ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी — करदर्शनम् — Word-by-Word Meaning
ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी — करदर्शनम्
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
ब्रह्मा
Brahma
ब्रह्मा, सृष्टिकर्ता
मुरारिः
Murarih
विष्णु, मुर असुर का संहारक
त्रिपुरान्तकारी
Tripurantakari
शिव, त्रिपुर (तीन नगरों) के संहारक
भानुः
Bhanuh
सूर्य
शशी
Shashi
चन्द्र
भूमिसुतः
Bhumisutah
मंगल, पृथ्वी के पुत्र
बुधः
Budhah
बुध
गुरुः
Guruh
बृहस्पति / गुरु
शुक्रः
Shukrah
शुक्र
शनिः
Shanih
शनि
राहुकेतवः
Rahu-Ketavah
राहु और केतु, चन्द्र-गाँठें
कुर्वन्तु सर्वे
Kurvantu sarve
ये सभी प्रदान करें / करें
मम सुप्रभातम्
mama suprabhatam
मेरे लिए मंगलमय प्रभात (शुभ प्रातःकाल)
Complete Translation
ब्रह्मा, मुरारि (विष्णु) और त्रिपुरान्तक (शिव), सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु — ये सभी मिलकर मेरा सुप्रभात (मंगलमय प्रातःकाल) करें।
Origin & History
Source: Traditional Prabhata-smarana (morning remembrance) shloka
Author: Traditional
Period: Classical
यह एक उत्कृष्ट 'सुप्रभातम्' श्लोक है जिससे अनेक हिन्दू अपने दिन का आरम्भ करते हैं। जागने पर भक्त तीन महान देवताओं ब्रह्मा, विष्णु और शिव का नवग्रहों के साथ स्मरण करता है और प्रार्थना करता है कि वे सभी एक मंगलमय और शुभ प्रभात प्रदान करें। त्रिमूर्ति और नवग्रह की ब्रह्मांडीय शक्तियों दोनों को प्रणाम करते हुए दिन आरम्भ करने से पूरा दिन उनके संरक्षण और कृपा में आ जाता है।
Frequently Asked Questions
ब्रह्मा मुरारि त्रिपुरान्तकारी का अर्थ क्या है?▼
यह एक प्रातः प्रार्थना है जिसमें कामना की जाती है कि ब्रह्मा, विष्णु (मुरारि) और शिव (त्रिपुरान्तक), सूर्य, चन्द्र तथा अन्य सात ग्रह — मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु — मिलकर भक्त को मंगलमय प्रभात (सुप्रभात) प्रदान करें।
यह श्लोक कब पढ़ा जाता है?▼
यह एक प्रभात-स्मरण है जो जागने पर, बिस्तर से उठने से पहले पढ़ा जाता है। इसे प्रायः 'कराग्रे वसते लक्ष्मी' के साथ, प्रातःकाल अपनी हथेलियों को देखने के करदर्शन अनुष्ठान के अंग के रूप में पढ़ा जाता है।
इसमें नौ ग्रहों का नाम क्यों लिया जाता है?▼
यह श्लोक नवग्रह — वैदिक ज्योतिष की नौ खगोलीय शक्तियों — का आशीर्वाद माँगता है, जिससे दिन की ग्रह-ऊर्जाएँ अनुकूल रहें। प्रभात में त्रिमूर्ति के साथ उन्हें प्रणाम करके भक्त ब्रह्मांड के साथ सामंजस्य में दिन आरम्भ करता है।
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