सूर्य नमस्कार मंत्र
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✦ अर्थ
सूर्य नमस्कार मंत्र सूर्य नमस्कार की बारह मुद्राओं के लिए बारह मंत्रों का समूह है, जिनमें प्रत्येक सूर्य को एक भिन्न नाम से नमस्कार करता है। यह शारीरिक योग को मंत्र-जप के साथ जोड़कर पूर्ण स्वास्थ्य देता है। सूर्योदय के समय पूर्व की ओर मुख करके इसका अभ्यास सर्वाधिक फलदायी है।
उत्पत्ति और कथा
Traditional yoga and Vedic sun worship · Ancient Yogic tradition · Ancient
सूर्य नमस्कार में प्रयुक्त सूर्य के बारह नाम वैदिक सूर्योपासना परम्परा से आते हैं। प्रत्येक नाम सौर ऊर्जा के एक भिन्न पक्ष को प्रकट करता है — भौतिक (प्रकाश, ऊष्मा) से लेकर ब्रह्मांडीय (सृष्टिकर्ता, चेतना का आलोककर्ता) तक। शारीरिक मुद्राएँ हठयोग परम्परा में संहिताबद्ध हुईं, और मंत्र तथा आसन का संयोग एक पूर्ण साधना रचता है, जिसका अभ्यास विश्वभर में करोड़ों लोग प्रतिदिन करते हैं।
✦ शास्त्रों में वर्णित
ऋग्वेद घोषित करता है: 'सूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्च' — सूर्य चराचर समस्त जगत् की आत्मा है। आधुनिक विज्ञान पुष्टि करता है कि पृथ्वी की समस्त ऊर्जा अंततः सूर्य से ही आती है — भोजन, जीवाश्म ईंधन, पवन, और हमारे शरीर के परमाणु तक तारों में रचे गए। प्राचीन ऋषियों ने विज्ञान से सहस्रों वर्ष पूर्व ही इस सत्य का अंतर्ज्ञान कर लिया था, और इसे इन बारह मंत्रों में पिरो दिया, जो सूर्य को केवल एक खगोलीय पिंड के रूप में नहीं, अपितु समस्त जीवन और चेतना के स्रोत के रूप में नमन करते हैं।
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ॐ मित्राय नमः
Om Mitraya Namah
अर्थ:ॐ मित्राय नमः — सबके मित्र को नमस्कार।
ॐ रवये नमः
Om Ravaye Namah
अर्थ:ॐ रवये नमः — प्रकाशमान को नमस्कार।
ॐ सूर्याय नमः
Om Suryaya Namah
अर्थ:ॐ सूर्याय नमः — परम ज्योति को नमस्कार।
ॐ भानवे नमः
Om Bhanave Namah
अर्थ:ॐ भानवे नमः — तेजस्वी को नमस्कार।
ॐ खगाय नमः
Om Khagaya Namah
अर्थ:ॐ खगाय नमः — आकाश में विचरने वाले को नमस्कार।
ॐ पूष्णे नमः
Om Pushne Namah
अर्थ:ॐ पूष्णे नमः — पोषक को नमस्कार।
ॐ हिरण्यगर्भाय नमः
Om Hiranyagarbhaya Namah
अर्थ:ॐ हिरण्यगर्भाय नमः — स्वर्णिम कोश (हिरण्यगर्भ) को नमस्कार।
ॐ मरीचये नमः
Om Marichaye Namah
अर्थ:ॐ मरीचये नमः — किरणों के स्वामी को नमस्कार।
ॐ आदित्याय नमः
Om Adityaya Namah
अर्थ:ॐ आदित्याय नमः — अदिति-पुत्र को नमस्कार।
ॐ सवित्रे नमः
Om Savitre Namah
अर्थ:ॐ सवित्रे नमः — जीवनदायी शक्ति को नमस्कार।
ॐ अर्काय नमः
Om Arkaya Namah
अर्थ:ॐ अर्काय नमः — पूजनीय को नमस्कार।
ॐ भास्कराय नमः
Om Bhaskaraya Namah
अर्थ:ॐ भास्कराय नमः — सबको आलोकित करने वाले को नमस्कार।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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सूर्य नमस्कार मंत्र पाठ के लाभ
सूर्य नमस्कार की बारह मुद्राओं के लिए बारह मंत्र।
शारीरिक योग को मंत्र-जप के साथ जोड़कर पूर्ण स्वास्थ्य देता है।
प्रत्येक मंत्र शरीर में सौर ऊर्जा के एक भिन्न पक्ष को जागृत करता है।
प्रातःकालीन अभ्यास विटामिन डी, उपापचय और ऊर्जा-स्तर को बढ़ाता है।
रीढ़ को सशक्त करता है, लचीलापन सुधारता है और हृदय-स्वास्थ्य बनाता है।
विश्व में सर्वाधिक प्रचलित योग क्रमों में से एक।
सूर्य नमस्कार मंत्र जप विधि
बारह मंत्रों में से प्रत्येक सूर्य नमस्कार की एक मुद्रा से जुड़ा है। सूर्योदय के समय पूर्व की ओर मुख करके आरंभ करें। पहली मुद्रा (प्रणामासन / प्रार्थना मुद्रा) करते हुए मंत्र १ (ॐ मित्राय नमः) जपें। इसी प्रकार उनके संगत मंत्रों के साथ सभी बारह मुद्राएँ करें। एक पूर्ण चक्र = बारह मंत्र + बारह मुद्राएँ। पूर्ण अभ्यास के लिए आदर्श रूप से बारह चक्र (कुल १४४ मंत्र) करें। शारीरिक गति, श्वास और पवित्र ध्वनि का यह संयोग इसे सर्वाधिक शक्तिशाली दैनिक साधनाओं में से एक बनाता है।
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