गरुड गमन तव (विष्णु स्तोत्रम्)
अन्य नाम / खोज: garuda gamana tava charana kamalam · mama tapam apakuru deva · garuda gamana stotram · vishnu stotram garuda gamana
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✦ अर्थ
गरुड गमन तव एक कोमल, मधुर विष्णु स्तोत्र है, जिसमें भक्त प्रार्थना करता है कि भगवान के चरणकमल सदा हृदय में निवास करें, और प्रत्येक श्लोक 'मम तापम् अपाकुरु देव' — 'हे देव, मेरे दुःख को दूर करो' — की हार्दिक टेक से समाप्त होता है। यह विष्णु को गरुडवाहन कमलनयन, शेषशायी, शंख-चक्रधारी, दैत्यनाशक और सर्वलोकशरण्य के रूप में स्तुति करता है। यह समर्पण का गीत माना जाता है जो शांति, रक्षा तथा जीवन के तीनों तापों से मुक्ति देता है।
उत्पत्ति और कथा
Traditional Vaishnava stotra praising Lord Vishnu (popular Carnatic devotional composition) · Traditionally attributed to the Vaishnava devotional tradition · Medieval to modern devotional period
यह प्रिय स्तोत्र भगवान विष्णु को उनकी अनेक महिमाओं से सम्बोधित करता है — गरुड पर विराजमान कमलनयन प्रभु, शेषनाग अनन्त पर शयन करने वाले, शंख और चक्र धारण करने वाले, दैत्यों के संहारक और समस्त लोकों के शरण्य। संक्षिप्त स्तुतियों के बाद एक विनम्र टेक की इसकी रचना इसे समर्पण की एक आदर्श प्रार्थना बनाती है, जिसमें भक्त बार-बार करुणामय प्रभु से समस्त दुःख दूर करने की विनती करता है। यह मन्दिरों और घरों में एक कर्नाटक भक्ति-रचना के रूप में व्यापक रूप से गाया जाता है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
भक्त मानते हैं कि यहाँ 'अशरणशरणद' — जिनका अन्य कोई आश्रय नहीं उनके आश्रय — रूप में सम्बोधित प्रभु उस भक्त को कभी निराश नहीं करते जो 'मेरे दुःख को दूर करो' की सरल प्रार्थना के साथ उन्हें पुकारता है, ठीक वैसे ही जैसे उन्होंने गजेन्द्र हाथी-राज के समर्पण करते ही गरुड पर दौड़कर उसे बचाया था। अनेक लोग इसे शोक के समय गाते हैं और बताते हैं कि उनका बोझ हल्का हो जाता है और शान्ति लौट आती है।
सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित
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गरुडगमन तव चरणकमलमिह मनसि लसतु मम नित्यम्। मम तापमपाकुरु देव॥
Garuda-gamana Tava Charana-kamalam-iha Manasi Lasatu Mama Nityam Mama Tapam-apakuru Deva
अर्थ:हे गरुडवाहन! आपके चरणकमल सदा मेरे हृदय में सुशोभित रहें; हे देव, मेरे ताप (दुःख) को दूर करो।
जलजनयन विधिनमुचिहरणमुख विबुधविनुत पदपद्म। मम तापमपाकुरु देव॥
Jalaja-nayana Vidhi-namuchi-harana-mukha Vibudha-vinuta Pada-padma Mama Tapam-apakuru Deva
अर्थ:हे कमलनयन! जिनके चरण ब्रह्मा, इन्द्र और श्रेष्ठ देवताओं द्वारा वन्दित हैं; हे देव, मेरे दुःख को दूर करो।
भुजगशयन भव मदनजनक मम जननमरणभयहारी। मम तापमपाकुरु देव॥
Bhujaga-shayana Bhava Madana-janaka Mama Janana-marana-bhaya-hari Mama Tapam-apakuru Deva
अर्थ:हे शेषशायी! कामदेव के जनक, जन्म-मरण के भय को हरने वाले; हे देव, मेरे दुःख को दूर करो।
शंखचक्रधर दुष्टदैत्यहर सर्वलोकशरण्य। मम तापमपाकुरु देव॥
Shankha-chakra-dhara Dushta-daitya-hara Sarva-loka-sharanya Mama Tapam-apakuru Deva
अर्थ:हे शंख-चक्रधारी! दुष्ट दैत्यों के संहारक, समस्त लोकों के शरण्य; हे देव, मेरे दुःख को दूर करो।
अगणित गुणगण अशरणशरणद विदलितसुरररिजाल। मम तापमपाकुरु देव॥
Aganita Guna-gana Asharana-sharanada Vidalita-surari-jala Mama Tapam-apakuru Deva
अर्थ:हे अगणित गुणों के स्वामी! अशरणों को शरण देने वाले, देवशत्रुओं के समूह को विदीर्ण करने वाले; हे देव, मेरे दुःख को दूर करो।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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गरुड गमन तव (विष्णु स्तोत्रम्) पाठ के लाभ
भगवान विष्णु के चरणकमलों में प्रेमपूर्ण समर्पण (शरणागति) का भाव जगाता है
'मेरे दुःख को दूर करो' की बार-बार की प्रार्थना तीनों तापों (ताप-त्रय) से राहत देती है
व्याकुल, चिन्तित मन को शान्त करता है और गहन आन्तरिक शान्ति प्रदान करता है
विष्णु को 'सर्वलोकशरण्य', समस्त लोकों के आश्रय रूप में, उनकी रक्षा हेतु पुकारता है
माना जाता है कि यह जन्म-मरण के भय तथा सांसारिक बन्धन को सरल करता है
इसकी कोमल, पुनरावृत्त धुन याद करने में सरल और नित्य भक्ति के लिए आदर्श है
'अशरणशरणद' — असहायों के आश्रय — प्रभु की कृपा खींचता है
गरुड गमन तव (विष्णु स्तोत्रम्) जप विधि
भगवान विष्णु की प्रतिमा के समक्ष शान्त भाव से बैठें, दीप जलाएँ और श्लोकों को उनकी स्वाभाविक कोमल धुन में धीरे-धीरे गाएँ, प्रत्येक श्लोक के अन्त में 'मम तापम् अपाकुरु देव' की टेक को भावपूर्वक दोहराते हुए। इसे प्रभु के चरणकमलों पर पूर्ण ध्यान के साथ, अपने बोझ और शोक को समर्पित करते हुए, एक मधुर भजन के रूप में गाना सर्वोत्तम है। इसे नित्य अथवा जब भी हृदय भारी हो और सान्त्वना चाहे, पढ़ा जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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