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यति पञ्चकम् (कौपीन पञ्चकम्) — Word-by-Word Meaning

यति पञ्चकम् (कौपीन पञ्चकम्)

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

Complete Translation

आदि शंकराचार्य के संन्यासी के आनंद पर पाँच श्लोक — "वेदांत-वाक्यों में सदा रमते, भिक्षा में जो मिले उसी से तृप्त, शोकरहित विचरते… धन्य हैं वे जो केवल कौपीन धारण करते हैं।"

Origin & History

Source: Ascribed to Adi Shankaracharya

Author: Adi Shankaracharya

Period: Classical

यति पञ्चकम् (कौपीन पञ्चकम्) पारंपरिक रूप से आदि शंकराचार्य को आरोपित है। आदि शंकराचार्य के संन्यासी के आनंद पर पाँच श्लोक — 'वेदांत-वाक्यों में सदा रमते, भिक्षा में जो मिले उसी से तृप्त, शोकरहित विचरते… धन्य हैं वे जो केवल कौपीन धारण करते हैं।'

Frequently Asked Questions

यति पञ्चकम् (कौपीन पञ्चकम्) क्या है?
आदि शंकराचार्य के संन्यासी के आनंद पर पाँच श्लोक — 'वेदांत-वाक्यों में सदा रमते, भिक्षा में जो मिले उसी से तृप्त, शोकरहित विचरते… धन्य हैं वे जो केवल कौपीन धारण करते हैं।'
इसकी रचना किसने की और यह कब पढ़ा जाता है?
यह आदि शंकराचार्य को आरोपित है (आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माना जाता है)। इसका पाठ प्रातः या सायं भक्तिपूर्वक किया जाता है, विशेषकर सोमवार को तथा महाशिवरात्रि और श्रावण में।

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