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शुक्र स्तोत्र

🕉️ hindu·📿 108× जप·🕐 शुक्रवार को सूर्योदय के समय; शुक्र दशा या शुक्र की पीड़ा के दौरान·🎵 ऑडियो सहित·📜 Traditional Navagraha (planetary) stotra

अन्य नाम / खोज: om ashvadhvajaya vidmahe dhanurhastaya dhimahi · shukra stotra lyrics

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अर्थ

शुक्र स्तोत्र शुक्र ग्रह (शुक्राचार्य) की स्तुति है, जो जन्म कुंडली में कमजोर या पीड़ित शुक्र को बलवान करने हेतु जपा जाता है। शुक्र प्रेम, विवाह, सौंदर्य, सुख, कला और समृद्धि का कारक है। यह शुक्रवार को सूर्योदय के समय सर्वाधिक प्रभावशाली होता है।

उत्पत्ति और कथा

Traditional Navagraha (planetary) stotra · Traditional · Ancient

शुक्र — शुक्र ग्रह — को शुक्राचार्य के रूप में चित्रित किया जाता है, जो ऋषि भृगु के पुत्र और असुरों के गुरु हैं, तथा मृतकों को जीवित करने वाली मृत-संजीवनी विद्या के स्वामी हैं। नवग्रहों (नौ ग्रहों) में से एक के रूप में शुक्र प्रेम, विवाह, सौंदर्य, कला, सुख और धन का कारक है। शुक्र स्तोत्र और उनका बीज मंत्र कमजोर शुक्र को बलवान करने तथा उसके कोमल, समृद्धिदायक प्रभाव को पाने हेतु एक शास्त्रीय उपाय के रूप में जपे जाते हैं।

शास्त्रों में वर्णित

ज्योतिष (वैदिक ज्योतिष) में शुक्र प्रेम, विवाह और जीवन की अच्छी वस्तुओं का महान शुभ ग्रह है। विवाह में विलंब, संबंधों में परेशानी या कमजोर शुक्र वाले भक्त परंपरागत रूप से शुक्रवार को शुक्र मंत्र जपते हैं — श्वेत पुष्प और मिष्ठान्न अर्पित करते हुए — और अपने जीवन में सामंजस्य, मिलन तथा नवीन समृद्धि के प्रवाह की बात बताते हैं।

सुनें और साथ में जपें

सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

किसी भी पंक्ति या ▶ बटन पर टैप कर सुनें

श्लोक 1

अश्वध्वजाय विद्महे धनुर्हस्ताय धीमहि तन्नो शुक्रः प्रचोदयात्

Om Ashvadhvajaya Vidmahe Dhanurhastaya Dhimahi Tanno Shukrah Prachodayat

अर्थ:ॐ। हम अश्वध्वज (शुक्र) को जानें, धनुर्धारी का ध्यान करें; वे शुक्र (शुक्राचार्य/शुक्र ग्रह) हमें प्रेरित करें। (शुक्र गायत्री)

श्लोक 2

द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः

Om Dram Dreem Draum Sah Shukraya Namah

अर्थ:ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः — शुक्र को नमस्कार। (शुक्र बीज मन्त्र)

श्लोक 3

नमस्ते भार्गव श्रेष्ठ देव दानवपूजित वृष्टिरोधप्रकर्तासि वृष्टिकर्ता त्वमेव हि

Namaste Bhargava Shreshtha Deva Danava-pujita Vrishti-rodha-prakartasi Vrishti-karta Tvameva Hi

अर्थ:हे भार्गवश्रेष्ठ! देव और दानव दोनों से पूजित आपको नमस्कार; वर्षा को रोकने वाले और वर्षा करने वाले भी आप ही हैं।

श्लोक 4

हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम् सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम्

Hima-kunda-mrinalabham Daityanam Paramam Gurum Sarva-shastra-pravaktaram Bhargavam Pranamamyaham

अर्थ:हिम, कुन्द और मृणाल-सी कान्ति वाले, दैत्यों के परम गुरु, समस्त शास्त्रों के प्रवक्ता — उन भार्गव (शुक्राचार्य) को मैं प्रणाम करता हूँ।

श्लोक 5

शुक्रः शुक्राम्बरः शुभ्रः शुभदः शुभलक्षणः शुभ्रांशुः शुभदृष्टिश्च शुभकृच्छुभवर्धनः

Shukrah Shukrambarah Shubhrah Shubhadah Shubha-lakshanah Shubhramshuh Shubha-drishtish-cha Shubha-krich-chhubha-vardhanah

अर्थ:शुक्र, श्वेत वस्त्रधारी, शुभ्र, शुभदायक, शुभ लक्षणों वाले; उज्ज्वल किरणों और शुभ दृष्टि वाले, कल्याणकारी और शुभ की वृद्धि करने वाले।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

शुक्र🔊Shukraशुक्र — प्रेम, सौंदर्य, विवाह और समृद्धि का ग्रह वीनस
भार्गव🔊Bhargavaभार्गव — भृगु ऋषि के पुत्र शुक्राचार्य, असुरों के गुरु
द्रां द्रीं द्रौं सः🔊Dram Dreem Draum Sahद्रां द्रीं द्रौं सः — शुक्र मंत्र के बीज अक्षर
अश्वध्वजाय🔊Ashvadhvajayaअश्वध्वजाय — अश्व-ध्वज वाले रथ के स्वामी (शुक्र गायत्री)
शुभदः🔊Shubhadahशुभदः — समस्त शुभ का दाता

शुक्र स्तोत्र पाठ के लाभ

जन्म कुंडली में कमजोर या पीड़ित शुक्र को बलवान करने हेतु जपा जाता है — शुक्र प्रेम, विवाह, सौंदर्य, सुख, कला और समृद्धि का कारक है।

विवाह और संबंधों में विलंब या परेशानियों, तथा वैवाहिक सामंजस्य के लिए पारंपरिक उपाय।

माना जाता है कि यह भौतिक सुख, धन, परिष्कार तथा कला एवं रचनात्मक क्षेत्रों में सफलता आकर्षित करता है।

ग्रहों के संतुलन और शांति हेतु नवग्रह (नौ ग्रह) पूजा के भाग रूप में पढ़ा जाता है।

शुक्र के दिन शुक्रवार को, आदर्श रूप से सूर्योदय के समय सर्वाधिक शक्तिशाली।

शुक्र बीज मंत्र 'ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः' केंद्रित लाभ हेतु 108 बार जपा जाता है।

शुक्र स्तोत्र जप विधि

जप संख्या108बार
उत्तम समयशुक्रवार को सूर्योदय के समय; शुक्र दशा या शुक्र की पीड़ा के दौरान
दिशाEast or North-East

शुक्रवार को स्नान के पश्चात पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें, आदर्श रूप से श्वेत वस्त्रों में (श्वेत शुक्र का रंग है)। दीपक जलाएँ और श्वेत पुष्प, चावल तथा शर्करा/मिष्ठान्न अर्पित करें। शुक्र बीज मंत्र 'ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः' माला पर 108 बार जपें, फिर शुक्र गायत्री और स्तोत्र का पाठ करें। शुक्रवार को श्वेत वस्तुएँ अर्पित करना और जरूरतमंदों को दान करना शुक्र को बलवान करता है, ऐसा कहा जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शुक्र शुक्र ग्रह के देवता तथा असुरों के गुरु एवं ऋषि भृगु के पुत्र शुक्राचार्य हैं। शुक्र स्तोत्र उनकी स्तुति है, जो कुंडली में शुक्र को बलवान करने तथा प्रेम, सौंदर्य, विवाह और समृद्धि के आशीर्वाद पाने हेतु जपा जाता है।
शुक्र बीज मंत्र 'ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः' और शुक्र गायत्री विवाह, वैवाहिक सामंजस्य और प्रेमपूर्ण संबंधों हेतु जपे जाते हैं, क्योंकि शुक्र प्रेम और मिलन का कारक है।
शुक्रवार शुक्र का दिन और सबसे शुभ समय है, आदर्श रूप से सूर्योदय के समय। यह विशेष रूप से शुक्र दशा के दौरान या जब कुंडली में शुक्र कमजोर या पीड़ित हो, तब अनुशंसित है।
बीज मंत्र परंपरागत रूप से प्रतिदिन 108 बार (एक माला) जपा जाता है, विशेषकर शुक्रवार को। शुक्र उपाय हेतु पूर्ण संख्या अक्सर समय के साथ 16,000 जप होती है।

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