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गरुड गमन तव (विष्णु स्तोत्रम्) Meaning — Line by Line

गरुड गमन तव (विष्णु स्तोत्रम्)

Every verse and every word explained in English & Hindi

Meaning — Line by Line

Every verse of गरुड गमन तव (विष्णु स्तोत्रम्) with its Hindi meaning. Tap any word to hear it, or ▶ to recite the verse.

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  1. Verse 1. Garuda-gamana Tava Charana-kamalam-iha
  2. Verse 2. Jalaja-nayana Vidhi-namuchi-harana-mukha
  3. Verse 3. Bhujaga-shayana Bhava Madana-janaka Mama
  4. Verse 4. Shankha-chakra-dhara Dushta-daitya-hara
  5. Verse 5. Aganita Guna-gana Asharana-sharanada
Verse 1#

Garuda-gamana Tava Charana-kamalam-iha

गरुडगमन तव चरणकमलमिह मनसि लसतु मम नित्यम्। मम तापमपाकुरु देव॥

Garuda-gamana Tava Charana-kamalam-iha Manasi Lasatu Mama Nityam Mama Tapam-apakuru Deva

Meaningहे गरुडवाहन! आपके चरणकमल सदा मेरे हृदय में सुशोभित रहें; हे देव, मेरे ताप (दुःख) को दूर करो।

Verse 2#

Jalaja-nayana Vidhi-namuchi-harana-mukha

जलजनयन विधिनमुचिहरणमुख विबुधविनुत पदपद्म। मम तापमपाकुरु देव॥

Jalaja-nayana Vidhi-namuchi-harana-mukha Vibudha-vinuta Pada-padma Mama Tapam-apakuru Deva

Meaningहे कमलनयन! जिनके चरण ब्रह्मा, इन्द्र और श्रेष्ठ देवताओं द्वारा वन्दित हैं; हे देव, मेरे दुःख को दूर करो।

Verse 3#

Bhujaga-shayana Bhava Madana-janaka Mama

भुजगशयन भव मदनजनक मम जननमरणभयहारी। मम तापमपाकुरु देव॥

Bhujaga-shayana Bhava Madana-janaka Mama Janana-marana-bhaya-hari Mama Tapam-apakuru Deva

Meaningहे शेषशायी! कामदेव के जनक, जन्म-मरण के भय को हरने वाले; हे देव, मेरे दुःख को दूर करो।

Verse 4#

Shankha-chakra-dhara Dushta-daitya-hara

शंखचक्रधर दुष्टदैत्यहर सर्वलोकशरण्य। मम तापमपाकुरु देव॥

Shankha-chakra-dhara Dushta-daitya-hara Sarva-loka-sharanya Mama Tapam-apakuru Deva

Meaningहे शंख-चक्रधारी! दुष्ट दैत्यों के संहारक, समस्त लोकों के शरण्य; हे देव, मेरे दुःख को दूर करो।

Verse 5#

Aganita Guna-gana Asharana-sharanada

अगणित गुणगण अशरणशरणद विदलितसुरररिजाल। मम तापमपाकुरु देव॥

Aganita Guna-gana Asharana-sharanada Vidalita-surari-jala Mama Tapam-apakuru Deva

Meaningहे अगणित गुणों के स्वामी! अशरणों को शरण देने वाले, देवशत्रुओं के समूह को विदीर्ण करने वाले; हे देव, मेरे दुःख को दूर करो।

Word-by-Word Breakdown

गरुडगमन
Garuda-gamana
हे गरुड पर सवार होने वाले प्रभु (अर्थात् विष्णु)
तव चरणकमलम्
Tava Charana-kamalam
आपके चरणकमल
इह मनसि लसतु मम नित्यम्
Iha Manasi Lasatu Mama Nityam
वे यहाँ मेरे हृदय में सदा सुशोभित रहें
मम तापम् अपाकुरु देव
Mama Tapam-apakuru Deva
हे देव, मेरे दुःख को दूर करो (यह टेक हर श्लोक में दोहराई जाती है)
जलजनयन
Jalaja-nayana
हे कमलनयन (जल में उत्पन्न कमल के समान नेत्रों वाले)
विधिनमुचिहरणमुख
Vidhi-namuchi-harana-mukha
हे वे जिनके चरणकमल ब्रह्मा (विधि), इन्द्र (नमुचि के संहारक) और प्रमुख देवताओं द्वारा पूजित हैं
विबुधविनुत पदपद्म
Vibudha-vinuta Pada-padma
जिनके चरणकमल विद्वानों एवं देवताओं द्वारा स्तुत हैं
भुजगशयन
Bhujaga-shayana
हे शेषनाग (अनन्त) पर शयन करने वाले
मदनजनक
Madana-janaka
हे मदन (कामदेव) के जनक
जननमरणभयहारी
Janana-marana-bhaya-hari
हे जन्म-मरण (संसारचक्र) के भय को हरने वाले
शंखचक्रधर
Shankha-chakra-dhara
हे शंख और चक्र धारण करने वाले
दुष्टदैत्यहर
Dushta-daitya-hara
हे दुष्ट दैत्यों के संहारक
सर्वलोकशरण्य
Sarva-loka-sharanya
हे समस्त लोकों के शरण्य
अगणित गुणगण
Aganita Guna-gana
हे अगणित (असंख्य) शुभ गुणों वाले
अशरणशरणद
Asharana-sharanada
हे असहायों (जिनका अन्य कोई आश्रय नहीं) को शरण देने वाले
विदलितसुरररिजाल
Vidalita-surari-jala
हे देवताओं के शत्रुओं (दैत्यों) के समूह को विदीर्ण करने वाले

Origin & History

Source: Traditional Vaishnava stotra praising Lord Vishnu (popular Carnatic devotional composition)

Author: Traditionally attributed to the Vaishnava devotional tradition

Period: Medieval to modern devotional period

यह प्रिय स्तोत्र भगवान विष्णु को उनकी अनेक महिमाओं से सम्बोधित करता है — गरुड पर विराजमान कमलनयन प्रभु, शेषनाग अनन्त पर शयन करने वाले, शंख और चक्र धारण करने वाले, दैत्यों के संहारक और समस्त लोकों के शरण्य। संक्षिप्त स्तुतियों के बाद एक विनम्र टेक की इसकी रचना इसे समर्पण की एक आदर्श प्रार्थना बनाती है, जिसमें भक्त बार-बार करुणामय प्रभु से समस्त दुःख दूर करने की विनती करता है। यह मन्दिरों और घरों में एक कर्नाटक भक्ति-रचना के रूप में व्यापक रूप से गाया जाता है।

Frequently Asked Questions

गरुड गमन तव स्तोत्रम् क्या है?
यह भगवान विष्णु को समर्पित एक भक्तिपूर्ण संस्कृत स्तोत्र है, जिसमें प्रत्येक श्लोक प्रभु के किसी रूप की स्तुति करता है और 'मम तापम् अपाकुरु देव' — 'हे देव, मेरे दुःख को दूर करो' — की टेक से समाप्त होता है। इसकी आरम्भिक पंक्ति प्रार्थना करती है कि विष्णु के चरणकमल भक्त के हृदय में सदा सुशोभित रहें।
'गरुड गमन' का क्या अर्थ है?
'गरुड-गमन' का अर्थ है 'जिनका वाहन (गमन) गरुड है' — वह दिव्य गरुड जो भगवान विष्णु का वाहन है। यह विष्णु के प्रति एक स्नेहपूर्ण सम्बोधन है, जिन्हें गरुड समस्त ब्रह्माण्ड में ले जाता है।
यह स्तोत्र किसलिए पढ़ा जाता है?
यह आन्तरिक शान्ति, दुःख तथा सांसारिक चिन्ताओं से राहत, और भगवान विष्णु के प्रति समर्पण एवं भक्ति को गहरा करने के लिए पढ़ा जाता है। 'मेरे दुःख को दूर करो' की बार-बार की प्रार्थना इसे शोक, चिन्ता या कठिनाई के समय में एक सान्त्वनादायक प्रार्थना बनाती है।
इसे कब गाना चाहिए?
यह विशेष रूप से प्रातः और सायं, गुरुवार और एकादशी को, तथा विष्णु या वेंकटेश्वर की पूजा के समय उपयुक्त है। अपनी मधुर धुन और सरल टेक के कारण अनेक भक्त इसे एक शान्तिदायक भजन के रूप में नित्य गाते हैं।

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