Mantra.Tips
shivastotramsanskrityati

यति पञ्चकम् (कौपीन पञ्चकम्)

🕉️ hindu·📿 1× जप·🕐 प्रातः या सायं; विशेषकर सोमवार को।·📜 Ascribed to Adi Shankaracharya

अन्य नाम / खोज: vedantavakyeshu sada ramanto · yati panchakam kaupina panchakam lyrics

Share:

अर्थ

यति पञ्चकम् (कौपीन पञ्चकम्) आदि शंकराचार्य के संन्यासी के आनंद पर पाँच श्लोक हैं — जो वेदांत-वाक्यों में सदा रमते, भिक्षा में जो मिले उसी से तृप्त, और शोकरहित विचरते हैं। प्रत्येक श्लोक इस टेक के साथ समाप्त होता है कि धन्य हैं वे जो केवल कौपीन धारण करते हैं।

उत्पत्ति और कथा

Ascribed to Adi Shankaracharya · Adi Shankaracharya · Classical

यति पञ्चकम् (कौपीन पञ्चकम्) पारंपरिक रूप से आदि शंकराचार्य को आरोपित है। आदि शंकराचार्य के संन्यासी के आनंद पर पाँच श्लोक — 'वेदांत-वाक्यों में सदा रमते, भिक्षा में जो मिले उसी से तृप्त, शोकरहित विचरते… धन्य हैं वे जो केवल कौपीन धारण करते हैं।'

शास्त्रों में वर्णित

कहा जाता है कि यति पञ्चकम् (कौपीन पञ्चकम्) का सच्चे और भक्तिपूर्ण हृदय से पाठ करना दिव्य की कृपा के निकट जाना है, जो उन्हें कभी नहीं त्यागती जो प्रेमपूर्वक उसे पुकारते हैं।

मंत्र

किसी भी पंक्ति या ▶ बटन पर टैप कर सुनें

वेदान्तवाक्येषु सदा रमन्तो भिक्षान्नमात्रेण तुष्टिमन्तः विशोकवन्तः करणैकवन्तः कौपीनवन्तः खलु भाग्यवन्तः १॥ मूलं तरोः केवलमाश्रयन्तः पाणिद्वयं भोक्तुममत्रयन्तः कन्थामिव श्रीमपि कुत्सयन्तः कौपीनवन्तः खलु भाग्यवन्तः २॥ देहादिभावं परिमार्जयन्त आत्मानमात्मन्यवलोकयन्तः नान्तं मध्यं बहिः स्मरन्तः कौपीनवन्तः खलु भाग्यवन्तः ३॥ स्वानन्दभावे परितुष्टिमन्तः संशान्तसर्वेन्द्रियदृष्टिमन्तः अहर्निशं ब्रह्मणि ये रमन्तः कौपीनवन्तः खलु भाग्यवन्तः ४॥ पञ्चाक्षरं पावनमुच्चरन्तः पतिं पशूनां हृदि भावयन्तः भिक्षाशना दिक्षु परिभ्रमन्तः कौपीनवन्तः खलु भाग्यवन्तः ५॥ इति श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य श्रीगोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यस्य श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ यतिपञ्चक सम्पूर्णम्

vedāntavākyeṣu sadā ramanto bhikṣānnamātreṇa ca tuṣṭimantaḥ | viśokavantaḥ karaṇaikavantaḥ kaupīnavantaḥ khalu bhāgyavantaḥ || 1|| mūlaṃ taroḥ kevalamāśrayantaḥ pāṇidvayaṃ bhoktumamatrayantaḥ | kanthāmiva śrīmapi kutsayantaḥ kaupīnavantaḥ khalu bhāgyavantaḥ || 2|| dehādibhāvaṃ parimārjayanta ātmānamātmanyavalokayantaḥ | nāntaṃ na madhyaṃ na bahiḥ smarantaḥ kaupīnavantaḥ khalu bhāgyavantaḥ || 3|| svānandabhāve parituṣṭimantaḥ saṃśāntasarvendriyadṛṣṭimantaḥ | aharniśaṃ brahmaṇi ye ramantaḥ kaupīnavantaḥ khalu bhāgyavantaḥ || 4|| pañcākṣaraṃ pāvanamuccarantaḥ patiṃ paśūnāṃ hṛdi bhāvayantaḥ | bhikṣāśanā dikṣu paribhramantaḥ kaupīnavantaḥ khalu bhāgyavantaḥ || 5|| iti śrīmatparamahaṃsaparivrājakācāryasya śrīgovindabhagavatpūjyapādaśiṣyasya śrīmacchaṅkarabhagavataḥ kṛtau yatipañcaka sampūrṇam ||

अर्थ:आदि शंकराचार्य के संन्यासी के आनंद पर पाँच श्लोक — "वेदांत-वाक्यों में सदा रमते, भिक्षा में जो मिले उसी से तृप्त, शोकरहित विचरते… धन्य हैं वे जो केवल कौपीन धारण करते हैं।"

यति पञ्चकम् (कौपीन पञ्चकम्) पाठ के लाभ

यति पञ्चकम् (कौपीन पञ्चकम्) का पाठ देवता की कृपा, आशीर्वाद और रक्षा प्रदान करने वाला माना जाता है।

भक्ति का विकास करता है, मन को शांत करता है और हृदय को प्रभु-स्मरण में स्थिर करता है।

सोमवार को तथा महाशिवरात्रि और श्रावण में सर्वाधिक शुभ।

एक अमूल्य संस्कृत स्तोत्र, जो श्रद्धापूर्वक प्रतिदिन पाठ हेतु उपयुक्त है।

यति पञ्चकम् (कौपीन पञ्चकम्) जप विधि

जप संख्या1बार
उत्तम समयप्रातः या सायं; विशेषकर सोमवार को।
दिशाEast or North

स्नान करके देवता की प्रतिमा के सम्मुख पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें। दीप जलाकर यति पञ्चकम् (कौपीन पञ्चकम्) का धीरे-धीरे और भक्तिपूर्वक पाठ करें। इसका पाठ प्रतिदिन, अथवा विशेषकर सोमवार को तथा महाशिवरात्रि और श्रावण में किया जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आदि शंकराचार्य के संन्यासी के आनंद पर पाँच श्लोक — 'वेदांत-वाक्यों में सदा रमते, भिक्षा में जो मिले उसी से तृप्त, शोकरहित विचरते… धन्य हैं वे जो केवल कौपीन धारण करते हैं।'
यह आदि शंकराचार्य को आरोपित है (आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माना जाता है)। इसका पाठ प्रातः या सायं भक्तिपूर्वक किया जाता है, विशेषकर सोमवार को तथा महाशिवरात्रि और श्रावण में।

ये भी पढ़ें

उपयोगी लगा? अपनों के साथ साझा करें 🙏

Share:

Explore more sacred mantras with complete meaning and chanting guides