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నానాటి బతుకు నాటకము Meaning — Line by Line

నానాటి బతుకు నాటకము

Every verse and every word explained in English & Hindi

Meaning — Line by Line

Every verse of నానాటి బతుకు నాటకము with its Hindi meaning. Tap any word to hear it, or ▶ to recite the verse.

Verse 1#

nānāṭi batuku nāṭakamu

నానాటి బతుకు నాటకము కానక కన్నది కైవల్యము

nānāṭi batuku nāṭakamu kānaka kannadi kaivalyamu

Meaningयह दिन-प्रतिदिन का जीवन मात्र एक नाटक है, एक खेल; और जो समस्त सामान्य दृष्टि से परे झलकता है, वही मोक्ष (कैवल्य) है। (यह भगवान वेंकटेश पर अन्नमाचार्य की सर्वाधिक प्रिय तेलुगु कीर्तनों में से एक है, जो वैराग्य सिखाती है।)

Verse 2#

puṭṭuṭayu nijamu pōvuṭayu nijamu

పుట్టుటయు నిజము పోవుటయు నిజము నట్ట నడిమి పని నాటకము యెట్ట నెదుట గలదిదె ప్రపంచము కట్ట గడపటిది కైవల్యము

puṭṭuṭayu nijamu pōvuṭayu nijamu naṭṭa naḍimi pani nāṭakamu yeṭṭa neduṭa galadide prapañcamu kaṭṭa gaḍapaṭidi kaivalyamu

Meaningजन्म लेना सत्य है, और मरना सत्य है; किंतु इन दोनों के बीच के समस्त कार्य मात्र एक खेल हैं। यह संसार जो हमारी आँखों के सामने फैला है, यहीं है — फिर भी इस सबके अंत में मोक्ष खड़ा है।

Verse 3#

kuḍicēdannamu kōka cuṭṭeḍidi

కుడిచేదన్నము కోక చుట్టెడిది నడుమంత్రపు పని నాటకము వొడిగట్టుకొనిన వుభయ కర్మములు గడిదాటినపుడె కైవల్యము

kuḍicēdannamu kōka cuṭṭeḍidi naḍumantrapu pani nāṭakamu voḍigaṭṭukonina vubhaya karmamulu gaḍidāṭinapuḍe kaivalyamu

Meaningजो अन्न हम खाते हैं, जो वस्त्र हम लपेटते हैं — ये बीच के कार्य मात्र एक खेल हैं। दोनों प्रकार के कर्म, पुण्य और पाप, जो हम अपनी गोद में बटोरते हैं — उनसे पार जाने पर ही मोक्ष है।

Verse 4#

tegadu pāpamu tīradu puṇyamu

తెగదు పాపము తీరదు పుణ్యము నగి నగి కాలము నాటకము యెగువనె శ్రీవేంకటేశ్వరు డేలికే గగనము మీదిది కైవల్యము

tegadu pāpamu tīradu puṇyamu nagi nagi kālamu nāṭakamu yeguvane śrīvēṅkaṭēśvaru ḍēlikē gaganamu mīdidi kaivalyamu

Meaningपाप इतनी सहजता से नहीं कटता, न पुण्य इतनी सहजता से चुकता है; और इस प्रकार, हँसते-हँसते, काल स्वयं एक खेल है। ऊपर, भगवान श्रीवेंकटेश सब पर शासन करते हैं — और जो आकाश से भी परे है, वही मोक्ष है।

Word-by-Word Breakdown

నానాటి బతుకు
nānāṭi batuku
दिन-प्रतिदिन का जीवन / यह नित्य का अस्तित्व।
నాటకము
nāṭakamu
मात्र एक नाटक है, एक खेल।
కానక కన్నది కైవల్యము
kānaka kannadi kaivalyamu
जो साधारण दृष्टि के बिना देखा जाता है — उससे परे — वही मोक्ष (कैवल्य) है।
పుట్టుటయు నిజము పోవుటయు నిజము
puṭṭuṭayu nijamu pōvuṭayu nijamu
जन्म लेना सत्य है, और मरना सत्य है (दोनों निश्चित हैं)।
నట్ట నడిమి పని నాటకము
naṭṭa naḍimi pani nāṭakamu
किंतु इन दोनों के ठीक बीच (जन्म और मृत्यु के बीच) के कर्म (मात्र) एक खेल हैं।
యెట్ట నెదుట గలదిదె ప్రపంచము
yeṭṭa neduṭa galadide prapañcamu
ठीक हमारी आँखों के सामने यह संसार (दृश्य जगत्) है।
కట్ట గడపటిది కైవల్యము
kaṭṭa gaḍapaṭidi kaivalyamu
किंतु इस सबके अंत में मोक्ष है।
కుడిచేదన్నము
kuḍicēdannamu
जो अन्न हम खाते हैं।
కోక చుట్టెడిది
kōka cuṭṭeḍidi
जो वस्त्र हम अपने चारों ओर लपेटते (पहनते) हैं।
నడుమంత్రపు పని నాటకము
naḍumantrapu pani nāṭakamu
ये बीच के कार्य (केवल) एक खेल हैं।
వొడిగట్టుకొనిన వుభయ కర్మములు
voḍigaṭṭukonina vubhaya karmamulu
दोनों प्रकार के कर्म (पुण्य और पाप) जो हम अपनी गोद में बाँधते (संचित करते) हैं।
గడిదాటినపుడె కైవల్యము
gaḍidāṭinapuḍe kaivalyamu
जब हम (उनसे परे) सीमा को पार करते हैं, तभी मोक्ष है।
తెగదు పాపము తీరదు పుణ్యము
tegadu pāpamu tīradu puṇyamu
पाप (सहजता से) नहीं कटता, पुण्य (सहजता से) नहीं चुकता।
నగి నగి కాలము నాటకము
nagi nagi kālamu nāṭakamu
हँसते-हँसते, काल का (बीतना) एक खेल है।
యెగువనె శ్రీవేంకటేశ్వరుడేలికే
yeguvane śrīvēṅkaṭēśvaruḍēlikē
ऊपर, भगवान श्रीवेंकटेश (सबके स्वामी रूप में) शासन करते हैं।
గగనము మీదిది కైవల్యము
gaganamu mīdidi kaivalyamu
जो आकाश से ऊपर (परे) है — वही मोक्ष है।

Origin & History

Source: Telugu keertana of Annamacharya (Annamayya), in praise of Lord Venkateswara (15th century CE)

Author: Annamacharya (Tallapaka Annamayya)

Period: 1408-1503 CE

अन्नमाचार्य का जन्म तल्लपाक में हुआ और बाल्यकाल से ही वे तिरुमला के भगवान वेंकटेश के प्रति पूर्णतः समर्पित थे, जिन पर उन्होंने भक्ति एवं दर्शन की हजारों कीर्तनाओं की रचना की। 'नानाटि बतुकु नाटकमु' में वे सांसारिक जीवन की अनित्यता पर चिंतन करते हैं, उसे एक क्षणभंगुर नाटक कहते हैं, और उसके परे प्रभु के शाश्वत शासन के अधीन मोक्ष की ओर संकेत करते हैं। इस सहित उनके अनेक गीत तिरुमला मंदिर में सुरक्षित ताम्रपत्रों पर अंकित किए गए थे।

Frequently Asked Questions

'नानाटि बतुकु नाटकमु' क्या है?
यह संत-संगीतकार अन्नमाचार्य (अन्नमय्या) की एक प्रसिद्ध तेलुगु कीर्तना है, जो सिखाती है कि दिन-प्रतिदिन का जीवन मात्र एक नाटक है और सच्चा सत्य मोक्ष (कैवल्य) है, जो संसार से परे है। यह भगवान वेंकटेश की स्तुति में उनके सर्वाधिक प्रिय दार्शनिक गीतों में से एक है।
अन्नमाचार्य कौन थे?
अन्नमाचार्य (अन्नमय्या, 1408-1503) एक महान संत-कवि और कर्नाटक संगीत के सबसे आरम्भिक ज्ञात रचयिता (पद-कविता पितामह) थे, जो तिरुमला के भगवान वेंकटेश के भक्त थे। कहा जाता है कि उन्होंने 32,000 कीर्तनाओं की रचना की, जिनमें से अनेक तिरुमला में सुरक्षित ताम्रपत्रों पर उत्कीर्ण हैं।
यह गीत क्या सिखाता है?
यह वैराग्य सिखाता है: जन्म और मृत्यु सत्य हैं, किंतु इनके बीच का सब कुछ — खाना, वस्त्र धारण, पुण्य एवं पाप का संचय — मात्र एक क्षणभंगुर खेल है। केवल मोक्ष, जो दृश्य जगत् और उस आकाश से भी परे है जहाँ वेंकटेश विराजते हैं, ही अटल सत्य और आत्मा का लक्ष्य है।
'कैवल्य' का क्या अर्थ है?
कैवल्य का अर्थ है मोक्ष अथवा अंतिम मुक्ति — जन्म और मृत्यु के चक्र से आत्मा का छुटकारा और उसके सच्चे, शाश्वत स्वरूप में स्थिति। इस कीर्तना में अन्नमय्या बार-बार जीवन के क्षणभंगुर 'नाटकम्' (नाटक) की तुलना कैवल्य के स्थायी सत्य से करते हैं।

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