Mantra.Tips
bhaja-govindamshankaracharyaself-inquirydetachment

का ते कान्ता कस्ते पुत्रः

🕉️ hindu·📿 11× जप·🕐 आत्म-चिन्तन के शान्त क्षण, विशेषकर प्रातःकाल या शयन से पूर्व·📜 Bhaja Govindam (Moha Mudgara), verse on self-inquiry

अन्य नाम / खोज: ka te kanta kaste putrah · kasya tvam kah kuta ayatah · samsaro ayam ativa vichitrah · tattvam chintaya tadiha bhratah · bhaja govindam ka te kanta

Share:

अर्थ

आदि शंकराचार्य के 'भज गोविन्दम्' का यह प्रसिद्ध श्लोक साधक के समक्ष आत्म-विचार के महान प्रश्न रखता है। 'तेरी पत्नी कौन? तेरा पुत्र कौन? तू कौन है? कहाँ से आया?' — ऐसे प्रश्नों से यह परिवार और शरीर के साथ मिथ्या तादात्म्य को शिथिल करता है। यह संसार की विचित्रता पर प्रश्न उठाकर श्रोता को — जिसे प्रेमपूर्वक 'भाई' कहा गया है — आत्मतत्त्व का यहीं और अभी चिन्तन करने को प्रेरित करता है।

उत्पत्ति और कथा

Bhaja Govindam (Moha Mudgara), verse on self-inquiry · Adi Shankaracharya · 8th century CE (circa 788-820)

यह श्लोक आदि शंकराचार्य के भज गोविन्दम् का अंश है, जो काशी में सांसारिक मोह से आत्मा को जगाने के लिए गाया गया था। धन, शरीर और सम्बन्धों की क्षणभंगुरता दिखाने के पश्चात् शंकराचार्य यहाँ साधक का ध्यान वेदान्त के शाश्वत प्रश्नों — तू कौन है? किसका है? कहाँ से आया? — की ओर मोड़ते हैं, और संसार के विचित्र दृश्य के मूल में स्थित आत्मा के चिन्तन का निमन्त्रण देते हैं।

शास्त्रों में वर्णित

ये ही प्रश्न — 'मैं कौन हूँ? कहाँ से आया हूँ?' — आत्म-विचार के बीज बने, जिनका उपयोग असंख्य साधकों ने, आधुनिक ऋषियों सहित, आत्म-साक्षात्कार के लिए किया है। कहा जाता है कि इस श्लोक के साथ सच्चे मन से बैठना उस अन्तर्यात्रा का आरम्भ है जो समस्त दुःखों का अन्त करती है।

मंत्र

किसी भी पंक्ति या ▶ बटन पर टैप कर सुनें

का ते कान्ता कस्ते पुत्रः संसारोऽयमतीव विचित्रः कस्य त्वं कः कुत आयातः तत्त्वं चिन्तय तदिह भ्रातः

Ka te kanta kaste putrah samsaroyamativa vichitrah Kasya tvam kah kuta ayatah tattvam chintaya tadiha bhratah

अर्थ:तेरी पत्नी कौन? तेरा पुत्र कौन? यह संसार अत्यन्त विचित्र है। तू किसका है? तू कौन है? कहाँ से आया है? हे भाई! इस तत्त्व का यहीं विचार कर।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

का🔊Kaकौन (है)
ते🔊Teतेरा
कान्ता🔊Kantaपत्नी, प्रिया
कस्ते पुत्रः🔊Kaste putrahतेरा पुत्र कौन है?
संसारः अयम्🔊Samsarah ayamयह सांसारिक अस्तित्व
अतीव विचित्रः🔊Ativa vichitrahअत्यन्त विचित्र और आश्चर्यजनक
कस्य त्वं🔊Kasya tvamतू किसका है?
कः🔊Kahतू कौन (है)?
कुत आयातः🔊Kuta ayatahकहाँ से आया है?
तत्त्वं🔊Tattvamतत्त्व, मूल सत्य
चिन्तय🔊Chintayaचिन्तन कर, मनन कर
तदिह🔊Tad-ihaवह, यहीं (इसी जीवन में)
भ्रातः🔊Bhratahहे भाई!

का ते कान्ता कस्ते पुत्रः पाठ के लाभ

गहन आत्म-विचार जगाता है — 'मैं कौन हूँ? कहाँ से आया हूँ?'

स्थायी मानी गई पारिवारिक सम्बन्धों की आसक्ति को शिथिल करता है

सांसारिक अस्तित्व (संसार) की विचित्र, स्वप्न-सदृश प्रकृति को प्रकट करता है

मन को शाश्वत आत्मा (आत्मन्) के चिन्तन की ओर मोड़ता है

साधक को 'भाई' कहकर दी गई एक कोमल किन्तु मर्मभेदी शिक्षा

आदि शंकराचार्य के अद्वैत की दार्शनिक गहराई समेटे हुए है

का ते कान्ता कस्ते पुत्रः जप विधि

जप संख्या11बार
उत्तम समयआत्म-चिन्तन के शान्त क्षण, विशेषकर प्रातःकाल या शयन से पूर्व

इस श्लोक का ध्यानपूर्वक पाठ करें, प्रत्येक प्रश्न पर रुककर — 'तेरी पत्नी कौन? तेरा पुत्र कौन? तू कौन है?' — और पहचान की दृढ़ धारणाओं को विलीन होने दें। शीघ्र उत्तर की खोज न करें; प्रश्नों को ही मन को अन्तर्मुख करने दें। समापन के शब्द 'तत्त्वं चिन्तय' (सत्य का चिन्तन कर) मौन आत्म-विचार में बैठने का निमन्त्रण हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इसका अर्थ है 'तेरी पत्नी कौन? तेरा पुत्र कौन?' आदि शंकराचार्य इन प्रश्नों से यह दर्शाते हैं कि हमारे सम्बन्ध हमारी सच्ची पहचान नहीं हैं, और हमें यह विचार करने को प्रेरित करते हैं कि हम वास्तव में कौन हैं और कहाँ से आए हैं।
यह आत्म-विचार (आत्म-विचार) का आह्वान है। अपनी आसक्तियों पर प्रश्न उठाकर और 'मैं कौन हूँ? कहाँ से आया?' पूछकर यह श्लोक शरीर और परिवार से परे शाश्वत आत्मा की ओर संकेत करता है, और हमें इसी जीवन में इस तत्त्व का चिन्तन करने को प्रेरित करता है।
शंकराचार्य साधक को प्रेमपूर्वक 'भाई' कहकर सम्बोधित करते हैं ताकि यह स्पष्ट हो कि यह शिक्षा करुणा से दी गई है, न कि किसी निन्दा से। यह एक गुरु का स्नेहपूर्ण उपदेश है जो किसी साथी प्राणी को सत्य के प्रति जगाना चाहता है।
यह भज गोविन्दम् (मोह मुद्गर) से है, जिसकी रचना आदि शंकराचार्य ने आठवीं शताब्दी में की थी। यह इस स्तोत्र के आत्म-विचार और वैराग्य पर सर्वाधिक उद्धृत श्लोकों में से एक है।

ये भी पढ़ें

उपयोगी लगा? अपनों के साथ साझा करें 🙏

Share:

Explore more sacred mantras with complete meaning and chanting guides