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श्री राघवेन्द्र स्तोत्र (पूज्याय राघवेन्द्राय)

🕉️ hindu·📿 108× जप·🕐 प्रातः या सायंकाल; विशेषकर गुरुवार·📜 Shloka by Appannacharya; traditional moola mantra

अन्य नाम / खोज: poojyaya raghavendraya · pujyaya raghavendraya satyadharma rataya cha · om sri raghavendraya namaha · raghavendra swamy mantra

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अर्थ

श्री राघवेन्द्र स्वामी (1595–1671) माध्व (द्वैत वैष्णव) परम्परा के सर्वाधिक पूजनीय गुरु हैं, जिनका बृन्दावन मन्त्रालय में है। उनके भक्त अप्पणाचार्य रचित प्रसिद्ध श्लोक 'पूज्याय राघवेन्द्राय' तथा मूल मन्त्र 'ॐ श्री राघवेन्द्राय नमः' करोड़ों भक्त रक्षा, मनोकामना-पूर्ति व गुरु-कृपा हेतु प्रतिदिन पढ़ते हैं। यह अत्यन्त छोटा व कण्ठस्थ करने में सरल है।

उत्पत्ति और कथा

Shloka by Appannacharya; traditional moola mantra · Appannacharya · 17th century

श्री राघवेन्द्र स्वामी (1595–1671) माध्व परम्परा के एक तेजस्वी सन्त थे, जिन्होंने 1671 में मन्त्रालय में सजीव समाधि (बृन्दावन) ली। प्रसिद्ध श्लोक 'पूज्याय राघवेन्द्राय' उनके परम भक्त अप्पणाचार्य द्वारा रचित था, जिनके विषय में कहा जाता है कि उन्होंने अपना 'राघवेन्द्र स्तोत्र' उसी क्षण पूर्ण किया जब गुरु बृन्दावन में प्रविष्ट हो रहे थे। आज भी दक्षिण भारत भर के भक्त गुरु को कल्पवृक्ष व कामधेनु — हर वरदान देने वाले — रूप में पूजते हैं।

शास्त्रों में वर्णित

असंख्य भक्त बताते हैं कि श्री राघवेन्द्र स्वामी से सच्ची प्रार्थना — 'भजने वालों के लिए कल्पवृक्ष' — असम्भव-सी कठिनाइयों से मुक्ति दिलाती है, इसीलिए वे प्रेमपूर्वक मन्त्रालय के सदा-जीवित गुरु कहलाते हैं।

मंत्र

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श्री राघवेन्द्राय नमः पूज्याय राघवेन्द्राय सत्यधर्मरताय भजतां कल्पवृक्षाय नमतां कामधेनवे

oṃ śrī rāghavendrāya namaḥ || pūjyāya rāghavendrāya satyadharmaratāya ca | bhajatāṃ kalpavṛkṣāya namatāṃ kāmadhenave ||

अर्थ:मन्त्रालय के महान सन्त श्री राघवेन्द्र स्वामी का प्रमुख मन्त्र व श्लोक। 'श्री राघवेन्द्र को नमस्कार। सत्य व धर्म में सदा रत, भजने वालों के लिए कल्पवृक्ष व नमन करने वालों के लिए कामधेनु स्वरूप पूज्य राघवेन्द्र को नमस्कार।'

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

पूज्याय राघवेन्द्राय🔊pūjyāya rāghavendrāyaTo the venerable, worshipful Sri Raghavendra
सत्यधर्मरताय च🔊satyadharmaratāya cawho is ever devoted to truth (satya) and righteousness (dharma)
भजतां कल्पवृक्षाय🔊bhajatāṃ kalpavṛkṣāyawho is the wish-fulfilling tree (Kalpavriksha) to those who worship him
नमतां कामधेनवे🔊namatāṃ kāmadhenaveand the wish-granting cow (Kamadhenu) to those who bow to him

श्री राघवेन्द्र स्तोत्र (पूज्याय राघवेन्द्राय) पाठ के लाभ

श्री राघवेन्द्र स्वामी का प्रमुख मन्त्र, उनकी रक्षा, कृपा व सच्ची मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु पढ़ा जाता है — वे अपने भक्तों के लिए कल्पवृक्ष व कामधेनु रूप में स्तुत हैं।

कठिनाई, भय, रोग व विघ्नों से मुक्ति तथा सत्य व धर्म में स्थिरता हेतु इसका जाप किया जाता है।

गुरुवार को तथा राघवेन्द्र स्वामी आराधना के समय और मन्त्रालय के तीर्थयात्रियों को विशेष प्रिय।

अत्यन्त छोटा व सरलता से कण्ठस्थ होने वाला, दैनिक जप व भक्तिपूर्वक पाठ के लिए उपयुक्त।

श्री राघवेन्द्र स्तोत्र (पूज्याय राघवेन्द्राय) जप विधि

जप संख्या108बार
उत्तम समयप्रातः या सायंकाल; विशेषकर गुरुवार
दिशाEast or North

स्नान कर श्री राघवेन्द्र स्वामी की मूर्ति के समक्ष पूर्व या उत्तर की ओर मुख कर बैठें। दीप जलाकर 'ॐ श्री राघवेन्द्राय नमः' का जप करें (माला पर 108 बार परम्परागत है), फिर 'पूज्याय राघवेन्द्राय' श्लोक भक्तिपूर्वक पढ़ें। गुरुवार व आराधना दिवस विशेष शुभ हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इसका अर्थ है: सत्य व धर्म में सदा रत, भजने वालों के लिए कल्पवृक्ष व नमन करने वालों के लिए कामधेनु स्वरूप पूज्य श्री राघवेन्द्र को नमस्कार। यह श्री राघवेन्द्र स्वामी का सर्वाधिक पढ़ा जाने वाला एकमात्र श्लोक है।
मूल मन्त्र है 'ॐ श्री राघवेन्द्राय नमः', जिसका जप गुरु की रक्षा व कृपा हेतु किया जाता है — सामान्यतः माला पर 108 बार।
श्री राघवेन्द्र स्वामी (1595–1671) मध्वाचार्य द्वारा स्थापित माध्व (द्वैत वैष्णव) परम्परा के महान सन्त, विद्वान व गुरु थे। उनका बृन्दावन आन्ध्र प्रदेश के मन्त्रालय में तुंगभद्रा के तट पर है, जो कर्नाटक, आन्ध्र व अन्यत्र पूजित प्रमुख तीर्थस्थल है।

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