मधुराष्टकम्
अन्य नाम / खोज: adharam madhuram vadanam madhuram · madhuradhipater akhilam madhuram · madhurashtakam lyrics
अपनी भाषा/लिपि में पढ़ें
✦ अर्थ
मधुराष्टकम् श्री वल्लभाचार्य द्वारा रचित आठ श्लोकों का मधुर स्तोत्र है जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के प्रत्येक गुण को 'मधुरम्' कहा गया है। यह हृदय को कृष्ण-प्रेम और मधुर्य-भाव से भर देता है, विशेषकर जन्माष्टमी और भागवत पाठ में गाया जाता है।
उत्पत्ति और कथा
Composed by Sri Vallabhacharya · Sri Vallabhacharya · c. 15th–16th century CE
कृष्ण-भक्ति के महान आचार्य और पुष्टिमार्ग के संस्थापक श्री वल्लभाचार्य ने मधुराष्टकम् की रचना प्रेम के स्वतःस्फूर्त उद्गार के रूप में की। गोकुल में श्रीकृष्ण के सौंदर्य से अभिभूत होकर उन्होंने गाया कि मधुराधिपति का प्रत्येक अंश — उनका रूप, उनकी वेणु, उनकी लीला, यहाँ तक कि उनके चरणों की धूलि और यमुना की लहरें भी — स्वयं मधुरता के अतिरिक्त कुछ नहीं हैं।
✦ शास्त्रों में वर्णित
पुष्टिमार्ग के भक्त मानते हैं कि मधुराष्टकम् स्वयं वही मधुरता धारण करता है जिसका यह वर्णन करता है: जो इसे प्रेम से गाते हैं, वे कृष्ण की उपस्थिति की मधुर्य — मधुमय आनंद — का आस्वादन करते हैं, और उनका हृदय अनायास भक्ति में खिंच जाता है।
सुनें और साथ में जपें
सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित
किसी भी पंक्ति या ▶ बटन पर टैप कर सुनें
अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम् । हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ १॥
Adharam madhuram vadanam madhuram nayanam madhuram hasitam madhuram Hridayam madhuram gamanam madhuram madhuradhipaterakhilam madhuram
अर्थ:अधर मधुर हैं, मुख मधुर है, नेत्र मधुर हैं, हँसी मधुर है; हृदय मधुर है, चाल मधुर है — मधुराधिपति (श्रीकृष्ण) का सब कुछ मधुर है।
वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरम् । चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ २॥
Vachanam madhuram charitam madhuram vasanam madhuram valitam madhuram Chalitam madhuram bhramitam madhuram madhuradhipaterakhilam madhuram
अर्थ:वचन मधुर हैं, चरित्र मधुर है, वस्त्र मधुर हैं, अंगभंगिमा मधुर है; चलना मधुर है, विचरण मधुर है — मधुराधिपति का सब कुछ मधुर है।
वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ । नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ ३॥
Venurmadhuro renurmadhurah panirmadhurah padau madhurau Nrityam madhuram sakhyam madhuram madhuradhipaterakhilam madhuram
अर्थ:वेणु (बाँसुरी) मधुर है, चरणधूलि मधुर है, हाथ मधुर हैं, चरण मधुर हैं; नृत्य मधुर है, मित्रता मधुर है — मधुराधिपति का सब कुछ मधुर है।
गीतं मधुरं पीतं मधुरं भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरम् । रूपं मधुरं तिलकं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ ४॥
Gitam madhuram pitam madhuram bhuktam madhuram suptam madhuram Rupam madhuram tilakam madhuram madhuradhipaterakhilam madhuram
अर्थ:गीत मधुर है, पीना मधुर है, भोजन मधुर है, शयन मधुर है; रूप मधुर है, तिलक मधुर है — मधुराधिपति का सब कुछ मधुर है।
करणं मधुरं तरणं मधुरं हरणं मधुरं रमणं मधुरम् । वमितं मधुरं शमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ ५॥
Karanam madhuram taranam madhuram haranam madhuram ramanam madhuram Vamitam madhuram shamitam madhuram madhuradhipaterakhilam madhuram
अर्थ:कर्म मधुर है, तैरना मधुर है, हरण मधुर है, रमण मधुर है; शमन मधुर है — मधुराधिपति का सब कुछ मधुर है।
गुञ्जा मधुरा माला मधुरा यमुना मधुरा वीची मधुरा । सलिलं मधुरं कमलं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ ६॥
Gunja madhura mala madhura yamuna madhura vichi madhura Salilam madhuram kamalam madhuram madhuradhipaterakhilam madhuram
अर्थ:गुंजा (माला) मधुर है, माला मधुर है, यमुना मधुर है, उसकी लहरें मधुर हैं; जल मधुर है, कमल मधुर है — मधुराधिपति का सब कुछ मधुर है।
गोपी मधुरा लीला मधुरा युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरम् । दृष्टं मधुरं शिष्टं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ ७॥
Gopi madhura lila madhura yuktam madhuram muktam madhuram Drishtam madhuram shishtam madhuram madhuradhipaterakhilam madhuram
अर्थ:गोपियाँ मधुर हैं, लीला मधुर है, मिलन मधुर है, मुक्ति देना मधुर है; दृष्टि मधुर है, शिष्टाचार मधुर है — मधुराधिपति का सब कुछ मधुर है।
गोपा मधुरा गावो मधुरा यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा । दलितं मधुरं फलितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ ८॥
Gopa madhura gavo madhura yashtirmadhura srishtirmadhura Dalitam madhuram phalitam madhuram madhuradhipaterakhilam madhuram
अर्थ:ग्वाले मधुर हैं, गायें मधुर हैं, लाठी मधुर है, सृष्टि मधुर है; दलन मधुर है, फल देना मधुर है — मधुराधिपति का सब कुछ मधुर है।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें
मधुराष्टकम् पाठ के लाभ
श्री वल्लभाचार्य द्वारा रचित एक मधुर स्तोत्र जिसमें कृष्ण का प्रत्येक गुण 'मधुरम्' — मधुर — बताया गया है, जो हृदय को प्रेम (भक्ति-रस) से भर देता है।
कृष्ण के प्रति प्रेममयी भक्ति के सर्वमधुर भाव — मधुर्य-भाव — का विकास करता है।
अशांत मन को शांत करता है और मधुराधिपति के स्मरण के आनंद से भर देता है।
संक्षिप्त, संगीतमय और याद करने में सरल — दैनिक जप तथा बच्चों के लिए आदर्श।
विशेषकर जन्माष्टमी, भागवत पाठ के समय और पुष्टिमार्ग की सेवा में गाया जाता है।
कृष्ण के सुंदर रूप, लीला और चरित्र के एकाग्र स्मरण को गहरा करता है।
मधुराष्टकम् जप विधि
श्रीकृष्ण के चित्र के समक्ष बैठकर आठों श्लोकों को धीरे-धीरे जपें, वर्णित मधुरता का ध्यान करते हुए — उनके अधर, मुस्कान, वेणु, नृत्य और यमुना। बार-बार आने वाला शब्द 'मधुरम्' मन को प्रेम में पिघला दे। इसे मधुर स्वर में गाया जा सकता है; सरल छंद इसे दैनिक अभ्यास के लिए उपयुक्त बनाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ये भी पढ़ें
ॐ
Explore more sacred mantras with complete meaning and chanting guides