एकश्लोकी
अन्य नाम / खोज: kim jyotistavabhanumanahani me ratrau pradipadikam · eka shloki lyrics
अपनी भाषा/लिपि में पढ़ें
✦ अर्थ
एकश्लोकी आदि शंकराचार्य रचित एक-श्लोकीय संवाद है, जो आत्मा को उस परम प्रकाश रूप में इंगित करता है जिससे सब कुछ जाना जाता है। "तेरा प्रकाश क्या है? दिन में सूर्य, रात में दीप… और दीप किस प्रकाश से दिखता है? — वही मैं हूँ।" यह भक्ति जगाने और मन को शांत करने वाला स्तोत्र है।
उत्पत्ति और कथा
Ascribed to Adi Shankaracharya · Adi Shankaracharya · Classical
एकश्लोकी परंपरागत रूप से आदि शंकराचार्य को आरोपित है। यह आदि शंकराचार्य का एक-श्लोकीय संवाद है, जो आत्मा को उस प्रकाश रूप में इंगित करता है जिससे सब जाना जाता है — "तेरा प्रकाश क्या है? दिन में सूर्य, रात में दीप… और दीप किस प्रकाश से दिखता है? — वही मैं हूँ।"
✦ शास्त्रों में वर्णित
कहा जाता है कि एकश्लोकी का सच्चे और भक्तिपूर्ण हृदय से पाठ करना दिव्य की कृपा के निकट पहुँचना है, जो उसे प्रेमपूर्वक पुकारने वालों का कभी त्याग नहीं करती।
मंत्र
किसी भी पंक्ति या ▶ बटन पर टैप कर सुनें
किं ज्योतिस्तवभानुमानहनि मे रात्रौ प्रदीपादिकं स्यादेवं रविदीपदर्शनविधौ किं ज्योतिराख्याहि मे । चक्षुस्तस्य निमीलनादिसमये किं धीर्धियो दर्शने किं तत्राहमतो भवान्परमकं ज्योतिस्तदस्मि प्रभो ॥ इति श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य श्रीगोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यस्य श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ एकश्लोकी सम्पूर्णा ॥
kiṃ jyotistavabhānumānahani me rātrau pradīpādikaṃ syādevaṃ ravidīpadarśanavidhau kiṃ jyotirākhyāhi me | cakṣustasya nimīlanādisamaye kiṃ dhīrdhiyo darśane kiṃ tatrāhamato bhavānparamakaṃ jyotistadasmi prabho || iti śrīmatparamahaṃsaparivrājakācāryasya śrīgovindabhagavatpūjyapādaśiṣyasya śrīmacchaṅkarabhagavataḥ kṛtau ekaślokī sampūrṇā ||
अर्थ:आदि शंकराचार्य का एक-श्लोकीय संवाद, जो आत्मा को उस प्रकाश रूप में इंगित करता है जिससे सब जाना जाता है — "तेरा प्रकाश क्या है? दिन में सूर्य, रात में दीप… और दीप किस प्रकाश से दिखता है? — वही मैं हूँ।"
एकश्लोकी पाठ के लाभ
एकश्लोकी का पाठ देवता की कृपा, आशीर्वाद और रक्षा प्रदान करने वाला माना जाता है।
भक्ति को बढ़ाता है, मन को शांत करता है और प्रभु के स्मरण में हृदय को स्थिर करता है।
सोमवार को तथा महाशिवरात्रि और श्रावण में सर्वाधिक शुभ।
एक अनमोल संस्कृत स्तोत्र, जो श्रद्धा सहित नित्य पाठ के लिए उपयुक्त है।
एकश्लोकी जप विधि
स्नान करके देवता के चित्र के समक्ष पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। एक दीपक प्रज्वलित करें और एकश्लोकी को धीरे-धीरे और भक्ति सहित पढ़ें। इसे नित्य जपा जा सकता है, अथवा विशेषकर सोमवार को तथा महाशिवरात्रि और श्रावण में।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ये भी पढ़ें
ॐ
Explore more sacred mantras with complete meaning and chanting guides