श्री बृहस्पति देव आरती
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✦ अर्थ
श्री बृहस्पति देव आरती देवगुरु बृहस्पति (गुरु ग्रह) की स्तुति में गाई जाने वाली पारंपरिक हिंदी आरती है। बृहस्पति बुद्धि, ज्ञान, धर्म और समृद्धि के दाता हैं, और विशेषकर गुरुवार को उनकी पूजा की जाती है। दीपक और घंटी के साथ भक्तिपूर्वक गाई जाने वाली यह आरती उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए की जाती है।
उत्पत्ति और कथा
Traditional Hindi devotional aarti · Traditional · Devotional era
बृहस्पति देवताओं के गुरु (देवगुरु) और गुरु ग्रह के स्वामी हैं — बुद्धि, धर्म, समृद्धि तथा सौभाग्य के दाता। विशेषकर गुरुवार को भगवान विष्णु के साथ (जिनका दिन गुरुवार है) उनकी पूजा की जाती है। उनकी आरती पीली वस्तुओं — केला, चना तथा गुड़ — के अर्पण के साथ उनकी कृपामयी अनुग्रह को पाने के लिए गाई जाती है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
कहा जाता है कि बलवान, प्रसन्न बृहस्पति व्यक्ति को बुद्धि, उत्तम विवाह, योग्य संतान तथा स्थायी समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। भक्त गुरुवार का व्रत रखते हैं, पीली वस्तुएँ तथा केला अर्पित करते हैं, और बृहस्पति को बलवान करने तथा देवगुरु की कृपा पाने के लिए यह आरती गाते हैं।
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ॐ जय बृहस्पति देवा । छिन छिन भोग लगाऊँ कदली फल मेवा ॥
Om jaya brihaspati deva Chhina chhina bhoga lagaun kadali phala meva
अर्थ:ॐ, हे बृहस्पति देव (देवगुरु, गुरु ग्रह), आपकी जय हो; क्षण-क्षण मैं आपको केला, फल और मेवे का भोग अर्पित करता हूँ।
तुम पूरण परमात्मा तुम अन्तर्यामी । जगतपिता जगदीश्वर तुम सबके स्वामी ॥
Tuma purana paramatma tuma antaryami Jagatapita jagadishvara tuma sabake svami
अर्थ:आप पूर्ण परमात्मा हैं, सबके अंतर्यामी; जगत के पिता, ब्रह्माण्ड के स्वामी, सबके मालिक।
चरणामृत निज निर्मल सब पातक हर्ता । सकल मनोरथ दायक कृपा करो भर्ता ॥
Charanamrita nija nirmala saba pataka harta Sakala manoratha dayaka kripa karo bharta
अर्थ:आपके चरणों का अमृत पवित्र है और हर पाप को धो देता है; हर इच्छा पूर्ण करने वाले — हे प्रभु, कृपा कीजिए।
धन अर्पण कर जो जन शरण पड़े । प्रभु प्रकट तब होकर आकर द्वार खड़े ॥
Dhana arpana kara jo jana sharana pada़e Prabhu prakata taba hokara akara dvara khada़e
अर्थ:जो अपना धन अर्पित कर आपकी शरण में गिरता है — तब प्रभु प्रकट होकर उसके द्वार पर स्वयं खड़े हो जाते हैं।
दीनदयाल दयानिधि भक्तन हितकारी । पाप दोष सब हर्ता भव बन्धन हारी ॥
Dinadayala dayanidhi bhaktana hitakari Papa dosha saba harta bhava bandhana hari
अर्थ:दीनों पर दयालु, करुणा के सागर, भक्तों के हितकारी; सब पाप और दोष हरने वाले, सांसारिक बंधन तोड़ने वाले।
सकल मनोरथ दायक सब संशय हारो । विषय विकार मिटाओ सन्तन सुखकारी ॥
Sakala manoratha dayaka saba samshaya haro Vishaya vikara mitao santana sukhakari
अर्थ:हर इच्छा पूर्ण करने वाले, सब संशय दूर करने वाले; इंद्रियों की लालसा का नाश करें, हे संतों को आनंद देने वाले।
जो कोई आरती तेरी प्रेम सहित गावे । जेठानन्द आनन्दकर सो निश्चय पावे ॥
Jo koi arati teri prema sahita gave Jethananda anandakara so nishchaya pave
अर्थ:जो आपकी आरती प्रेम से गाता है — जेठानंद (भक्त), आनंद देने वाले, अवश्य (अपनी मनोकामना) पा लेता है।
श्री बृहस्पति देव आरती पाठ के लाभ
देवगुरु बृहस्पति (गुरु / गुरु ग्रह) की स्तुति में गाई जाती है — बुद्धि, ज्ञान, समृद्धि तथा जन्मकुंडली में बलवान बृहस्पति के लिए।
विशेषकर गुरुवार (गुरुवार / बृहस्पतिवार), गुरु के दिन, विद्या, विवाह, संतान तथा आध्यात्मिक उन्नति में सफलता के लिए गाई जाती है।
परंपरागत रूप से पीली वस्तुओं — केला, चना दाल, गुड़ तथा पीले पुष्पों — के अर्पण के साथ की जाती है, जो बृहस्पति का शुभ रंग है।
श्री बृहस्पति देव आरती जप विधि
एक दीपक (घी या कपूर का) जलाएँ और उसे हाथ में लेकर, देव के सम्मुख उसे घुमाते हुए आरती करें, यथासंभव घंटी के साथ। पुष्प तथा प्रसाद अर्पित करें, और अंत में आरती का आशीर्वाद लें (हाथों को ज्योति के ऊपर ले जाकर नेत्रों से लगाएँ)। भक्ति तथा स्थिर हृदय से गाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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