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कुबेर मंत्र

🕉️ hindu·📿 108× जप·🕐 धनतेरस, दीवाली, गुरुवार, या आर्थिक आवश्यकता के समय·🎵 ऑडियो सहित·📜 Vedic and Puranic tradition

अन्य नाम / खोज: om yakshaya kuberaya vaishravanaya

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अर्थ

कुबेर मंत्र धन के देवता और देवताओं के कोषाध्यक्ष भगवान कुबेर का आह्वान करता है। इसमें धन को आकर्षित करने के लिए शक्तिशाली बीज मंत्रों (श्रीं, ह्रीं, क्लीं) का प्रयोग होता है और इसमें कुबेर गायत्री भी शामिल है। यह आर्थिक वृद्धि, व्यापार में सफलता और हर प्रकार की समृद्धि के लिए जपा जाता है।

उत्पत्ति और कथा

Vedic and Puranic tradition · Vedic Rishis · Ancient

कुबेर मूल रूप से एक मर्त्य मानव थे जिन्होंने भगवान ब्रह्मा की कठोर तपस्या की। प्रसन्न होकर ब्रह्मा ने उन्हें देवताओं का कोषाध्यक्ष और समस्त धन का स्वामी बना दिया। उन्हें उड़ने वाला वाहन पुष्पक विमान और कैलाश के निकट सुनहरी नगरी अलकापुरी प्रदान की गई। वे रावण के सौतेले भाई हैं — जहाँ रावण ने सैन्य शक्ति चुनी, वहीं कुबेर ने दिव्य धन की रक्षा करना चुना। उनके मंत्र समस्त भौतिक समृद्धि के ब्रह्मांडीय स्रोत से जुड़ते हैं।

शास्त्रों में वर्णित

रामायण में, जब रावण ने कुबेर से पुष्पक विमान चुरा लिया और राम द्वारा पराजित हुआ, तब भगवान राम ने पुष्पक विमान कुबेर को लौटा दिया। कृतज्ञता से अभिभूत कुबेर ने राम को उनके राज्य अयोध्या के लिए चिरस्थायी समृद्धि का आशीर्वाद दिया। विष्णु पुराण कहता है कि कुबेर का धन अक्षय है — चाहे कितना भी दान कर दिया जाए, वह पुनः उत्पन्न हो जाता है। उनके मंत्र का जप भक्त को इस अक्षय ब्रह्मांडीय कोष से जोड़ता है।

सुनें और साथ में जपें

सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

किसी भी पंक्ति या ▶ बटन पर टैप कर सुनें

श्लोक 1

यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥

Om Yakshaya Kuberaya Vaishravanaya Dhanadhanyadhipataye Dhanadhanya Samriddhim Me Dehi Dapaya Svaha

अर्थ:ॐ यक्षराज कुबेर, विश्रवण के पुत्र, धन-धान्य के अधिपति — आपसे प्रार्थना है; मुझे धन और समृद्धि प्रदान करें।

श्लोक 2

श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः॥

Om Shreem Hreem Kleem Shreem Kleem Vitteshvaraya Namah

अर्थ:ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं — धन के स्वामी (वित्तेश्वर कुबेर) को नमस्कार।

श्लोक 3

यक्षराजाय विद्महे वैश्रवणाय धीमहि तन्नो कुबेरः प्रचोदयात्॥

Om Yaksharajaya Vidmahe Vaishravanaya Dhimahi Tanno Kuberah Prachodayat

अर्थ:ॐ यक्षराज को हम जानें, वैश्रवण (कुबेर) का ध्यान करें; वे कुबेर हमें प्रेरित करें।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

यक्षाय🔊Yakshayaयक्षों (दिव्य प्राणियों) के स्वामी को
कुबेराय🔊Kuberayaकुबेर (धन के देवता) को
वैश्रवणाय🔊Vaishravanayaविश्रवण के पुत्र (कुबेर के पिता)
धनधान्याधिपतये🔊Dhanadhanyadhipatayeधन और धान्य के अधिपति
समृद्धिं🔊Samriddhimसमृद्धि, प्रचुरता
देहि दापय🔊Dehi Dapayaदो और दिलवाओ
स्वाहा🔊Svahaआहुति (मंत्रों का समापन)
श्रीं🔊Shreemलक्ष्मी/धन का बीज मंत्र
ह्रीं🔊Hreemमाया/शक्ति का बीज मंत्र
क्लीं🔊Kleemआकर्षण/इच्छा का बीज मंत्र
वित्तेश्वर🔊Vitteshvaraधन/वित्त के स्वामी
यक्षराजाय🔊Yaksharajayaयक्षों के राजा
प्रचोदयात्🔊Prachodayatवे हमें प्रेरित/प्रकाशित करें

कुबेर मंत्र पाठ के लाभ

कुबेर देवताओं के कोषाध्यक्ष हैं — समस्त दिव्य धन के रक्षक।

धन को आकर्षित करने के लिए शक्तिशाली बीज मंत्रों (श्रीं, ह्रीं, क्लीं) का प्रयोग करता है।

कुबेर गायत्री (तीसरा मंत्र) पवित्र गायत्री छंद का अनुसरण करता है।

आर्थिक वृद्धि, व्यापार में सफलता और निवेश के लिए अत्यंत प्रभावी।

धनतेरस और दीवाली पर जप करने से विशेष फल मिलते हैं।

केवल धन ही नहीं, बल्कि हर प्रकार की समृद्धि — अन्न, संपत्ति, परिसंपत्तियाँ — आकर्षित करता है।

कुबेर मंत्र जप विधि

जप संख्या108बार
उत्तम समयधनतेरस, दीवाली, गुरुवार, या आर्थिक आवश्यकता के समय

उत्तर दिशा की ओर मुख करें (कुबेर की दिशा)। एक घी का दीया जलाएं। कुबेर की छवि या कुबेर यंत्र के सामने कुछ सिक्के रखें। आर्थिक परिवर्तन के लिए 40 दिनों तक प्रतिदिन 108 बार जपें। धनतेरस पर अधिकतम प्रभाव के लिए 1008 बार जपें। बीज मंत्र संस्करण (ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं) शीघ्र फल के लिए सर्वाधिक शक्तिशाली है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुबेर हिंदू पौराणिक कथाओं में देवताओं के कोषाध्यक्ष और धन के देवता हैं। वे यक्षों (प्रकृति के देवों) के स्वामी हैं और देवताओं के खजानों की रक्षा करते हैं। वे कैलाश पर्वत के निकट सुनहरी नगरी अलकापुरी में निवास करते हैं।
लक्ष्मी सौभाग्य और समृद्धि की देवी हैं — वे समृद्धि की दिव्य स्त्री शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं। कुबेर धन के रक्षक/प्रबंधक हैं — वे धन के संचय और प्रबंधन के पुरुष सिद्धांत का प्रतिनिधित्व करते हैं। धन के लिए दोनों का आह्वान किया जाता है, परंतु भिन्न ऊर्जाओं के माध्यम से।
उत्तर — कुबेर उत्तर दिशा के रक्षक (उत्तर दिक्पाल) हैं। उनके मंत्र का जप करते समय उत्तर की ओर मुख करने से सीधे उनकी ऊर्जा से जुड़ाव होता है।

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