धन्वंतरि उपचार मंत्र (महामंत्र)
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✦ अर्थ
यह भगवान धन्वन्तरि का महान उपचार (आरोग्य) मंत्र है — वे दिव्य वैद्य, जो समुद्र-मन्थन से अमृत-कलश लिए प्रकट हुए। यह मंत्र उन्हें वासुदेव और सुदर्शनधारी, समस्त रोगों के नाशक तथा त्रिलोकनाथ के रूप में नमन करता है। आयुर्वेद एवं वैष्णव परंपरा में आरोग्य, रोग से मुक्ति तथा शरीर-मन की रक्षा के लिए यह सर्वप्रमुख प्रार्थना है।
उत्पत्ति और कथा
Ayurvedic and Vaishnava tradition; the Maha Dhanvantari mantra invoked for healing and arogya · Unknown (traditional) · Ancient
जब देवों और असुरों ने अमरत्व के अमृत हेतु क्षीरसागर का मन्थन (समुद्र मन्थन) किया, तब भगवान धन्वन्तरि अमृत-कलश लेकर जल से प्रकट हुए — वही अमृत जो रोग और मृत्यु पर विजय पाता है। आयुर्वेद के प्रवर्तक रूप में पूजित, उन्हें उपचार और औषधि के आरम्भ में स्मरण किया जाता है। यह महामंत्र उनके दिव्य वैद्य स्वरूप को रक्षक सुदर्शन तथा महाविष्णु की सर्वोच्चता के साथ जोड़ता है, जिससे यह समस्त रोगों के नाश की पूर्ण प्रार्थना बन जाता है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
वैद्य और भक्त लंबे समय से औषधियों तथा पवित्र जल पर इस मंत्र का जप कर उन्हें देने से पूर्व अभिमंत्रित करते आए हैं, इस विश्वास के साथ कि अमृत-कलशधारी भगवान उनमें आरोग्य का संचार करते हैं। विशेषकर धनतेरस पर परिवार इस मंत्र से धन्वन्तरि का आवाहन कर रोगमुक्त वर्ष की प्रार्थना करते हैं, उन्हें समस्त व्याधियों के नाशक रूप में स्मरण करते हुए।
मंत्र
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ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वन्तरये। अमृतकलशहस्ताय सर्वामयविनाशनाय त्रैलोक्यनाथाय श्रीमहाविष्णवे नमः॥
Om Namo Bhagavate Maha-Sudarshanaya Vasudevaya Dhanvantaraye Amrita-kalasha-hastaya Sarva-amaya-vinashanaya Trailokya-nathaya Sri Maha-Vishnave Namah
अर्थ:ॐ, भगवान को नमस्कार — जो महासुदर्शनधारी, वासुदेव और धन्वन्तरि हैं, जिनके हाथ में अमृत-कलश है, जो समस्त रोगों के नाशक तथा त्रिलोक के नाथ हैं; उन श्रीमहाविष्णु को नमस्कार।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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धन्वंतरि उपचार मंत्र (महामंत्र) पाठ के लाभ
स्वास्थ्य, आरोग्य एवं रोग से उबरने हेतु सर्वप्रमुख मंत्र
अमरत्व के अमृत-कलशधारी दिव्य वैद्य धन्वन्तरि का आवाहन करता है
श्रद्धापूर्वक जप करने पर दीर्घकालीन एवं गम्भीर रोगों के उपचार में सहायक माना जाता है
रक्षा (सुदर्शन) तथा उपचार को जोड़ता है, शरीर और मन दोनों की रक्षा करता है
परम्परा अनुसार औषधि, जल या भोजन पर अभिमंत्रित कर रोगी हेतु आशीर्वादित किया जाता है
दीर्घायु, ओज तथा रोगमुक्ति (आरोग्य) को बढ़ावा देता है
धनतेरस (धन्वन्तरि जयन्ती) पर वर्ष भर के कल्याण हेतु विशेष फलदायी
धन्वंतरि उपचार मंत्र (महामंत्र) जप विधि
स्नान के पश्चात् भगवान धन्वन्तरि की छवि के समक्ष बैठें — जो चतुर्भुज रूप में शंख, चक्र, जलौका (जोंक) और अमृत-कलश धारण किए दर्शाए जाते हैं — और घी का दीप जलाएँ। आरोग्य एवं उपचार पर एकाग्र होकर तुलसी या रुद्राक्ष की माला पर मंत्र 108 बार जपें। रोगी के लिए मंत्र को जल, औषधि या भोजन पर अभिमंत्रित कर वह रोगी को दिया जा सकता है। नियमित जप तथा धनतेरस पर यह सर्वाधिक फलदायी है। गम्भीर रोग में इसे प्रायः महामृत्युंजय मंत्र के साथ जोड़ा जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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