్టుటయు నిజము పోవుటయు నిజము నట్ట నడిమి పని నాటకము యెట్ట నెదుట గలదిదె ప్రపంచము కట్ట గడపటిది కైవల్యము

puṭṭuṭayu nijamu pōvuṭayu nijamu naṭṭa naḍimi pani nāṭakamu yeṭṭa neduṭa galadide prapañcamu kaṭṭa gaḍapaṭidi kaivalyamu

अर्थ:जन्म लेना सत्य है, और मरना सत्य है; किंतु इन दोनों के बीच के समस्त कार्य मात्र एक खेल हैं। यह संसार जो हमारी आँखों के सामने फैला है, यहीं है — फिर भी इस सबके अंत में मोक्ष खड़ा है।

श्लोक 3

కుడిచేదన్నము కోక చుట్టెడిది నడుమంత్రపు పని నాటకము వొడిగట్టుకొనిన వుభయ కర్మములు గడిదాటినపుడె కైవల్యము

kuḍicēdannamu kōka cuṭṭeḍidi naḍumantrapu pani nāṭakamu voḍigaṭṭukonina vubhaya karmamulu gaḍidāṭinapuḍe kaivalyamu

अर्थ:जो अन्न हम खाते हैं, जो वस्त्र हम लपेटते हैं — ये बीच के कार्य मात्र एक खेल हैं। दोनों प्रकार के कर्म, पुण्य और पाप, जो हम अपनी गोद में बटोरते हैं — उनसे पार जाने पर ही मोक्ष है।

श्लोक 4

తెగదు పాపము తీరదు పుణ్యము నగి నగి కాలము నాటకము యెగువనె శ్రీవేంకటేశ్వరు డేలికే గగనము మీదిది కైవల్యము

tegadu pāpamu tīradu puṇyamu nagi nagi kālamu nāṭakamu yeguvane śrīvēṅkaṭēśvaru ḍēlikē gaganamu mīdidi kaivalyamu

अर्थ:पाप इतनी सहजता से नहीं कटता, न पुण्य इतनी सहजता से चुकता है; और इस प्रकार, हँसते-हँसते, काल स्वयं एक खेल है। ऊपर, भगवान श्रीवेंकटेश सब पर शासन करते हैं — और जो आकाश से भी परे है, वही मोक्ष है।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

నానాటి బతుకు🔊nānāṭi batukuदिन-प्रतिदिन का जीवन / यह नित्य का अस्तित्व।
నాటకము🔊nāṭakamuमात्र एक नाटक है, एक खेल।
కానక కన్నది కైవల్యము🔊kānaka kannadi kaivalyamuजो साधारण दृष्टि के बिना देखा जाता है — उससे परे — वही मोक्ष (कैवल्य) है।
పుట్టుటయు నిజము పోవుటయు నిజము🔊puṭṭuṭayu nijamu pōvuṭayu nijamuजन्म लेना सत्य है, और मरना सत्य है (दोनों निश्चित हैं)।
నట్ట నడిమి పని నాటకము🔊naṭṭa naḍimi pani nāṭakamuकिंतु इन दोनों के ठीक बीच (जन्म और मृत्यु के बीच) के कर्म (मात्र) एक खेल हैं।
యెట్ట నెదుట గలదిదె ప్రపంచము🔊yeṭṭa neduṭa galadide prapañcamuठीक हमारी आँखों के सामने यह संसार (दृश्य जगत्) है।
కట్ట గడపటిది కైవల్యము🔊kaṭṭa gaḍapaṭidi kaivalyamuकिंतु इस सबके अंत में मोक्ष है।
కుడిచేదన్నము🔊kuḍicēdannamuजो अन्न हम खाते हैं।
కోక చుట్టెడిది🔊kōka cuṭṭeḍidiजो वस्त्र हम अपने चारों ओर लपेटते (पहनते) हैं।
నడుమంత్రపు పని నాటకము🔊naḍumantrapu pani nāṭakamuये बीच के कार्य (केवल) एक खेल हैं।
వొడిగట్టుకొనిన వుభయ కర్మములు🔊voḍigaṭṭukonina vubhaya karmamuluदोनों प्रकार के कर्म (पुण्य और पाप) जो हम अपनी गोद में बाँधते (संचित करते) हैं।
గడిదాటినపుడె కైవల్యము🔊gaḍidāṭinapuḍe kaivalyamuजब हम (उनसे परे) सीमा को पार करते हैं, तभी मोक्ष है।
తెగదు పాపము తీరదు పుణ్యము🔊tegadu pāpamu tīradu puṇyamuपाप (सहजता से) नहीं कटता, पुण्य (सहजता से) नहीं चुकता।
నగి నగి కాలము నాటకము🔊nagi nagi kālamu nāṭakamuहँसते-हँसते, काल का (बीतना) एक खेल है।
యెగువనె శ్రీవేంకటేశ్వరుడేలికే🔊yeguvane śrīvēṅkaṭēśvaruḍēlikēऊपर, भगवान श्रीवेंकटेश (सबके स्वामी रूप में) शासन करते हैं।
గగనము మీదిది కైవల్యము🔊gaganamu mīdidi kaivalyamuजो आकाश से ऊपर (परे) है — वही मोक्ष है।

నానాటి బతుకు నాటకము पाठ के लाभ

वैराग्य की गहन शिक्षा — कि सांसारिक जीवन एक क्षणभंगुर खेल है और मोक्ष ही सच्चा लक्ष्य है।

मन को शान्त करती है और लाभ-हानि के प्रति आसक्ति ढीली करती है, हृदय को कोमलता से ईश्वर की ओर मोड़ती है।

तिरुमला के भगवान वेंकटेश की स्तुति में अन्नमय्या की सर्वाधिक प्रिय कीर्तनों में से एक।

शान्ति, दृष्टिकोण और वैराग्य की खोज में, विशेषकर वेंकटेश (बालाजी) की भक्ति में गाई जाती है।

भक्त को स्मरण कराती है कि जन्म, मृत्यु और कर्म के परे, प्रभु के शासन के अधीन शाश्वत कैवल्य स्थित है।

నానాటి బతుకు నాటకము जप विधि

जप संख्या1बार
उत्तम समयप्रातः या सायं प्रार्थना; वेंकटेश पूजा के समय और शनिवार को (बालाजी को समर्पित)
दिशाFacing the deity of Venkateswara / Vishnu or east

भगवान वेंकटेश (बालाजी) की छवि के समक्ष बैठें और कीर्तना को धीरे-धीरे गाएँ या पढ़ें, इसके वैराग्य के संदेश पर चिंतन करते हुए — कि जीवन एक खेल है और केवल मोक्ष ही सत्य है। अन्नमय्या के गीत गाए जाने के लिए हैं; यदि पढ़ें तो प्रत्येक चरणम् के पश्चात् पल्लवी 'नानाटि बतुकु नाटकमु' को टेक के रूप में दोहराएँ, हृदय को शाश्वत के चिंतन में विश्राम देते हुए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह संत-संगीतकार अन्नमाचार्य (अन्नमय्या) की एक प्रसिद्ध तेलुगु कीर्तना है, जो सिखाती है कि दिन-प्रतिदिन का जीवन मात्र एक नाटक है और सच्चा सत्य मोक्ष (कैवल्य) है, जो संसार से परे है। यह भगवान वेंकटेश की स्तुति में उनके सर्वाधिक प्रिय दार्शनिक गीतों में से एक है।
अन्नमाचार्य (अन्नमय्या, 1408-1503) एक महान संत-कवि और कर्नाटक संगीत के सबसे आरम्भिक ज्ञात रचयिता (पद-कविता पितामह) थे, जो तिरुमला के भगवान वेंकटेश के भक्त थे। कहा जाता है कि उन्होंने 32,000 कीर्तनाओं की रचना की, जिनमें से अनेक तिरुमला में सुरक्षित ताम्रपत्रों पर उत्कीर्ण हैं।
यह वैराग्य सिखाता है: जन्म और मृत्यु सत्य हैं, किंतु इनके बीच का सब कुछ — खाना, वस्त्र धारण, पुण्य एवं पाप का संचय — मात्र एक क्षणभंगुर खेल है। केवल मोक्ष, जो दृश्य जगत् और उस आकाश से भी परे है जहाँ वेंकटेश विराजते हैं, ही अटल सत्य और आत्मा का लक्ष्य है।
कैवल्य का अर्थ है मोक्ष अथवा अंतिम मुक्ति — जन्म और मृत्यु के चक्र से आत्मा का छुटकारा और उसके सच्चे, शाश्वत स्वरूप में स्थिति। इस कीर्तना में अन्नमय्या बार-बार जीवन के क्षणभंगुर 'नाटकम्' (नाटक) की तुलना कैवल्य के स्थायी सत्य से करते हैं।

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