साधन पञ्चकम्
अन्य नाम / खोज: vedo nityamadhiyatam taduditam karma svanushthiyatam · sadhana panchakam lyrics
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✦ अर्थ
साधन पञ्चकम् आदि शंकराचार्य के साधना के पाँच श्लोक हैं — चालीस सूत्रों में सम्पूर्ण आध्यात्मिक मार्ग: नित्य वेद पढ़ो, स्वकर्म भली-भाँति करो, उसका फल ईश्वर को अर्पित करो, कामना त्यागो, संसार के दोष देखो, आत्मा की खोज करो, घर छोड़ो, सत्संग करो। श्रद्धा से इसका पाठ दिव्य की कृपा, आशीर्वाद और रक्षा प्रदान करता है।
उत्पत्ति और कथा
Ascribed to Adi Shankaracharya · Adi Shankaracharya · Classical
साधन पञ्चकम् पारम्परिक रूप से आदि शंकराचार्य को श्रेय दिया जाता है। आदि शंकराचार्य के साधना के पाँच श्लोक — चालीस सूत्रों में सम्पूर्ण मार्ग: “नित्य वेद पढ़ो, स्वकर्म भली-भाँति करो, उसका फल ईश्वर को अर्पित करो, कामना त्यागो, संसार के दोष देखो, आत्मा की खोज करो, घर छोड़ो, सत्संग करो…”
✦ शास्त्रों में वर्णित
कहा जाता है कि सच्चे और भक्तिपूर्ण हृदय से साधन पञ्चकम् का पाठ करना दिव्य की कृपा के निकट पहुँचना है, जो प्रेमपूर्वक उसे पुकारने वालों को कभी नहीं त्यागती।
मंत्र
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वेदो नित्यमधीयतां तदुदितं कर्म स्वनुष्ठीयतां तेनेशस्य विधीयतामपचितिः काम्ये मतिस्त्यज्यताम् । पापौघः परिधूयतां भवसुखे दोषोऽनुसन्धीयता- मात्मेच्छा व्यवसीयतां निजगृहात्तूर्णं विनिर्गम्यताम् ॥ १॥ सङ्गः सत्सु विधीयतां भगवतो भक्तिर्दृढाऽऽधीयतां शान्त्यादिः परिचीयतां दृढतरं कर्माशु सन्त्यज्यताम् । सद्विद्वानुपसृप्यतां प्रतिदिनं तत्पादुका सेव्यतां ब्रह्मैकाक्षरमर्थ्यतां श्रुतिशिरोवाक्यं समाकर्ण्यताम् ॥ २॥ वाक्यार्थश्च विचार्यतां श्रुतिशिरःपक्षः समाश्रीयतां दुस्तर्कात्सुविरम्यतां श्रुतिमतस्तर्कोऽनुसन्धीयताम् । ब्रह्मास्मीति विभाव्यतामहरहर्गर्वः परित्यज्यतां देहेऽहम्मतिरुज्झ्यतां बुधजनैर्वादः परित्यज्यताम् ॥ ३॥ क्षुद्व्याधिश्च चिकित्स्यतां प्रतिदिनं भिक्षौषधं भुज्यतां स्वाद्वन्नं न तु याच्यतां विधिवशात् प्राप्तेन सन्तुष्यताम् । शीतोष्णादि विषह्यतां न तु वृथा वाक्यं समुच्चार्यता- मौदासीन्यमभीप्स्यतां जनकृपानैष्ठुर्यमुत्सृज्यताम् ॥ ४ ॥ एकान्ते सुखमास्यतां परतरे चेतः समाधीयतां पूर्णात्मा सुसमीक्ष्यतां जगदिदं तद्बाधितं दृश्यताम् । प्राक्कर्म प्रविलाप्यतां चितिबलान्नाप्युत्तरैः श्लिष्यतां प्रारब्धं त्विह भुज्यतामथ परब्रह्मात्मना स्थीयताम् ॥ ५॥ ॥ इति परमहंसपरिव्राजकाचार्यश्रीमच्छङ्कराचार्यविरचित साधन पञ्चकं सम्पूर्णम् ॥
vedo nityamadhīyatāṃ taduditaṃ karma svanuṣṭhīyatāṃ teneśasya vidhīyatāmapacitiḥ kāmye matistyajyatām | pāpaughaḥ paridhūyatāṃ bhavasukhe doṣo'nusandhīyatā- mātmecchā vyavasīyatāṃ nijagṛhāttūrṇaṃ vinirgamyatām || 1|| saṅgaḥ satsu vidhīyatāṃ bhagavato bhaktirdṛḍhā''dhīyatāṃ śāntyādiḥ paricīyatāṃ dṛḍhataraṃ karmāśu santyajyatām | sadvidvānupasṛpyatāṃ pratidinaṃ tatpādukā sevyatāṃ brahmaikākṣaramarthyatāṃ śrutiśirovākyaṃ samākarṇyatām || 2|| vākyārthaśca vicāryatāṃ śrutiśiraḥpakṣaḥ samāśrīyatāṃ dustarkātsuviramyatāṃ śrutimatastarko'nusandhīyatām | brahmāsmīti vibhāvyatāmaharahargarvaḥ parityajyatāṃ dehe'hammatirujjhyatāṃ budhajanairvādaḥ parityajyatām || 3|| kṣudvyādhiśca cikitsyatāṃ pratidinaṃ bhikṣauṣadhaṃ bhujyatāṃ svādvannaṃ na tu yācyatāṃ vidhivaśāt prāptena santuṣyatām | śītoṣṇādi viṣahyatāṃ na tu vṛthā vākyaṃ samuccāryatā- maudāsīnyamabhīpsyatāṃ janakṛpānaiṣṭhuryamutsṛjyatām || 4 || ekānte sukhamāsyatāṃ paratare cetaḥ samādhīyatāṃ pūrṇātmā susamīkṣyatāṃ jagadidaṃ tadbādhitaṃ dṛśyatām | prākkarma pravilāpyatāṃ citibalānnāpyuttaraiḥ śliṣyatāṃ prārabdhaṃ tviha bhujyatāmatha parabrahmātmanā sthīyatām || 5|| || iti paramahaṃsaparivrājakācāryaśrīmacchaṅkarācāryaviracita sādhana pañcakaṃ sampūrṇam ||
अर्थ:आदि शंकराचार्य के साधना के पाँच श्लोक — चालीस सूत्रों में सम्पूर्ण मार्ग: "नित्य वेद पढ़ो, स्वकर्म भली-भाँति करो, उसका फल ईश्वर को अर्पित करो, कामना त्यागो, संसार के दोष देखो, आत्मा की खोज करो, घर छोड़ो, सत्संग करो…"
साधन पञ्चकम् पाठ के लाभ
साधन पञ्चकम् का पाठ देवता की कृपा, आशीर्वाद और रक्षा प्रदान करने वाला माना जाता है।
यह भक्ति को बढ़ाता है, मन को शांत करता है और हृदय को भगवान के स्मरण में स्थिर करता है।
सोमवार को तथा महाशिवरात्रि और श्रावण में इसका पाठ सर्वाधिक शुभ होता है।
यह एक अनमोल संस्कृत स्तोत्र है, जो श्रद्धा से दैनिक पाठ के लिए उपयुक्त है।
साधन पञ्चकम् जप विधि
स्नान करके देवता की मूर्ति के सम्मुख पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें। दीपक जलाएँ और साधन पञ्चकम् का धीरे-धीरे भक्तिपूर्वक पाठ करें। इसे प्रतिदिन, अथवा विशेष रूप से सोमवार को तथा महाशिवरात्रि और श्रावण में पढ़ा जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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