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நாச்சியார் திருமொழி — வாரணம் ஆயிரம் — Word-by-Word Meaning

நாச்சியார் திருமொழி — வாரணம் ஆயிரம்

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

வாரணம் ஆயிரம் சூழ
vāraṇam āyiram sūzha
सहस्र हाथियों से घिरे हुए (भव्य शोभायात्रा में)।
வலம்செய்து
valamseydhu
नगर की मंगल प्रदक्षिणा करते हुए।
நாரண நம்பி நடக்கின்றான் என்று
nāraṇa nambi naḍakkinṟān enṟu
कहते हुए कि 'पूर्ण प्रभु नारायण चले आ रहे हैं/यहाँ आ रहे हैं!'
பூரண பொற்குடம் வைத்து
pūraṇa poṟkuḍam vaiththu
पूर्ण स्वर्ण-कलश (पूर्ण-कुम्भ, मंगल स्वागत) रखकर।
தோரணம் நாட்ட
thōraṇam nāṭṭa
सर्वत्र तोरण / सजावटी मेहराब लगाते हुए।
கனாக்கண்டேன் தோழீ நான்
kanākkaṇḍēn thōzhī nān
हे सखी, मैंने यह स्वप्न में देखा!
நாளை வதுவை மணமென்று நாள்இட்டு
nāḷai vadhuvai maṇamenṟu nāḷiṭṭu
'कल विवाह-संस्कार है' कहकर दिन निश्चित करते हुए।
கோளரி மாதவன் கோவிந்தன்
kōḷari mādhavan gōvindhan
भयंकर सिंह (नरसिंह) माधव, गोविंद (कृष्ण)।
காளை புகுத
kāḷai pugudha
वह युवा वर (विवाह-मंडप में) प्रवेश करते हुए।
இந்திரன் உள்ளிட்ட தேவர் குழாம் எல்லாம்
indiran uḷḷiṭṭa dēvar kuzhām ellām
इंद्र सहित समस्त देवगण।
என்னை மகள்பேசி மந்திரித்து
ennai magaḷpēsi mandhiriththu
मुझे औपचारिक रूप से वधू कहकर तथा (विवाह की) मंत्रणा करते हुए।
மந்திரக் கோடி உடுத்தி
mandhirak kōḍi uḍuththi
(मुझे) पवित्र वधू-वस्त्र पहनाते हुए।
மணமாலை அந்தரி சூட்ட
maṇamālai andhari sūṭṭa
दुर्गा (अन्तरी) (मुझे) विवाह-माला पहनाते हुए।
கைத்தலம் பற்ற
kaiththalam paṟṟa
(उन्होंने) मेरा हाथ थामा (पाणिग्रहण-संस्कार, वधू का हाथ लेना)।
அத்தனும் அன்னையும் என்னைக் கொடுத்திட
aththanum annaiyum ennaik koḍuththiḍa
मेरे माता-पिता मुझे (कन्यादान में) दान करते हुए।
முத்தணல் நீரால் முழுக்காட்டி
muththaṇal nīrāl muzhukkāṭṭi
(मुझे) विवाह-संस्कार के पवित्र जल से स्नान कराते हुए।

Complete Translation

ये आण्डाल की नाच्चियार् तिरुमोष़ि के प्रसिद्ध छठे दशक 'वारणम् आयिरम्' के पासुर हैं — वह स्वप्न-विवाह जिसमें आण्डाल स्वयं को भगवान नारायण (कृष्ण) से विवाहित देखती हैं। यह आज भी श्रीवैष्णव और अय्यंगार विवाहों में गाया जाता है। 'हे सखी! मैंने स्वप्न में देखा कि सहस्र हाथियों से घिरे, नगर की प्रदक्षिणा करते हुए पूर्ण प्रभु नारायण चले आ रहे हैं; और सर्वत्र पूर्ण स्वर्ण-कलश रखे गए तथा उत्सव के तोरण सजाए गए।' 'हे सखी! मैंने स्वप्न में देखा कि "कल विवाह है" कहकर दिन निश्चित किया गया; और सुपारी के वृक्षों तथा कोमल पुष्पों से सज्जित मंडप के नीचे, वह युवा वर — नरसिंह माधव, गोविंद — (वर रूप में) प्रवेश कर रहा है।' 'हे सखी! मैंने स्वप्न में देखा कि इंद्र आदि समस्त देवगण आकर बैठे, मुझे वधू कहकर विवाह की मंत्रणा की, मुझे पवित्र वधू-वस्त्र पहनाया, और देवी (दुर्गा) ने मुझे विवाह-माला पहनाई।' 'हे सखी! मैंने स्वप्न में देखा कि उन्होंने मेरा हाथ अपने हाथ में लिया; मुझे अपने निकट खींचा; मेरे माता-पिता ने मुझे कन्यादान किया, और मुझे विवाह-संस्कार के पवित्र जल से स्नान कराया गया।'

Origin & History

Source: Nalayira Divya Prabandham — Nachiyar Thirumozhi, 6th decad 'Varanam Ayiram', by Andal (Tamil, c. 8th century CE)

Author: Andal (Godadevi / Kodhai), Alwar saint

Period: Tamil Bhakti era (c. 8th century CE)

आण्डाल, श्रीविल्लिपुत्तूर के पेरियाष़्वार की पालिता-पुत्री, भगवान विष्णु से इतना सम्पूर्ण प्रेम करती थीं कि मन्दिर के लिए बनी मालाओं को अर्पित किए जाने से पूर्व स्वयं धारण कर लेती थीं। नाच्चियार् तिरुमोष़ि में वे प्रभु से मिलन की अपनी उत्कंठा उँडेलती हैं, और इस छठे दशक में वे एक स्वप्न का वर्णन करती हैं जिसमें सम्पूर्ण विवाह सम्पन्न होता है — प्रभु शोभायात्रा में आते हैं, देवगण एकत्र होते हैं, और वे स्वयं नारायण से ब्याही जाती हैं। परम्परा कहती है कि वे अन्ततः श्रीरंगम् के भगवान रंगनाथ में लीन हो गईं।

Frequently Asked Questions

'वारणम् आयिरम्' क्या है?
यह आण्डाल की नाच्चियार् तिरुमोष़ि का प्रसिद्ध छठा दशक (तिरुमोष़ि) है, जिसमें आण्डाल भगवान नारायण (कृष्ण) से अपने विवाह का स्वप्न वर्णित करती हैं। यह विवाह का चरण-दर-चरण वर्णन करता है और आज भी श्रीवैष्णव विवाहों में गाया जाता है।
आण्डाल कौन थीं?
आण्डाल (गोदादेवी) श्रीवैष्णव परम्परा के बारह आष़्वार संतों में एकमात्र स्त्री हैं। श्रीविल्लिपुत्तूर में तुलसी-उद्यान में संत पेरियाष़्वार को बालिका रूप में मिलीं, वे भगवान रंगनाथ के प्रति गहन प्रेम में बड़ी हुईं और परम्परानुसार अन्ततः उन्हीं में लीन हो गईं। उन्होंने संसार को तिरुप्पावै एवं नाच्चियार् तिरुमोष़ि प्रदान किए।
यह विवाहों में क्यों गाया जाता है?
क्योंकि यह दशक प्रभु से एक सम्पूर्ण, मंगल विवाह का वर्णन करता है — शोभायात्रा, मंगनी, माला, पाणिग्रहण, कन्यादान एवं पवित्र स्नान। प्रत्येक पद पारम्परिक विवाह के एक चरण से मेल खाता है, जिससे यह वर-वधू के लिए सर्वोत्तम आशीर्वाद बन जाता है।
क्या यह दिव्य प्रबन्धम् का अंग है?
हाँ। नाच्चियार् तिरुमोष़ि आष़्वारों के 4,000-पद वाले तमिल काव्य-संग्रह नालायिर दिव्य प्रबन्धम् में आण्डाल की दो कृतियों में से एक है। 'वारणम् आयिरम्' इसका छठा दशक है तथा समस्त संग्रह के सर्वाधिक प्रिय भागों में से एक है।

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