श्री राघवेन्द्र स्तोत्र (पूज्याय राघवेन्द्राय) — Word-by-Word Meaning
श्री राघवेन्द्र स्तोत्र (पूज्याय राघवेन्द्राय)
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
पूज्याय राघवेन्द्राय
pūjyāya rāghavendrāya
पूज्य, वन्दनीय श्री राघवेन्द्र को
सत्यधर्मरताय च
satyadharmaratāya ca
जो सत्य और धर्म में सदा तत्पर हैं
भजतां कल्पवृक्षाय
bhajatāṃ kalpavṛkṣāya
जो उपासना करने वालों के लिए मनोकामना पूर्ण करने वाला कल्पवृक्ष हैं
नमतां कामधेनवे
namatāṃ kāmadhenave
और प्रणाम करने वालों के लिए कामधेनु हैं
Complete Translation
मन्त्रालय के महान सन्त श्री राघवेन्द्र स्वामी का प्रमुख मन्त्र व श्लोक। 'श्री राघवेन्द्र को नमस्कार। सत्य व धर्म में सदा रत, भजने वालों के लिए कल्पवृक्ष व नमन करने वालों के लिए कामधेनु स्वरूप पूज्य राघवेन्द्र को नमस्कार।'
Origin & History
Source: Shloka by Appannacharya; traditional moola mantra
Author: Appannacharya
Period: 17th century
श्री राघवेन्द्र स्वामी (1595–1671) माध्व परम्परा के एक तेजस्वी सन्त थे, जिन्होंने 1671 में मन्त्रालय में सजीव समाधि (बृन्दावन) ली। प्रसिद्ध श्लोक 'पूज्याय राघवेन्द्राय' उनके परम भक्त अप्पणाचार्य द्वारा रचित था, जिनके विषय में कहा जाता है कि उन्होंने अपना 'राघवेन्द्र स्तोत्र' उसी क्षण पूर्ण किया जब गुरु बृन्दावन में प्रविष्ट हो रहे थे। आज भी दक्षिण भारत भर के भक्त गुरु को कल्पवृक्ष व कामधेनु — हर वरदान देने वाले — रूप में पूजते हैं।
Frequently Asked Questions
'पूज्याय राघवेन्द्राय' का अर्थ क्या है?▼
इसका अर्थ है: सत्य व धर्म में सदा रत, भजने वालों के लिए कल्पवृक्ष व नमन करने वालों के लिए कामधेनु स्वरूप पूज्य श्री राघवेन्द्र को नमस्कार। यह श्री राघवेन्द्र स्वामी का सर्वाधिक पढ़ा जाने वाला एकमात्र श्लोक है।
श्री राघवेन्द्र मूल मन्त्र क्या है?▼
मूल मन्त्र है 'ॐ श्री राघवेन्द्राय नमः', जिसका जप गुरु की रक्षा व कृपा हेतु किया जाता है — सामान्यतः माला पर 108 बार।
श्री राघवेन्द्र स्वामी कौन थे?▼
श्री राघवेन्द्र स्वामी (1595–1671) मध्वाचार्य द्वारा स्थापित माध्व (द्वैत वैष्णव) परम्परा के महान सन्त, विद्वान व गुरु थे। उनका बृन्दावन आन्ध्र प्रदेश के मन्त्रालय में तुंगभद्रा के तट पर है, जो कर्नाटक, आन्ध्र व अन्यत्र पूजित प्रमुख तीर्थस्थल है।
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