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लिंगाष्टकम्

🕉️ hindu·📿 11× जप·🕐 सोमवार प्रातः, महाशिवरात्रि, अथवा शिवलिंग पूजा के समय·🎵 ऑडियो सहित·📜 Traditional Sanskrit hymn (Shaiva tradition)

अन्य नाम / खोज: brahma murari surarchita lingam · lingashtakam lyrics · shiva lingashtakam

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अर्थ

लिंगाष्टकम् शिवलिंग की स्तुति में आठ श्लोकों का प्रिय स्तोत्र है, जिसका प्रत्येक श्लोक 'तत् प्रणमामि सदाशिव लिंगम्' से समाप्त होता है। यह लिंग को ब्रह्मा, विष्णु और देवों द्वारा पूजित, चंदन से सुगंधित तथा पापों और दुखों का नाशक बताता है। भक्तिपूर्वक इसका गान भक्त को शिवलोक की ओर ले जाने वाला माना जाता है।

उत्पत्ति और कथा

Traditional Sanskrit hymn (Shaiva tradition) · Unknown (attributed to ancient Shaiva tradition) · Ancient

लिंगाष्टकम् शिवलिंग का गुणगान करता है — जो शैव परंपरा का सबसे पवित्र प्रतीक है। शिवपुराण के अनुसार जब ब्रह्मा और विष्णु अपनी श्रेष्ठता पर विवाद कर रहे थे, तब उनके बीच एक अनंत अग्निस्तंभ (ज्योतिर्लिंग) प्रकट हुआ। दोनों उसका आदि-अंत न पा सके। शिव उस स्तंभ से प्रकट होकर अपनी सर्वोच्चता स्थापित की। लिंग इसी अनंत, निराकार दिव्य उपस्थिति का प्रतीक है, और लिंगाष्टकम् उसकी स्तुति का सबसे लोकप्रिय स्तोत्र है।

शास्त्रों में वर्णित

शिवपुराण कहता है कि भारत भर में फैले 12 ज्योतिर्लिंग स्वयं प्रकट ज्योतिर्मय लिंग हैं जहाँ शिव प्रकट हुए। सोमनाथ में आक्रमणकारियों द्वारा लिंग कई बार नष्ट किए जाने पर भी वह बार-बार पुनर्निर्मित हुआ, क्योंकि उसके समक्ष पाठ करने वाले भक्तों ने एक ही रात्रि की पूजा में दर्शन, रोगमुक्ति और जन्मों के कर्म के विलय का अनुभव बताया। अंतिम श्लोक लिंग को 'परात्पर' घोषित करता है — 'परे' की धारणा से भी परे।

सुनें और साथ में जपें

सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

किसी भी पंक्ति या ▶ बटन पर टैप कर सुनें

श्लोक 1

ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं निर्मलभासितशोभितलिङ्गम्। जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥

Brahma Murari Surarchita Lingam Nirmala Bhasita Shobhita Lingam Janmaja Duhkha Vinashaka Lingam Tat Pranamami Sadashiva Lingam

अर्थ:ब्रह्मा, मुरारि (विष्णु) और देवों से अर्चित, निर्मल कान्ति से सुशोभित, जन्म-जनित दुःखों का नाश करने वाले — उस सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

श्लोक 2

देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहनकरुणाकरलिङ्गम्। रावणदर्पविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥

Deva Muni Pravararchita Lingam Kama Dahana Karunakara Lingam Ravana Darpa Vinashana Lingam Tat Pranamami Sadashiva Lingam

अर्थ:देवों और श्रेष्ठ मुनियों से अर्चित, कामदेव को भस्म करने वाले करुणाकर, रावण के दर्प का नाश करने वाले — उस सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

श्लोक 3

सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गं बुद्धिविवर्धनकारणलिङ्गम्। सिद्धसुरासुरवन्दितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥

Sarva Sugandhi Sulepita Lingam Buddhi Vivardhana Karana Lingam Siddha Surasura Vandita Lingam Tat Pranamami Sadashiva Lingam

अर्थ:समस्त सुगन्धित द्रव्यों से लेपित, बुद्धि की वृद्धि के कारण, सिद्ध-सुर-असुरों से वन्दित — उस सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

श्लोक 4

कनकमहामणिभूषितलिङ्गं फणिपतिवेष्टितशोभितलिङ्गम्। दक्षसुयज्ञविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥

Kanaka Mahamani Bhushita Lingam Phanipati Veshtita Shobhita Lingam Daksha Suyajna Vinashana Lingam Tat Pranamami Sadashiva Lingam

अर्थ:स्वर्ण और महामणियों से भूषित, नागराज से वेष्टित एवं सुशोभित, दक्ष के यज्ञ का नाश करने वाले — उस सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

श्लोक 5

कुङ्कुमचन्दनलेपितलिङ्गं पङ्कजहारसुशोभितलिङ्गम्। सञ्चितपापविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥

Kunkuma Chandana Lepita Lingam Pankaja Hara Sushobhita Lingam Sanchita Papa Vinashana Lingam Tat Pranamami Sadashiva Lingam

अर्थ:कुंकुम और चन्दन से लेपित, कमल की माला से सुशोभित, संचित पापों का नाश करने वाले — उस सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

श्लोक 6

देवगणार्चितसेवितलिङ्गं भावैर्भक्तिभिरेव लिङ्गम्। दिनकरकोटिप्रभाकरलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥

Deva Ganarchita Sevita Lingam Bhavair Bhaktibhireva Cha Lingam Dinakara Koti Prabhakara Lingam Tat Pranamami Sadashiva Lingam

अर्थ:देवगणों से अर्चित एवं सेवित, केवल भाव और भक्ति से प्राप्य, करोड़ों सूर्यों की प्रभा वाले — उस सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

श्लोक 7

अष्टदलोपरिवेष्टितलिङ्गं सर्वसमुद्भवकारणलिङ्गम्। अष्टदरिद्रविनाशितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥

Ashta Dalopari Veshtita Lingam Sarva Samudbhava Karana Lingam Ashta Daridra Vinashita Lingam Tat Pranamami Sadashiva Lingam

अर्थ:आठ दलों से वेष्टित, समस्त सृष्टि के कारण, आठों प्रकार की दरिद्रता का नाश करने वाले — उस सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

श्लोक 8

सुरगुरुसुरवरपूजितलिङ्गं सुरवनपुष्पसदार्चितलिङ्गम्। परात्परं परमात्मकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥

Sura Guru Sura Vara Poojita Lingam Suravana Pushpa Sadarchita Lingam Paratparam Paramatmaka Lingam Tat Pranamami Sadashiva Lingam

अर्थ:देवगुरु (बृहस्पति) और श्रेष्ठ देवों से पूजित, देवोद्यान के पुष्पों से सदा अर्चित, परात्पर परमात्मस्वरूप — उस सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

ब्रह्ममुरारि🔊Brahma Murariब्रह्ममुरारि — ब्रह्मा और विष्णु (मुरारि = मुर का शत्रु)
सुरार्चित🔊Surarchitaसुरार्चित — देवों द्वारा पूजित
लिङ्गम्🔊Lingamलिंगम् — शिव का पवित्र प्रतीक — निराकार दिव्य
निर्मल🔊Nirmalaनिर्मल — शुद्ध, निर्मल
जन्मजदुःख🔊Janmaja Duhkhaजन्मजदुःख — जन्म/जीवन से उत्पन्न दुख
विनाशक🔊Vinashakaविनाशक — नाशक
सदाशिव🔊Sadashivaसदाशिव — सनातन शिव
कामदहन🔊Kama Dahanaकामदहन — जिसने कामदेव को भस्म किया
करुणाकर🔊Karunakaraकरुणाकर — करुणा का सागर
रावणदर्प🔊Ravana Darpaरावणदर्प — रावण का अहंकार
बुद्धिविवर्धन🔊Buddhi Vivardhanaबुद्धिविवर्धन — बुद्धि को बढ़ाने वाला
कनकमहामणि🔊Kanaka Mahamaniकनकमहामणि — स्वर्ण और महामणि
फणिपति🔊Phanipatiफणिपति — नागराज (वासुकि)
दक्षसुयज्ञ🔊Daksha Suyajnaदक्षसुयज्ञ — दक्ष का महायज्ञ (जिसे शिव ने नष्ट किया)
कुङ्कुम🔊Kunkumaकुंकुम — कुंकुम/सिंदूर
चन्दन🔊Chandanaचंदन — चंदन
दिनकरकोटि🔊Dinakara Kotiदिनकरकोटि — करोड़ों सूर्यों का तेज
परात्परं🔊Paratparamपरात्परं — परे से भी परे, परम
परमात्मक🔊Paramatmakaपरमात्मक — स्वयं परमात्मा

लिंगाष्टकम् पाठ के लाभ

शिव के निराकार (निर्गुण) स्वरूप से गहरा जुड़ाव कराता है।

प्रत्येक श्लोक दिव्य के एक अलग गुण का वर्णन करता है — एक संपूर्ण शिवस्तुति।

प्रत्येक श्लोक के अनुसार दुख, पाप, अहंकार, दरिद्रता और अज्ञान का नाश करता है।

बुद्धि और आध्यात्मिक समझ को बढ़ाता है।

शिवलिंग के अभिषेक के समय गाने पर अत्यंत प्रभावशाली है।

सोमवार और महाशिवरात्रि पर नियमित पाठ शिव की प्रत्यक्ष कृपा दिलाता है।

लिंगाष्टकम् जप विधि

जप संख्या11बार
उत्तम समयसोमवार प्रातः, महाशिवरात्रि, अथवा शिवलिंग पूजा के समय

आदर्श रूप से इसे शिवलिंग का जल, दूध या गंगाजल से अभिषेक करते हुए गाया जाता है। यदि लिंग उपलब्ध न हो तो निराकार दिव्य पर ध्यान लगाते हुए पाठ करें। प्रत्येक श्लोक 'तत् प्रणमामि सदाशिव लिंगम्' से समाप्त होता है — हर बार इस पंक्ति पर प्रणाम करें। आठ श्लोक क्रमशः दिव्य के आठ पहलुओं का वर्णन करते हैं, जिससे यह शिव पर एक पूर्ण ध्यान बन जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लिंगाष्टकम् (लिंग + अष्टकम्) का अर्थ है 'लिंग को समर्पित आठ श्लोक'। यह 8 श्लोकों का संस्कृत स्तोत्र है जो शिवलिंग की स्तुति करता है — वह पवित्र प्रतीक जो भगवान शिव के निराकार, अनंत स्वरूप को दर्शाता है।
शिवलिंग भगवान शिव के निराकार (निर्गुण) स्वरूप — अनंत ज्योतिर्मय स्तंभ को दर्शाता है। यह सृष्टि, शिव-शक्ति के मिलन और समस्त रूपों के पीछे की निराकार सत्ता का प्रतीक है।
शिवलिंग की पूजा के समय, सोमवार को, महाशिवरात्रि, श्रावण मास या प्रदोष काल में। इसे महारुद्र अभिषेक के अनुष्ठान में भी पढ़ा जाता है।

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