कर्पूरगौरं करुणावतारम्
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✦ अर्थ
कर्पूरगौरं भगवान शिव की चार पंक्तियों वाली अत्यंत प्रभावशाली स्तुति है, जिसमें उन्हें कर्पूर-सा श्वेत, करुणा का अवतार और पार्वती सहित हृदय-कमल में सदा निवास करने वाला कहा गया है। यह प्रायः हर शिव-आरती के अंत में गाया जाता है। इसका जप मन में तुरंत शांति और दिव्य संबंध जगाता है।
उत्पत्ति और कथा
Traditional Sanskrit devotional verse · Unknown (ancient tradition) · Ancient
यह श्लोक हिंदू मंदिर-पूजा के ताने-बाने में रचा-बसा है — यह भारत भर में होने वाली हर शिव-आरती का सार्वभौमिक समापन-श्लोक है। इसकी चार पंक्तियाँ शिव-उपासना के संपूर्ण भाव को समेट लेती हैं: उनकी पवित्रता (कर्पूर-सा श्वेत), उनका स्वरूप (करुणा का अवतार), उनकी ब्रह्मांडीय भूमिका (अस्तित्व का सार), उनका रूप (सर्प-धारी) और उनकी उपस्थिति (पार्वती सहित सदा भक्त के हृदय में)।
✦ शास्त्रों में वर्णित
काशी (वाराणसी) में यह मंत्र प्रतिदिन हर शिव मंदिर की हर आरती के समापन-श्लोक के रूप में करोड़ों बार जपा जाता है। काशी विश्वनाथ मंदिर में जब संध्या-आरती हजारों कंठों से 'कर्पूरगौरं' के सामूहिक उच्चारण के साथ संपन्न होती है, तब भक्त अनुभव करते हैं कि वातावरण दिव्य उपस्थिति से भर उठता है — अनेकों को स्वतः अश्रु, दिव्य अनुभूति और गहन ध्यान की अवस्था प्राप्त होती है। इस मंत्र की शक्ति इसकी सरलता में है: केवल चार पंक्तियाँ जो शिव के संपूर्ण सार को धारण करती हैं।
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मंत्र
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कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥
Karpura Gauram Karunavataram Sansara Saram Bhujagendra Haram Sada Vasantam Hridayaravinde Bhavam Bhavani Sahitam Namami
अर्थ:कर्पूर-से गौर, करुणा के अवतार, संसार के सार, सर्पराज को हार रूप में धारण करने वाले; पार्वती-सहित सदा हृदय-कमल में निवास करने वाले भगवान शिव को मैं प्रणाम करता हूँ।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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कर्पूरगौरं करुणावतारम् पाठ के लाभ
सबसे छोटे किंतु अत्यंत प्रभावशाली शिव मंत्रों में से एक — केवल 4 पंक्तियाँ
भारत भर में हर शिव-आरती के समापन पर इसका जप होता है
शिव और पार्वती दोनों का — दिव्य युगल का — एक साथ आवाहन करता है
'सदावसन्तं हृदयारविन्दे' — प्रभु सदा आपके हृदय में निवास करते हैं
नौसिखियों के लिए आदर्श — याद रखने और जपने में सरल
तुरंत शांति और ईश्वर से जुड़ाव का अनुभव कराता है
कर्पूरगौरं करुणावतारम् जप विधि
परंपरागत रूप से यह हर शिव-आरती का समापन मंत्र है। इसे स्वतंत्र रूप से 108 बार एक प्रभावशाली ध्यान के रूप में भी जपा जा सकता है। आँखें बंद करें और शिव-पार्वती को अपने हृदय-कमल में एक साथ विराजमान देखें। प्रत्येक शब्द एक सजीव चित्र खींचता है — कर्पूर-सा श्वेत, करुणामय, सर्प-धारी, आपके भीतर निवास करते हुए। जप करते समय प्रत्येक गुण को अनुभव करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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