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நாச்சியார் திருமொழி — வாரணம் ஆயிரம்

🕉️ hindu·📿 1× जप·🕐 विवाह एवं मंगनी के अवसर पर; मार्गष़ि मास में, शुक्रवारों को, तथा मंगल विवाह हेतु दैनिक प्रार्थना में·📜 Nalayira Divya Prabandham — Nachiyar Thirumozhi, 6th decad 'Varanam Ayiram', by Andal (Tamil, c. 8th century CE)

अन्य नाम / खोज: varanam ayiram · vaaranam aayiram · nachiyar thirumozhi · andal varanam ayiram · andal wedding song

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अर्थ

'वारणम् आयिरम्' आण्डाल की नाच्चियार् तिरुमोष़ि का प्रसिद्ध छठा दशक है, जिसमें संत भगवान नारायण (कृष्ण) से अपने विवाह का स्वप्न वर्णित करती हैं। पद-दर-पद यह सम्पूर्ण विवाह को उद्घाटित करता है — सहस्र हाथियों की भव्य शोभायात्रा, दिन का निश्चय, देवों का एकत्र होना, देवी द्वारा वर-माला पहनाना, पाणिग्रहण, माता-पिता द्वारा कन्यादान, और पवित्र स्नान। चूँकि यह एक सम्पूर्ण मंगल-विवाह का वर्णन करता है, यह आज भी श्रीवैष्णव विवाहों में गाया जाता है।

उत्पत्ति और कथा

Nalayira Divya Prabandham — Nachiyar Thirumozhi, 6th decad 'Varanam Ayiram', by Andal (Tamil, c. 8th century CE) · Andal (Godadevi / Kodhai), Alwar saint · Tamil Bhakti era (c. 8th century CE)

आण्डाल, श्रीविल्लिपुत्तूर के पेरियाष़्वार की पालिता-पुत्री, भगवान विष्णु से इतना सम्पूर्ण प्रेम करती थीं कि मन्दिर के लिए बनी मालाओं को अर्पित किए जाने से पूर्व स्वयं धारण कर लेती थीं। नाच्चियार् तिरुमोष़ि में वे प्रभु से मिलन की अपनी उत्कंठा उँडेलती हैं, और इस छठे दशक में वे एक स्वप्न का वर्णन करती हैं जिसमें सम्पूर्ण विवाह सम्पन्न होता है — प्रभु शोभायात्रा में आते हैं, देवगण एकत्र होते हैं, और वे स्वयं नारायण से ब्याही जाती हैं। परम्परा कहती है कि वे अन्ततः श्रीरंगम् के भगवान रंगनाथ में लीन हो गईं।

शास्त्रों में वर्णित

परम्परा कहती है कि आण्डाल का प्रेम इतना शुद्ध था कि स्वयं भगवान रंगनाथ ने उन्हें अपनी वधू रूप में श्रीरंगम् लाने की आज्ञा दी; गर्भगृह में प्रवेश कर वे प्रभु में लीन हो गईं। इसीलिए 'वारणम् आयिरम्' में उनका स्वप्न-विवाह उस दिव्य मिलन की पूर्व-सूचना के रूप में पूजित है, और उसी मंगल आशीर्वाद को आकर्षित करने हेतु विवाहों में गाया जाता है।

सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

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श्लोक 1

வாரணம் ஆயிரம் சூழ வலம்செய்து நாரண நம்பி நடக்கின்றான் என்றெதிர் பூரண பொற்குடம் வைத்துப் புறமெங்கும் தோரணம் நாட்டக் கனாக்கண்டேன் தோழீ நான்.

vāraṇam āyiram sūzha valamseydhu nāraṇa nambi naḍakkinṟān enṟedhir pūraṇa poṟkuḍam vaiththup puṟamengum thōraṇam nāṭṭak kanākkaṇḍēn thōzhī nān.

अर्थ:ये आण्डाल की नाच्चियार् तिरुमोष़ि के प्रसिद्ध छठे दशक 'वारणम् आयिरम्' के पासुर हैं — वह स्वप्न-विवाह जिसमें आण्डाल स्वयं को भगवान नारायण (कृष्ण) से विवाहित देखती हैं। यह आज भी श्रीवैष्णव और अय्यंगार विवाहों में गाया जाता है।

श्लोक 2

நாளை வதுவை மணமென்று நாள்இட்டு பாளை கமுகு பரிசுடைப் பந்தற்கீழ் கோளரி மாதவன் கோவிந்தன் என்பான்ஓர் காளை புகுதக் கனாக்கண்டேன் தோழீ நான்.

nāḷai vadhuvai maṇamenṟu nāḷiṭṭu pāḷai kamugu parisuḍaip pandhaṟkīzh kōḷari mādhavan gōvindhan enbānōr kāḷai pugudhak kanākkaṇḍēn thōzhī nān.

अर्थ:'हे सखी! मैंने स्वप्न में देखा कि सहस्र हाथियों से घिरे, नगर की प्रदक्षिणा करते हुए पूर्ण प्रभु नारायण चले आ रहे हैं; और सर्वत्र पूर्ण स्वर्ण-कलश रखे गए तथा उत्सव के तोरण सजाए गए।'

श्लोक 3

இந்திரன் உள்ளிட்ட தேவர் குழாம்எல்லாம் வந்திருந்து என்னை மகள்பேசி மந்திரித்து மந்திரக் கோடி உடுத்தி மணமாலை அந்தரி சூட்டக் கனாக்கண்டேன் தோழீ நான்.

indiran uḷḷiṭṭa dēvar kuzhāmellām vandhirundhu ennai magaḷpēsi mandhiriththu mandhirak kōḍi uḍuththi maṇamālai andhari sūṭṭak kanākkaṇḍēn thōzhī nān.

अर्थ:'हे सखी! मैंने स्वप्न में देखा कि "कल विवाह है" कहकर दिन निश्चित किया गया; और सुपारी के वृक्षों तथा कोमल पुष्पों से सज्जित मंडप के नीचे, वह युवा वर — नरसिंह माधव, गोविंद — (वर रूप में) प्रवेश कर रहा है।'

श्लोक 4

கைத்தலம் பற்றக் கனாக்கண்டேன் தோழீ நான் மெய்த்தலம் பற்றக் கனாக்கண்டேன் தோழீ நான் அத்தனும் அன்னையும் என்னைக் கொடுத்திட முத்தணல் நீரால் முழுக்காட்டிக் கண்டேனே.

kaiththalam paṟṟak kanākkaṇḍēn thōzhī nān meyththalam paṟṟak kanākkaṇḍēn thōzhī nān aththanum annaiyum ennaik koḍuththiḍa muththaṇal nīrāl muzhukkāṭṭik kaṇḍēnē.

अर्थ:'हे सखी! मैंने स्वप्न में देखा कि इंद्र आदि समस्त देवगण आकर बैठे, मुझे वधू कहकर विवाह की मंत्रणा की, मुझे पवित्र वधू-वस्त्र पहनाया, और देवी (दुर्गा) ने मुझे विवाह-माला पहनाई।'

शब्द-दर-शब्द अर्थ

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வாரணம் ஆயிரம் சூழ🔊vāraṇam āyiram sūzhaसहस्र हाथियों से घिरे हुए (भव्य शोभायात्रा में)।
வலம்செய்து🔊valamseydhuनगर की मंगल प्रदक्षिणा करते हुए।
நாரண நம்பி நடக்கின்றான் என்று🔊nāraṇa nambi naḍakkinṟān enṟuकहते हुए कि 'पूर्ण प्रभु नारायण चले आ रहे हैं/यहाँ आ रहे हैं!'
பூரண பொற்குடம் வைத்து🔊pūraṇa poṟkuḍam vaiththuपूर्ण स्वर्ण-कलश (पूर्ण-कुम्भ, मंगल स्वागत) रखकर।
தோரணம் நாட்ட🔊thōraṇam nāṭṭaसर्वत्र तोरण / सजावटी मेहराब लगाते हुए।
கனாக்கண்டேன் தோழீ நான்🔊kanākkaṇḍēn thōzhī nānहे सखी, मैंने यह स्वप्न में देखा!
நாளை வதுவை மணமென்று நாள்இட்டு🔊nāḷai vadhuvai maṇamenṟu nāḷiṭṭu'कल विवाह-संस्कार है' कहकर दिन निश्चित करते हुए।
கோளரி மாதவன் கோவிந்தன்🔊kōḷari mādhavan gōvindhanभयंकर सिंह (नरसिंह) माधव, गोविंद (कृष्ण)।
காளை புகுத🔊kāḷai pugudhaवह युवा वर (विवाह-मंडप में) प्रवेश करते हुए।
இந்திரன் உள்ளிட்ட தேவர் குழாம் எல்லாம்🔊indiran uḷḷiṭṭa dēvar kuzhām ellāmइंद्र सहित समस्त देवगण।
என்னை மகள்பேசி மந்திரித்து🔊ennai magaḷpēsi mandhiriththuमुझे औपचारिक रूप से वधू कहकर तथा (विवाह की) मंत्रणा करते हुए।
மந்திரக் கோடி உடுத்தி🔊mandhirak kōḍi uḍuththi(मुझे) पवित्र वधू-वस्त्र पहनाते हुए।
மணமாலை அந்தரி சூட்ட🔊maṇamālai andhari sūṭṭaदुर्गा (अन्तरी) (मुझे) विवाह-माला पहनाते हुए।
கைத்தலம் பற்ற🔊kaiththalam paṟṟa(उन्होंने) मेरा हाथ थामा (पाणिग्रहण-संस्कार, वधू का हाथ लेना)।
அத்தனும் அன்னையும் என்னைக் கொடுத்திட🔊aththanum annaiyum ennaik koḍuththiḍaमेरे माता-पिता मुझे (कन्यादान में) दान करते हुए।
முத்தணல் நீரால் முழுக்காட்டி🔊muththaṇal nīrāl muzhukkāṭṭi(मुझे) विवाह-संस्कार के पवित्र जल से स्नान कराते हुए।

நாச்சியார் திருமொழி — வாரணம் ஆயிரம் पाठ के लाभ

श्रीवैष्णव एवं अय्यंगार विवाहों में पारम्परिक रूप से गाया जाता है, क्योंकि यह प्रभु से सम्पूर्ण मंगल-विवाह का वर्णन करता है।

अविवाहितों को उत्तम एवं समयोचित विवाह का तथा विवाहित दम्पतियों को सामंजस्य का आशीर्वाद देने वाला माना जाता है।

आण्डाल की वधू-भक्ति (मधुर भक्ति) को विकसित करता है — ईश्वर से मिलन की पूर्ण प्रीति एवं उत्कंठा।

नालायिर दिव्य प्रबन्धम् का अंग, जो श्रीवैष्णव परम्परा के मन्दिरों एवं घरों में पढ़ा जाता है।

भगवान नारायण-कृष्ण को दिव्य वर के रूप में आवाहित करता है, आत्मा की उनसे एकत्व की लालसा को गहन करता है।

நாச்சியார் திருமொழி — வாரணம் ஆயிரம் जप विधि

जप संख्या1बार
उत्तम समयविवाह एवं मंगनी के अवसर पर; मार्गष़ि मास में, शुक्रवारों को, तथा मंगल विवाह हेतु दैनिक प्रार्थना में
दिशाFacing the deity of Vishnu / Krishna or east

भगवान कृष्ण अथवा रंगनाथ की मूर्ति के समक्ष बैठकर भक्ति-पूर्वक इस दशक का पाठ करें, और आण्डाल द्वारा वर्णित स्वप्न के अनुसार पवित्र विवाह के प्रत्येक चरण का चित्रण करें। यह विशेष रूप से विवाह की प्रार्थना करने वालों द्वारा पढ़ा जाता है, तथा आशीर्वाद रूप में श्रीवैष्णव विवाहों में पारम्परिक रूप से गाया जाता है। जहाँ ज्ञात हो वहाँ आण्डाल के तनियन से आरम्भ करें, और पासुरों को क्रम से पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह आण्डाल की नाच्चियार् तिरुमोष़ि का प्रसिद्ध छठा दशक (तिरुमोष़ि) है, जिसमें आण्डाल भगवान नारायण (कृष्ण) से अपने विवाह का स्वप्न वर्णित करती हैं। यह विवाह का चरण-दर-चरण वर्णन करता है और आज भी श्रीवैष्णव विवाहों में गाया जाता है।
आण्डाल (गोदादेवी) श्रीवैष्णव परम्परा के बारह आष़्वार संतों में एकमात्र स्त्री हैं। श्रीविल्लिपुत्तूर में तुलसी-उद्यान में संत पेरियाष़्वार को बालिका रूप में मिलीं, वे भगवान रंगनाथ के प्रति गहन प्रेम में बड़ी हुईं और परम्परानुसार अन्ततः उन्हीं में लीन हो गईं। उन्होंने संसार को तिरुप्पावै एवं नाच्चियार् तिरुमोष़ि प्रदान किए।
क्योंकि यह दशक प्रभु से एक सम्पूर्ण, मंगल विवाह का वर्णन करता है — शोभायात्रा, मंगनी, माला, पाणिग्रहण, कन्यादान एवं पवित्र स्नान। प्रत्येक पद पारम्परिक विवाह के एक चरण से मेल खाता है, जिससे यह वर-वधू के लिए सर्वोत्तम आशीर्वाद बन जाता है।
हाँ। नाच्चियार् तिरुमोष़ि आष़्वारों के 4,000-पद वाले तमिल काव्य-संग्रह नालायिर दिव्य प्रबन्धम् में आण्डाल की दो कृतियों में से एक है। 'वारणम् आयिरम्' इसका छठा दशक है तथा समस्त संग्रह के सर्वाधिक प्रिय भागों में से एक है।

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