असतो मा सद्गमय
अन्य नाम / खोज: om asato ma sadgamaya
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✦ अर्थ
असतो मा सद्गमय, बृहदारण्यक उपनिषद (1.3.28) का पावमान मन्त्र, सबसे प्राचीन और प्रिय शान्ति मन्त्रों में से एक है। अपनी तीन उदात्त पंक्तियों में यह प्रार्थना करता है "मुझे असत् से सत् की ओर, अन्धकार से प्रकाश की ओर, मृत्यु से अमरत्व की ओर ले चलो," और "ॐ शान्ति शान्ति शान्ति" से समाप्त होता है। यह आन्तरिक शान्ति तथा आत्मा की अज्ञान से ज्ञान की यात्रा के लिए जपा जाता है।
उत्पत्ति और कथा
Brihadaranyaka Upanishad 1.3.28 · Traditional (Upanishadic) · Vedic / Upanishadic
पावमान मन्त्र, 'असतो मा सद्गमय', बृहदारण्यक उपनिषद में मिलता है, जो उपनिषदों में सबसे प्राचीन है। अपनी तीन उदात्त पंक्तियों में यह आध्यात्मिक साधक की सम्पूर्ण अभिलाषा को प्रस्तुत करता है — असत् से सत् की ओर, अन्धकार से प्रकाश की ओर, मृत्यु से अमरत्व की ओर ले जाए जाने की। अपनी सुन्दरता और गहराई के कारण यह हिन्दू धर्म की सबसे प्रिय प्रार्थनाओं में से एक बन गई है, जो सारे संसार में पठित होती है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
ऋषि इस प्रार्थना को आत्मा की अभिलाषा की वाणी मानते हैं — कि प्रत्येक मानव इच्छा के नीचे यही एक पुकार है कि भ्रम से सत्य की ओर, अन्धकार से प्रकाश की ओर, और मृत्यु से अमृत की ओर जाया जाए; इसे सच्चे मन से जपना सम्पूर्ण अस्तित्व को शाश्वत की ओर मोड़ देना है।
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मंत्र
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ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
Om asato ma sadgamaya Tamaso ma jyotirgamaya Mrityorma amritam gamaya Om shantih shantih shantih
अर्थ:मुझे असत् से सत् की ओर ले चलो; अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो; मृत्यु से अमरत्व की ओर ले चलो। ॐ शान्ति, शान्ति, शान्ति।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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असतो मा सद्गमय पाठ के लाभ
उपनिषदों की सबसे प्राचीन और पूज्य प्रार्थनाओं में से एक (पावमान मन्त्र, बृहदारण्यक उपनिषद 1.3.28) — अज्ञान से ज्ञान की यात्रा के लिए एक प्रार्थना।
साधक की असत्य से सत्य, अन्धकार से प्रकाश, और मृत्यु से अमरत्व की ओर प्रगति के लिए पठित — जो आध्यात्मिक जीवन का परम लक्ष्य है।
अध्ययन, ध्यान और प्रार्थना के आरम्भ में आन्तरिक शान्ति, स्पष्टता और अज्ञान के नाश के लिए जपा जाता है।
एक सार्वभौमिक प्रार्थना, जो शाश्वत के प्रति मानव की अभिलाषा की उदात्त अभिव्यक्ति के कारण सभी परम्पराओं में प्रिय है।
प्रतिदिन और प्रार्थनाओं के अन्त में 'ॐ शान्ति शान्ति शान्ति' के साथ पठित।
असतो मा सद्गमय जप विधि
धीरे-धीरे और ध्यानपूर्वक पाठ करें, आत्मा की असत् से सत् की ओर, अन्धकार से प्रकाश की ओर, और मृत्यु से अमरत्व की ओर गति पर मनन करते हुए। यह आध्यात्मिक अध्ययन और ध्यान के आरम्भ में जपा जाता है, और 'ॐ शान्ति शान्ति शान्ति' से समाप्त किया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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