Mantra.Tips

गरुड गमन तव (विष्णु स्तोत्रम्) PDF

गरुड गमन तव (विष्णु स्तोत्रम्) की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

गरुडगमन तव चरणकमलमिह मनसि लसतु मम नित्यम्। मम तापमपाकुरु देव॥

Garuda-gamana Tava Charana-kamalam-iha Manasi Lasatu Mama Nityam Mama Tapam-apakuru Deva

हे गरुडवाहन! आपके चरणकमल सदा मेरे हृदय में सुशोभित रहें; हे देव, मेरे ताप (दुःख) को दूर करो।

जलजनयन विधिनमुचिहरणमुख विबुधविनुत पदपद्म। मम तापमपाकुरु देव॥

Jalaja-nayana Vidhi-namuchi-harana-mukha Vibudha-vinuta Pada-padma Mama Tapam-apakuru Deva

हे कमलनयन! जिनके चरण ब्रह्मा, इन्द्र और श्रेष्ठ देवताओं द्वारा वन्दित हैं; हे देव, मेरे दुःख को दूर करो।

भुजगशयन भव मदनजनक मम जननमरणभयहारी। मम तापमपाकुरु देव॥

Bhujaga-shayana Bhava Madana-janaka Mama Janana-marana-bhaya-hari Mama Tapam-apakuru Deva

हे शेषशायी! कामदेव के जनक, जन्म-मरण के भय को हरने वाले; हे देव, मेरे दुःख को दूर करो।

शंखचक्रधर दुष्टदैत्यहर सर्वलोकशरण्य। मम तापमपाकुरु देव॥

Shankha-chakra-dhara Dushta-daitya-hara Sarva-loka-sharanya Mama Tapam-apakuru Deva

हे शंख-चक्रधारी! दुष्ट दैत्यों के संहारक, समस्त लोकों के शरण्य; हे देव, मेरे दुःख को दूर करो।

अगणित गुणगण अशरणशरणद विदलितसुरररिजाल। मम तापमपाकुरु देव॥

Aganita Guna-gana Asharana-sharanada Vidalita-surari-jala Mama Tapam-apakuru Deva

हे अगणित गुणों के स्वामी! अशरणों को शरण देने वाले, देवशत्रुओं के समूह को विदीर्ण करने वाले; हे देव, मेरे दुःख को दूर करो।