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विश्वनाथ अष्टकम्

🕉️ hindu·📿 1× जप·🕐 प्रातः या संध्या; विशेषकर सोमवार·📜 Traditional

अन्य नाम / खोज: adishambhu svarupa munivara candrashisha jatadharam · vishwanatha ashtakam lyrics

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अर्थ

विश्वनाथ अष्टकम् विश्वनाथ — काशी (वाराणसी) के अधिपति भगवान शिव — की स्तुति के आठ श्लोक हैं, जो मोक्षपुरी के परम आश्रय हैं। यह गंगातट की पवित्र नगरी के तीर्थयात्रियों का प्रिय स्तोत्र है, जिसे भक्ति के साथ पढ़ने पर भगवान की कृपा प्राप्त होती है।

उत्पत्ति और कथा

Traditional · Traditional · Classical

विश्वनाथ अष्टकम् एक प्रिय परम्परागत स्तोत्र है। यह विश्वनाथ — काशी (वाराणसी) के अधिपति भगवान शिव — की स्तुति के आठ श्लोक हैं, जो मोक्षपुरी के परम आश्रय हैं। गंगातट की पवित्र नगरी के तीर्थयात्रियों का प्रिय स्तोत्र।

शास्त्रों में वर्णित

कहा जाता है कि सच्चे और भक्तिपूर्ण हृदय से विश्वनाथ अष्टकम् का पाठ करना भगवान की कृपा के निकट पहुँचना है, जो उन्हें कभी नहीं त्यागते जो प्रेमपूर्वक उन्हें पुकारते हैं।

मंत्र

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आदिशम्भु-स्वरूप-मुनिवर-चन्द्रशीश-जटाधरं मुण्डमाल-विशाललोचन-वाहनं वृषभध्वजम् नागचन्द्र-त्रिशूलडमरू भस्म-अङ्गविभूषणं श्रीनीलकण्ठ-हिमाद्रिजलधर-विश्वनाथविश्वेश्वरम् १॥ गङ्गसङ्ग-उमाङ्गवामे-कामदेव-सुसेवितं नादबिन्दुज-योगसाधन-पञ्चवक्तत्रिलोचनम् इन्दु-बिन्दुविराज-शशिधर-शङ्करं सुरवन्दितं श्रीनीलकण्ठ-हिमाद्रिजलधर-विश्वनाथविश्वेश्वरम् २॥ ज्योतिलिङ्ग-स्फुलिङ्गफणिमणि-दिव्यदेवसुसेवितं मालतीसुर -पुष्पमाला -कञ्ज-धूप-निवेदितम् अनलकुम्भ-सुकुम्भझलकत-कलशकञ्चनशोभितं श्रीनीलकण्ठहिमाद्रिजलधर-विश्वनाथविश्वेश्वरम् ३॥ मुकुटक्रीट-सुकनककुण्डलरञ्जितं मुनिमण्डितं हारमुक्ता-कनकसूत्रित-सुन्दरं सुविशेषितम् गन्धमादन-शैल-आसन-दिव्यज्योतिप्रकाशनं श्रीनीलकण्ठ-हिमाद्रिजलधर-विश्वनाथ-विश्वेश्वरम् ४॥ मेघडम्वरछत्रधारण-चरणकमल-विलासितं पुष्परथ-परमदनमूरति-गौरिसङ्गसदाशिवम् क्षेत्रपाल-कपाल-भैरव-कुसुम-नवग्रहभूषितं श्रीनीलकण्ठ-हिमाद्रिजलधर-विश्वनाथ-विश्वेश्वरम् ५॥ त्रिपुरदैत्य-विनाशकारक-शङ्करं फलदायकं रावणाद्दशकमलमस्तक-पूजितं वरदायकम् कोटिमन्मथमथन-विषधर-हारभूषण-भूषितं श्रीनीलकण्ठ-हिमाद्रिजलधर-विश्वनाथविश्वेश्वरम् ६॥ मथितजलधिज-शेषविगलित-कालकूटविशोषणं ज्योतिविगलितदीपनयन-त्रिनेत्रशम्भु-सुरेश्वरम् महादेवसुदेव-सुरपतिसेव्य-देवविश्वम्भरं श्रीनीलकण्ठ-हिमाद्रिजलधर-विश्वनाथविश्वेश्वरम् ७॥ रुद्ररूपभयङ्करं कृतभूरिपान-हलाहलं गगनवेधित-विश्वमूल-त्रिशूलकरधर-शङ्करम् कामकुञ्जर-मानमर्दन-महाकाल-विश्वेश्वरं श्रीनीलकण्ठ-हिमाद्रिजलधर-विश्वेनाथविश्वेश्वरम् ८॥ ऋतुवसन्तविलास-चहुँदिशि दीप्यते फलदायकं दिव्यकाशिकधामवासी-मनुजमङ्गलदायकम् अम्बिकातट-वैद्यनाथं शैलशिखरमहेश्वरं श्रीनीलकण्ठ-हिमाद्रिजलधर-विश्वनाथविश्वेश्वरम् ९॥ शिवस्तोत्र-प्रतिदिन-ध्यानधर-आनन्दमय-प्रतिपादितं धन-धान्य-सम्पति-गृहविलासित-विश्वनाथ-प्रसादजम् हर-धाम-चिरगण-सङ्गशोभित-भक्तवर-प्रियमण्डितं आनन्दवन-आनन्दछवि-आनन्द-कन्द-विभूषितम् १०॥ इति श्रीशिवदत्तमिश्रशास्त्रिसंस्कृतं विश्वनाथाष्टकस्तोत्रं सम्पूर्णम्

ādiśambhu-svarūpa-munivara-candraśīśa-jaṭādharaṃ muṇḍamāla-viśālalocana-vāhanaṃ vṛṣabhadhvajam | nāgacandra-triśūlaḍamarū bhasma-aṅgavibhūṣaṇaṃ śrīnīlakaṇṭha-himādrijaladhara-viśvanāthaviśveśvaram || 1|| gaṅgasaṅga-umāṅgavāme-kāmadeva-susevitaṃ nādabinduja-yogasādhana-pañcavaktatrilocanam | indu-binduvirāja-śaśidhara-śaṅkaraṃ suravanditaṃ śrīnīlakaṇṭha-himādrijaladhara-viśvanāthaviśveśvaram || 2|| jyotiliṅga-sphuliṅgaphaṇimaṇi-divyadevasusevitaṃ mālatīsura -puṣpamālā -kañja-dhūpa-niveditam | analakumbha-sukumbhajhalakata-kalaśakañcanaśobhitaṃ śrīnīlakaṇṭhahimādrijaladhara-viśvanāthaviśveśvaram || 3|| mukuṭakrīṭa-sukanakakuṇḍalarañjitaṃ munimaṇḍitaṃ hāramuktā-kanakasūtrita-sundaraṃ suviśeṣitam | gandhamādana-śaila-āsana-divyajyotiprakāśanaṃ śrīnīlakaṇṭha-himādrijaladhara-viśvanātha-viśveśvaram || 4|| meghaḍamvarachatradhāraṇa-caraṇakamala-vilāsitaṃ puṣparatha-paramadanamūrati-gaurisaṅgasadāśivam | kṣetrapāla-kapāla-bhairava-kusuma-navagrahabhūṣitaṃ śrīnīlakaṇṭha-himādrijaladhara-viśvanātha-viśveśvaram || 5|| tripuradaitya-vināśakāraka-śaṅkaraṃ phaladāyakaṃ rāvaṇāddaśakamalamastaka-pūjitaṃ varadāyakam | koṭimanmathamathana-viṣadhara-hārabhūṣaṇa-bhūṣitaṃ śrīnīlakaṇṭha-himādrijaladhara-viśvanāthaviśveśvaram || 6|| mathitajaladhija-śeṣavigalita-kālakūṭaviśoṣaṇaṃ jyotivigalitadīpanayana-trinetraśambhu-sureśvaram | mahādevasudeva-surapatisevya-devaviśvambharaṃ śrīnīlakaṇṭha-himādrijaladhara-viśvanāthaviśveśvaram || 7|| rudrarūpabhayaṅkaraṃ kṛtabhūripāna-halāhalaṃ gaganavedhita-viśvamūla-triśūlakaradhara-śaṅkaram | kāmakuñjara-mānamardana-mahākāla-viśveśvaraṃ śrīnīlakaṇṭha-himādrijaladhara-viśvenāthaviśveśvaram || 8|| ṛtuvasantavilāsa-cahu~diśi dīpyate phaladāyakaṃ divyakāśikadhāmavāsī-manujamaṅgaladāyakam | ambikātaṭa-vaidyanāthaṃ śailaśikharamaheśvaraṃ śrīnīlakaṇṭha-himādrijaladhara-viśvanāthaviśveśvaram || 9|| śivastotra-pratidina-dhyānadhara-ānandamaya-pratipāditaṃ dhana-dhānya-sampati-gṛhavilāsita-viśvanātha-prasādajam | hara-dhāma-ciragaṇa-saṅgaśobhita-bhaktavara-priyamaṇḍitaṃ ānandavana-ānandachavi-ānanda-kanda-vibhūṣitam || 10|| iti śrīśivadattamiśraśāstrisaṃskṛtaṃ viśvanāthāṣṭakastotraṃ sampūrṇam |

अर्थ:विश्वनाथ — काशी (वाराणसी) के अधिपति भगवान शिव — की स्तुति के आठ श्लोक, जो मोक्षपुरी के परम आश्रय हैं। गंगातट की पवित्र नगरी के तीर्थयात्रियों का प्रिय स्तोत्र।

विश्वनाथ अष्टकम् पाठ के लाभ

विश्वनाथ अष्टकम् का पाठ भगवान की कृपा, आशीर्वाद और संरक्षण लाने वाला माना जाता है।

भक्ति का विकास करता है, मन को शांत करता है और भगवान के स्मरण में हृदय को स्थिर करता है।

सोमवार को तथा महाशिवरात्रि, प्रदोष और श्रावण मास के दौरान सर्वाधिक शुभ।

एक छोटा, मधुर स्तोत्र जिसे कोई भी सीखकर श्रद्धा के साथ नित्य पढ़ सकता है।

विश्वनाथ अष्टकम् जप विधि

जप संख्या1बार
उत्तम समयप्रातः या संध्या; विशेषकर सोमवार
दिशाEast or North

स्नान करके देवता के चित्र के समक्ष पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें। दीप जलाएँ और विश्वनाथ अष्टकम् को धीरे-धीरे व भक्ति के साथ पढ़ें। इसे नित्य पढ़ा जा सकता है, अथवा विशेषकर महाशिवरात्रि, प्रदोष और श्रावण मास के दौरान। कृपा व संरक्षण की प्रार्थना के साथ समाप्त करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्वनाथ — काशी (वाराणसी) के अधिपति भगवान शिव — की स्तुति के आठ श्लोक, जो मोक्षपुरी के परम आश्रय हैं। गंगातट की पवित्र नगरी के तीर्थयात्रियों का प्रिय स्तोत्र।
यह एक परम्परागत स्तोत्र है। इसे प्रातः या संध्या को भक्ति के साथ पढ़ा जाता है, और विशेषकर सोमवार को तथा महाशिवरात्रि, प्रदोष और श्रावण मास के दौरान।

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