सूर्य चालीसा
अन्य नाम / खोज: kanaka badana kundala makara mukta mala anga · surya chalisa lyrics
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✦ अर्थ
सूर्य चालीसा (भानु चालीसा) सूर्यदेव की चालीस-छंदों वाली हिंदी स्तुति है, जो उनके बारह नामों और रूपों का गुणगान करती है। इसमें सिर, नेत्र, कान और समस्त अंगों पर सूर्य की किरणों का रक्षा-कवच पिरोया गया है। स्वास्थ्य, तेज, आत्मविश्वास और सफलता के लिए इसका पाठ किया जाता है, विशेषकर रविवार के सूर्योदय पर।
उत्पत्ति और कथा
Traditional Hindi devotional hymn · Traditional · Devotional era
सूर्य चालीसा, जिसे भानु चालीसा भी कहते हैं, सूर्यदेव की चालीस छंदों वाली हिंदी स्तुति है — वह प्रत्यक्ष देवता जिनकी वैदिक काल से जीवन, प्रकाश और स्वास्थ्य के स्रोत रूप में पूजा होती आई है। यह सूर्य के बारह नामों और रूपों की माला पिरोती है, हर अंग पर उनकी किरणों की रक्षा-ढाल रखती है, और उन सबको ओज तथा पापनाश का वचन देती है जो अपने छंदों से उदित सूर्य का अभिनंदन करते हैं।
✦ शास्त्रों में वर्णित
चालीसा वचन देती है कि सूर्य के बारह नामों का गायन सहस्र जन्मों के पाप नष्ट करता है, उनका किरण-कवच हर अंग की ऐसी रक्षा करता है कि 'संसार में कहीं भय शेष नहीं रहता', और दाद-कुष्ठ तक श्रद्धालु पाठक को स्पर्श नहीं करते — यह आदित्य हृदय की प्रतिध्वनि है, जिससे अगस्त्य ऋषि ने राम को रावण-वध हेतु सुसज्जित किया था।
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कनक बदन कुण्डल मकर,मुक्ता माला अङ्ग। पद्मासन स्थित ध्याइए,शंख चक्र के सङ्ग॥
Kanaka badana kundala makara,mukta mala anga Padmasana sthita dhyaie,shamkha chakra ke sanga
अर्थ:स्वर्ण के समान देहवाले, मकराकार कुण्डल तथा अंगों पर मोतियों की माला धारण किए हुए — शंख और चक्र के साथ कमलासन पर विराजमान उनका ध्यान करें।
जय सविता जय जयति दिवाकर!।सहस्रांशु! सप्ताश्व तिमिरहर॥
Jaya savita jaya jayati divakara!sahasramshu! saptashva timirahara
अर्थ:जय हो सविता; जय हो, जय हो दिवाकर (दिन के कर्ता)! हे सहस्र किरणों वाले, सात अश्वों वाले, अंधकार के नाशक!
भानु! पतंग! मरीची! भास्कर!।सविता हंस! सुनूर विभाकर॥
Bhanu! patamga! marichi! bhaskara!savita hamsa! sunura vibhakara
अर्थ:हे भानु! पतंग! मरीचि! भास्कर! सविता! हंस! हे तेजस्वी प्रकाश-कर्ता!
विवस्वान! आदित्य! विकर्तन।मार्तण्ड हरिरूप विरोचन॥
Vivasvana! aditya! vikartanamartanda harirupa virochana
अर्थ:हे विवस्वान! आदित्य! विकर्तन! मार्तण्ड, हरि के रूप, विरोचन!
अम्बरमणि! खग! रवि कहलाते।वेद हिरण्यगर्भ कह गाते॥
Ambaramani! khaga! ravi kahalateveda hiranyagarbha kaha gate
अर्थ:आकाश के मणि (अम्बरमणि), गगन के पक्षी (खग), आप रवि कहलाते हैं; वेद आपको हिरण्यगर्भ कहकर गाते हैं।
सहस्रांशु प्रद्योतन, कहिकहि।मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि॥
Sahasramshu pradyotana, kahikahimunigana hota prasanna modalahi
अर्थ:'सहस्रांशु, सर्व-प्रकाशक' कहते हुए मुनिगण प्रसन्न होकर आनंद को प्राप्त होते हैं।
अरुण सदृश सारथी मनोहर।हांकत हय साता चढ़ि रथ पर॥
Aruna sadrisha sarathi manoharahamkata haya sata chaढ़i ratha para
अर्थ:अरुण के समान आपका मनोहर सारथी, रथ पर आरूढ़ होकर सात अश्वों को हाँकता है।
मंडल की महिमा अति न्यारी।तेज रूप केरी बलिहारी॥
Mamdala ki mahima ati nyariteja rupa keri balihari
अर्थ:आपके मण्डल की महिमा अति अद्भुत है; मैं आपके तेजोमय रूप पर बलिहारी जाता हूँ।
उच्चैःश्रवा सदृश हय जोते।देखि पुरन्दर लज्जित होते॥
Uchchaihshrava sadrisha haya jotedekhi purandara lajjita hote
अर्थ:उच्चैःश्रवा के समान अश्वों को जोतकर, देखते ही इन्द्र (पुरन्दर) भी लज्जित हो जाते हैं।
मित्र मरीचि भानु अरुण भास्कर।सविता सूर्य अर्क खग कलिकर॥
Mitra marichi bhanu aruna bhaskarasavita surya arka khaga kalikara
अर्थ:मित्र, मरीचि, भानु, अरुण, भास्कर; सविता, सूर्य, अर्क, खग, युगों के कर्ता —
पूषा रवि आदित्य नाम लै।हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै॥
Pusha ravi aditya nama laihiranyagarbhaya namah kahikai
अर्थ:— पूषा, रवि, आदित्य नाम लेकर, और 'हिरण्यगर्भाय नमः' कहकर,
द्वादस नाम प्रेम सों गावैं।मस्तक बारह बार नवावैं॥
Dvadasa nama prema som gavaimmastaka baraha bara navavaim
अर्थ:— इन बारह नामों को प्रेम से गाकर, तथा बारह बार मस्तक नवाकर,
चार पदारथ जन सो पावै।दुःख दारिद्र अघ पुंज नसावै॥
Chara padaratha jana so pavaiduhkha daridra agha pumja nasavai
अर्थ:— वह भक्त चारों पुरुषार्थों को प्राप्त करता है; दुःख, दरिद्रता और पापों के पुंज नष्ट हो जाते हैं।
नमस्कार को चमत्कार यह।विधि हरिहर को कृपासार यह॥
Namaskara ko chamatkara yahavidhi harihara ko kripasara yaha
अर्थ:यह नमस्कार का चमत्कार है — यह ब्रह्मा, हरि और हर की कृपा का सार है।
सेवै भानु तुमहिं मन लाई।अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई॥
Sevai bhanu tumahim mana laiashtasiddhi navanidhi tehim pai
अर्थ:हे भानु, जो भी आपकी भक्तिपूर्ण मन से सेवा करता है, वह अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों को प्राप्त करता है।
बारह नाम उच्चारन करते।सहस जनम के पातक टरते॥
Baraha nama uchcharana karatesahasa janama ke pataka tarate
अर्थ:बारह नामों का उच्चारण करने से सहस्र जन्मों के पाप मिट जाते हैं।
उपाख्यान जो करते तवजन।रिपु सों जमलहते सोतेहि छन॥
Upakhyana jo karate tavajanaripu som jamalahate sotehi chhana
अर्थ:जो भक्त आपकी महिमा का वर्णन करता है, वह उसी क्षण में शत्रु पर, मानो यमराज के समान, विजय पा लेता है।
धन सुत जुत परिवार बढ़तु है।प्रबल मोह को फंद कटतु है॥
Dhana suta juta parivara badha़tu haiprabala moha ko phamda katatu hai
अर्थ:उसका धन, पुत्र और परिवार बढ़ते हैं; मोह का प्रबल फंदा कट जाता है।
अर्क शीश को रक्षा करते।रवि ललाट पर नित्य बिहरते॥
Arka shisha ko raksha karateravi lalata para nitya biharate
अर्थ:अर्क मेरे शीश की रक्षा करें; रवि सदा मेरे ललाट पर विराजें।
सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत।कर्ण देस पर दिनकर छाजत॥
Surya netra para nitya virajatakarna desa para dinakara chhajata
अर्थ:सूर्य सदा मेरे नेत्रों पर विराजें; दिनकर मेरे कर्ण-प्रदेश को छाया दें।
भानु नासिका वासकरहुनित।भास्कर करत सदा मुखको हित॥
Bhanu nasika vasakarahunitabhaskara karata sada mukhako hita
अर्थ:भानु सदा मेरी नासिका पर वास करें; भास्कर सदा मेरे मुख का हित करें।
ओंठ रहैं पर्जन्य हमारे।रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे॥
Omtha rahaim parjanya hamarerasana bicha tikshna basa pyare
अर्थ:पर्जन्य मेरे ओठों पर विराजें; हे प्रिय, तीक्ष्ण किरणों वाले मेरी जिह्वा पर वास करें।
कंठ सुवर्ण रेत की शोभा।तिग्म तेजसः कांधे लोभा॥
Kamtha suvarna reta ki shobhatigma tejasah kamdhe lobha
अर्थ:मेरे कण्ठ पर स्वर्ण-रेत की शोभा हो; तीव्र तेजस्वी मेरे कंधों पर आनंद करें।
पूषां बाहू मित्र पीठहिं पर।त्वष्टा वरुण रहत सुउष्णकर॥
Pusham bahu mitra pithahim paratvashta varuna rahata suushnakara
अर्थ:पूषा मेरी भुजाओं पर, मित्र मेरी पीठ पर; त्वष्टा और वरुण कोमल ऊष्मा देते हुए विराजें।
युगल हाथ पर रक्षा कारन।भानुमान उरसर्म सुउदरचन॥
Yugala hatha para raksha karanabhanumana urasarma suudarachana
अर्थ:मेरे दोनों हाथों पर रक्षा हो; भानुमान मेरे वक्ष और उदर पर ऊष्मा दें।
बसत नाभि आदित्य मनोहर।कटिमंह, रहत मन मुदभर॥
Basata nabhi aditya manoharakatimamha, rahata mana mudabhara
अर्थ:मनोहर आदित्य मेरी नाभि पर वास करते हैं; मेरी कमर पर वे मन को आनंद से भरते हुए विराजते हैं।
जंघा गोपति सविता बासा।गुप्त दिवाकर करत हुलासा॥
Jamgha gopati savita basagupta divakara karata hulasa
अर्थ:गोपति सविता मेरी जाँघों पर वास करते हैं; गुप्त दिवाकर हर्ष प्रदान करते हैं।
विवस्वान पद की रखवारी।बाहर बसते नित तम हारी॥
Vivasvana pada ki rakhavaribahara basate nita tama hari
अर्थ:विवस्वान मेरे चरणों की रक्षा करते हैं; अंधकार के नाशक सदा बाहर वास करते हैं।
सहस्रांशु सर्वांग सम्हारै।रक्षा कवच विचित्र विचारे॥
Sahasramshu sarvamga samharairaksha kavacha vichitra vichare
अर्थ:सहस्रांशु मेरे समस्त अंगों की रक्षा करते हैं — एक अद्भुत, सुविचारित रक्षा-कवच।
अस जोजन अपने मन माहीं।भय जगबीच करहुं तेहि नाहीं॥
Asa jojana apane mana mahimbhaya jagabicha karahum tehi nahim
अर्थ:जो भी इसका मन में चिंतन करता है, उसे संसार में कहीं भय नहीं रहता।
दद्रु कुष्ठ तेहिं कबहु न व्यापै।जोजन याको मन मंह जापै॥
Dadru kushtha tehim kabahu na vyapaijojana yako mana mamha japai
अर्थ:जो इसे मन में जपता है, उसे दाद और कुष्ठ कभी नहीं व्यापते।
अंधकार जग का जो हरता।नव प्रकाश से आनन्द भरता॥
Amdhakara jaga ka jo haratanava prakasha se ananda bharata
अर्थ:जो संसार के अंधकार को हरते हैं और उसे नवीन प्रकाश व आनंद से भरते हैं,
ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही।कोटि बार मैं प्रनवौं ताही॥
Graha gana grasi na mitavata jahikoti bara maim pranavaum tahi
अर्थ:— जिन्हें ग्रह न तो ग्रस सकते हैं और न मिटा सकते हैं — उन्हें मैं करोड़ों बार प्रणाम करता हूँ।
मंद सदृश सुत जग में जाके।धर्मराज सम अद्भुत बांके॥
Mamda sadrisha suta jaga mem jakedharmaraja sama adbhuta bamke
अर्थ:जिनके पुत्र मन्द (शनि) के समान संसार में हैं; अद्भुत और श्रेष्ठ, धर्मराज (यम) के समान —
धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा।किया करत सुरमुनि नर सेवा॥
Dhanya-dhanya tuma dinamani devakiya karata suramuni nara seva
अर्थ:— धन्य हैं, धन्य हैं आप, हे दिनमणि, हे देव; देव, मुनि और मनुष्य सदा आपकी सेवा करते हैं।
भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों।दूर हटतसो भवके भ्रम सों॥
Bhakti bhavayuta purna niyama somdura hatataso bhavake bhrama som
अर्थ:भक्ति और नियमों के पूर्ण पालन से मनुष्य सांसारिक अस्तित्व के भ्रमों से दूर हो जाता है।
परम धन्य सों नर तनधारी।हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी॥
Parama dhanya som nara tanadharihaim prasanna jehi para tama hari
अर्थ:परम धन्य है वह देहधारी आत्मा जिस पर अंधकार के नाशक प्रसन्न होते हैं।
अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन।मधु वेदांग नाम रवि उदयन॥
Aruna magha maham surya phalgunamadhu vedamga nama ravi udayana
अर्थ:माघ में अरुण, फाल्गुन में सूर्य; मधु (चैत्र में), उदित रवि का नाम वेदांग है;
भानु उदय बैसाख गिनावै।ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै॥
Bhanu udaya baisakha ginavaijyeshtha indra ashadha़ ravi gavai
अर्थ:— वैशाख में उदित होते भानु गिने जाते हैं; ज्येष्ठ में इन्द्र, आषाढ़ में रवि कहकर गाए जाते हैं;
यम भादों आश्विन हिमरेता।कातिक होत दिवाकर नेता॥
Yama bhadom ashvina himaretakatika hota divakara neta
अर्थ:— भाद्रपद में यम, आश्विन में 'हिमरेता'; कार्तिक में दिवाकर नेता हैं;
अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं।पुरुष नाम रवि हैं मलमासहिं॥
Agahana bhinna vishnu haim pusahimpurusha nama ravi haim malamasahim
अर्थ:— अगहन में 'भिन्न', पौष में विष्णु; मलमास में उनका नाम 'पुरुष' है।
भानु चालीसा प्रेम युत,गावहिं जे नर नित्य। सुख सम्पत्ति लहि बिबिध,होंहिं सदा कृतकृत्य॥
Bhanu chalisa prema yuta,gavahim je nara nitya Sukha sampatti lahi bibidha,homhim sada kritakritya
अर्थ:जो भी प्रेमपूर्वक प्रतिदिन भानु (सूर्य) चालीसा गाता है, वह विविध सुख और समृद्धि पाता है, और सदा कृतकृत्य होता है।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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सूर्य चालीसा पाठ के लाभ
सूर्य चालीसा स्वास्थ्य, ओज, ऊर्जा, आत्मविश्वास और सफलता के लिए भगवान सूर्य, सूर्यदेव का आवाहन करती है।
सूर्य के बारह पवित्र नामों (द्वादश आदित्य) का स्मरण करती है, जिनके जाप से सहस्र जन्मों के पाप नष्ट होते हैं, ऐसा कहा जाता है।
इसमें एक अंग-कवच है जो सिर, नेत्र, कान, अंगों और समस्त शरीर पर सूर्य की रक्षा का आवाहन करता है।
जन्मकुंडली में निर्बल सूर्य को बल देने तथा त्वचा रोगों और नेत्र विकारों के निवारण हेतु परंपरागत रूप से इसका पाठ किया जाता है।
रविवार के सूर्योदय पर, उदित सूर्य को अर्घ्य देते हुए यह सर्वाधिक प्रभावशाली होती है।
भक्त को अष्ट सिद्धि, नव निधि और चार पुरुषार्थ (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) प्रदान करती है।
सूर्य चालीसा जप विधि
सूर्योदय पर स्नान के पश्चात पूर्व की ओर मुख करके ताम्र पात्र से उदित सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हुए पाठ करें। फिर श्रद्धापूर्वक सूर्य चालीसा का पाठ करें, आदर्श रूप से बारह नामों का जाप करते हुए बारह बार सिर झुकाएँ। रविवार सर्वाधिक शुभ है; एक समय भोजन (और नमक त्याग) के साथ इसका पालन साधना को गहन बनाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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