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ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी — करदर्शनम्

🕉️ hindu·📿 1× जप·🕐 जागने पर, प्रभात में (ब्रह्म मुहूर्त), बिस्तर से उठने से पहले·📜 Traditional Prabhata-smarana (morning remembrance) shloka

अन्य नाम / खोज: brahma murari tripurantakari bhanuh shashi · karadarshanam · kara darshanam shloka · prabhat smaran shloka · suprabhatam morning prayer · navagraha morning prayer

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अर्थ

यह प्रसिद्ध करदर्शनम् / प्रभात-स्मरण श्लोक है, जो त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु, शिव) तथा नवग्रहों का एक साथ आवाहन करके भक्त को मंगलमय प्रातःकाल का आशीर्वाद देता है। इसे प्रातः जागने पर, प्रायः अपनी हथेलियों के दर्शन के बाद, समस्त ब्रह्मांडीय शक्तियों की छत्रछाया में दिन आरम्भ करने के लिए पढ़ा जाता है। यह संक्षिप्त और सरल होने के कारण अनेक हिन्दू घरों में सिखाई जाने वाली पहली प्रातः प्रार्थनाओं में से एक है।

उत्पत्ति और कथा

Traditional Prabhata-smarana (morning remembrance) shloka · Traditional · Classical

यह एक उत्कृष्ट 'सुप्रभातम्' श्लोक है जिससे अनेक हिन्दू अपने दिन का आरम्भ करते हैं। जागने पर भक्त तीन महान देवताओं ब्रह्मा, विष्णु और शिव का नवग्रहों के साथ स्मरण करता है और प्रार्थना करता है कि वे सभी एक मंगलमय और शुभ प्रभात प्रदान करें। त्रिमूर्ति और नवग्रह की ब्रह्मांडीय शक्तियों दोनों को प्रणाम करते हुए दिन आरम्भ करने से पूरा दिन उनके संरक्षण और कृपा में आ जाता है।

शास्त्रों में वर्णित

कहा जाता है कि जो प्रत्येक दिन इस प्रार्थना से आरम्भ करता है, उसके लिए ग्रह कभी प्रतिकूल नहीं होते, क्योंकि उसने स्वयं त्रिमूर्ति और सभी नौ ग्रहों से प्रभात को मंगलमय बनाने की प्रार्थना की है — और ऐसे समर्पण से आरम्भ हुआ दिन कृपापूर्वक बीतता है।

मंत्र

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ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च गुरुश्च शुक्रः शनिराहुकेतवः कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्

Brahma Muraris Tripurantakari Bhanuh Shashi Bhumisuto Budhash cha Gurush cha Shukrah Shani-Rahu-Ketavah Kurvantu sarve mama suprabhatam

अर्थ:ब्रह्मा, मुरारि (विष्णु) और त्रिपुरान्तक (शिव), सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु — ये सभी मिलकर मेरा सुप्रभात (मंगलमय प्रातःकाल) करें।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

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ब्रह्मा🔊Brahmaब्रह्मा, सृष्टिकर्ता
मुरारिः🔊Murarihविष्णु, मुर असुर का संहारक
त्रिपुरान्तकारी🔊Tripurantakariशिव, त्रिपुर (तीन नगरों) के संहारक
भानुः🔊Bhanuhसूर्य
शशी🔊Shashiचन्द्र
भूमिसुतः🔊Bhumisutahमंगल, पृथ्वी के पुत्र
बुधः🔊Budhahबुध
गुरुः🔊Guruhबृहस्पति / गुरु
शुक्रः🔊Shukrahशुक्र
शनिः🔊Shanihशनि
राहुकेतवः🔊Rahu-Ketavahराहु और केतु, चन्द्र-गाँठें
कुर्वन्तु सर्वे🔊Kurvantu sarveये सभी प्रदान करें / करें
मम सुप्रभातम्🔊mama suprabhatamमेरे लिए मंगलमय प्रभात (शुभ प्रातःकाल)

ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी — करदर्शनम् पाठ के लाभ

दिन के आरम्भ में ही सम्पूर्ण त्रिमूर्ति — ब्रह्मा, विष्णु और शिव — का आवाहन करता है, जिससे पूरा दिन दिव्य संरक्षण में आ जाता है।

सभी नौ ग्रहों (नवग्रह) को प्रणाम करता है, उनके प्रभाव को अनुकूल और दिन को मंगलमय बनाने की प्रार्थना करता है।

जागने पर पढ़ा जाने वाला पारम्परिक प्रभात-स्मरण, प्रायः हथेलियों को देखते हुए 'कराग्रे वसते लक्ष्मी' के साथ पढ़ा जाता है।

सांसारिक चिन्ताओं के बजाय ब्रह्मांडीय शक्तियों के स्मरण से दिन आरम्भ करते हुए समर्पण और कृतज्ञता का भाव जगाता है।

संक्षिप्त, लयबद्ध और सरल होने से बालक और वृद्ध सभी इसे दैनिक अभ्यास के रूप में सरलता से सीख सकते हैं।

माना जाता है कि यह ग्रह-स्थितियों के नकारात्मक प्रभावों को दूर करता है और एक सुखद, शुभारम्भ वाला दिन प्रदान करता है।

ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी — करदर्शनम् जप विधि

जप संख्या1बार
उत्तम समयजागने पर, प्रभात में (ब्रह्म मुहूर्त), बिस्तर से उठने से पहले
दिशाAny (ideally facing east)

जागने के तुरन्त बाद, अभी बैठे हुए या उठने से पहले एक बार पढ़ें। इसे पारम्परिक रूप से करदर्शनम् श्लोकों (जैसे 'कराग्रे वसते लक्ष्मी') के साथ अपनी खुली हथेलियों को देखते हुए पढ़ा जाता है, त्रिमूर्ति और नौ ग्रहों का स्मरण करते हुए, जिससे दिन का आरम्भ मंगलमय हो।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह एक प्रातः प्रार्थना है जिसमें कामना की जाती है कि ब्रह्मा, विष्णु (मुरारि) और शिव (त्रिपुरान्तक), सूर्य, चन्द्र तथा अन्य सात ग्रह — मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु — मिलकर भक्त को मंगलमय प्रभात (सुप्रभात) प्रदान करें।
यह एक प्रभात-स्मरण है जो जागने पर, बिस्तर से उठने से पहले पढ़ा जाता है। इसे प्रायः 'कराग्रे वसते लक्ष्मी' के साथ, प्रातःकाल अपनी हथेलियों को देखने के करदर्शन अनुष्ठान के अंग के रूप में पढ़ा जाता है।
यह श्लोक नवग्रह — वैदिक ज्योतिष की नौ खगोलीय शक्तियों — का आशीर्वाद माँगता है, जिससे दिन की ग्रह-ऊर्जाएँ अनुकूल रहें। प्रभात में त्रिमूर्ति के साथ उन्हें प्रणाम करके भक्त ब्रह्मांड के साथ सामंजस्य में दिन आरम्भ करता है।

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