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धन्वंतरि उपचार मंत्र (महामंत्र) — Word-by-Word Meaning

धन्वंतरि उपचार मंत्र (महामंत्र)

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

ॐ नमो भगवते
Om Namo Bhagavate
ॐ, भगवान को नमस्कार (परम पूज्य, समस्त दिव्य ऐश्वर्यों से युक्त)
महासुदर्शनाय
Maha-Sudarshanaya
महान सुदर्शन चक्र धारण करने वाले को (विष्णु का रक्षक आयुध)
वासुदेवाय
Vasudevaya
वासुदेव को, सर्वव्यापी परम प्रभु को
धन्वन्तरये
Dhanvantaraye
धन्वन्तरि को — दिव्य वैद्य एवं आयुर्वेद के जनक, विष्णु के अवतार
अमृतकलशहस्ताय
Amrita-kalasha-hastaya
जो अपने हाथ में अमरत्व के अमृत का कलश धारण करते हैं
सर्वामयविनाशनाय
Sarva-amaya-vinashanaya
जो समस्त रोगों एवं व्याधियों (सर्व-आमय) के नाशक हैं
त्रैलोक्यनाथाय
Trailokya-nathaya
जो त्रिलोक के नाथ हैं
श्रीमहाविष्णवे
Sri Maha-Vishnave
श्रीमहाविष्णु को, परम विष्णु को
नमः
Namah
नमस्कार, मैं प्रणाम करता हूँ

Complete Translation

ॐ, भगवान को नमस्कार — जो महासुदर्शनधारी, वासुदेव और धन्वन्तरि हैं, जिनके हाथ में अमृत-कलश है, जो समस्त रोगों के नाशक तथा त्रिलोक के नाथ हैं; उन श्रीमहाविष्णु को नमस्कार।

Origin & History

Source: Ayurvedic and Vaishnava tradition; the Maha Dhanvantari mantra invoked for healing and arogya

Author: Unknown (traditional)

Period: Ancient

जब देवों और असुरों ने अमरत्व के अमृत हेतु क्षीरसागर का मन्थन (समुद्र मन्थन) किया, तब भगवान धन्वन्तरि अमृत-कलश लेकर जल से प्रकट हुए — वही अमृत जो रोग और मृत्यु पर विजय पाता है। आयुर्वेद के प्रवर्तक रूप में पूजित, उन्हें उपचार और औषधि के आरम्भ में स्मरण किया जाता है। यह महामंत्र उनके दिव्य वैद्य स्वरूप को रक्षक सुदर्शन तथा महाविष्णु की सर्वोच्चता के साथ जोड़ता है, जिससे यह समस्त रोगों के नाश की पूर्ण प्रार्थना बन जाता है।

Frequently Asked Questions

भगवान धन्वन्तरि कौन हैं?
धन्वन्तरि दिव्य वैद्य और आयुर्वेद के जनक हैं, जिन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। वे क्षीरसागर के मन्थन (समुद्र मन्थन) से अमरत्व के अमृत-कलश को लेकर प्रकट हुए। आरोग्य, उपचार और दीर्घायु हेतु उनकी पूजा होती है।
इस धन्वन्तरि उपचार मंत्र का उपयोग किसलिए होता है?
यह स्वास्थ्य, रोग से उबरने और समग्र कल्याण हेतु जपा जाता है। चूँकि मंत्र उन्हें 'सर्व-आमय-विनाशन' (समस्त रोगों के नाशक) कहता है, भक्त अपने अथवा किसी रोगी के आरोग्य हेतु, और शारीरिक-मानसिक ओज बनाए रखने हेतु इसका जप करते हैं।
यह संक्षिप्त धन्वन्तरि मंत्र से किस प्रकार भिन्न है?
संक्षिप्त मंत्र केवल 'ॐ नमो भगवते धन्वन्तरये' है। यह दीर्घ महामंत्र इसके अतिरिक्त सुदर्शन, वासुदेव, अमृत-कलश और महाविष्णु का आवाहन करता है, रक्षात्मक एवं उपचारात्मक शक्ति को जोड़ता है, और प्रायः विस्तृत आयुर्वेदिक पूजा तथा उपचार-अनुष्ठानों में प्रयुक्त होता है।
इसे जपने का सर्वोत्तम समय कौन-सा है?
स्नान के पश्चात् प्रातःकाल जप करना श्रेष्ठ है, और यह धनतेरस (धन्वन्तरि जयन्ती, दीपावली से दो दिन पूर्व) तथा मंगलवार को विशेष शुभ है। अस्वस्थता के समय अथवा किसी अन्य के आरोग्य की प्रार्थना करते समय भी इसे जपा जा सकता है।

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